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  • मेरठ (24 अगस्त 2026): उत्तर प्रदेश के मेरठ शहर में आज सवर्ण समाज और विशेषकर ब्राह्मण समुदाय की एक विशाल और अभूतपूर्व एकजुटता देखने को मिली। 'युवा ब्राह्मण समाज संगठन ट्रस्ट' (स्थापित 1992) के तत्वावधान में आयोजित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और विस्तृत प्रेस वार्ता में समाज के प्रबुद्ध नेताओं, युवाओं और पदाधिकारियों ने वर्तमान राजनीतिक और प्रशासनिक व्यवस्था के खिलाफ खुली बगावत का ऐलान कर दिया है। यह प्रेस वार्ता केवल एक औपचारिक बैठक नहीं थी, बल्कि यह उन दबी हुई आवाजों का एक शक्तिशाली विस्फोट था जो दशकों से राजनीतिक उपेक्षा, जातिगत आरक्षण की विसंगतियों और दमनकारी नीतियों का दंश झेल रही हैं।Read also:-LPG e-KYC Update: 23 अगस्त की डेडलाइन खत्म! क्या आज से छिन जाएगी आपकी गैस सब्सिडी? जानें ई-केवाईसी का पूरा सच और नया नियम
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संगठन ने स्पष्ट कर दिया है कि ब्राह्मण समाज अब मूकदर्शक बनकर अपने अधिकारों का हनन नहीं देखने वाला है। इस प्रेस वार्ता का मुख्य एजेंडा सवर्ण समाज के खिलाफ हो रहे निरंतर उत्पीड़न और कुछ निहित स्वार्थी तत्वों द्वारा कानूनों और अध्यादेशों की आड़ में किए जा रहे शोषण का कड़ा विरोध दर्ज कराना था।
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राजनीतिक दलों को दो टूक: "हम किसी पार्टी के बंधुआ नहीं"

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प्रेस वार्ता के दौरान सबसे अधिक आक्रोश राजनीतिक दलों के रवैये पर देखने को मिला। समाज के नेताओं ने सभी प्रमुख राजनीतिक दलों की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए एक सुर में कहा कि ब्राह्मण समाज को अब तक केवल चुनावों के समय 'वोट बैंक' के रूप में इस्तेमाल किया गया है।
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संगठन के केंद्रीय नेतृत्व ने एक स्पष्ट और कठोर उद्घोषणा की है कि चाहे वह किसी भी पार्टी का कितना भी बड़ा नेता क्यों न हो, यदि वह सवर्ण और ब्राह्मण समाज को उचित सम्मान और प्रतिनिधित्व नहीं देगा, तो उसका पूर्ण रूप से 'सामाजिक बहिष्कार' किया जाएगा। ब्राह्मण समाज अब स्वयं को पीड़ित, उपेक्षित और हाशिए पर महसूस करते हुए खामोश नहीं बैठेगा।
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पदाधिकारियों ने चेतावनी देते हुए कहा, "समाज अब किसी भी राजनीतिक दल का 'बंधुआ' बनकर कार्य करने को तैयार नहीं है। हमारा समर्थन, हमारा वोट और हमारा साथ केवल उसी को मिलेगा, जो हमारे स्वाभिमान, हमारे सम्मान और हमारे अधिकारों की बात प्रमुखता से करेगा।"
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जातिगत आरक्षण का पूर्ण विरोध: 'आर्थिक आधार' ही है वास्तविक न्याय
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इस महा-बैठक का दूसरा सबसे बड़ा मुद्दा वर्तमान आरक्षण प्रणाली रही। युवा ब्राह्मण समाज संगठन ट्रस्ट ने जातिगत आरक्षण और यूजीसी (UGC) एक्ट की वर्तमान विसंगतियों का पुरजोर विरोध किया। नेताओं ने विस्तार से समझाते हुए कहा कि केवल जातिगत आधार पर दिए जा रहे आरक्षण से राष्ट्र का वास्तविक हित कभी भी संभव नहीं है।
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संविधान की मूल भावना की अनदेखी:

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वक्ताओं ने भारतीय संविधान के निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर का हवाला देते हुए याद दिलाया कि संविधान में आरक्षण का प्रावधान मात्र 10 वर्षों के लिए समाज के उत्थान हेतु किया गया था। परंतु, आज पांच दशक से अधिक समय बीत जाने के बाद भी यह व्यवस्था एक राजनीतिक टूल बनकर रह गई है और इसका वास्तविक लाभ समाज के सबसे निचले और गरीब तबके को नहीं मिल पा रहा है।
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क्रीमी लेयर का एकाधिकार और सवर्ण गरीबों की अनदेखी:

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प्रेस वार्ता में इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की गई कि आरक्षण का पूरा लाभ केवल एक वर्ग विशेष के कुछ गिने-चुने परिवारों यानी 'क्रीमी लेयर' (Creamy Layer) तक ही सिमट कर रह गया है। स्थिति यह है कि आरक्षित वर्ग का गरीब आज भी गरीब है, जबकि सवर्ण समाज का गरीब युवा, जिसमें अपार प्रतिभा है, उसे अवसरों से पूरी तरह वंचित किया जा रहा है।
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संगठन की प्रमुख मांग:

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संगठन ने भारत सरकार से यह स्पष्ट मांग की है कि वर्तमान जातिगत आरक्षण प्रणाली को तत्काल प्रभाव से समाप्त किया जाए। इसके स्थान पर, आरक्षण को पूरी तरह से 'आर्थिक आधार' पर लागू किया जाए। इससे देश के सभी जाति, धर्म और समुदाय के उन वास्तविक गरीब लोगों को लाभ मिलेगा जिन्हें इसकी सबसे अधिक आवश्यकता है।
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UGC नियमों में विसंगतियां और शिक्षा के अधिकार का हनन

