मेरठ: डिजिटल दौर में बढ़ते ऑनलाइन अपराधों और साइबर ठगी के नए-नए तरीकों पर अंकुश लगाने के लिए मेरठ जोन पुलिस ने इस साल (2026) एक अभूतपूर्व और आक्रामक रुख अपनाया है। अपर पुलिस महानिदेशक (ADG) भानु भास्कर के कुशल मार्गदर्शन में साइबर पुलिस और स्थानीय थानों की संयुक्त टीमों ने साइबर अपराधियों के खिलाफ बड़े पैमाने पर धरपकड़ अभियान चलाया है।READ ALSO:-धामपुर में गूंजे 'हर-हर महादेव' के जयकारे: अनंत श्री शिव शक्तिपीठ में आठवें दिन भव्य रुद्राभिषेक, यजमान परिवार ने की गौ सेवा
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वर्ष 2026 के शुरुआती 7 महीनों (1 जनवरी से 31 जुलाई 2026) के आंकड़ों का विश्लेषण करें, तो मेरठ जोन पुलिस ने 486 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे धकेला है। इस दौरान नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) और स्थानीय साइबर सेल में कुल 25,220 शिकायतें दर्ज की गईं। इन शिकायतों में आम नागरिकों से कुल 84.40 करोड़ रुपये की ऑनलाइन धोखाधड़ी की बात सामने आई थी। लेकिन, पुलिस की त्वरित कार्रवाई और बैंकों के साथ बेहतर तालमेल के चलते अपराधियों के मंसूबों पर पानी फेर दिया गया।
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आंकड़े जो पुलिस की मुस्तैदी की गवाही देते हैं (1 जनवरी - 31 जुलाई 2026)

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विवरण
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आंकड़े / राशि
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कुल दर्ज साइबर शिकायतें
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25,220
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वित्तीय साइबर अपराध (Financial Scams)
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19,888
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कुल ठगी गई धनराशि
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₹ 84.40 करोड़
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समय रहते बैंक खातों में फ्रीज कराई गई राशि
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₹ 37.28 करोड़ (44.30%)
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पीड़ितों के खातों में लौटाई गई राशि
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₹ 1.41 करोड़
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कुल गिरफ्तार साइबर अपराधी
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486
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'ऑपरेशन साइवज्र' के तहत दर्ज मुकदमे
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170+
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'ऑपरेशन साइवज्र' में गिरफ्तार आरोपी
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185
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19,888 मामले केवल वित्तीय ठगी के: 44.30% रकम अपराधियों तक पहुंचने से पहले रोकी गई

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पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, कुल 25,220 शिकायतों में से 19,888 शिकायतें सीधे तौर पर वित्तीय साइबर अपराध (Financial Cyber Crime) से जुड़ी थीं। इनमें फर्जी निवेश (Trading Fraud), एपीके फाइल (APK Link Scam), डिजिटल अरेस्ट (Digital Arrest), वर्क फ्रॉम होम (Work From Home Job Scam) और फर्जी बैंक अधिकारी बनकर की गई ठगी शामिल है।
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साइबर अपराधियों ने अलग-अलग हथकंडे अपनाकर पीड़ितों से कुल 84.40 करोड़ रुपये ऐंठ लिए थे। हालांकि, मामला संज्ञान में आते ही मेरठ जोन की साइबर टीमों ने तकनीकी संसाधनों का उपयोग किया और नोडल बैंक अधिकारियों से संपर्क साधा। इसका सुखद परिणाम यह रहा कि पुलिस ने 37.28 करोड़ रुपये की राशि को विभिन्न बैंक खातों में समय रहते फ्रीज (Hold) करा दिया।
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अहम उपलब्धि: यह कुल ठगी गई धनराशि का लगभग 44.30 प्रतिशत है। यानी लगभग आधी रकम को अपराधियों के वॉलेट या विदेशी खातों में ट्रांसफर होने से पहले ही भारतीय बैंकिंग प्रणाली के भीतर लॉक कर दिया गया।
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7 जुलाई से जारी है 'ऑपरेशन साइवज्र': 185 खतरनाक साइबर अपराधी दबोचे गए

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मेरठ जोन में साइबर अपराधियों के अंतर्राज्यीय सिंडिकेट और नेटवर्क की रीढ़ तोड़ने के लिए 7 जुलाई 2026 से एक विशेष संयुक्त अभियान 'ऑपरेशन साइवज्र' (Operation Cy-Vajra) की शुरुआत की गई। इस विशेष अभियान के तहत जोन के सभी जिलों (मेरठ, गाजियाबाद, बुलंदशहर, बागपत, हापुड़, मुजफ्फरनगर, शामली और सहारनपुर) की पुलिस व स्पेशल साइबर सेल टीमें मिलकर काम कर रही हैं।
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ऑपरेशन साइवज्र के मुख्य पड़ाव:

