मेरठ: पूरे प्रदेश में सुर्खियां बटोरने वाले मेरठ के 'नाक रगड़वाई' कांड के मुख्य आरोपी और पूर्व भाजपा नेता विकुल चपराणा को आखिरकार फिर से गिरफ्तार कर लिया गया है। मेरठ पुलिस ने आरोपी की सरेंडर की कोशिशों को नाकाम करते हुए उसे शुक्रवार देर रात गुरुग्राम से धर दबोचा। विकुल पर राज्यमंत्री सोमेंद्र तोमर का नाम लेकर एक कपड़ा व्यापारी से सरेआम गुंडई, मारपीट और सड़क पर नाक रगड़वाने का आरोप है।Read also:-लखनऊ: इंस्टाग्राम पर दोस्ती, होटल में रेप! 32 साल के शादीशुदा तौकीर ने इंटर की छात्रा को बनाया शिकार, पिता ने रंगे हाथ पकड़ा
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सरेंडर का प्लान हुआ फेल, ऐसे चढ़ा हत्थे शुक्रवार को विकुल चपराणा ने अपने वकील के माध्यम से कोर्ट में सरेंडर की अर्जी डाली थी। इसकी भनक लगते ही मेरठ पुलिस एक्शन मोड में आ गई। सीओ अभिषेक तिवारी के नेतृत्व में पुलिस टीम ने कचहरी में जाल बिछाया, लेकिन विकुल वहां नहीं पहुंचा। पुलिस ने तुरंत विकुल का वारंट लेने के लिए कोर्ट में अर्जी दी और दो टीमों को उसकी रिश्तेदारी में दबिश देने के लिए रवाना किया। देर रात, पुलिस को सटीक सूचना मिली कि विकुल गुरुग्राम में छिपा हुआ है, जिसके बाद मेडिकल थाना पुलिस ने उसे वहीं से गिरफ्तार कर लिया।
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 Vikal chaprana

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क्या थी वह शर्मनाक घटना? यह पूरा विवाद 19 अक्टूबर को राज्यमंत्री सोमेंद्र तोमर के कार्यालय के नीचे कार पार्किंग को लेकर शुरू हुआ था। आरोप है कि विकुल चपराणा ने अपने साथियों (हैप्पी भड़ाना, आयुष शर्मा और सुबोध यादव) के साथ मिलकर व्यापारी सत्यम और उसके साथी को घेर लिया।
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21 अक्टूबर को इस घटना का एक वीडियो वायरल हुआ, जिसने सभी को झकझोर दिया। वीडियो में आरोपी पीड़ित की बलेनो कार के शीशे तोड़ते और उसे गालियां देते दिख रहे थे। विकुल और उसके साथी पीड़ित युवक को धमकाते हुए कह रहे थे, "हाथ जोड़कर बोल, सोमेंद्र तोमर तेरा बाप है... गलती हो गई।" इसके बाद पीड़ित से सरेआम सड़क पर नाक रगड़वाकर माफी मंगवाई गई।
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पुलिस की ढिलाई और बढ़ता दबाव हैरानी की बात यह है कि जब यह सब हो रहा था, तब कीर्ति पैलेस चौकी इंचार्ज गौरव सिंह व अन्य पुलिसकर्मी मौके पर मौजूद थे, लेकिन उन्होंने मूकदर्शक बनकर तमाशा देखा। शुरुआत में पुलिस ने विकुल के खिलाफ हल्की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया, जिससे उसे एसीएम टू कोर्ट से तुरंत जमानत मिल गई।
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लेकिन वीडियो वायरल होते ही वैश्य समाज, व्यापारी संगठनों और विपक्षी दलों ने इस घटना को लेकर योगी सरकार और मेरठ पुलिस पर तीखा हमला बोल दिया। चौतरफा दबाव बढ़ता देख, पुलिस ने मुकदमे में बलवा, मारपीट, तोड़फोड़ और रंगदारी जैसी गंभीर धाराएं जोड़ीं। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों ने पीड़ित को धमकाकर पांच लाख रुपये की रंगदारी भी मांगी थी।
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इस मामले में लापरवाही बरतने के आरोप में एसएसपी ने तीन पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर कर दिया है। विकुल के तीनों साथियों को पुलिस पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है, और अब मुख्य आरोपी विकुल चपराणा भी सलाखों के पीछे पहुंच गया है।
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