खबरीलाल न्यूज़ डेस्क, मेरठ: आगामी श्रावण मास और कांवड़ यात्रा (Kanwar Yatra) को देखते हुए मेरठ पुलिस प्रशासन किसी भी तरह की चूक नहीं चाहता है। हर साल कांवड़ यात्रा की निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरों का कंट्रोल रूम तैयार किया जाता था, जिसमें तारों के जाल से कैमरों को मैन्युअली जोड़कर निगरानी होती थी, जो काफी मशक्कत भरा काम था। लेकिन इस बार मेरठ पुलिस ने पूरी व्यवस्था को हाई-टेक कर दिया है।READ ALSO:-मेरठ में खौफनाक वारदात: 'बर्थडे पार्टी' के बहाने मौत का बुलावा! 24 वर्षीय रजत की बेरहमी से हत्या, रेलवे ट्रैक पर लहूलुहान मिला शव
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पुलिस लाइन में एक अत्याधुनिक एकीकृत केंद्रीय कमांड कंट्रोल (iCCC) रूम विकसित किया गया है। पूरी व्यवस्था इतनी 'डिजिटल' है कि कांवड़िये के जिले में एंट्री से लेकर एग्जिट तक हर हलचल पर पुलिस की पैनी नजर रहेगी।
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 250 कैमरों से चप्पे चप्पे पर नजर रखी जा रही है।

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1. हांगकांग की मशीनें और डायरेक्ट सैटेलाइट से जुड़े कैमरे (Satellite & Hong Kong Tech)

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कांवड़ मार्ग पर सुरक्षा का सबसे मजबूत पहलू इस बार विदेशी तकनीक का इस्तेमाल है।
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    हांगकांग की विशेष मशीनें: ICCC कंट्रोल रूम की रीढ़ की हड्डी हांगकांग से मंगाई गई दो विशेष मशीनें हैं, जो विशाल डेटा और वीडियो फीड को बिना रुके प्रोसेस करने में सक्षम हैं।
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    सैटेलाइट कनेक्टिविटी: इस बार तारों के झंझट को खत्म करते हुए कांवड़ मार्ग पर लगे हाई-डेफिनेशन (HD) कैमरों को सैटेलाइट (Satellite) की मदद से सीधे कंट्रोल रूम से जोड़ा गया है। इससे पल-पल की एकदम साफ और लाइव तस्वीरें मिलेंगी।
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    भविष्य की तकनीक: पुलिस अफसरों का कहना है कि इसके परिणाम इतने शानदार हैं कि बहुत जल्द इस व्यवस्था में 'फेस रिकग्निशन' (Face Recognition - चेहरे पहचानने की तकनीक) को भी शामिल किया जाएगा।
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    कैमरों का जाल: फिलहाल कांवड़ रूट पर 250 हाई-डेफिनेशन कैमरों का जाल बिछाया जा चुका है। यात्रा के विधिवत शुरू होने तक इसे बढ़ाकर 300 कैमरों तक करने की योजना है।
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2. मुजफ्फरनगर बॉर्डर से दिल्ली बॉर्डर तक होगी कड़ी निगरानी

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मेरठ जिले में कांवड़ यात्रा का दायरा काफी बड़ा है। ICCC कंट्रोल रूम के जरिए मुख्य रूप से मुजफ्फरनगर बॉर्डर से लेकर दिल्ली बॉर्डर तक के तकरीबन 110-150 किलोमीटर के सीधे मार्ग की निगरानी की जा रही है।
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जैसे-जैसे श्रावण मास आगे बढ़ेगा और शिवभक्तों की भीड़ इन रास्तों पर बढ़ेगी, सुरक्षा और ट्रैफिक को सुचारू बनाए रखने में यह सिस्टम एक 'गेम चेंजर' साबित होगा।
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3. कंट्रोल रूम में 24 घंटे तैनात रहेगा पुलिस और सात अन्य विभागों का स्टाफ

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ICCC कंट्रोल रूम सिर्फ पुलिस का नहीं, बल्कि कांवड़ यात्रा से जुड़े हर विभाग का केंद्रीय मुख्यालय (Headquarters) होगा।
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    24x7 निगरानी: कंट्रोल रूम 24 घंटे काम करेगा, जिसमें 8-8 घंटे की शिफ्ट में एक्सपर्ट पुलिसकर्मी ड्यूटी देंगे। तत्काल सूचना फ्लैश करने के लिए एक लैंडलाइन फोन और वायरलेस सेट (Wireless Set) की व्यवस्था की गई है।
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    7 विभागों के प्रतिनिधि रहेंगे मौजूद: कंट्रोल रूम में पुलिस के अलावा 7 अन्य महत्वपूर्ण विभागों के अधिकारी भी चौबीसों घंटे मौजूद रहेंगे। इनमें लोक निर्माण विभाग (PWD), नगर निगम, पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम (Electricity Dept), फूड सेफ्टी (Food Safety), स्वास्थ्य विभाग (Health Dept), सिंचाई विभाग, ट्रैफिक विभाग और दमकल (Fire Dept) शामिल हैं।
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    तुरंत होगा समस्या का समाधान: यदि कैमरे में कांवड़ रूट पर कहीं जलभराव, टूटी सड़क, बिजली का तार झूलता हुआ या ट्रैफिक जाम दिखता है, तो कंट्रोल रूम स्टाफ तुरंत वहीं मौजूद संबंधित विभाग के प्रतिनिधि को समस्या के त्वरित निस्तारण का आदेश देगा।
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4. क्या कहते हैं अधिकारी? (Statement of ICCC In-charge)

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ICCC के प्रभारी इंस्पेक्टर नजीर अली खान का कहना है कि यह कंट्रोल रूम कांवड़ यात्रा में सबसे अहम भूमिका निभाएगा।
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उन्होंने बताया, "जैसे ही कोई कांवड़िया मुजफ्फरनगर बॉर्डर से जिले (मेरठ) में प्रवेश करेगा, उसकी सुरक्षा और देखभाल शुरू हो जाएगी, जो उसके एग्जिट पॉइंट (दिल्ली बॉर्डर) तक जारी रहेगी। एक सिंगल क्लिक पर पूरा इलाका हमारी स्क्रीन पर होगा। सैटेलाइट कवरेज और हांगकांग की मशीनों ने इस व्यवस्था को बेहद मजबूत और विश्वसनीय बना दिया है।"
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मेरठ पुलिस की यह डिजिटल पहल शिवभक्तों के सफर को सुरक्षित और सुगम बनाने में बहुत बड़ी भूमिका निभाएगी। इस हाई-टेक निगरानी से न सिर्फ असामाजिक तत्वों और अफवाहों पर लगाम लगेगी, बल्कि किसी भी आपातकालीन स्थिति में तुरंत राहत पहुंचाना संभव हो सकेगा। खबरीलाल न्यूज़ कांवड़ यात्रा की हर सुरक्षा अपडेट और ग्राउंड रिपोर्ट आप तक पहुंचाता रहेगा।
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