मेरठ: उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के सबसे व्यस्त व्यापारिक केंद्र शास्त्री नगर स्थित सेंट्रल मार्केट में एक बार फिर बुलडोजर का खौफ मंडराने लगा है। मेरठ सेंट्रल मार्केट अवैध निर्माण (Meerut Central Market Illegal Construction) के मामले में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के कड़े रुख ने व्यापारियों की नींद उड़ा दी है। कोर्ट ने आवास विकास परिषद को दो महीने के भीतर सभी अवैध निर्माणों पर कार्रवाई करने का अल्टीमेटम दिया है। इस आदेश के विरोध में और अपनी रोजी-रोटी बचाने के लिए रविवार को व्यापारियों ने अपने प्रतिष्ठानों और घरों के बाहर 'व्यापार बचाओ' के पोस्टर चस्पा कर दिए।READ ALSO:-यूपी में बिजली उपभोक्ताओं को बंपर गिफ्ट: अब 'नेवर पेड' वालों का भी होगा बेड़ा पार, 11 दिसंबर से खुलेगा किस्मत का ताला
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सुप्रीम कोर्ट का आदेश और व्यापारियों का डर

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सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में आवास विकास परिषद द्वारा दाखिल हलफनामे पर सुनवाई करते हुए नाराजगी जताई थी। कोर्ट ने स्पष्ट कहा है कि मेरठ सेंट्रल मार्केट अवैध निर्माण को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इससे पहले अक्टूबर महीने में आवास विकास ने कार्रवाई करते हुए 22 अवैध दुकानों को जमींदोज किया था, लेकिन कोर्ट ने इसे नाकाफी माना। 1 दिसंबर को हुई सुनवाई के बाद कोर्ट ने पूरे क्षेत्र में मौजूद शेष अवैध निर्माणों को दो महीने के अंदर हटाने का आदेश दिया है।
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इस आदेश के बाद से शास्त्री नगर के सेक्टर-6 और आसपास के इलाकों में हड़कंप मचा हुआ है। आवास विकास परिषद ने कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू करते हुए अब तक 31 भूखंड मालिकों को ध्वस्तीकरण का नोटिस जारी कर दिया है। बताया जा रहा है कि 90 से अधिक दुकानें और प्रतिष्ठान रडार पर हैं, जिन पर कभी भी बुलडोजर चल सकता है। 
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'एक लाख परिवारों की रोजी-रोटी पर संकट'

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रविवार को 'व्यापार बचाओ संघर्ष समिति मेरठ' के बैनर तले व्यापारियों ने एकजुटता दिखाई। सुबह से ही सेंट्रल मार्केट की दुकानों और व्यापारियों के आवासों पर पोस्टर दिखाई देने लगे। इन पोस्टरों पर लिखा है- "एक लाख परिवारों की रोजी-रोटी पर संकट, व्यापार बचाओ, सरकार से गुहार"।
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व्यापारियों का कहना है कि यह मार्केट दशकों से चल रहा है और हजारों लोगों का रोजगार इससे जुड़ा है। अगर मेरठ सेंट्रल मार्केट अवैध निर्माण के नाम पर दुकानों को तोड़ा गया, तो हजारों परिवार सड़क पर आ जाएंगे। व्यापारियों ने सरकार से मानवीय आधार पर हस्तक्षेप करने की मांग की है।
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बैठकों का दौर और रणनीति

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सुप्रीम कोर्ट की सख्ती को देखते हुए व्यापारी अब आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं। गुरुवार को जैना ज्वेलर्स शोरूम में हुई एक आपात बैठक में सभी व्यापारियों ने एकजुट होकर संघर्ष करने की शपथ ली। बैठक में एक नई कमेटी का गठन करने पर सहमति बनी है जो कानूनी और जमीनी स्तर पर लड़ाई लड़ेगी।
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व्यापारियों का आरोप है कि उन्हें पहले राजनीतिक आश्वासन मिला था। जब पिछली बार धरना-प्रदर्शन हुआ था, तब भाजपा पदाधिकारियों ने सेंट्रल मार्केट को 'स्ट्रीट बाजार' (Street Market) का दर्जा दिलाकर राहत देने का वादा किया था। लेकिन कोर्ट के आदेश के सामने अब ये वादे फीके पड़ते नजर आ रहे हैं।
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आवास विकास की तैयारी

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दूसरी ओर, सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद आवास विकास परिषद के अधिकारी भी दबाव में हैं। परिषद ने मेरठ सेंट्रल मार्केट अवैध निर्माण को चिह्नित करने का काम तेज कर दिया है। अधिकारियों का कहना है कि वे कोर्ट के आदेश का पालन करने के लिए बाध्य हैं। जिन 31 लोगों को नोटिस भेजा गया है, उन्हें अपना पक्ष रखने का समय दिया गया था, लेकिन संतोषजनक जवाब न मिलने पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई तय मानी जा रही है।
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मेरठ का सेंट्रल मार्केट इस समय असमंजस और डर के माहौल में है। एक तरफ सुप्रीम कोर्ट का सख्त आदेश है, तो दूसरी तरफ हजारों व्यापारियों की आजीविका। 'व्यापार बचाओ' के पोस्टर लगाकर व्यापारियों ने सरकार तक अपनी आवाज पहुंचाने की कोशिश की है। अब देखना यह होगा कि क्या सरकार कोई बीच का रास्ता निकाल पाती है या फिर मेरठ सेंट्रल मार्केट अवैध निर्माण पर बुलडोजर चलकर ही रहेगा। आने वाले दो महीने इस बाजार के भविष्य के लिए बेहद निर्णायक होने वाले हैं।
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