पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच की मांग को लेकर मेरठ के अधिवक्ताओं का आंदोलन तेज हो गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ हुई वार्ता में बेंच को लेकर सरकार के अधिकार क्षेत्र से बाहर होने की बात सामने आने के बाद मेरठ बार एसोसिएशन ने मंगलवार को पंडित नानकचंद सभागार में आम सभा की। इसमें मुख्यमंत्री के रुख और भाजपा के कुछ जनप्रतिनिधियों के रवैये को लेकर नाराजगी जताते हुए कई प्रस्ताव पारित किए गए।
भाजपा जनप्रतिनिधियों के कचहरी प्रवेश पर रोक का फैसला
मेरठ बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और पश्चिम उत्तर प्रदेश हाईकोर्ट बेंच केंद्रीय संघर्ष समिति के चेयरमैन अनुज शर्मा तथा संयोजक परवेज आलम के अनुसार, आम सभा में तय किया गया कि कचहरी परिसर में ‘बेंच नहीं तो वोट नहीं’ से जुड़े बैनर और पोस्टर लगाए जाएंगे। साथ ही भाजपा के जनप्रतिनिधियों और पदाधिकारियों के कचहरी परिसर में प्रवेश को निषेध करने की सूचना दर्ज की जाएगी।

बार की ओर से यह भी कहा गया है कि एमपी-एमएलए कोर्ट में भाजपा जनप्रतिनिधियों के मामलों की पैरवी अधिवक्ता नहीं करेंगे। ये फैसले मेरठ बार एसोसिएशन की आम सभा में लिए गए हैं।
23 सितंबर को 22 जिलों में न्यायिक कार्य से विरत रहेंगे वकील
बार पदाधिकारियों ने बताया कि मुख्यमंत्री के साथ हुई वार्ता के विरोध में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सभी 22 जनपदों के अधिवक्ता बुधवार, 23 सितंबर को न्यायिक कार्य से विरत रहेंगे। इससे पहले भी पश्चिमी यूपी के 22 जिलों में हाईकोर्ट बेंच की मांग को लेकर कार्य बहिष्कार और आंदोलन के कार्यक्रम किए जा चुके हैं।
Follow the Khabreelal News channel on WhatsApp Join ›अधिवक्ताओं का कहना है कि आगे की रणनीति तय करने के लिए हाईकोर्ट बेंच स्थापना केंद्रीय संघर्ष समिति की बैठक जल्द बुलाई जाएगी। इसमें 22 जनपदों के बार एसोसिएशन के पदाधिकारी शामिल होंगे। बैठक में आंदोलन के अगले चरण पर फैसला लिया जाएगा।
लक्ष्मीकांत बाजपेयी को दिया वकालतनामा वापस लेने का फैसला
आम सभा में राज्यसभा सदस्य लक्ष्मीकांत बाजपेयी को हाईकोर्ट बेंच की मांग की पैरवी के लिए दिया गया वकालतनामा वापस लेने की भी घोषणा की गई। बार पदाधिकारियों के मुताबिक, मेरठ बार एसोसिएशन के जिन सदस्यों के भाजपा से जुड़े पद हैं, उनकी बार सदस्यता समाप्त करने की प्रक्रिया पर भी आगे निर्णय लिया जाएगा।
इससे पहले 21 सितंबर को अधिवक्ताओं के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से मुलाकात की थी। अधिवक्ताओं के मुताबिक, मुख्यमंत्री ने कहा कि पश्चिमी यूपी में हाईकोर्ट बेंच स्थापित करना प्रदेश सरकार के अधिकार क्षेत्र में नहीं है और इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कही। मुख्यमंत्री के इस कथित जवाब की स्वतंत्र आधिकारिक प्रति उपलब्ध नहीं मिली है; यह विवरण वार्ता में शामिल अधिवक्ताओं के बयान और मीडिया रिपोर्टों पर आधारित है।
डिस्क्लेमर: यह खबर मेरठ बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों के बयानों और उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों पर आधारित है। आंदोलन, बहिष्कार और जनप्रतिनिधियों के संबंध में लिए गए निर्णय संबंधित बार एसोसिएशन की ओर से घोषित किए गए हैं। मुख्यमंत्री की वार्ता के संबंध में ऊपर दी गई बातें अधिवक्ताओं द्वारा बताए गए विवरण के रूप में प्रस्तुत की गई हैं।
Sabse pehle comment karne wale banein.