उत्तर प्रदेश में अपना घर बनाने का सपना देख रहे या नई दुकान-प्रतिष्ठान खोलने की तैयारी कर रहे लाखों लोगों के लिए साल के अंत में एक ऐसी खुशखबरी आई है, जो सीधे उनकी जेब को बड़ी राहत पहुंचाएगी। योगी सरकार की मंशा के अनुरूप उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग (UPERC) ने प्रदेश की जनता को नए साल (2026) से पहले एक जबरदस्त तोहफा दिया है। प्रदेश में अब नया बिजली कनेक्शन (New Electricity Connection) लेना न केवल बेहद सस्ता हो गया है, बल्कि इसकी प्रक्रिया को भी इतना आसान बना दिया गया है कि भ्रष्टाचार की गुंजाइश लगभग खत्म हो जाएगी।READ ALSO:-बिजनौर में 'मौत' के साये में 30 मिनट: भरे बाजार में सिरफिरे ने लड़की की गर्दन पर रखा चाकू; पुलिस ने 'सिंघम स्टाइल' में दबोचा, रोंगटे खड़े कर देगा यह रेस्क्यू ऑपरेशन
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नियामक आयोग ने बुधवार को बहुप्रतीक्षित नई 'कास्ट डाटा बुक' (Cost Data Book 2025) जारी कर दी है। इस नई व्यवस्था के तहत स्मार्ट प्रीपेड मीटरों (Smart Prepaid Meters) की कीमतों में भारी कटौती की गई है। जो मीटर पहले हजारों रुपये में मिलते थे, अब उनकी कीमतें आधे से भी कम कर दी गई हैं। इसके साथ ही, सबसे बड़ी राहत 'इस्टीमेट' (अनुमानित लागत) की व्यवस्था को खत्म करके दी गई है, जो अक्सर उपभोक्ताओं और बिजली विभाग के इंजीनियरों के बीच विवाद और भ्रष्टाचार का कारण बनती थी।
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'खबरिलाल' की इस विशेष रिपोर्ट में हम आपको बताएंगे कि नई दरें क्या हैं, अब कनेक्शन लेने में कितना खर्च आएगा, गरीब परिवारों को क्या विशेष सुविधाएं मिली हैं, और यह नई व्यवस्था कब से लागू होगी।
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1. स्मार्ट मीटर की कीमतों में ऐतिहासिक कटौती: आधे से भी कम हुए दाम

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नई कास्ट डाटा बुक का सबसे आकर्षक पहलू स्मार्ट प्रीपेड मीटरों की कीमतों में की गई भारी कटौती है। यह कदम सीधे तौर पर नए उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ने वाले बोझ को कम करेगा।
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नई दरें एक नजर में:

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    सिंगल फेज स्मार्ट प्रीपेड मीटर: अब तक नए उपभोक्ताओं को सिंगल फेज स्मार्ट मीटर के लिए 6016 रुपये चुकाने पड़ते थे। नई व्यवस्था में इसकी कीमत घटाकर मात्र 2800 रुपये कर दी गई है। यानी सीधे तौर पर 3200 रुपये से ज्यादा की बचत।
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    थ्री फेज स्मार्ट प्रीपेड मीटर: घरेलू और कॉमर्शियल इस्तेमाल में आने वाले थ्री फेज स्मार्ट मीटर की कीमत पहले 11342 रुपये थी। आयोग ने इसे घटाकर अब सिर्फ 4100 रुपये कर दिया है। यहाँ उपभोक्ताओं को 7000 रुपये से ज्यादा की भारी भरकम राहत मिली है।
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यह कटौती उन सभी नए उपभोक्ताओं के लिए लागू होगी जो अब नया कनेक्शन लेने के लिए आवेदन करेंगे।
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2. 'इस्टीमेट राज' का अंत: भ्रष्टाचार पर सबसे बड़ी चोट

