उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में शास्त्रीनगर स्थित सेंट्रल मार्केट (Meerut Central Market) के प्रभावित दुकानदारों के लिए एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद यहां अनधिकृत निर्माणों पर लगातार कार्रवाई चल रही है, जिससे सैकड़ों व्यापारियों का रोजगार संकट में आ गया है। इस समस्या के समाधान के लिए बुधवार को सर्किट हाउस में भाजपा के सांसदों और विधायकों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में प्रभावित व्यापारियों के पुनर्वास को लेकर अहम फैसला लिया गया है, जिसके तहत उन्हें दूसरी जगह दुकानें उपलब्ध कराई जाएंगी।
सरकारी जमीन पर बनेगा नया कॉम्प्लेक्स बैठक के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए दक्षिण विधायक और प्रदेश के ऊर्जा राज्य मंत्री डॉ. सोमेंद्र तोमर ने इस योजना की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सेंट्रल मार्केट के प्रभावित व्यापारियों के लिए प्रशासन एक विशेष प्रस्ताव पर काम कर रहा है। इसके तहत किसी उपयुक्त सरकारी जमीन को चिन्हित कर वहां एक नया कमर्शियल कॉम्प्लेक्स तैयार किया जाएगा। इस नए कॉम्प्लेक्स में उन सभी दुकानदारों को दुकानें आवंटित की जाएंगी, जिनकी दुकानें सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद हुई कार्रवाई में प्रभावित हुई हैं। हालांकि, अभी तक यह तय नहीं हुआ है कि यह कॉम्प्लेक्स किस सरकारी जमीन पर बनेगा और इसमें कुल कितनी दुकानें बनाई जाएंगी।

मुफ्त नहीं, किराये पर मिलेगी जगह इस प्रस्तावित योजना की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि व्यापारियों को नई दुकानें मुफ्त में नहीं दी जाएंगी। ऊर्जा राज्य मंत्री ने स्पष्ट किया है कि प्रभावित दुकानदारों को यह जगह किराये के आधार पर उपलब्ध कराई जाएगी। इस कदम से व्यापारियों को अपना कारोबार फिर से खड़ा करने के लिए एक सुरक्षित और वैध विकल्प मिल सकेगा। फिलहाल, दुकान आवंटन के लिए व्यापारियों की पात्रता क्या होगी, किराये की दरें कितनी होंगी और लीज की अवधि क्या होगी, इन सभी बिंदुओं पर संबंधित विभागों द्वारा नियम तय किए जाने अभी बाकी हैं।
सुप्रीम कोर्ट की सख्ती और ध्वस्तीकरण गौरतलब है कि मेरठ के शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट में आवासीय भूखंडों (रेजिडेंशियल प्लॉट्स) पर अवैध रूप से व्यावसायिक निर्माण कर लिए गए थे। नियमों के इस खुले उल्लंघन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट के कड़े निर्देशों के बाद, 16 सितंबर से मेरठ विकास प्राधिकरण (एमडीए) और स्थानीय प्रशासन ने बाजार में ध्वस्तीकरण और सीलिंग की कार्रवाई शुरू की थी। इसके बाद 22 सितंबर को हुई सुनवाई में कोर्ट ने जोन-1 में लगभग 16,726 अनधिकृत निर्माणों को सील करने का आदेश दिया, जिससे हड़कंप मच गया है।
Follow the Khabreelal News channel on WhatsApp Join ›आगे की प्रक्रिया पर टिकी निगाहें सरकारी जमीन पर नया कॉम्प्लेक्स बनाने का प्रस्ताव बेशक व्यापारियों के लिए उम्मीद की एक किरण है, लेकिन इसकी औपचारिक प्रक्रिया अभी शुरू होनी बाकी है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जमीन का चयन कब होता है और निर्माण एजेंसी कौन सी होगी। लागत, दुकानों की संख्या, पात्र दुकानदारों की सूची और किराये की शर्तें तय होने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि यह राहत योजना जमीनी स्तर पर कितनी कारगर साबित होती है।
Sabse pehle comment karne wale banein.