मेरठ (Meerut Special Report): देश की रक्षा का संकल्प लेकर सेना की वर्दी पहनने वाला एक जवान जब खुद ही कानून का भक्षक बन जाए, तो हालात कितने खौफनाक हो सकते हैं, इसका जीता-जागता उदाहरण रविवार को मेरठ जिले में देखने को मिला।READ ALSO:-मौत का 'अदृश्य' फंदा: गाजियाबाद NH-9 पर चाइनीज मांझे से कटी डिलीवरी बॉय की गर्दन, बीच सड़क पर तड़प-तड़पकर मौत
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मेरठ के व्यस्ततम कंकरखेड़ा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले देहरादून हाईवे पर उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब एक सिरफिरे और नशे में धुत अग्निवीर ने बीच सड़क पर 'दबंगई' दिखानी शुरू कर दी। यह फौजी, जिसकी पहचान बाद में यश तोमर (Yash Tomar) के रूप में हुई, अपनी फौजी होने की धौंस जमाकर आम जनता और कानून-व्यवस्था के रक्षकों (यूपी पुलिस) के साथ खुलेआम मारपीट पर उतारू हो गया।
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इस पूरी घटना का एक लाइव वीडियो भी सामने आया है, जिसमें फौजी और पुलिसकर्मियों के बीच चल रही हाथापाई और 'हाई-वोल्टेज ड्रामा' साफ देखा जा सकता है। पुलिस ने आरोपी फौजी को सलाखों के पीछे भेज दिया है और सेना की मिलिट्री पुलिस (Military Police) को भी इस अनुशासनहीनता की रिपोर्ट सौंप दी है।
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कैसे शुरू हुआ विवाद? देहरादून हाईवे पर आम जनता से बदसलूकी
\r\n\r\nप्रत्यक्षदर्शियों और पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, रविवार की शाम देहरादून हाईवे पर ट्रैफिक अपनी सामान्य रफ्तार से चल रहा था। इसी दौरान हाईवे के किनारे एक युवक शराब के नशे में बुरी तरह धुत होकर खड़ा था।
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नशे की हालत में इस युवक ने वहां से गुजरने वाले राहगीरों, महिलाओं और दोपहिया वाहन चालकों के साथ अभद्रता और गाली-गलौज शुरू कर दी। जब कुछ लोगों ने इसका विरोध किया, तो उसने खुद को फौज में (अग्निवीर) बताते हुए लोगों को धमकाना शुरू कर दिया। इस फौजी का आतंक इतना बढ़ गया कि हाईवे पर जाम जैसी स्थिति पैदा होने लगी। आम जनता की सुरक्षा को खतरे में देख मौके पर मौजूद किसी जागरूक नागरिक ने तुरंत यूपी पुलिस के आपातकालीन नंबर डायल-112 (PRV) पर कॉल कर दी।
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डायल-112 की एंट्री और फौजी का खौफनाक रूप
\r\n\r\nकंट्रोल रूम से सूचना मिलते ही कंकरखेड़ा थाना क्षेत्र की पीआरवी (Police Response Vehicle) टीम सायरन बजाती हुई चंद मिनटों में घटनास्थल पर पहुंच गई। पुलिसकर्मियों को लगा कि वर्दी देखकर नशेबाज युवक शांत हो जाएगा, लेकिन यहां दांव उल्टा पड़ गया।
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- \r\n पुलिस से सीधी भिड़ंत: पीआरवी पर तैनात पुलिसकर्मियों ने जब यश तोमर को समझा-बुझाकर हाईवे से किनारे ले जाने का प्रयास किया, तो वह भड़क गया। उसने पुलिसकर्मियों को ही गालियां देनी शुरू कर दीं।\r\n \r\n
- \r\n वर्दी पर हाथ और हाथापाई: बातचीत जब हाथापाई में बदल गई, तो फौजी ने अपना आपा पूरी तरह खो दिया। आरोप है कि यश तोमर ने आपे से बाहर होकर पीआरवी में तैनात एक दारोगा (Sub-Inspector) का गिरेबान पकड़ लिया और हाथापाई करते हुए उसकी वर्दी (Uniform) फाड़ डाली।\r\n \r\n
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इस घटना को देखकर वहां मौजूद सैकड़ों लोगों की भीड़ सन्न रह गई। एक तरफ सेना का जवान था, तो दूसरी तरफ राज्य की पुलिस। दोनों के बीच बीच-सड़क चल रहे इस संघर्ष ने प्रशासन की नींद उड़ा दी।
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मदद के लिए दौड़ानी पड़ी दूसरी पीआरवी, तब जाकर हुआ काबू
\r\n\r\nनशेबाज फौजी शारीरिक रूप से फिट था और पुलिसकर्मियों पर भारी पड़ रहा था। पहली पीआरवी टीम जब उसे काबू करने में नाकाम साबित होने लगी और स्थिति बेकाबू हो गई, तो वायरलेस सेट पर तत्काल बैकअप की मांग की गई।
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सूचना फ्लैश होते ही कंकरखेड़ा थाने से अतिरिक्त पुलिस बल और दूसरी पीआरवी गाड़ी को घटनास्थल की ओर दौड़ाया गया। कई पुलिसकर्मियों ने मौके पर पहुंचकर यश तोमर की चारों तरफ से घेराबंदी की। वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि आधा दर्जन पुलिसकर्मी इस फौजी को खींचते हुए जीप में बैठाने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि वह पूरी ताकत से उनका विरोध कर रहा है। भारी मशक्कत के बाद पुलिस उसे अपनी गाड़ी में धकेलने में कामयाब रही और सीधा थाने ले आई।
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| \r\n घटना का घटनाक्रम (Timeline of the Ruckus) \r\n | \r\n