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मीटर की कीमतें कम होने से भी बड़ी राहत 'इस्टीमेट व्यवस्था' के खात्मे के रूप में मिली है। अब तक नया कनेक्शन लेते समय, खासकर जब दूरी थोड़ी ज्यादा हो, तो बिजली विभाग के जूनियर इंजीनियर (JE) या एसडीओ (SDO) द्वारा खंभे, तार और ट्रांसफार्मर का खर्च जोड़कर एक 'इस्टीमेट' (अनुमानित लागत) तैयार किया जाता था।
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पुरानी व्यवस्था का दर्द: अक्सर यह शिकायतें मिलती थीं कि क्षेत्र के अभियंता जानबूझकर अधिक इस्टीमेट बनाते थे। फिर उपभोक्ताओं से 'लेनदेन' या 'सुविधा शुल्क' लेकर उसकी लागत कम की जाती थी। इस प्रक्रिया में उपभोक्ता को कनेक्शन के लिए महीनों दौड़ना पड़ता था और हजारों रुपये अतिरिक्त खर्च करने पड़ते थे।
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नई पारदर्शी व्यवस्था: नियामक आयोग के सचिव सुमित अग्रवाल द्वारा जारी आदेश के अनुसार, अब 300 मीटर तक की दूरी और 150 किलोवाट तक के लोड वाले नए कनेक्शनों (निजी नलकूप को छोड़कर) के लिए इस्टीमेट तैयार करने की जरूरत ही खत्म कर दी गई है।
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    अब इसके लिए एक तयशुदा (फिक्स) चार्ज लिया जाएगा।
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    चाहे खंभा लगे या तार खिंचे, उपभोक्ता को सिर्फ निर्धारित फिक्स चार्ज ही देना होगा। इससे न केवल भ्रष्टाचार रुकेगा बल्कि कनेक्शन मिलने में लगने वाला समय भी काफी कम हो जाएगा।
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3. अब कनेक्शन लेने में कितना आएगा खर्च? (उदाहरण से समझें)

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नई कास्ट डाटा बुक में दिए गए प्रावधानों से कनेक्शन की लागत में भारी कमी आई है। इसे एक उदाहरण से बेहतर समझा जा सकता है:
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पहले की स्थिति: अगर कोई उपभोक्ता 2 किलोवाट का घरेलू कनेक्शन लेना चाहता था और खंभे से उसके घर की दूरी 100 मीटर या उससे अधिक थी, तो मीटर की लागत के अलावा खंभे, तार और अन्य खर्चों के नाम पर एस्टीमेट बनता था। कुल मिलाकर खर्च अक्सर 15,000 से 20,000 रुपये तक पहुंच जाता था।
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अब नई व्यवस्था में:

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    यदि कोई उपभोक्ता 2 किलोवाट का घरेलू कनेक्शन 100 मीटर की दूरी तक लेना चाहता है, तो उसे सभी शुल्क मिलाकर केवल 5500 रुपये एकमुश्त जमा करने होंगे।
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    इसी प्रकार, यदि दूरी 300 मीटर तक है, तो कुल खर्च मात्र 7555 रुपये आएगा।
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यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि नया कनेक्शन लेना अब पहले के मुकाबले कई गुना सस्ता हो गया है।
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4. गरीबों और बीपीएल परिवारों के लिए 'किस्तों' की सुविधा

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योगी सरकार ने अंत्योदय की भावना के तहत गरीब और गरीबी रेखा से नीचे (BPL) जीवन यापन करने वाले उपभोक्ताओं के लिए खजाना खोल दिया है। नई कास्ट डाटा बुक में उनके लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं ताकि पैसे की कमी के कारण कोई भी घर अंधेरे में न रहे।
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बीपीएल उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहतें:

