मेरठ:
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मेरठ में इंसाफ और इंसानियत को शर्मसार करने वाली एक ऐसी घटना सामने आई है, जहाँ एक पीड़ित न्याय मांगने थाने गया और बदले में मिली बेइज्जती और मारपीट के बाद जहर खाकर लौटा। भावनपुर थाना क्षेत्र में एक ट्रांसपोर्टर, जो पहले ही लूट का शिकार हो चुका था, ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए आत्महत्या की कोशिश की। उसका आरोप है कि थाने में एक दरोगा ने न सिर्फ उसे पीटा और उसका मोबाइल छीन लिया, बल्कि जबरन एक वीडियो बनवाकर यह कहलवाया कि उसके साथ कोई लूट नहीं हुई थी। इस घटना के बाद ग्रामीणों के गुस्से का उबाल सड़कों पर आ गया।READ ALSO:-मेरठ में 'पुलिस' का नकाब पहन आए किडनैपर! घर के बाहर से युवक को कार में डाला, पिता चीखकर बोला- 'मेरे बेटे का एनकाउंटर हो जाएगा!
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पहली चोट: जब सड़क पर लुट गया ट्रांसपोर्टर
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मुबारकपुर गांव निवासी ट्रांसपोर्टर पुष्पेंद्र सोमवार देर शाम स्याल से अपने घर लौट रहे थे। रास्ते में बाइक सवार दो बदमाशों ने उन्हें रोक लिया और हथियार के बल पर उनसे 20 हजार रुपये लूट लिए। बदहवास पुष्पेंद्र ने घर पहुंचकर तुरंत डायल 112 पर पुलिस को सूचना दी।
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 बेहोशी की हालत में पुष्पेंद्र नागर को इसी अस्पताल में भर्ती कराया गया।

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दूसरी चोट: जब थाने में 'लुट गई इज्जत'
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डायल 112 की टीम मौके पर पहुंची और पुष्पेंद्र को पूछताछ के लिए भावनपुर थाने ले आई। यहीं से पुष्पेंद्र की असल पीड़ा शुरू हुई।
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    आरोप 1 (मारपीट और अभद्रता): पुष्पेंद्र का आरोप है कि थाने में मौजूद एक दरोगा ने उसकी बात सुनने के बजाय उससे ही अभद्रता शुरू कर दी। जब उसने विरोध किया तो उसके साथ मारपीट की गई।
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    आरोप 2 (मोबाइल छीना): दरोगा ने उसका मोबाइल फोन और कार की चाबी छीन ली।
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    आरोप 3 (जबरन वीडियो): सबसे गंभीर आरोप यह है कि पुलिस ने पुष्पेंद्र का एक वीडियो बनाया और उस पर दबाव डालकर यह कहलवाया कि "मेरे साथ कोई लूट नहीं हुई है।"
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इस अपमान के बाद रात में ग्रामीण किसी तरह पुष्पेंद्र को घर वापस ले आए, लेकिन वह अंदर से टूट चुका था।
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आखिरी कदम: "मेरे बच्चों का ख्याल रखना"
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मंगलवार सुबह पुष्पेंद्र घर से जई गांव जाने की बात कहकर निकले। दोपहर में उन्होंने अपने एक परिचित, राजेंद्र, जिन्हें वह चाचा कहते हैं, को फोन किया। उसकी आवाज में हताशा थी। करीब 5 मिनट की बातचीत के बाद उसने कहा, "चाचा, मेरे बच्चों का ख्याल रखना," और फोन काट दिया।
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घबराए हुए राजेंद्र ने जब बार-बार फोन मिलाया तो पुष्पेंद्र ने रोते हुए बताया कि वह जई गांव में है और उसने जहर पी लिया है। यह सुनते ही परिवार में कोहराम मच गया। परिजन उसे ढूंढकर तुरंत गढ़ रोड स्थित नागर हॉस्पिटल ले गए, जहाँ उसकी हालत गंभीर बनी हुई है।
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सड़कों पर उतरा गुस्सा, DIG तक पहुंची गूंज
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पुष्पेंद्र के जहर खाने की खबर लगते ही सैकड़ों ग्रामीण भावनपुर पुलिस के खिलाफ नारेबाजी करते हुए एकत्र हो गए। हालात बिगड़ते देख मेडिकल समेत कई थानों की फोर्स मौके पर पहुंची। जब स्थानीय स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं हुई तो ग्रामीण दो गाड़ियां भरकर डीआईजी कलानिधि नैथानी के कार्यालय पहुंच गए। डीआईजी ने ग्रामीणों के तीन प्रतिनिधियों से बात की और उन्हें निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का पूरा भरोसा दिलाया।
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यह घटना पुलिस की कार्यशैली पर एक बड़ा और गंभीर सवाल खड़ा करती है, जहाँ एक पीड़ित को ही आरोपी की तरह प्रताड़ित कर आत्महत्या के लिए मजबूर कर दिया गया।
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