| \r\n स्थान: कंकरखेड़ा थाना क्षेत्र, देहरादून हाईवे (मेरठ)। \r\n | \r\n
| \r\n शुरुआत: फौजी यश तोमर द्वारा राहगीरों से गाली-गलौज। \r\n | \r\n
| \r\n पुलिस की एंट्री: डायल-112 को सूचना, PRV का मौके पर पहुंचना। \r\n | \r\n
| \r\n चरम बिंदु: पुलिस से हाथापाई, दारोगा की वर्दी फाड़ना। \r\n | \r\n
| \r\n एक्शन: अतिरिक्त फोर्स का आना, फौजी को हिरासत में लेना। \r\n | \r\n
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सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो, पुलिस अधिकारियों में हड़कंप
\r\n\r\nआज के डिजिटल युग में ऐसी घटनाएं छिपती नहीं हैं। मौके पर मौजूद कई लोगों ने इस पूरी हाथापाई और वर्दी फाड़ने की घटना को अपने मोबाइल कैमरे में कैद कर लिया। रविवार शाम होते-होते यह वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स (X, Facebook, WhatsApp) पर तेजी से वायरल हो गया।
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जैसे ही यह वीडियो पुलिस के आला अधिकारियों के संज्ञान में आया, महकमे में हड़कंप मच गया। एक फौजी द्वारा पुलिस की वर्दी का अपमान किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता था। अधिकारियों ने तुरंत वीडियो की लोकेशन ट्रेस कराई और कंकरखेड़ा पुलिस को आरोपी के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने के आदेश जारी कर दिए।
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सीओ दौराला शिव ठाकुर का बयान: "मिलिट्री पुलिस को दी गई सूचना"
\r\n\r\nइस सनसनीखेज मामले पर पुलिस का आधिकारिक पक्ष सामने आया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए सीओ (CO) दौराला, शिव ठाकुर ने खुद मीडिया को इस पूरे प्रकरण की जानकारी दी।
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सीओ शिव ठाकुर ने स्पष्ट शब्दों में बताया:
\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n"सोशल मीडिया पर एक वीडियो प्रकाश में आया था, जिसमें एक फौजी द्वारा यूपी पुलिस के पीआरवी जवानों के साथ अभद्रता, बदसलूकी और मारपीट की जा रही है। हमारी साइबर सेल और थाना पुलिस ने जब इस वीडियो की जांच की, तो घटनास्थल कंकरखेड़ा थाना क्षेत्र का हाईवे पाया गया।"\r\n
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उन्होंने आगे की कार्रवाई की जानकारी देते हुए कहा:
\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n"पुलिस ने इस दुस्साहसिक घटना का तत्काल संज्ञान लिया है। आरोपी फौजी यश तोमर को कंकरखेड़ा पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। उसके खिलाफ सरकारी कार्य में बाधा डालने, पुलिस से मारपीट करने और वर्दी फाड़ने जैसी गंभीर धाराओं में आवश्यक वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।"\r\n
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सेना के नियमों का कड़ाई से पालन:
\r\n\r\nसीओ ने यह भी स्पष्ट किया कि चूंकि आरोपी भारतीय सेना में कार्यरत एक अग्निवीर है, इसलिए इस मामले की पूरी रिपोर्ट और एफआईआर (FIR) की कॉपी मेरठ स्थित मिलिट्री पुलिस (Military Police) को भेज दी गई है। सेना को अवगत करा दिया गया है ताकि वे भी अपने नियमों के तहत इस अनुशासनहीनता पर कड़ी कार्रवाई कर सकें।
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अग्निवीर योजना और करियर पर कोर्ट मार्शल की तलवार!
\r\n\r\nरक्षा मामलों के जानकारों के मुताबिक, भारतीय सेना में सिविल पुलिस से उलझना और शराब के नशे में सार्वजनिक स्थान पर उत्पात मचाना एक बहुत ही गंभीर अपराध माना जाता है। अग्निवीर (Agniveer) योजना के तहत भर्ती हुए जवानों के लिए अनुशासन के नियम और भी कड़े हैं, क्योंकि उनका प्रदर्शन ही उनके स्थायी कमीशन (Permanent Enrolment) का आधार बनता है।
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इस घटना के बाद यश तोमर का फौजी करियर अब अधर में लटक गया है। सिविल पुलिस की एफआईआर के बाद, सेना भी अपने स्तर पर 'कोर्ट ऑफ इंक्वायरी' (Court of Inquiry) बैठा सकती है। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो यश तोमर को कड़ी सजा के साथ-साथ सेना से तुरंत बर्खास्त (Dismiss) भी किया जा सकता है।
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मेरठ हाईवे की इस घटना ने साफ कर दिया है कि कानून की नजर में कोई भी व्यक्ति, चाहे वह किसी भी पद या बल में क्यों न हो, बड़ा नहीं है। वर्दी का काम जनता की रक्षा करना है, न कि शराब के नशे में जनता और प्रशासन के लिए सिरदर्द बनना। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि यूपी पुलिस और मिलिट्री पुलिस मिलकर इस 'नशेबाज' अग्निवीर पर क्या सख्त नजीर पेश करते हैं।
Sabse pehle comment karne wale banein.