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    प्रोसेसिंग फीस और सिक्योरिटी जीरो: बीपीएल परिवारों के लिए प्रोसेसिंग शुल्क और सुरक्षा जमा (Security Deposit) राशि अब पूरी तरह शून्य (Zero) कर दी गई है।
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    कनेक्शन चार्ज में किस्त: 100 मीटर तक की दूरी के लिए 'आपूर्ति वहन शुल्क' (Connection Charge) का भुगतान भी किस्तों में हो सकेगा। उन्हें केवल 500 रुपये अग्रिम भुगतान करना होगा। शेष राशि कनेक्शन लगने के बाद 12 महीनों तक बिजली बिल में 45 रुपये की आसान मासिक किस्तों (EMI) में दी जा सकेगी।
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    मीटर की लागत भी किस्तों में: सिंगल फेज कनेक्शन के लिए 2800 रुपये की मीटर लागत को भी दो भागों में देने का विकल्प है।
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      आवेदन के समय सिर्फ 1000 रुपये जमा करके कनेक्शन मिल जाएगा।
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      बाकी के 1800 रुपये, 24 समान मासिक किस्तों में 84 रुपये प्रति माह की दर से जमा करने होंगे।
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      अगर उपभोक्ता ब्याज से बचना चाहता है, तो वह एकमुश्त भुगतान का विकल्प भी चुन सकता है।
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5. किसानों और पहले से मीटर लगवा चुके लोगों के लिए क्या?

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किसानों के लिए अच्छी खबर: नई व्यवस्था में अन्नदाताओं का भी खयाल रखा गया है। अब किसान सिंचाई के लिए स्वतंत्र रूप से 3-फेज 16 केवीए ट्रांसफार्मर या सिंगल फेज 10 केवीए ट्रांसफार्मर के माध्यम से सीधे विद्युत आपूर्ति प्राप्त कर सकेंगे। इससे उन्हें सिंचाई के लिए पर्याप्त और निर्बाध बिजली मिल सकेगी।
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जिन्होंने महंगा मीटर लगवाया, उनका क्या होगा? यह सवाल उन लाखों उपभोक्ताओं के मन में है जिन्होंने हाल ही में 6016 रुपये या 11342 रुपये देकर स्मार्ट मीटर लगवाए हैं। विद्युत नियामक आयोग ने स्थिति साफ की है। आयोग ने कहा है कि जिन नए उपभोक्ताओं से स्मार्ट मीटर के मद में इन नई स्वीकृत दरों से अतिरिक्त राशि वसूल की गई है, उसके निपटान (वापसी या समायोजन) के लिए आयोग द्वारा अलग से एक आदेश पारित किया जाएगा। यानी, बढ़ी हुई कीमत चुकाने वालों को भी जल्द ही राहत मिलने की उम्मीद है।
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6. कब से लागू होगी नई व्यवस्था? (Implementation Timeline)

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उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग (UPERC) की ओर से जारी यह नई 'कॉस्ट डाटा बुक 2025' अगले दो वर्षों के लिए मान्य होगी।
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    सॉफ्टवेयर अपडेट: आयोग ने पावर कॉरपोरेशन (UPPCL) को कड़े निर्देश दिए हैं कि वह 12 जनवरी 2026 तक अपने बिलिंग और नए कनेक्शन के सॉफ्टवेयर में सभी आवश्यक बदलाव कर ले।
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    लागू होने की तिथि: इसका मतलब है कि मकर संक्रांति के आसपास से प्रदेश भर में नए कनेक्शन के लिए आवेदन करने वाले उपभोक्ताओं को इन नई और सस्ती दरों का लाभ मिलना शुरू हो जाएगा।
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'पावर फॉर ऑल' की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम

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उत्तर प्रदेश में बिजली कनेक्शन की दरों में यह भारी कटौती और प्रक्रियाओं का सरलीकरण केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं है, बल्कि यह राज्य सरकार की उस प्रतिबद्धता को दर्शाता है कि बिजली अब विलासिता नहीं, बल्कि हर नागरिक का बुनियादी अधिकार है। स्मार्ट मीटर की कीमतों को तर्कसंगत बनाना और एस्टीमेट की अपारदर्शी व्यवस्था को खत्म करना, प्रदेश के ऊर्जा क्षेत्र में एक नए और पारदर्शी युग की शुरुआत है। इससे न केवल आम आदमी का जीवन आसान होगा, बल्कि प्रदेश में 'ईज ऑफ लिविंग' (Ease of Living) को भी बढ़ावा मिलेगा।
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