विवाद की शुरुआत: केसरगंज की जनसभा और भड़काऊ बोल उत्तर प्रदेश की राजनीति में बयानों के तीर अक्सर चुनावी माहौल को गरमा देते हैं। इसी कड़ी में मेरठ के केसरगंज इलाके में रविवार को आयोजित एक जनसभा में आजाद समाज पार्टी (आसपा) के नेता बदर अली ने एक ऐसा बयान दे दिया है, जिसने शहर का सियासी पारा अचानक बढ़ा दिया है। अपने समर्थकों की भीड़ को संबोधित करते हुए बदर अली ने सीधे तौर पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और बजरंग दल को निशाने पर लिया।Read also:-Bijnor Breaking News: आसमान छूती महंगाई से त्रस्त व्यापारियों का फूटा गुस्सा, बिजनौर में बाजार बंद कर फूंका पुतला; DM जसजीत कौर को सौंपा ज्ञापन
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मंच से गरजते हुए बदर अली ने कहा, "जिस दिन आपने हमारे हाथों को ताकत दे दी, उस दिन बीजेपी, आरएसएस और बजरंग दल वाले किसी भी टोपी को हाथ लगाने से पहले 10 बार सोचेंगे।" इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बदर अली का यह बयान पूरी तरह से एक विशेष समुदाय के वोटों का ध्रुवीकरण करने और आगामी चुनावों में अपनी राजनीतिक जमीन को मजबूत करने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है।
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हिंदू संगठनों का कड़ा पलटवार: 'अपनी कौम को पागल न बनाएं' बदर अली के इस विवादित और भड़काऊ बयान के सामने आते ही मेरठ और आसपास के क्षेत्रों में सक्रिय हिंदू संगठनों के कार्यकर्ताओं में भारी आक्रोश फैल गया है। अखिल भारतीय हिन्दू सुरक्षा संगठन ने इस बयान को लेकर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सचिन सिरोही ने मीडिया से बातचीत करते हुए बदर अली को सीधे शब्दों में चेतावनी दी है।
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सचिन सिरोही ने कहा, "बदर अली इस तरह की बेतुकी और आधारहीन बयानबाजी करके केवल अपनी कौम को पागल बनाने का काम कर रहे हैं। हम किसी भी हिंदू संगठन पर इस प्रकार की भड़काऊ और अपमानजनक टिप्पणी को कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे।" सिरोही ने आगे स्पष्ट करते हुए कहा कि भाजपा, आरएसएस और बजरंग दल जैसे राष्ट्रवादी संगठनों ने आज तक कभी किसी 'टोपी वाले' (मुस्लिम समुदाय के व्यक्ति) को बिना वजह नहीं मारा है या प्रताड़ित नहीं किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि बदर अली केवल अपनी मृतप्राय राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को जिंदा करने और घटिया राजनीति चमकाने के लिए इस तरह के हथकंडों का इस्तेमाल कर रहे हैं। हिंदू संगठनों ने प्रशासन से मांग की है कि ऐसे भड़काऊ बयानों से शहर का माहौल खराब करने वालों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
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चंद्रशेखर आजाद का 'मिशन मेरठ' और बदर अली की ग्रैंड री-एंट्री बदर अली का राजनीतिक सफर काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। दिलचस्प बात यह है कि बदर अली को हाल ही में आजाद समाज पार्टी में दोबारा शामिल किया गया है, और वह भी खुद पार्टी प्रमुख चंद्रशेखर आजाद की मौजूदगी में। मेरठ के चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय (CCSU) स्थित नेताजी सुभाषचंद्र बोस प्रेक्षागृह में एक भव्य समारोह का आयोजन किया गया था। इस कार्यक्रम के लिए बदर अली ने खुद हॉल की बुकिंग की थी और विश्वविद्यालय परिसर में भारी भीड़ जुटाकर अपनी ताकत का अहसास कराया था।
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इसी समारोह में चंद्रशेखर आजाद ने बदर अली को पार्टी की सदस्यता दिलाई। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, चंद्रशेखर आजाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश में दलित-मुस्लिम गठजोड़ (DM Factor) को मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। बदर अली को पार्टी में वापस लाना इसी रणनीति का एक अहम हिस्सा माना जा रहा है, ताकि मुस्लिम बहुल इलाकों में आसपा की पैठ को गहरा किया जा सके, भले ही इसके लिए एक दागी छवि वाले नेता का सहारा क्यों न लेना पड़े।
