उत्तर प्रदेश पुलिस (UP Police) को अनुशासन और सख्ती के लिए जाना जाता है। प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) लगातार पुलिस महकमे को अपनी कार्यशैली सुधारने और जनता के प्रति जवाबदेह बनने के निर्देश देते रहे हैं। लेकिन, जब खाकी वर्दी पहनने वाले ही सोशल मीडिया की चकाचौंध में खो जाएं और वर्दी की गरिमा को ताक पर रख दें, तो विभाग की साख पर सवाल उठना लाजमी है। ऐसा ही एक बेहद चौंकाने वाला और शर्मनाक मामला उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले से सामने आया है।Read also:-राशन कोटेदारों की खुली किस्मत! CM योगी ने कमीशन बढ़ाकर किया ₹125 प्रति कुंतल, बिचौलियों का खेल खत्म
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मेरठ में तैनात 2023 बैच की महिला सब-इंस्पेक्टर (दरोगा) अनु को सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक वीडियो पोस्ट करने और वर्दी का इस्तेमाल कर ऑनलाइन डोनेशन मांगने के गंभीर आरोप में मेरठ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) द्वारा तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। यह वही दरोगा हैं जो 2025 के बहुचर्चित 'नीले ड्रम कांड' (सौरभ हत्याकांड) में भी काफी सुर्खियों में रही थीं। आइए, इस पूरे घटनाक्रम को विस्तार से समझते हैं।
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'एनी कॉलिस' के नाम से चलाती थीं सीक्रेट अकाउंट
\r\n\r\nपुलिस विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, महिला दरोगा अनु मूल रूप से प्रयागराज जिले की रहने वाली हैं। वह 2023 बैच की दरोगा हैं। मेरठ जिले में उनकी पहली तैनाती रोहटा थाने में हुई थी। इसके बाद उन्हें ब्रह्मपुरी थाने भेजा गया और वहां से उनका तबादला एसएसपी (SSP) कार्यालय में कर दिया गया था। निलंबन के समय वह एसएसपी कार्यालय में ही अपनी सेवाएं दे रही थीं।
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अनु इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर 'एनी कॉलिस' (Annie Callis) के नाम से अपना अकाउंट चला रही थीं। निलंबन से पहले उनके इंस्टाग्राम पर 1016 फॉलोवर्स और 684 से ज्यादा पोस्ट मौजूद थे। उनकी प्रोफाइल के बायो में स्पष्ट रूप से "सब इंस्पेक्टर उत्तर प्रदेश पुलिस" (Sub Inspector Uttar Pradesh Police) लिखा हुआ था और साथ ही "एज ग्रेस माई लव" (Age grace my love) जैसी पंक्तियां लिखी गई थीं। नीचे उनके यूट्यूब चैनल का लिंक भी मौजूद था। खाकी वर्दी में बॉलीवुड गानों पर रील्स बनाना और अपनी ड्यूटी के दौरान वीडियो शूट करना उनका रोज का काम बन चुका था।
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यूट्यूबर ने खोला राज: "वर्दी पहनकर QR कोड से मांग रही थीं डोनेशन"
\r\n\r\nइस पूरे मामले का पर्दाफाश तब हुआ जब एक जागरूक यूट्यूबर ने सोशल मीडिया पर दरोगा अनु की गतिविधियों पर ध्यान दिया। इस यूट्यूबर ने एक वीडियो जारी कर सीधे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और पुलिस महानिदेशक (DGP) राजीव कृष्ण को संबोधित करते हुए एक गंभीर शिकायत दर्ज कराई।
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यूट्यूबर ने अपने वीडियो में दरोगा अनु के वीडियो दिखाते हुए कहा:
\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n"योगी जी, नमस्ते। आप हमारे फेवरेट प्राइम मिनिस्टर... मेरा मतलब फेवरेट नेता हैं। फुल सपोर्ट रहेगा सर मेरा। लेकिन सर, मैं आपको एक वीडियो दिखाना चाहता हूं। यह वीडियो देखिए। मैं जानता हूं, योगी जी, यह गलत वीडियो है और इस पर आपका गुस्सा जायज है। यह वीडियो उत्तर प्रदेश पुलिस में सब इंस्पेक्टर एनी कॉलिस का है। यूट्यूब चैनल पर इनके कुछ आपत्तिजनक वीडियो आते हैं और सबसे बड़ी बात, इनके वीडियो के साथ एक QR कोड भी दिखाई देता है। यह क्यूआर कोड बेसकली डोनेशन (चंदा) के लिए है। आप पर्पज समझ रहे हैं ना?"\r\n
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यूट्यूबर ने आगे अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश जैसे सबसे महत्वपूर्ण राज्य की पुलिस की एक गरिमा है। उसने तंज कसते हुए कहा, "अगर हरियाणा पुलिस या अन्य राज्यों की पुलिस ने देख लिया कि यूपी पुलिस के दरोगा रात को क्यूआर कोड लगाकर पैसे मांग रहे हैं, तो वे अपने व्हाट्सऐप ग्रुप्स पर इसका खूब मजाक उड़ाएंगे। इससे वर्दी की गरिमा गिरती है, बेइज्जती होती है। बड़े पदों पर बैठे ब्यूरोक्रेट्स या पुलिस वालों को सोशल मीडिया पर इस प्रकार के ड्रामे करने की अनुमति बिल्कुल नहीं होनी चाहिए।"