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    170 से अधिक मुकदमे दर्ज: इस अभियान की शुरुआत के बाद से अब तक विभिन्न थानों में 170 से अधिक नए मामले दर्ज कर जांच तेज की गई है।
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    185 शातिर अपराधी गिरफ्तार: 'ऑपरेशन साइवज्र' के तहत 185 बड़े साइबर अपराधियों को राज्य के अलग-अलग हिस्सों व अन्य राज्यों से गिरफ्तार कर जेल भेजा गया।
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    देशभर के 5,533 मामलों से जुड़े तार: पुलिस जांच में एक सनसनीखेज खुलासा हुआ है। गिरफ्तार किए गए ये 185 आरोपी देश भर के विभिन्न राज्यों में दर्ज 5,533 साइबर अपराध मामलों में संलिप्त पाए गए हैं। इससे साफ होता है कि यह गिरोह केवल पश्चिमी उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरे देश में ठगी का जाल फैलाए हुए था।
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पीड़ितों के चेहरों पर लौटी मुस्कान: 1.41 करोड़ रुपये बैंक खातों में वापस कराए गए

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अक्सर माना जाता है कि एक बार ऑनलाइन ठगी का शिकार होने के बाद पैसा वापस मिलना बेहद कठिन होता है। लेकिन मेरठ जोन पुलिस ने इस धारणा को गलत साबित किया है।
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एडीजी भानु भास्कर ने बताया कि कानूनी प्रक्रियाओं को तेजी से पूरा करते हुए अदालत के माध्यम से फ्रीज कराई गई धनराशि में से 1.41 करोड़ रुपये सीधे पीड़ितों के मूल बैंक खातों में वापस (Refund) ट्रांसफर करा दिए गए हैं। अपनी गाढ़ी कमाई वापस मिलने पर कई पीड़ितों ने साइबर पुलिस टीम का आभार व्यक्त किया है। शेष फ्रीज कराई गई 35.87 करोड़ रुपये की राशि को भी विधिक प्रक्रिया पूरी कर पीड़ितों को लौटाने का कार्य तेजी से जारी है।
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एडीजी भानु भास्कर का सख्त संदेश: 'त्वरित रिपोर्टिंग ही साइबर ठगी से बचाव का सबसे बड़ा हथियार'

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मेरठ जोन के अपर पुलिस महानिदेशक (ADG) भानु भास्कर ने पूरे अभियान की समीक्षा करते हुए बताया कि पुलिस, साइबर सेल, बैंक नोडल अधिकारियों और वित्तीय एजेंसियों के बीच बने मजबूत समन्वय की वजह से यह सफलता मिल सकी है।
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"हमारी साइबर टीमें चौबीसों घंटे अलर्ट मोड पर काम कर रही हैं। जैसे ही राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल (NCRP) या हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कोई शिकायत प्राप्त होती है, हमारी पहली प्राथमिकता संदिग्ध बैंक खातों, म्युल अकाउंट्स (Mule Accounts) और डिजिटल वॉलेट को तत्काल प्रभाव से होल्ड कराने की होती है। यदि नागरिक ठगी के तुरंत बाद संपर्क करें, तो नुकसान को शून्य के बराबर किया जा सकता है।"
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— भानु भास्कर (एडीजी, मेरठ जोन)
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आम नागरिकों के लिए साइबर सुरक्षा एडवाइजरी

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मेरठ पुलिस प्रशासन ने आम जनता से अपील की है कि वे थोड़ी सी सावधानी बरतकर साइबर ठगी से सुरक्षित रह सकते हैं:
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    गोल्डन आवर (Golden Hour) का ध्यान रखें: यदि आपके साथ किसी भी प्रकार की ऑनलाइन वित्तीय ठगी होती है, तो बिना समय गंवाए तत्काल 1930 (Cyber Helpline) पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें। ठगी के 1 से 2 घंटे के भीतर दी गई सूचना पर पैसे वापस मिलने की संभावना 90% तक होती है।
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  3. \r\n
    अज्ञात लिंक पर क्लिक न करें: व्हाट्सएप, टेलीग्राम या एसएमएस पर आने वाले संदिग्ध एपीके (APK) फाइलों या लॉटरी/जॉब ऑफर लिंक को कभी न खोलें।
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    डिजिटल अरेस्ट से न डरें: कोई भी सरकारी एजेंसी (CBI, ED, या Police) व्हाट्सएप/स्काइप वीडियो कॉल पर किसी को गिरफ्तार नहीं करती और न ही पैसे ट्रांसफर करने को कहती है।
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  6. \r\n
  7. \r\n
    ओटीपी व पिन शेयर न करें: अपना बैंक पासवर्ड, यूपीआई पिन या ओटीपी किसी के साथ साझा न करें।
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  8. \r\n
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मेरठ जोन में 'ऑपरेशन साइवज्र' के माध्यम से पुलिस ने न केवल करोड़ों रुपये की ठगी होने से बचाई है, बल्कि यह संदेश भी स्पष्ट कर दिया है कि डिजिटल दुनिया में अपराध करने वाले अब पुलिस की पहुंच से दूर नहीं रह सकते। आने वाले दिनों में पुलिस इस नेटवर्क से जुड़े अन्य सहयोगियों और फर्जी सिम/बैंक खाते मुहैया कराने वाले एजेंटों पर और भी कड़ी कार्रवाई करने जा रही है।
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