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मेरठ शहर विधानसभा सीट: दिग्गजों की नजर और कड़ा मुकाबला बदर अली को आजाद समाज पार्टी में शामिल कराने के पीछे का सबसे बड़ा कारण मेरठ की शहर विधानसभा सीट है। पार्टी ने उन्हें इस सीट से अपना प्रत्याशी और प्रभारी घोषित किया है। पिछले लगभग आठ महीने से बदर अली इसी सीट पर अपनी चुनावी जमीन तैयार करने में जुटे हुए हैं।
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 16 अक्टूबर 2025 को आसपा ने करीब 500 लोगों के साथ बदर अली को पार्टी ज्वाइन कराई थी।

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मेरठ शहर विधानसभा सीट का राजनीतिक इतिहास बेहद दिलचस्प रहा है। वर्तमान में इस सीट पर समाजवादी पार्टी (सपा) के कद्दावर नेता रफीक अंसारी विधायक हैं। इस सीट पर मुस्लिम मतदाताओं की संख्या काफी अधिक है, जो किसी भी प्रत्याशी की जीत-हार तय करने में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। दूसरी ओर, यह सीट भाजपा का भी पुराना गढ़ रही है। भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष पंडित लक्ष्मीकांत वाजपेयी यहां से लंबे समय तक विधायक रहे हैं, जिसके कारण इसे 'ब्राह्मणों की सीट' भी कहा जाता है।
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आगामी चुनावों को देखते हुए भाजपा के भीतर भी इस सीट को लेकर भारी खींचतान मची हुई है। एमएलसी धर्मेंद्र भारद्वाज, कमलदत्त शर्मा और पंडित सुनील भराला जैसे दिग्गज ब्राह्मण चेहरे इस सीट से अपनी मजबूत दावेदारी पेश कर रहे हैं। ऐसे में, यदि बदर अली आजाद समाज पार्टी के बैनर तले चुनाव लड़ते हैं, तो वह सीधे तौर पर समाजवादी पार्टी के मुस्लिम वोट बैंक में सेंध लगाएंगे, जिससे इस सीट का मुकाबला त्रिकोणीय और बेहद रोमांचक हो जाएगा।
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क्राइम कुंडली: 22 संगीन मुकदमे और गैंगस्टर की कुख्यात पहचान राजनीतिक मंचों पर भड़काऊ भाषण देने वाले बदर अली का अतीत और वर्तमान दोनों ही आपराधिक रिकॉर्ड से भरा हुआ है। पुलिस फाइलों में बदर अली महज़ एक राजनीतिक कार्यकर्ता नहीं, बल्कि एक लिस्टेड गैंगस्टर है। उस पर मेरठ और आसपास के जिलों में गंभीर धाराओं में कई आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं।
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पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, बदर अली पर दंगा भड़काने, हत्या की धमकी देने, बलवा करने और शांति भंग करने जैसी गंभीर धाराओं में कुल 22 मुकदमे दर्ज हैं। ये मामले मेरठ के विभिन्न थानों- देहली गेट, ब्रह्मपुरी, सदर बाजार, रेलवे रोड, नौचंदी, लिसाड़ी गेट, सिविल लाइन, टीपी नगर, साइबर क्राइम, लोहियानगर और शहर कोतवाली के साथ-साथ गाजियाबाद के कई थानों में भी पंजीकृत हैं।
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सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इसी आपराधिक इतिहास और लगातार मिल रही अनुशासनहीनता की शिकायतों के चलते मार्च 2021 में आजाद समाज पार्टी ने बदर अली को पार्टी से निष्कासित कर दिया था। पार्टी ने तब साफ कहा था कि ऐसे दागी लोगों के लिए संगठन में कोई जगह नहीं है। लेकिन, राजनीति में कब कौन सा नियम बदल जाए, यह कोई नहीं जानता। आगामी चुनाव में वोटों की गणित साधने के लिए उसी गैंगस्टर को 16 अक्टूबर को 500 से अधिक समर्थकों की भीड़ के साथ पूरी शानो-शौकत से दोबारा पार्टी में शामिल कर लिया गया। यह घटना स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि चुनावी जीत के आगे राजनीतिक दलों के लिए शुचिता और अनुशासन के नियम अक्सर बौने साबित हो जाते हैं।
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अस्वीकरण (Disclaimer): यह समाचार रिपोर्ट केवल सूचनात्मक और पत्रकारिता के उद्देश्यों से उपलब्ध कराई गई सामग्री तथा घटनाक्रमों पर आधारित है। लेख में व्यक्त किए गए विचार, बयान और दावे संबंधित राजनीतिक व्यक्तियों तथा संगठनों के निजी वक्तव्य हैं। हमारी वेबसाइट या डिजिटल प्लेटफॉर्म इन बयानों का समर्थन नहीं करता है और न ही किसी प्रकार की हिंसा, सामाजिक वैमनस्य या भड़काऊ भाषा का अनुमोदन करता है।
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