मेरठ: उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई देखने को मिली है। मेरठ सहकारी डेयरी प्रशिक्षण संस्थान एवं शोध केंद्र की प्रिंसिपल वंदना सिंह को भ्रष्टाचार निवारण (एंटी करप्शन) टीम ने रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। मंगलवार दोपहर करीब 2 बजे गिरफ्तारी के बाद उन्हें कचहरी परिसर स्थित स्पेशल एंटी करप्शन कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत (जेल) में भेज दिया गया है।READ ALSO:-महाराजगंज से 'भारत विज्ञान यात्रा' का ऐतिहासिक शंखनाद: अंतरिक्ष दिवस पर छात्रों ने किए ब्रह्मांड के दर्शन, जानें पूरी खबर
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क्या है पूरा मामला? गंगानगर निवासी अमित सिवाच मेरठ सहकारी डेयरी प्रशिक्षण संस्थान एवं शोध केंद्र में ठेके पर कैंटीन चलाते हैं। इस कैंटीन के माध्यम से केंद्र पर प्रशिक्षण के लिए आने वाले किसानों को भोजन उपलब्ध कराया जाता है।
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 एंटी करप्शन कोर्ट में पेश होती वंदना सिंह। - Dainik Bhaskar

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अमित सिवाच के अनुसार, उनका कैंटीन का करीब 3.85 लाख रुपए का बिल काफी समय से लंबित था। आरोप है कि इस पेंडिंग बिल को पास कराने के एवज में संस्थान की प्रिंसिपल वंदना सिंह ने उनसे 1.50 लाख रुपए की मोटी रिश्वत मांगी थी। बातचीत के बाद दोनों के बीच 1.35 लाख रुपए में सौदा तय हुआ।
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"मांग नहीं मानी तो खाने में निकलवा दूंगी छिपकली..." पीड़ित ठेकेदार अमित ने बताया कि जब उन्होंने बिल पास कराने के लिए प्रिंसिपल पर दबाव बनाया, तो वंदना सिंह ने उन्हें बेहद गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी। प्रिंसिपल ने कथित तौर पर कहा कि "अगर ज्यादा दबाव बनाया और पैसे नहीं दिए, तो कैंटीन के खाने में एक छिपकली निकलवा दी जाएगी, जिससे कैंटीन का ठेका तुरंत निरस्त हो जाएगा।" इस धमकी के बाद अमित ने भ्रष्ट सिस्टम के आगे झुकने के बजाय कानूनी कार्रवाई का रास्ता चुना।
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सीबीआई से एंटी करप्शन तक का सफर इस मामले की शिकायत लेकर अमित सबसे पहले सीबीआई (CBI) के पास पहुंचे थे। हालांकि, क्षेत्राधिकार और नियमों का हवाला देते हुए सीबीआई ने उन्हें राज्य की एंटी करप्शन यूनिट (Anti-Corruption Bureau) के पास भेज दिया। इसके बाद अमित ने एंटी करप्शन टीम को लिखित शिकायत दी, जिसके बाद जाल बिछाने की योजना तैयार की गई।
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 ऐसे रंगे हाथों पकड़ी गईं वंदना सिंह

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    योजना के मुताबिक, मंगलवार को एंटी करप्शन टीम ने अमित सिवाच को केमिकल लगे हुए 1.35 लाख रुपये के नोट दिए।
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    अमित यह रकम लेकर प्रिंसिपल वंदना सिंह के पास पहुंचे।
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    जैसे ही वंदना सिंह ने रिश्वत के पैसे अपने हाथ में लिए, पहले से मुस्तैद एंटी करप्शन टीम ने उन्हें मौके पर ही रंगे हाथों दबोच लिया। हाथ धुलवाते ही उनके हाथों का रंग लाल हो गया, जो उनकी संलिप्तता का पक्का सबूत था।
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दुपट्टे से मुंह छिपाकर पहुंचीं कोर्ट, वीडियोग्राफी पर हुई बहस गिरफ्तारी के बाद एंटी करप्शन टीम भारी सुरक्षा के बीच वंदना सिंह को लेकर कचहरी परिसर स्थित कोर्ट पहुंची। इस दौरान उन्होंने अपना चेहरा दुपट्टे से ढका हुआ था। कोर्ट परिसर में उनके परिवार के सदस्य भी मौजूद थे।
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सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष (वंदना सिंह) के अधिवक्ता अमित दीक्षित ने रिमांड का कड़ा विरोध किया। उन्होंने दलील दी कि ट्रैप (रिश्वत लेते समय) की वीडियोग्राफी नहीं कराई गई है। इसके जवाब में सरकारी वकील (स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर) डॉ. संजीव गुप्ता ने एफआईआर (FIR) पढ़कर सुनाई और स्पष्ट किया कि टीम ने पूरी कार्रवाई नियमानुसार और पूरी पारदर्शिता के साथ की है।
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कोर्ट का फैसला दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद, एंटी करप्शन कोर्ट ने वीडियोग्राफी न होने की बचाव पक्ष की दलील को दरकिनार कर दिया और एफआईआर के तथ्यों को स्वीकार किया। कोर्ट ने वंदना सिंह की जमानत अर्जी को खारिज करते हुए एंटी करप्शन टीम की रिमांड एप्लीकेशन को मंजूर कर लिया और आरोपी प्रिंसिपल को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेजने का आदेश दे दिया।
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