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2025 का 'नीला ड्रम कांड' और आरोपी के साथ वीडियो
\r\n\r\nदरोगा अनु का विवादों से यह पहला नाता नहीं है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, वर्ष 2025 में मेरठ में हुए बेहद खौफनाक और चर्चित सौरभ हत्याकांड (जिसे 'नीले ड्रम कांड' के नाम से भी जाना गया) में भी उनकी भूमिका को लेकर सवाल उठे थे।
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उस समय अनु ब्रह्मपुरी थाने में तैनात थीं। इस हाई-प्रोफाइल हत्याकांड में उन्होंने मुख्य आरोपी मुस्कान को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी एक बड़ी सफलता थी, लेकिन अनु ने उस समय भी विभागीय नियमों की अनदेखी की थी। उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर हत्या की आरोपी मुस्कान के साथ एक वीडियो शूट करके शेयर कर दिया था। एक संगीन अपराध की आरोपी के साथ पुलिस अधिकारी का सोशल मीडिया पर वीडियो बनाना उस समय भी विभाग के अंदर दबी जुबान में चर्चा का विषय बना था, हालांकि तब उन पर कोई बड़ी गाज नहीं गिरी थी।
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यूपी पुलिस की सोशल मीडिया नीति का खुला उल्लंघन
\r\n\r\nफरवरी 2023 में उत्तर प्रदेश पुलिस मुख्यालय ने पुलिसकर्मियों के लिए एक सख्त 'सोशल मीडिया पॉलिसी' लागू की थी। इसके तहत स्पष्ट निर्देश हैं कि:
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- \r\n ड्यूटी के दौरान वर्दी में कोई भी पुलिसकर्मी रील्स या मनोरंजन वाले वीडियो नहीं बनाएगा।\r\n \r\n
- \r\n पुलिस की वर्दी या पद का इस्तेमाल करके सोशल मीडिया से किसी भी प्रकार की कमाई (Monetization) या चंदा (Donation) लेना सख्त वर्जित है।\r\n \r\n
- \r\n आरोपियों या पीड़ितों के साथ सेल्फी लेना या वीडियो बनाना प्रतिबंधित है।\r\n \r\n
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दरोगा अनु का कृत्य इन सभी नियमों का खुला उल्लंघन था। वर्दी पहनकर क्यूआर कोड के माध्यम से आम जनता से डोनेशन मांगना पुलिस विभाग की भ्रष्टाचार विरोधी नीति और अनुशासन के सीधे खिलाफ माना गया।
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पुलिस विभाग का कड़ा एक्शन: साइबर और विभागीय जांच शुरू
\r\n\r\nयूट्यूबर का वीडियो वायरल होते ही मेरठ पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। मामले की गंभीरता और वर्दी की छवि धूमिल होते देख आला अधिकारियों ने तुरंत एक्शन लिया।
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- \r\n तत्काल निलंबन और अकाउंट डिलीट: एसएसपी मेरठ ने बिना कोई देरी किए दरोगा अनु को सस्पेंड कर दिया। कार्रवाई के तुरंत बाद सोशल मीडिया से सभी आपत्तिजनक वीडियो हटवा दिए गए और महिला दरोगा का 'एनी कॉलिस' नाम का इंस्टाग्राम अकाउंट पूरी तरह से डिलीट कर दिया गया है।\r\n \r\n
- \r\n साइबर प्रकोष्ठ (Cyber Cell) की जांच: एसपी क्राइम (मेरठ) अवनीश कुमार ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि पुलिस ने जांच का दायरा बढ़ा दिया है। मेरठ साइबर सेल को वीडियो की वास्तविकता जांचने की जिम्मेदारी दी गई है। टीम यह पता लगा रही है कि वायरल वीडियो में किसी प्रकार की डीपफेक तकनीक, छेड़छाड़ या तकनीकी बदलाव तो नहीं किया गया है।\r\n \r\n
- \r\n उच्च स्तरीय विभागीय जांच: इस पूरे प्रकरण की विभागीय जांच सीओ कार्यालय की वरिष्ठ अधिकारी सौम्या सिंह को सौंप दी गई है। सौम्या सिंह सोशल मीडिया नीति के उल्लंघन, महिला दरोगा की पुरानी गतिविधियों (विशेषकर मुस्कान कांड वाले वीडियो) और जांच के दौरान सामने आने वाले इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की बारीकी से पड़ताल करेंगी।\r\n \r\n
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आगे क्या होगा?
\r\n\r\nफिलहाल अनु को निलंबित कर पुलिस लाइन अटैच कर दिया गया है। एसपी क्राइम अवनीश कुमार का स्पष्ट कहना है कि विभागीय और साइबर जांच की रिपोर्ट आने के बाद, तथ्यों और दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर आगे की वैधानिक (Legal) और विभागीय (Departmental) दंडात्मक कार्रवाई तय की जाएगी।
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यह घटना उत्तर प्रदेश पुलिस के उन तमाम अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए एक सख्त चेतावनी है जो रील बनाने और सोशल मीडिया पर फॉलोवर्स बढ़ाने के चक्कर में अपनी वर्दी की मर्यादा भूल जाते हैं। खाकी वर्दी जनता की सुरक्षा के लिए है, न कि ऑनलाइन चंदा इकट्ठा करने और वर्चुअल दुनिया में लोकप्रियता हासिल करने का कोई साधन।
Sabse pehle comment karne wale banein.