मेरठ (ब्यूरो रिपोर्ट) - 25 जनवरी, 2026: देश भर के उच्च शिक्षण संस्थानों में गुणवत्ता और सुधार के दावों के बीच विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) का एक नया प्रस्ताव विवादों के घेरे में आ गया है। साल की शुरुआत के साथ ही UGC द्वारा प्रस्तावित "उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता सर्वेक्षण हेतु विनियमन-2026" (Regulation for Equality Survey in Higher Education Institutions - 2026) ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश की छात्र और सामाजिक राजनीति में भूचाल ला दिया है।READ ALSO:-बार्डर-2 की रिलीज के साथ ही मेरठ में भूचाल: दलित स्वाभिमान पर चोट या सिनेमाई चूक? 3 घंटे 19 मिनट की फिल्म के 27वें मिनट ने खड़ा किया बड़ा बखेड़ा
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मेरठ, जो हमेशा से क्रांतियों की धरा रही है, वहां से इस विनियमन के खिलाफ विरोध का पहला बड़ा स्वर फूट पड़ा है। युवा ब्राह्मण समाज संगठन (ट्रस्ट), मेरठ मण्डल ने इस प्रस्ताव को सिरे से खारिज करते हुए इसे समाज को बांटने वाली साजिश करार दिया है। संगठन ने रविवार को एक आपात बैठक कर इसे तत्काल प्रभाव से वापस लेने की मांग की है।
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25 जनवरी: विरोध की पहली चिंगारी
\r\n\r\nआज, रविवार को मेरठ के बी.एच. इंटर कॉलेज (B.H. Inter College) प्रांगण में युवा ब्राह्मण समाज संगठन के बैनर तले एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता संगठन के अध्यक्ष जितेन्द्र गौतम ने की। इस बैठक में मेरठ मण्डल के प्रबुद्ध जनों, शिक्षाविदों और समाजसेवियों ने हिस्सा लिया।
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माहौल में भारी आक्रोश था। वक्ताओं ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि शिक्षा के मंदिरों में 'समानता' के नाम पर 'जातिगत और सामाजिक विभाजन' का जो बीज बोने की कोशिश की जा रही है, उसका परिणाम भविष्य में घातक होगा। बैठक के अंत में सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित कर सरकार और यूजीसी को चेतावनी दी गई कि यदि इस विनियमन को रद्द नहीं किया गया, तो सड़कों पर उतरने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा।
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क्या है विवाद की जड़?
\r\n\r\nसंगठन के अनुसार, UGC का नया ड्राफ्ट "समानता सर्वेक्षण" (Equality Survey) के नाम पर शिक्षण संस्थानों में छात्रों और कर्मचारियों की सामाजिक पृष्ठभूमि, जाति और वर्ग का डेटाबेस तैयार करने की बात करता है। युवा ब्राह्मण समाज का तर्क है कि उच्च शिक्षा का उद्देश्य ज्ञान का प्रसार और अनुसंधान होना चाहिए, न कि यह गिनना कि किस जाति के कितने छात्र किस बेंच पर बैठे हैं।
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संगठन द्वारा उठाई गई 4 प्रमुख आपत्तियां:
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1. सामाजिक विभाजन का खतरा (Social Division)
\r\n\r\nबैठक में अध्यक्ष जितेन्द्र गौतम ने कहा, "यह विनियमन समानता लाने के बजाय असमानता की खाई को और चौड़ा करेगा। जब आप क्लासरूम में बैठे छात्र को उसकी मेधा के बजाय उसकी सामाजिक पहचान से तौलेंगे, तो वहां शिक्षा नहीं, राजनीति होगी। इससे छात्रों के बीच आपसी वैमनस्य बढ़ेगा।"
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2. दुरुपयोग की प्रबल आशंका (Potential for Misuse)
\r\n\r\nपत्र में एक महत्वपूर्ण बिंदु उठाया गया है कि इस नियम का दुरुपयोग केवल सामान्य वर्ग के खिलाफ ही नहीं, बल्कि दलित और पिछड़े वर्ग के छात्रों के हितों के खिलाफ भी हो सकता है। डेटा का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए "सॉफ्ट टारगेटिंग" के रूप में किया जा सकता है।
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3. शैक्षिक वातावरण का विनाश (Destruction of Academic Environment)
\r\n\r\nसंगठन का मानना है कि विश्वविद्यालयों का माहौल पहले ही छात्र राजनीति के कारण संवेदनशील रहता है। ऐसे में यह सर्वेक्षण शिक्षण संस्थानों को 'अखाड़ों' में तब्दील कर देगा। पढ़ाई और रिसर्च पीछे छूट जाएंगे और 'सर्वेक्षण और तुष्टिकरण' मुख्य मुद्दा बन जाएगा।
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4. अव्यावहारिक मूल्यांकन (Lack of Practical Assessment)
\r\n\r\nविरोध कर रहे लोगों का कहना है कि यह नियम वातानुकूलित कमरों में बैठकर बनाया गया है। इसमें भारतीय समाज की जटिल संरचना और जमीनी हकीकत (Ground Reality) का कोई वैज्ञानिक आकलन नहीं किया गया है।
