बढ़ती आबादी और बेतहाशा शहरीकरण (Urbanization) के चलते उत्तर प्रदेश के महानगरों की समस्याएं भी विकराल होती जा रही हैं। जाम, अतिक्रमण और प्रदूषण—ये तीन ऐसे नासूर हैं, जिनसे मेरठ जैसा ऐतिहासिक शहर भी अछूता नहीं है। इन समस्याओं से निपटने के लिए पुरानी प्रशासनिक व्यवस्था नाकाफी साबित हो रही थी। इसे देखते हुए उत्तर प्रदेश शासन ने नए साल (2026) की शुरुआत में ही नगर निगमों के प्रशासनिक ढांचे में 'सर्जरी' करने का बड़ा फैसला लिया है।READ ALSO:-यूपी वालों के लिए नए साल का सबसे बड़ा तोहफा: अब 'कौड़ियों के दाम' मिलेगा बिजली कनेक्शन; स्मार्ट मीटर की कीमतें धड़ाम, 'इस्टीमेट' का झंझट भी खत्म
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नगर विकास विभाग के प्रमुख सचिव पी. गुरुप्रसाद (P. Guruprasad) ने एक अहम आदेश जारी करते हुए मेरठ नगर निगम समेत प्रदेश के 7 बड़े नगर निगमों में व्यापक संगठनात्मक बदलाव (Organizational Restructuring) की घोषणा की है। इस आदेश के तहत अब नगर निगम में 'यातायात एवं परिवहन अभियंत्रण अनुभाग' और 'पर्यावरण अनुभाग' जैसे नए विभाग बनाए जाएंगे। वहीं, दशकों से चले आ रहे 'नगर स्वास्थ्य अधिकारी' (City Health Officer) के पद को समाप्त कर दिया गया है।
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यह बदलाव केवल कागजी नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर शहर की सड़कों, सफाई व्यवस्था और आबोहवा पर देखने को मिलेगा। आइये, 'खबरिलाल' की इस विस्तृत रिपोर्ट में जानते हैं कि इस नए आदेश के बाद नगर निगम में कौन सा अधिकारी क्या काम देखेगा और इससे आम जनता को क्या फायदा होगा।
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1. ट्रैफिक और अतिक्रमण: अब इंजीनियर बनाएंगे प्लान

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मेरठ शहर के लिए सबसे बड़ी मुसीबत यहाँ का ट्रैफिक जाम और अनियंत्रित अतिक्रमण है। अब तक नगर निगम में इसके लिए कोई विशेष तकनीकी विंग नहीं थी, जिससे वैज्ञानिक तरीके से सड़कों की प्लानिंग नहीं हो पाती थी।
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नया क्या है? (Traffic & Transport Engineering Section) शासन के आदेशानुसार, अब निगम में एक समर्पित 'यातायात एवं परिवहन अभियंत्रण अनुभाग' का गठन किया जाएगा।
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    अधिकारी: इस विभाग की कमान अधिशासी अभियंता (Executive Engineer) और सहायक अभियंता (Assistant Engineer) स्तर के तकनीकी अधिकारियों के हाथ में होगी।
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    जिम्मेदारी: इनका काम केवल चालान काटना नहीं, बल्कि शहर की सड़कों की इंजीनियरिंग में सुधार करना होगा। कहां फ्लाइओवर की जरूरत है, कहां रेड लाइट की टाइमिंग बदलनी है, और कहां से अतिक्रमण हटाकर पार्किंग बनानी है—यह सब अब तकनीकी दृष्टि से तय होगा।
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    विशेषज्ञों की राय: जानकारों का मानना है कि अतिक्रमण हटाने के अभियान अब तक अस्थायी होते थे, लेकिन इंजीनियरों की तैनाती के बाद सड़कों की डिजाइनिंग ऐसी की जा सकेगी जिससे अतिक्रमण की गुंजाइश ही कम हो।
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2. प्रदूषण पर प्रहार: अलग से बनेगा 'पर्यावरण अनुभाग'

