मेरठ: मेरठ के व्यस्ततम सेंट्रल मार्केट में शनिवार से शुरू हुई ध्वस्तीकरण की बड़ी कार्रवाई आज दूसरे दिन भी जारी है। सुप्रीम कोर्ट के सख्त आदेश के बाद, आवास एवं विकास परिषद का बुलडोजर 35 साल पुराने तीन मंजिला अवैध कॉम्प्लेक्स (661/6) को ध्वस्त कर रहा है। इस कॉम्प्लेक्स में बनी सभी 22 दुकानों को तोड़ा जा रहा है, जिससे व्यापारियों में भारी आक्रोश और बेबसी है।READ ALSO:-आगरा: दबिश से लौट रही पुलिस की अर्टिगा के उड़े परखच्चे, खड़े ट्रक में घुसी; हेड कॉन्स्टेबल और ड्राइवर की दर्दनाक मौत, दरोगा गंभीर
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
अपनी दुकानें गिरती देख रो पड़े व्यापारी शनिवार सुबह 11 बजे जैसे ही ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू हुई, व्यापारी और उनके परिवार मौके पर जमा हो गए। अपनी आंखों के सामने अपनी रोजी-रोटी को उजड़ता देख व्यापारी रो पड़े। 'अलंकार साड़ी सूट्स' दुकान के मालिक अपने पूरे परिवार के साथ सुबह से ही कुर्सी लगाकर कॉम्प्लेक्स के सामने बैठे रहे और टकटकी लगाए अपनी दुकान को गिरता देखते रहे।
\r\n\r\n

 

विज्ञापन
विज्ञापन
\r\n\r\n
इस दौरान कई महिला व्यापारियों की पुलिस से तीखी नोकझोंक भी हुई। महिलाएं हाथ जोड़कर अफसरों से बुलडोजर रोकने की मिन्नतें करती रहीं, लेकिन अधिकारियों ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देकर अपनी बेबसी जाहिर की। रोती हुई महिलाओं ने कहा, "अब हमारा क्या होगा, हम कहां जाएंगे और अपने बच्चों का गुजारा कैसे करेंगे?"
\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
छावनी बना सेंट्रल मार्केट कार्रवाई के दौरान भारी विरोध की आशंका को देखते हुए पूरे सेंट्रल मार्केट इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया गया है। मौके पर कई थानों की फोर्स और PAC को तैनात किया गया है। पूरे इलाके में बैरिकेडिंग कर रास्तों को बंद कर दिया गया है। प्रशासन ने स्थिति पर पैनी नजर रखने के लिए ATS के ड्रोन से भी निगरानी की। पहले दिन, शनिवार को, लगभग 7 घंटे की कार्रवाई में कॉम्प्लेक्स का करीब 40% हिस्सा गिरा दिया गया था।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
क्या है पूरा मामला? यह पूरा विवाद 288 वर्गमीटर जमीन से जुड़ा है, जो मूल रूप से आवास विकास परिषद द्वारा काजीपुर के वीर सिंह को आवास के लिए आवंटित की गई थी। आरोप है कि 1990 में विनोद अरोड़ा नामक व्यक्ति ने पावर ऑफ अटॉर्नी का दुरुपयोग करते हुए इस आवासीय भूखंड पर अवैध रूप से तीन मंजिला कमर्शियल कॉम्प्लेक्स बनवा दिया।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
सुप्रीम कोर्ट ने दिया था आदेश इस अवैध निर्माण के खिलाफ मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। कोर्ट ने 17 दिसंबर, 2024 को स्पष्ट आदेश दिया था कि इस अवैध कॉम्प्लेक्स को 3 महीने के भीतर खाली कराकर ध्वस्त किया जाए। जब आदेश का अनुपालन नहीं हुआ, तो आरटीआई कार्यकर्ता लोकेश खुराना ने सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका दायर कर दी।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
इस याचिका पर 6 अक्टूबर को सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट की खंडपीठ ने कड़ा रुख अपनाया और प्रदेश के गृह सचिव, आवास आयुक्त, एसएसपी मेरठ समेत कई अधिकारियों और व्यापारियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। इसी दबाव के चलते प्रशासन ने यह बड़ी कार्रवाई की है। इस प्रकरण में आवास एवं विकास परिषद ने 44 अधिकारियों और 20 व्यापारियों के खिलाफ नौचंदी थाने में एफआईआर भी दर्ज कराई है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
व्यापारियों का भविष्य अनिश्चित
\r\n\r\n
मेरठ सेंट्रल मार्केट का यह ध्वस्तीकरण अवैध निर्माण के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट की सख्ती को दर्शाता है। इससे न केवल 22 दुकानदारों का कारोबार खत्म हुआ है, बल्कि बाजार में एक बड़ा संदेश भी गया है। व्यापारियों का भविष्य फिलहाल अनिश्चित है, और प्रशासन को इस संबंध में कोई स्पष्ट आश्वासन नहीं मिला है।
\r\n\r\n

 

विज्ञापन
विज्ञापन