मेरठ में व्यापारी सत्यम रस्तोगी को सरेराह नाक रगड़वाने के मामले में गिरफ्तार किए गए भाजपा के निष्कासित नेता विकुल चपराणा समेत सभी चार आरोपी सोमवार शाम को जेल से रिहा हो गए। लगभग दो सप्ताह जेल में रहने के बाद, चारों आरोपी—विकुल चपराणा, हैप्पी भड़ाना, आयुष शर्मा और सुबोध यादव—एक साथ बाहर आए। रिहाई से पहले ही जेल रोड पर विकुल चपराणा के समर्थकों की भारी भीड़ जमा हो गई थी, जिन्हें पुलिस ने नियंत्रित किया।READ ALSO:-मुरादाबाद: 'हमें 5 मिनट दीजिए, हिन्दू राष्ट्र बना देंगे...' ओवैसी के बयान पर विश्व हिन्दू महासंघ की महिला नेता का पलटवार
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सरेआम दबंगई का वायरल वीडियो

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इस पूरे मामले ने तब तूल पकड़ा जब 21 अक्टूबर को विकुल चपराणा का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ।
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    दबंगई: वीडियो में विकुल चपराणा पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में ही कंकरखेड़ा के व्यापारी सत्यम रस्तोगी को धमकाते हुए दिखाई दे रहे थे।
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    अमानवीय कृत्य: वीडियो में विकुल चपराणा ने व्यापारी को धमकी देते हुए कहा था, "मंत्री सोमेंद्र तोमर तेरा बाप है। जमीन पर नाक रगड़कर माफी मांग।" मजबूरी में व्यापारी सत्यम रस्तोगी को गिड़गिड़ा कर माफी मांगनी पड़ी थी।
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    गिरफ्तारी: शुरुआती शांति भंग की कार्रवाई के बाद, मामले ने तूल पकड़ा तो पुलिस ने विकुल सहित चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
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भाजपा से निष्कासन और समझौता

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दबंगई का वीडियो सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया। ऊर्जा राज्य मंत्री का नाम घसीटे जाने के बाद किरकिरी होने लगी।
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    पार्टी की कार्रवाई: चौतरफा निंदा के बाद विकुल चपराणा को आनन-फानन में भाजपा से निष्कासित कर दिया गया था।
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    जनप्रतिनिधियों का हस्तक्षेप: किरकिरी और बढ़ते दबाव के बाद, स्थानीय जनप्रतिनिधि सक्रिय हुए और दोनों पक्षों के बीच समझौते की रणनीति तैयार हुई।
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    समझौते की शर्त: विगत गुरुवार को सर्किट हाउस में जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में दोनों पक्षों में लिखित समझौता हो गया। पीड़ित व्यापारी सत्यम रस्तोगी के पिता और आरोपी विकुल चपराणा के मामा रणपाल सिंह समेत दोनों पक्षों के परिजन मौजूद रहे। सभी ने आपसी सहमति से कहा कि वे अब इस मामले में किसी प्रकार की कानूनी कार्रवाई नहीं चाहते।
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ज़मानत और कानूनी प्रक्रिया

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समझौते के बाद ही यह तय हो गया था कि चारों आरोपियों को जल्द ही ज़मानत मिल जाएगी।
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    धाराएं हटीं: समझौता होने के बाद पुलिस ने मामले से गंभीर धाराएं हटा दीं, जिससे ज़मानत का रास्ता साफ हो गया।
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    न्यायालय का फैसला: इसके बाद मामला वापस लोअर कोर्ट में पहुंचा, जहाँ चारों आरोपियों की ज़मानत के कागजात लगाए गए और न्यायालय ने ज़मानत दे दी। सोमवार को जिला जेल से विकुल चपराणा समेत कुल 22 लोगों को ज़मानत पर रिहा किया गया।
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रिहाई पर पुलिस का पहरा

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विकुल चपराणा की रिहाई से पहले ही जेल रोड पर पुलिस फोर्स तैनात कर दिया गया था।
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    समर्थकों की भीड़: उन्हें लेने के लिए करीब 4 से 5 गाड़ियां जेल पहुंची थीं, लेकिन सीओ सिविल लाइन अभिषेक तिवारी ने पुलिस फोर्स की मदद से उन्हें बैरियर पर ही रोक दिया और आगे नहीं जाने दिया।
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    मीडिया से दूरी: जेल से बाहर आते ही विकुल चपराणा और उनके साथियों ने मीडिया से पूरी तरह दूरी बनाए रखी। यह रिहाई दर्शाती है कि सत्ताधारी पार्टी से जुड़े मामलों में समझौते के बाद कानूनी प्रक्रिया कितनी तेजी से बदल सकती है।
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