मेरठ | ख़बरीलाल डेस्क उत्तर भारत में मार्च के महीने में मौसम एक बार फिर अपनी करवटें बदल रहा है। 'क्रांतिधरा' मेरठ और आसपास के क्षेत्रों में पिछले दो दिनों से सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) का व्यापक असर देखने को मिल रहा है। शहर में लगातार हो रही रुकरुक कर बारिश और पिछले 12 घंटों से जारी हल्की बूंदाबांदी ने मौसम का रुख पूरी तरह से मोड़ दिया है। तपिश की ओर बढ़ रहे मार्च के महीने में अचानक हुई इस बारिश से न केवल तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई है, बल्कि शहरवासियों को एक बार फिर गुलाबी ठंड का अहसास होने लगा है।READ ALSO:-सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स पर गिरेगी गाज? सुप्रीम कोर्ट ने कथित पत्रकारों को बताया 'ब्लैकमेलर', आरोपियों की अपमानजनक तस्वीरों पर जताई भारी नाराजगी
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ख़बरीलाल की इस विस्तृत रिपोर्ट में जानिए मौसम में आए इस अचानक बदलाव के वैज्ञानिक कारण, तापमान के आंकड़े, वायु गुणवत्ता (AQI) की स्थिति और सबसे महत्वपूर्ण, हमारे अन्नदाता यानी किसानों पर पड़ने वाला इसका मिश्रित असर।
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तापमान में ऐतिहासिक गिरावट: मार्च में लौटी 'गुलाबी ठंड'
\r\n\r\nमौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, पिछले दो दिनों से हो रही बारिश के कारण मेरठ के अधिकतम तापमान में 8 डिग्री सेल्सियस तक की भारी गिरावट दर्ज की गई है। गुरुवार को मौसम ने जो करवट ली, उसका सिलसिला शुक्रवार को भी सुबह से ही हल्की बारिश और ठंडी हवाओं के रूप में जारी रहा।
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आज का तापमान विश्लेषण:
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- \r\n अधिकतम तापमान: मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि आज पूरे दिन आसमान में बादल छाए रहेंगे और गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। इस कारण अधिकतम तापमान महज 20 से 23 डिग्री सेल्सियस के बीच सिमट सकता है।\r\n \r\n
- \r\n न्यूनतम तापमान: रात और सुबह के समय ठंडक अधिक बढ़ गई है। न्यूनतम तापमान के 13 से 15 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने की संभावना है।\r\n \r\n
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ठंड की वापसी: हवा में नमी (Humidity) का स्तर बहुत अधिक होने और पुरवाई हवाओं के चलने के कारण कनकनी बनी हुई है। मौसम में आए इस अचानक बदलाव से जहां लोगों को गर्मी से शुरुआती राहत मिली है, वहीं ठंड की हल्की वापसी ने सुबह-शाम लोगों को फिर से गर्म कपड़े (Sweaters and Jackets) निकालने पर मजबूर कर दिया है।
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मौसम वैज्ञानिक की भविष्यवाणी: अगले 2-3 दिनों तक राहत नहीं
\r\n\r\nमेरठ स्थित सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (कृषि विवि) के प्रसिद्ध मौसम वैज्ञानिक डॉ. यूपी शाही के अनुसार, इस समय उत्तर भारत में पश्चिमी विक्षोभ काफी सक्रिय है।
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- \r\n फोरकास्ट (Forecast): डॉ. शाही ने बताया कि इस सिस्टम के सक्रिय रहने से अगले 2 से 3 दिनों तक मौसम ऐसा ही बना रहेगा।\r\n \r\n
- \r\n बारिश का अनुमान: आने वाले 48 से 72 घंटों के दौरान आसमान में घने बादल छाए रहेंगे और बीच-बीच में बारिश का दौर जारी रहेगा। कुछ स्थानों पर तेज हवाओं के साथ मध्यम दर्जे की बारिश भी देखने को मिल सकती है।\r\n \r\n