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दिल्ली-एनसीआर का हिस्सा होने के कारण मेरठ अक्सर प्रदूषण की चपेट में रहता है। वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) का बिगड़ना यहाँ आम बात है। इसे गंभीरता से लेते हुए सरकार ने निगम में 'पर्यावरण अनुभाग' (Environment Section) बनाने का निर्देश दिया है।
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    संरचना: इस विभाग में भी अधिशासी अभियंता और सहायक अभियंता तैनात होंगे।
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    कार्यक्षेत्र: यह विभाग सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट (कचरा प्रबंधन), धूल नियंत्रण, कंस्ट्रक्शन वेस्ट का निस्तारण और शहर में ग्रीन बेल्ट विकसित करने पर फोकस करेगा। अब तक यह काम स्वास्थ्य विभाग के पास अतिरिक्त जिम्मेदारी के तौर पर था, जिससे इस पर पूरा ध्यान नहीं दिया जा रहा था। अब तकनीकी अधिकारी प्रदूषण के स्रोतों को वैज्ञानिक तरीके से खत्म करने की योजना बनाएंगे।
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3. बड़ा बदलाव: 'नगर स्वास्थ्य अधिकारी' का पद समाप्त

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इस पूरे आदेश में सबसे चौंकाने वाला फैसला नगर स्वास्थ्य अधिकारी के पद को समाप्त करना है। अब तक शहर की सफाई, संक्रामक रोगों की रोकथाम और जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र जैसे कार्य इसी पद के अधीन थे।
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नयी व्यवस्था (Senior Sanitation Officer): शासन का मानना है कि सफाई व्यवस्था एक प्रबंधन (Management) का काम है, न कि केवल चिकित्सा का। इसलिए अब 'वरिष्ठ स्वच्छता अधिकारी' (Senior Sanitation Officer) का नया पद सृजित किया गया है।
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    सफाई का नया ढांचा:
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      1 वरिष्ठ स्वच्छता अधिकारी
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      3 स्वच्छता अधिकारी
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      3 मुख्य स्वच्छता निरीक्षक (CSI)
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      और कई स्वच्छता निरीक्षक (SI)
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इस बदलाव का उद्देश्य सफाई व्यवस्था को और अधिक पेशेवर (Professional) बनाना है। अब सफाई निरीक्षकों की जवाबदेही सीधे वरिष्ठ अधिकारियों के प्रति होगी।
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4. नगर नियोजन: अब बेतरतीब नहीं बसेगा शहर

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मेरठ जैसे पुराने शहरों में अनियोजित विकास एक बड़ी समस्या है। गलियां संकरी हैं और कॉलोनियां बिना नक्शे के बन रही हैं। इसे रोकने लिए 'नगर नियोजन अनुभाग' (Town Planning Section) खुलेगा।
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    पद: इस विभाग में एक नगर नियोजक (Town Planner) और एक सहायक नगर नियोजक का पद होगा।
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    भूमिका: इनका काम मास्टर प्लान को लागू कराना, अवैध निर्माणों को रोकना और भविष्य की जरूरतों के हिसाब से शहर का खाका तैयार करना होगा।
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5. इंजीनियरिंग (निर्माण) विभाग हुआ और मजबूत

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सड़कों, नालों और इमारतों के निर्माण के लिए जिम्मेदार अभियंत्रण (सिविल) विभाग को भी नई शक्ति दी गई है। बढ़ती जनसंख्या और क्षेत्रफल को देखते हुए मैनपावर बढ़ाई गई है।
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    नई टीम:
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      1 मुख्य अभियंता (Chief Engineer)
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      2 अधीक्षण अभियंता (Superintending Engineer - SE)
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      3 अधिशासी अभियंता (XEN)
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      6 सहायक अभियंता (AE)
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      12 अवर अभियंता (JE)
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इतनी बड़ी टीम होने से उम्मीद है कि विकास कार्यों की फाइलें अब दफ्तरों में धूल नहीं फांकेंगी और टेंडर प्रक्रिया से लेकर निर्माण तक में तेजी आएगी।
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6. अन्य महत्वपूर्ण बदलाव: उद्यान से लेकर पशु कल्याण तक