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शिक्षा, जो कि भारत के प्रत्येक नागरिक का मौलिक अधिकार है, उसे लेकर भी संगठन ने गहरी चिंता व्यक्त की। यूजीसी नेट (UGC NET) जैसी उच्च स्तरीय परीक्षाओं और पूरी उच्च शिक्षा प्रणाली में जिस प्रकार से सवर्ण छात्रों का मानसिक और व्यवस्थागत शोषण बढ़ रहा है, उसे संगठन ने घोर निंदनीय करार दिया है।
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नेताओं ने कहा कि एससी/एसटी (SC/ST) कानून के पहले से मौजूद कड़े प्रावधानों के लागू होने के बाद, शिक्षा व अन्य क्षेत्रों में सवर्णों को दबाने वाले इन अतिरिक्त संशोधनों का अब कोई औचित्य नहीं रह जाता है। इन कानूनों की आड़ में सवर्ण युवाओं का करियर बर्बाद किया जा रहा है। अब इनमें महज 'संशोधन' की बात करना भी बेमानी है, बल्कि इस पूरी व्यवस्था की निष्पक्ष समीक्षा होनी चाहिए ताकि प्रतिभाओं का गला न घोंटा जा सके।
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जंतर-मंतर आंदोलन को पूर्ण समर्थन और भविष्य की हुंकार

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दिल्ली के ऐतिहासिक जंतर-मंतर पर सवर्ण हकों के लिए चल रहे वर्तमान आंदोलन का युवा ब्राह्मण समाज संगठन ट्रस्ट ने पूर्ण समर्थन किया है। संगठन ने ऐलान किया है कि वह इस आंदोलन के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है और हर संभव शारीरिक, मानसिक और आर्थिक मदद के लिए तैयार रहेगा।
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भविष्य की रणनीति और एकजुटता का संकल्प:

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अंत में, संगठन ने एक महत्वपूर्ण संकल्प पारित किया कि अब पूरा ब्राह्मण समाज अपने हकों की रक्षा के लिए अखंड रूप से एकजुट है।
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    किसी भी प्रकार के राजनीतिक या प्रशासनिक दबाव के आगे अब ब्राह्मण समाज घुटने नहीं टेकेगा।
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    समाज ने अपने अधिकारों के लिए जो आक्रामक और कड़ा रुख अपनाया है, उस पर वह पूरी दृढ़ता के साथ कायम रहेगा।
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    आने वाले समय में समाज के प्रत्येक वर्ग, खासकर युवाओं और महिलाओं को जागरूक करने के लिए गांव-गांव और शहर-शहर बड़े स्तर पर महा-अभियान चलाए जाएंगे।
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यह प्रेस वार्ता एक स्पष्ट संदेश है कि यदि नीतियां नहीं बदलीं और सवर्णों की उपेक्षा जारी रही, तो आने वाले समय में एक बड़े जन-आंदोलन का सामना करने के लिए सत्ताधीशों को तैयार रहना होगा।
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प्रेस वार्ता के प्रमुख निर्णय एक नज़र में (Key Highlights)

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क्र.सं.
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प्रमुख मुद्दे
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लिए गए कड़े निर्णय और मांगें
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1.
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राजनीतिक उपेक्षा
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ब्राह्मण विरोधी नेताओं व दलों का पूर्ण सामाजिक बहिष्कार। समाज अब किसी का वोट बैंक नहीं रहेगा।
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2.
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आरक्षण प्रणाली
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जातिगत आरक्षण तत्काल समाप्त हो। सभी समुदायों के लिए केवल 'आर्थिक आधार' पर आरक्षण लागू हो।
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3.
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क्रीमी लेयर
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गिने-चुने परिवारों के एकाधिकार का विरोध। सवर्ण समाज के गरीब युवाओं के लिए समान अवसर की मांग।
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4.
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UGC व शिक्षा
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उच्च शिक्षा में सवर्ण छात्रों के मानसिक व व्यवस्थागत शोषण पर रोक। SC/ST एक्ट के दुरुपयोग का विरोध।
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5.
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जंतर-मंतर आंदोलन
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जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन को ट्रस्ट का बिना शर्त पूर्ण समर्थन।
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जारीकर्ता एवं कार्यालय विवरण:

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मीडिया प्रभारी / केंद्रीय कार्यकारिणी
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उपस्थित प्रमुख सदस्य सूची:

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    जितेन्द्र गौतम (स्थाई समिति सदस्य)
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    कुलदीप शर्मा (अध्यक्ष, मण्डल युवा ब्राह्मण समाज)
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    पुनीत शर्मा (मंत्री, युवा ब्राह्मण समाज संगठन)
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    सौरभ दिवाकर शर्मा (उपाध्यक्ष, युवा ब्राह्मण समाज संगठन)
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    राजीव नरहरी (कोषाध्यक्ष, युवा ब्राह्मण समाज संगठन)
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    अन्य वरिष्ठ सदस्य: आनन्द शर्मा, पुष्पेन्द्र शर्मा, अजीत पचोरी, सुनील शर्मा, अजय शर्मा, मनीष शर्मा, विपिन शर्मा, पं. गणेश दत्त शर्मा, ललित शर्मा, हिमांशु शर्मा, प्रेमचन्द शर्मा, राजू शर्मा, अंकुर शर्मा।
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