Meerut MDA Sealing: उत्तर प्रदेश के मेरठ शहर में अवैध निर्माणों और सीलिंग की कार्रवाई को लेकर हालात एक बार फिर बेहद तनावपूर्ण हो गए हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में मेरठ विकास प्राधिकरण (MDA) द्वारा जोन-ए में चिन्हित किए गए 16,726 निर्माणों पर सीलिंग और ध्वस्तीकरण की तलवार लटक रही है। हाल ही में सेंट्रल मार्केट में हुई सीलिंग की कार्रवाई के बाद अब शहर भर के व्यापारी और स्थानीय नागरिक एकजुट होकर प्रशासन और सरकार के खिलाफ आर-पार की लड़ाई के मूड में आ गए हैं।
प्रशासन के साथ वार्ता विफल, बैठक में हुआ भारी हंगामा
बढ़ते आक्रोश और संभावित आंदोलन को टालने व स्थिति को संभालने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों, व्यापारियों और स्थानीय नागरिकों के बीच एक महत्वपूर्ण संवाद बैठक आयोजित की गई थी। हालांकि, यह बैठक समाधान निकालने के बजाय और अधिक तल्खी का कारण बन गई, जहां व्यापारियों और अधिकारियों के बीच जमकर नोकझोंक हुई।
जंतर–मंतर गेम खेलें। पुलिस बनकर कॉकरोचों को पहचानो या आंदोलनकारी बनकर पहुंचो जंतर मंतर। खेलें ▶व्यापारियों का सीधा आरोप है कि इतने गंभीर और संवेदनशील मुद्दे पर एडीएम (ADM) और मुख्य अभियंताओं जैसे वरिष्ठ अधिकारियों को वार्ता के लिए आना चाहिए था, लेकिन उन्होंने खुद आने के बजाय छोटे स्तर के अधिकारियों और जूनियर इंजीनियरों को बैठक में भेज दिया। इसके अलावा, प्रशासन के पास चिन्हित किए गए 16 हजार से अधिक निर्माणों की कोई स्पष्ट या ठोस सूची भी मौजूद नहीं थी, जिसे लेकर व्यापारियों ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए।
24 अक्टूबर नहीं, अब 15 नवंबर को होगा महा-आंदोलन
प्रशासनिक रवैये से नाराज व्यापारी नेता रविंद्र गुर्जर ने मीडिया से बातचीत करते हुए अधिकारियों और राज्य सरकार को कड़े शब्दों में चेतावनी दी है। उन्होंने कहा, "अधिकारियों ने पहले हमसे झूठ बोला और समय आने पर बड़े अफसरों की जगह छोटे इंजीनियरों को भेज दिया। मैं प्रशासन को बता देना चाहता हूं कि वे मेरठ की जनता को हल्के में लेने की भूल न करें। लोगों के घरों और दुकानों पर सील लग रही है और अधिकारियों को बात समझ नहीं आ रही है।"
Follow the Khabreelal News channel on WhatsApp Join ›गुर्जर ने स्पष्ट किया कि प्रशासनिक संवादहीनता को देखते हुए व्यापारियों ने अपनी रणनीति बदली है और अब वे 24 अक्टूबर के बजाय 15 नवंबर को और भी बड़ा और व्यापक जन आंदोलन (महा-आंदोलन) करेंगे।
🏪 आपके शहर के ऑफर
"अध्यादेश लाए सरकार, वरना सीलिंग करने वालों का खुद करेंगे इलाज"
सीलिंग की कार्रवाई पर बेहद सख्त और उग्र रुख अपनाते हुए रविंद्र गुर्जर ने चेतावनी दी, "अगर इस बीच किसी के भी घर या दुकान पर सीलिंग की कार्रवाई की गई, तो सील लगाने आने वाले अधिकारियों का हम खुद इलाज करेंगे।"
व्यापारियों ने प्रशासन के सामने तीन प्रमुख बातें स्पष्ट की हैं:
- व्यापक जनसमर्थन: मेरठ की पूरी जनता और चारों ज़ोन के लोग इस आंदोलन में पूरी तरह से व्यापारियों के साथ खड़े हैं।
- सुरक्षा की गारंटी: किसी भी व्यापारी की दुकान या आम नागरिक के घर को टूटने या सील नहीं होने दिया जाएगा। इसकी गारंटी व्यापारी संगठन ने ली है।
- अध्यादेश की मांग: राज्य सरकार को चाहिए कि वह तत्काल प्रभाव से एक अध्यादेश (Ordinance) लाकर मेरठ के हजारों परिवारों और व्यापारियों को इस संकट से राहत दे।
व्यापारियों ने साफ कर दिया है कि यदि 15 नवंबर तक स्थानीय प्रशासन या प्रदेश सरकार कोई बीच का रास्ता निकालकर समस्या का समाधान करती है, तो वे उसका स्वागत और धन्यवाद करेंगे; अन्यथा 15 नवंबर के बाद यह आंदोलन बेहद उग्र रूप धारण करेगा, जिसकी जिम्मेदारी पूरी तरह शासन-प्रशासन की होगी।
डिस्क्लेमर (Disclaimer):
यह समाचार मेरठ के व्यापारी संगठनों, स्थानीय नागरिकों और प्रशासन के बीच हुई बैठक तथा मीडिया को दिए गए बयानों पर आधारित है। सीलिंग और ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया माननीय न्यायालय और विकास प्राधिकरण के दिशा-निर्देशों के अधीन है।
Sabse pehle comment karne wale banein.