मेरठ (Meerut) जिले के सिवालखास (Siwalkhas) कस्बे से एक बेहद हृदयविदारक और झकझोर देने वाली खबर सामने आई है। यहाँ स्थानीय नगर पंचायत की घोर लापरवाही और अनदेखी के चलते एक हंसता-खेलता परिवार हमेशा के लिए उजड़ गया। घर के बाहर खेल रहे महज डेढ़ साल के एक मासूम बच्चे की खुले नाले में गिरकर दर्दनाक मौत हो गई। इस घटना ने पूरे इलाके को शोक और गुस्से में डुबो दिया है।READ ALSO:-बिग बॉस 20 में सलमान खान का महा-धमाका: अब बेघर होने वाला कंटेस्टेंट नहीं जाएगा बाहर, मिला 'वरदान ऑफ एक्स्ट्रा जीवनदान'!
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जिस नाले की सफाई और उसे ढकने के लिए स्थानीय लोग बार-बार गुहार लगा रहे थे, उसी नाले ने शुक्रवार की सुबह एक मासूम की जिंदगी निगल ली। आइए जानते हैं इस दर्दनाक हादसे का पूरा घटनाक्रम।
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सुबह 9 बजे हुआ दर्दनाक हादसा: खेलते-खेलते गायब हुआ मासूम

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यह रुला देने वाली घटना शुक्रवार सुबह लगभग नौ बजे की है। सिवालखास कस्बे के रहने वाले गुलबहार का डेढ़ वर्षीय बेटा मोहम्मद ज़ैन अपने घर के ठीक बाहर गली में खेल रहा था। परिवार के लोग अपने रोजमर्रा के कामों में व्यस्त थे। बच्चा अपने छोटे-छोटे कदमों से खेलते हुए अचानक घर के पास बह रहे एक बड़े और खुले नाले के पास पहुँच गया और उसमें जा गिरा।
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काफी देर तक जब ज़ैन घर के बाहर या आस-पास नजर नहीं आया, तो परिवार में बेचैनी बढ़ने लगी। परिजनों ने तुरंत गली और आस-पड़ोस के घरों में उसकी तलाश शुरू की, लेकिन बच्चे का कहीं कोई अता-पता नहीं चला। हर बीतते पल के साथ मां-बाप के दिल की धड़कनें तेज होती जा रही थीं।
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CCTV फुटेज से सामने आया खौफनाक सच

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जब मासूम ज़ैन को ढूंढने की सारी कोशिशें नाकाम हो गईं, तो परिजनों और पड़ोसियों ने गली में लगे सीसीटीवी (CCTV) कैमरों की फुटेज खंगालने का फैसला किया। जैसे ही फुटेज सामने आई, परिवार के पैरों तले जमीन खिसक गई।
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सीसीटीवी वीडियो में साफ दिखाई दे रहा था कि मासूम बच्चा खेलते-खेलते नाले के मुहाने तक पहुंचा और संतुलन बिगड़ने के कारण सीधे उस गहरे और खुले नाले में जा गिरा।
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फुटेज देखते ही परिजन बदहवास होकर तुरंत नाले की ओर दौड़े। स्थानीय लोगों की मदद से नाले में बच्चे की युद्धस्तर पर तलाश शुरू की गई। काफी मशक्कत और जद्दोजहद के बाद आखिरकार मासूम ज़ैन को नाले के गहरे पानी और कीचड़ से बाहर निकाला गया। लेकिन, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। नाले के जहरीले पानी और दम घुटने के कारण बच्चे की सांसें थम चुकी थीं। ज़ैन को मृत अवस्था में बाहर निकाला गया।
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परिवार में मचा कोहराम, मां का रो-रोकर बुरा हाल

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जिस आंगन में सुबह तक बच्चे की किलकारियां गूंज रही थीं, वहां अचानक मातम पसर गया। ज़ैन का निर्जीव शरीर देखकर माता-पिता बेसुध हो गए। मां का रो-रोकर और छाती पीटकर बुरा हाल है; वह बार-बार अपने लाल को पुकार रही है। इस हृदयविदारक दृश्य को देखकर वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं। पूरा मोहल्ला शोक में डूब गया है और लोगों के घरों में चूल्हे तक नहीं जले हैं।
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नगर पंचायत की लापरवाही पर फूटा लोगों का गुस्सा (Public Outrage)

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इस मासूम की मौत कोई सामान्य हादसा नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर सिस्टम की नाकामी और नगर पंचायत (Nagar Panchayat) की आपराधिक लापरवाही का नतीजा है। घटना के तुरंत बाद स्थानीय लोगों का गुस्सा फूट पड़ा।
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ग्रामीणों और मोहल्ले वालों का गंभीर आरोप है कि:

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    शिकायतों की अनदेखी: सड़कों और गलियों के किनारे बने इन गहरे नालों को ढकने के लिए नगर पंचायत से कई बार लिखित और मौखिक शिकायतें की जा चुकी थीं।
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    खुली मौत का कुआं: कस्बे के ज्यादातर नाले पूरी तरह खुले हुए हैं, जो किसी भी समय बड़े हादसों को दावत देते रहते हैं।
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    प्रशासन की नींद: जब तक कोई बड़ी जनहानि न हो जाए, तब तक सरकारी महकमा कुंभकर्णी नींद से नहीं जागता।
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आगे की राह: न्याय और सुरक्षा की मांग

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इस दर्दनाक घटना के बाद सिवालखास के आक्रोशित ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और आला अधिकारियों से सख्त मांग की है कि:
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    दोषियों पर कार्रवाई: इस हादसे के लिए जिम्मेदार नगर पंचायत के लापरवाह अधिकारियों और ठेकेदारों के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज कर सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए।
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    नालों को ढकना (Covering of Drains): कस्बे के सभी खुले नालों को तत्काल प्रभाव से कंक्रीट के स्लैब (Slabs) या जालियों से ढका जाए, ताकि भविष्य में किसी और के घर का चिराग न बुझे।
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    पीड़ित परिवार को मुआवजा: पीड़ित परिवार को सरकार की तरफ से उचित आर्थिक सहायता प्रदान की जाए।
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डेढ़ साल के ज़ैन की मौत ने हमारे समाज के सामने एक कड़वा सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर कब तक हमारे बच्चे खुले बोरवेल, नालों और खस्ताहाल सड़कों की भेंट चढ़ते रहेंगे? उम्मीद है कि मेरठ प्रशासन इस घटना का त्वरित संज्ञान लेगा और यह सुनिश्चित करेगा कि ऐसी घोर लापरवाही की कीमत किसी और मासूम को अपनी जान देकर न चुकानी पड़े।
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