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प्रमुख सचिव पी. गुरुप्रसाद द्वारा जारी आदेश में निगम के हर अंग को छूने की कोशिश की गई है।
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    उद्यान अनुभाग (Garden Section): पार्कों के रखरखाव और शहर के सौंदर्यीकरण के लिए वरिष्ठ उद्यान अधिकारी, उद्यान अधिकारी और उद्यान निरीक्षकों की तैनाती होगी।
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    राजस्व अनुभाग (Revenue Section): हाउस टैक्स और अन्य करों की वसूली को तेज करने के लिए वरिष्ठ राजस्व निर्धारण अधिकारी और राजस्व अधीक्षक के पद बनाए गए हैं।
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    विद्युत एवं यांत्रिक विभाग: स्ट्रीट लाइट और निगम की गाड़ियों के रखरखाव के लिए अधीक्षण अभियंता, एक्सईएन, एई और जेई के पद स्वीकृत किए गए हैं।
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    पशु कल्याण अनुभाग: आवारा पशुओं (Stray Cattle) की समस्या और कान्हा उपवन जैसी गौशालाओं के प्रबंधन के लिए वरिष्ठ पशु कल्याण अधिकारी और अधीक्षक तैनात होंगे।
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    लेखा अनुभाग: निगम के खजाने का हिसाब रखने के लिए वरिष्ठ लेखा एवं वित्त अधिकारी की नियुक्ति होगी।
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7. क्यों पड़ी बदलाव की जरूरत?

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प्रमुख सचिव ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि मेरठ, गोरखपुर, मुरादाबाद, बरेली, अलीगढ़, मथुरा और अयोध्या जैसे शहरों की जनसंख्या में भारी वृद्धि हुई है। नगरीय निकायों की पुरानी संरचना (Structure) वर्तमान चुनौतियों का सामना करने में सक्षम नहीं थी। उपलब्ध जनशक्ति (Manpower) और संसाधनों का सही उपयोग करने के लिए यह पुनर्गठन अनिवार्य हो गया था।
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विशेष रूप से मेरठ, जहाँ रैपिड रेल (RRTS) और मेट्रो जैसे प्रोजेक्ट्स आ रहे हैं, वहां एक आधुनिक और तकनीकी रूप से सक्षम नगर निगम की आवश्यकता थी।
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कागजों से जमीन पर कब उतरेंगे बदलाव?
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शासन का यह आदेश निश्चित रूप से स्वागत योग्य है। ट्रैफिक, पर्यावरण और टाउन प्लानिंग के लिए अलग विभाग बनाना यह दर्शाता है कि सरकार शहरों को 'स्मार्ट' बनाने के प्रति गंभीर है। नगर स्वास्थ्य अधिकारी का पद खत्म कर स्वच्छता को एक स्पेशलाइज्ड विंग बनाना भी एक प्रयोग है, जिसके परिणाम आने वाले समय में दिखेंगे।
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हालांकि, सबसे बड़ा सवाल यह है कि इन नए पदों पर भर्तियां कब तक होंगी? अक्सर देखा जाता है कि पद सृजित हो जाते हैं, लेकिन अधिकारी प्रतिनियुक्ति (Deputation) पर नहीं आते या पद खाली रह जाते हैं। अगर मेरठ नगर निगम में यह टीम पूरी क्षमता के साथ तैनात होती है, तो निश्चित रूप से शहरवासियों को जाम, गंदगी और प्रदूषण से बड़ी राहत मिल सकती है।
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