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"शिक्षा में रिसर्च चाहिए, सर्वे नहीं": संगठन का विजन
\r\n\r\nयुवा ब्राह्मण समाज ने सिर्फ विरोध नहीं किया है, बल्कि शिक्षा सुधार के लिए एक सकारात्मक खाका (Roadmap) भी पेश किया है। संगठन के वरिष्ठ सदस्य श्री कुलदीप शर्मा और श्री राजीव नरहरी ने संयुक्त रूप से कहा कि भारत को यदि विश्वगुरु बनना है, तो उसे 'जाति' से ऊपर उठकर 'ज्ञान' की बात करनी होगी।
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संगठन ने सरकार के सामने 5 सूत्रीय मांगें रखी हैं:
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- \r\n अनुसंधान-केंद्रित शिक्षा (Research-Centric Education): उच्च शिक्षा का पूरा फोकस रटने या डिग्री बांटने के बजाय रिसर्च पर होना चाहिए।\r\n \r\n
- \r\n विश्वस्तरीय प्रयोगशालाएं (World-Class Labs): यूजीसी का फंड सर्वे पर खर्च करने के बजाय कॉलेजों में अंतरराष्ट्रीय स्तर की लैब बनाने पर खर्च हो।\r\n \r\n
- \r\n ब्रेन ड्रेन पर रोक (Stop Brain Drain): भारत की प्रतिभाएं विदेश क्यों जा रही हैं? उन्हें रोकने के लिए भारत में ही आकर्षक पैकेज और सुविधाएं दी जाएं।\r\n \r\n
- \r\n इंफ्रास्ट्रक्चर डवलपमेंट: सरकारी और निजी क्षेत्र मिलकर आधुनिक शोध के लिए बुनियादी ढांचा तैयार करें।\r\n \r\n
- \r\n स्टार्टअप और इनोवेशन: छात्रों को जातिगत आंकड़ों में उलझाने के बजाय स्टार्टअप और सामाजिक प्रभाव वाली परियोजनाओं (Social Impact Projects) के लिए प्रोत्साहित किया जाए।\r\n \r\n
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\r\n\r\n\r\n"हम चाहते हैं कि हमारा युवा यह न सोचे कि वह किस जाति का है, बल्कि यह सोचे कि वह देश के लिए क्या आविष्कार कर सकता है। यूजीसी का यह नियम युवाओं को पीछे धकेलने वाला है।" - ललित शर्मा, वरिष्ठ सदस्य\r\n
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28 जनवरी को आर-पार की रणनीति
\r\n\r\nआज की बैठक तो महज एक शुरुआत थी। युवा ब्राह्मण समाज ने आंदोलन को तेज करने का ऐलान कर दिया है। संगठन ने मीडिया को जानकारी दी है कि 28 जनवरी, 2026 (बुधवार) को एक बड़ी रणनीति बैठक बुलाई गई है।
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- \r\n तिथि: 28 जनवरी, 2026\r\n \r\n
- \r\n समय: दोपहर 3:00 बजे\r\n \r\n
- \r\n स्थान: मीटिंग हॉल, एन.ए.एस. इंटर कॉलेज (N.A.S. Inter College), मेरठ।\r\n \r\n
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इस बैठक में मेरठ मण्डल के अलावा आसपास के जिलों से भी युवा प्रतिनिधियों को बुलाया गया है। सूत्रों के अनुसार, इस बैठक में "विनियमन वापसी" के लिए चरणबद्ध आंदोलन, धरना प्रदर्शन और यूजीसी चेयरमैन के नाम ज्ञापन सौंपने की रूपरेखा तैयार की जाएगी।
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उपस्थित गणमान्य
\r\n\r\nआज बी.एच. इंटर कॉलेज में हुई बैठक में संगठन की मजबूती साफ दिखाई दी। मुख्य रूप से निम्नलिखित पदाधिकारी और सदस्य उपस्थित रहे:
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- जितेन्द्र गौतम (अध्यक्ष) - जिनके हस्ताक्षर से पत्र जारी किया गया। \r\n
- श्री कुलदीप शर्मा \r\n
- श्री राजीव नरहरी \r\n
- श्री ललित शर्मा \r\n
- श्री पुनीत शर्मा \r\n
- श्री सौरव दिवाकर शर्मा \r\n
- श्री सुरेंद्र शर्मा \r\n
- श्री रमाकांत पंचोरी \r\n
- डॉ पंकज शर्मा \r\n
- श्री गणेश दत्त शर्मा \r\n
- श्री संजय वाजपई \r\n
- श्री भूषण शर्मा \r\n
- सही अंकुर शर्मा तथा अन्य सक्रिय कार्यकर्ता। \r\n
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शिक्षा या राजनीति?
\r\n\r\nयूजीसी का "समानता सर्वेक्षण-2026" अभी लागू होने की प्रक्रिया में है, लेकिन इसका विरोध यह दर्शाता है कि शिक्षा नीति में किसी भी तरह का सामाजिक हस्तक्षेप अब आसानी से स्वीकार नहीं किया जाएगा। जहां एक तरफ सरकार समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) की बात करती है, वहीं दूसरी तरफ युवा संगठन इसे 'फूट डालो और राज करो' की नीति के रूप में देख रहे हैं।
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28 जनवरी की बैठक पर अब सबकी निगाहें टिकी हैं। क्या यह विरोध मेरठ तक सीमित रहेगा या यह आग पश्चिमी उत्तर प्रदेश से निकलकर दिल्ली तक पहुंचेगी? यह आने वाला वक्त ही बताएगा।
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Sabse pehle comment karne wale banein.