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पर्यावरण को फायदा: मेरठ की हवा हुई 'साफ', AQI संतोषजनक श्रेणी में
\r\n\r\nमौसम के इस बदलाव और लगातार हो रही बारिश का सबसे सकारात्मक पहलू पर्यावरण पर देखने को मिला है। मेरठ, जो अक्सर सर्दियों में वायु प्रदूषण की गंभीर समस्या से जूझता है, वहां बारिश ने हवा को पूरी तरह से 'धो' दिया है।
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- \r\n AQI डेटा: शहर का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) सुधरकर 97 दर्ज किया गया है।\r\n \r\n
- \r\n श्रेणी: शून्य से 50 के बीच AQI को 'अच्छा' और 51 से 100 के बीच 'संतोषजनक' (Satisfactory) माना जाता है।\r\n \r\n
- \r\n असर: 97 का AQI मेरठवासियों के लिए बहुत बड़ी राहत है। बारिश के कारण हवा में मौजूद धूल के कण (PM 10) और महीन कण (PM 2.5) जमीन पर बैठ गए हैं, जिससे हवा साफ हो गई है और लोगों को सांस लेने में ताज़गी का अनुभव हो रहा है।\r\n \r\n
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कृषि सेक्टर पर मिश्रित असर: वैज्ञानिक खुश, लेकिन ज़मीन पर किसान परेशान
\r\n\r\nइस बेमौसम बारिश का सबसे पेचीदा पहलू कृषि पर पड़ने वाला इसका असर है। जहां वैज्ञानिक इसे तकनीकी रूप से लाभदायक मान रहे हैं, वहीं खेत में खड़ा किसान इसे लेकर बेहद चिंतित है।
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1. वैज्ञानिक दृष्टिकोण (वैज्ञानिक डॉ. शाही की राय): मौसम वैज्ञानिक डॉ. यूपी शाही के अनुसार, यह बारिश वर्तमान में गेहूं समेत अन्य रबी फसलों के लिए लाभदायक साबित हो सकती है, बशर्ते तेज हवाएं न चलें और ओलावृष्टि न हो। यह बारिश फसलों को प्राकृतिक रूप से पानी देगी और तापमान कम रहने से दाना पकने की प्रक्रिया बेहतर होगी।
\r\n\r\n2. जमीनी हकीकत (किसानों की परेशानी): लेकिन, ख़बरीलाल की ज़मीनी पड़ताल और स्रोत समाचार के अनुसार, मार्च में इस समय हुई बारिश से किसान सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं। किसानों के लिए यह बारिश फायदे से ज्यादा परेशानी और काम में देरी (Delay in Work) लेकर आई है।
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- \r\n गेहूं की फसल: गेहूं कि फसल अब लगभग तैयार होने की स्थिति में आने लगी है। इस समय ज्यादा पानी या तेज हवा से फसल के गिरने (Lodging) का खतरा रहता है, जिससे पैदावार प्रभावित हो सकती है।\r\n \r\n
- \r\n गन्ने की फसल: किसानों के लिए गन्ने की पुरानी फसल को समाप्त करने और नए गन्ने की बुवाई के लिए यह अंतिम दौर चल रहा है। बारिश के कारण खेतों में नमी ज्यादा होने से गन्ने की कटाई और छिलाई का काम रुक गया है।\r\n \r\n
- \r\n सरसों की फसल पर सबसे बड़ी मार: बहुत से किसानों की सरसों की फसल खेत में कटी हुई पड़ी है। मार्च में सरसों की कटाई चरम पर होती है। ऐसे में कटी हुई फसल पर बारिश पड़ने से सरसों के दाने काले पड़ने, झड़ने और फंगस लगने का खतरा पैदा हो गया है। इससे किसानों को सीधे तौर पर आर्थिक नुकसान होने की आशंका है।\r\n \r\n
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पश्चिमी विक्षोभ के कारण मेरठ में मौसम का यह मिजाज शहरवासियों के लिए गुलाबी ठंड और साफ हवा लेकर आया है, लेकिन अन्नदाता के लिए यह चिंता की लकीरें खींच रहा है। अगले दो से तीन दिन मेरठ के लिए मौसम के लिहाज़ से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। ख़बरीलाल की टीम मौसम के हर अपडेट पर नज़र बनाए हुए है।
Sabse pehle comment karne wale banein.