मेरठ, उत्तर प्रदेश: मेरठ में नमो भारत (RRTS) और मेट्रो की सौगात मिलने के बाद शहर के विकास ने रफ्तार पकड़ ली है। मेट्रो स्टेशनों तक पहुंचने के लिए कनेक्टिविटी सुधारने के उद्देश्य से अब शहर की अंदरूनी सड़कों को चौड़ा करने का काम शुरू हो गया है। लेकिन, रेलवे रोड चौराहे से घंटाघर तक चल रहा मेरठ रेलवे रोड चौड़ीकरण का काम आम जनता के लिए 'विकास' से ज्यादा 'विनाश' और मुसीबत का सबब बन गया है।READ ALSO:-बदायूं में खौफनाक मंजर: छात्र को घेरकर बेरहमी से पीटा, वीडियो में गूंजी आवाज- 'जान से मार दो', मरणासन्न हालत में छोड़कर भागे आरोपी
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प्रशासन द्वारा बिना किसी ठोस योजना और यातायात प्रबंधन के शुरू किए गए इस काम ने शहर के सबसे व्यस्त इलाकों में से एक को जाम के झाम में फंसा दिया है। सड़क के बीचो-बीच खंभे गाड़ने और केबल डालने के लिए खोदाई करने से यातायात बुरी तरह बाधित हो रहा है।
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1200 मीटर का सफर, 20 मिनट की सजा
\r\n\r\nरेलवे रोड चौराहे से घंटाघर की दूरी महज 1200 मीटर है। सामान्य तौर पर इसे पार करने में 2 से 3 मिनट लगने चाहिए, लेकिन मेरठ रेलवे रोड चौड़ीकरण के बेतरतीब काम के कारण अब यह समय 15 से 20 मिनट तक पहुंच गया है।
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मंगलवार दोपहर को यहां से गुजर रहे बाइक सवार विक्की और सुबोध ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा, "घंटाघर तक पहुंचने में हमें 15 मिनट लग गए। धूल और जाम ने बुरा हाल कर दिया है।" वहीं, एक साइकिल सवार राजकुमार ने बताया कि उन्हें इस छोटी सी दूरी को तय करने में 20 मिनट लग गए। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि चार पहिया वाहनों की स्थिति कितनी खराब होगी।
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क्या है योजना और बजट?
\r\n\r\nलोक निर्माण विभाग (PWD) के प्रांतीय खंड के अधिशासी अभियंता सत्येंद्र सिंह के अनुसार, यह प्रोजेक्ट राज्यसभा सांसद डॉ. लक्ष्मीकांत बाजपेयी के प्रस्ताव पर शुरू किया गया है।
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- \r\n बजट: इस मेरठ रेलवे रोड चौड़ीकरण प्रोजेक्ट के लिए करीब 1.25 करोड़ रुपये का बजट तय किया गया है।\r\n \r\n
- \r\n चौड़ाई: वर्तमान में यह सड़क 5 मीटर चौड़ी है, जिसे बढ़ाकर 8 मीटर किया जाना है।\r\n \r\n
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अधिकारियों का कहना है कि अभी डिवाइडर की लेन सीधी करने के लिए खंभे लगाए गए हैं और सड़क चौड़ीकरण का मुख्य काम शुरू होने पर यातायात के लिए वैकल्पिक व्यवस्था दी जाएगी। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि काम शुरू हो चुका है और जनता परेशान है।
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लापरवाही की हद: बीच सड़क पर खंभे
\r\n\r\nइस मेरठ रेलवे रोड चौड़ीकरण प्रोजेक्ट में सबसे बड़ी खामी इसका 'प्लानिंग' है।
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- \r\n खुली खोदाई: ऊर्जा निगम सड़क किनारे केबल डालने के लिए खोदाई कर रहा है, लेकिन मलबे और गड्ढों के कारण सड़क संकरी हो गई है।\r\n \r\n
- \r\n डिवाइडर और खंभे: पुरानी सड़क का डिवाइडर तोड़ा नहीं गया, लेकिन नई एलाइनमेंट के हिसाब से बीच सड़क में खंभे गाड़ दिए गए हैं। इससे वाहन चालकों के लिए रास्ता बेहद संकरा और खतरनाक हो गया है।\r\n \r\n
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स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले केबल को अंडरग्राउंड करना चाहिए था और एक तरफ की सड़क पूरी तरह तैयार होने के बाद ही बीच में खंभे लगाने चाहिए थे। (External link:
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पुलिस की नाक के नीचे जाम, अधिकारी बेखबर
\r\n\r\nहैरानी की बात यह है कि जिस रेलवे रोड पर यह अव्यवस्था फैली है, वहीं एसपी सिटी (SP City) का ऑफिस भी मौजूद है। घंटाघर पर पुलिस चौकी भी स्थित है। इसके बावजूद, मेरठ रेलवे रोड चौड़ीकरण के दौरान लगने वाले जाम को खुलवाने के लिए पुलिस नदारद रहती है।
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आरोप है कि पुलिसकर्मी चौकी के अंदर आराम फरमाते हैं, जबकि बाहर जनता घंटों जाम में रेंगती रहती है। 1200 मीटर के इस पूरे हिस्से में यातायात व्यवस्था संभालने वाला कोई सिपाही नजर नहीं आता।
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अतिक्रमण ने बढ़ाई मुसीबत
\r\n\r\nसिर्फ निर्माण कार्य ही नहीं, बल्कि अतिक्रमण भी इस जाम की एक बड़ी वजह है। रेलवे रोड से घंटाघर तक दोनों तरफ दुकानें हैं।
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- \r\n दुकानदार अपना सामान सड़क तक फैलाकर रखते हैं।\r\n \r\n
- \r\n खाने-पीने की दुकानों के सामने ग्राहकों के दोपहिया वाहन बेतरतीब ढंग से खड़े होते हैं।\r\n \r\n
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मेरठ रेलवे रोड चौड़ीकरण का काम तभी सफल होगा जब प्रशासन निर्माण के साथ-साथ अतिक्रमण पर भी सख्त कार्रवाई करेगा। फिलहाल, विकास के नाम पर चल रही यह अव्यवस्था मेरठ वासियों के सब्र का इम्तिहान ले रही है।
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मेरठ में रेलवे रोड से घंटाघर तक चल रहा मेरठ रेलवे रोड चौड़ीकरण का काम जनता के लिए सिरदर्द बन गया है। 1.25 करोड़ के इस प्रोजेक्ट में खराब प्लानिंग के कारण 1200 मीटर का रास्ता तय करने में 20 मिनट लग रहे हैं। सड़क पर बेतरतीब खंभे, अतिक्रमण और पुलिस की निष्क्रियता ने हालात बदतर कर दिए हैं।
Sabse pehle comment karne wale banein.