उत्तर प्रदेश के मेरठ शहर में वायु प्रदूषण ने भयावह रूप ले लिया है। ठंड की दस्तक के साथ ही मेरठ की हवा 'विषाक्त' हो गई है और शहर 'प्रदूषित गैसों और अति सूक्ष्म कणों के चेंबर' में बदल चुका है। प्रदूषण का स्तर इतना बढ़ गया है कि यह लगातार दूसरे दिन उत्तर प्रदेश में सबसे प्रदूषित शहर और देश में दारूहेड़ा के बाद दूसरा सबसे प्रदूषित शहर दर्ज किया गया है। रात 10 बजे AQI 395 दर्ज किया गया, जो वायु की अत्यंत 'गंभीर' (Severe) स्थिति को दर्शाता है।READ ALSO:-गाजियाबाद में पिज्जा कैफे का ओवन ब्लास्ट: 500 मीटर तक गूंजा धमाका, पिता और दो बेटे 60% झुलसे, दिल्ली रेफर
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PM 2.5 का खतरनाक स्तर

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मेरठ में प्रदूषण के आंकड़ों ने सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। अति सूक्ष्म कणों (PM 2.5 और PM 10) की प्रचुरता अत्यधिक हो गई है।
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    रिकॉर्ड स्तर: पल्लवपुरम इलाके में पीएम 2.5 की मात्रा सुबह 5 बजे से दोपहर 1 बजे तक 500 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर तक पहुँच गई। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) द्वारा 500 से अधिक स्तर की माप दर्ज नहीं की जाती है।
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    तापमान और नमी: रात और सुबह के समय वातावरण में नमी की मात्रा (शनिवार रात 73 प्रतिशत) बढ़ी हुई थी, जबकि न्यूनतम तापमान 18.7 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। नमी के बढ़ने से प्रदूषक कण ज़मीन के करीब ठहर जाते हैं, जिससे धुंध गहरा जाती है।
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देश के टॉप प्रदूषित शहरों में मेरठ

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मेरठ के आसपास गाजियाबाद, नोएडा, मुजफ्फरनगर और बागपत में भी हवा की गुणवत्ता बेहद बदतर बनी हुई है।
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शहर
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वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI, शाम 4 बजे)
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स्थिति
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दारूहेड़ा
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434
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देश में सबसे ज्यादा प्रदूषित (गंभीर)
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मेरठ
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381
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प्रदेश में सबसे प्रदूषित (अत्यंत गंभीर)
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भिवाड़ी
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376
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अत्यंत गंभीर
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गुरुग्राम
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357
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अत्यंत गंभीर
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गाजियाबाद
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351
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अत्यंत गंभीर
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नोएडा, बुलंदशहर
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348
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बहुत खराब
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हापुड़
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346
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बहुत खराब
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ग्रेटर नोएडा
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340
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बहुत खराब
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बागपत
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341
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बहुत खराब
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मुजफ्फरनगर
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339
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बहुत खराब
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Pollution के स्थानीय कारण और लापरवाही

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पर्यावरणविदों की मानें तो मेरठ में प्रदूषण गहराने के पीछे स्थानीय कारण मुख्य रूप से जिम्मेदार हैं, जिनमें जिम्मेदार विभागों की घोर लापरवाही उजागर हुई है।
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    खुले में कूड़ा जलाना: जगह-जगह कूड़े के जलने और सड़कों पर उड़ रही धूल प्रदूषण को गुबार बना रही है।
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    अवैध निर्माण सामग्री: टीपी नगर और मंगल पांडे नगर में निर्माण सामग्री के ढेर खुले में सड़क के किनारे लगे देखे जा सकते हैं, जिससे पीएम 10 की मात्रा लगातार बढ़ रही है।
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    जलाऊ गतिविधियाँ: बिजली बंबा बाईपास पर लगातार दूसरे दिन रजवाहे की सफाई के बाद निकली गई झाड़ियों और घास को जलाया गया, जिससे भारी धुआँ उठा और राहगीर परेशान हुए।
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    विषैली गैस: वातावरण में कार्बन मोनोऑक्साइड गैस का स्तर भी 105 से 110 के बीच बना हुआ है, जिसे पूर्व अध्यक्ष प्रोफेसर एसवीएस राणा ने एक विषैली गैस बताया है।
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विशेषज्ञों की चेतावनी

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चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के पर्यावरण विज्ञान विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रोफेसर एसवीएस राणा ने इस स्थिति को 'अत्यंत गंभीर' बताया है।
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    जाम का प्रभाव: उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसे माहौल में ट्रैफिक जाम लगना प्रदूषण के स्तर को तेजी से बढ़ाता है, क्योंकि इससे कार्बन मोनोऑक्साइड जैसी विषैली गैसों का उत्सर्जन बढ़ जाता है।
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    सलाह: उन्होंने नागरिकों को सलाह दी है कि जहाँ ट्रैफिक जाम हो, उन मार्गों की जगह वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करें।
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स्वास्थ्य संकट और कार्रवाई की मांग

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मेरठ में AQI का 395 तक पहुँचना स्वास्थ्य के लिए एक बड़ा संकट है। यह स्थिति GRAP (Graded Response Action Plan) के 'गंभीर' चरण (400 के करीब) के बहुत करीब है। जिम्मेदार विभागों की घोर लापरवाही के बावजूद उनके कानों पर जूं न रेंगना स्थानीय प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाता है। नागरिकों ने तत्काल कूड़ा जलाने और धूल नियंत्रण के सख्त उपाय लागू करने की मांग की है।
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