दिल्ली-एनसीआर (Delhi NCR) में वायु प्रदूषण का संकट एक बार फिर चरम पर पहुँच गया है। दिवाली तक जहाँ गाजियाबाद का एवरेज AQI (Air Quality Index) 7 दिनों तक 'रेड जोन' (बहुत खराब से गंभीर) में रहा, वहीं तीन दिन की हल्की राहत के बाद आज स्थिति फिर से बिगड़ गई है। पूरे एनसीआर (NCR) में हवा की गुणवत्ता 'रेड जोन' में बनी हुई है, जिससे लोगों को सांस लेने में भारी दिक्कत होने लगी है। इस सीज़न में पहली बार उत्तर प्रदेश (UP) के 8 शहरों की हवा 'बेहद खराब' या 'गंभीर' श्रेणी में दर्ज की गई है।READ ALSO:-बरेली वालों को डबल गुड न्यूज! मुंबई-बेंगलुरु रूट पर अब उड़ेगा 232 सीटर बड़ा विमान, जल्द नवी मुंबई के लिए भी शुरू होगी फ्लाइट
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एक साथ बिगड़ी NCR की स्थिति

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मौसम में बदलाव और हवा की गति धीमी होने के कारण प्रदूषक तत्व (Pollutants) वातावरण में जमा हो गए हैं, जिससे दिल्ली NCR का एयर क्वालिटी इंडेक्स खतरनाक स्तर पर पहुँच गया है।
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    खतरे का निशान: हवा की गुणवत्ता इतनी खराब है कि अब यह 'सांस लेने लायक नहीं' रह गई है। बागपत का AQI भी 'रेड जोन' तक पहुँच रहा है।
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    उत्तर प्रदेश की स्थिति: गाजियाबाद के साथ-साथ नोएडा, मेरठ, मुजफ्फरनगर और बुलंदशहर की हवा भी 'बेहद खराब' श्रेणी में दर्ज की गई है।
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AQI रैंकिंग और टॉप 7 प्रदूषित शहर

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केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) द्वारा जारी रैंकिंग के अनुसार, गाजियाबाद आज देश के सबसे अधिक प्रदूषित शहरों में से एक है। देश के टॉप 7 सबसे अधिक प्रदूषित शहरों में दिल्ली NCR के ही 6 शहर शामिल हैं।
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शहर
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AQI (एयर क्वालिटी इंडेक्स)
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श्रेणी
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दिल्ली
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377
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बेहद खराब
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भिवाड़ी
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369
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बेहद खराब
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चरखी दादरी
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357
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बेहद खराब
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नोएडा
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354
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बेहद खराब
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मेरठ
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354
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बेहद खराब
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गाजियाबाद
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344
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बेहद खराब
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हापुड़
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343
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बेहद खराब
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Pollution के प्रमुख कारण (CPCB डेटा के अनुसार): 

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    PM-10 (सड़क की धूल): सड़कों की धूल से 86% PM-10 का उत्सर्जन होता है।
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    PM-2.5 (वाहन और धूल): PM-2.5 में 72% हिस्सेदारी सड़कों की धूल की है, जबकि 20% वाहनों के धुएं से आता है।
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    सल्फर डाइऑक्साइड: उद्योगों (Industries) से 58% सल्फर डाइऑक्साइड का उत्सर्जन हो रहा है।
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डॉ. जोशी की सलाह और GRAP की तैयारी

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गाजियाबाद के पल्मोनोलॉजिस्ट (Pulmonologist) डॉ. शरद जोशी ने बढ़ते खतरे पर गहरी चिंता व्यक्त की है।
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    स्वास्थ्य चेतावनी: डॉ. जोशी ने बच्चों, बुजुर्गों और सांस के रोगियों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी है। लोगों को आंखों में जलन और गले में खराश जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
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    बचाव: उन्होंने सभी को बाहरी गतिविधियों के दौरान N95 या डबल सर्जिकल मास्क पहनने की सलाह दी है।
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    प्रशासनिक कदम: CPCB के पूर्वानुमान को देखते हुए प्रशासन ने प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए GRAP (Graded Response Action Plan) के कड़े कदम उठाने की तैयारी शुरू कर दी है।
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पराली जलाने पर कानून और जुर्माना:

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प्रदूषण की सबसे बड़ी वजहों में से एक पराली जलाना है, जो उत्तरी और मध्य भारत में दिवाली के बाद शुरू हो जाता है।
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    NGT प्रतिबंध: 2015 में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने पराली जलाने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया था।
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    जुर्माना (CAQM अधिनियम 2021): केंद्र सरकार के वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) अधिनियम के तहत पराली जलाने पर भारी जुर्माने का प्रावधान है:
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      2 एकड़ से कम जमीन पर: ₹5,000 जुर्माना।
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      2 से 5 एकड़ जमीन पर: ₹10,000 जुर्माना।
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      5 एकड़ से ज्यादा जमीन पर: ₹30,000 जुर्माना।
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प्रदूषण की वजह पराली जलाना, इसे रोकने के लिए कानून भी बना उत्तर और मध्य भारत में दिवाली के बाद पराली जलाने का सिलसिला शुरू हो जाता है। इस वजह से प्रदूषण बढ़ने की रफ्तार भी तेज होने लगती है। हरियाणा और पंजाब में सबसे ज्यादा पराली जलाई जाती है। 2015 में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने पराली जलाने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया था। इससे किसानों को पराली का सफाया करने में परेशानी होने लगी।
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केंद्र सरकार ने वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) अधिनियम 2021 के तहत पराली जलाने पर नियम लागू किए। इसके मुताबिक 2 एकड़ से कम जमीन पर पराली जलाने पर 5,000 रुपए जुर्माने का प्रावधान है। 2 से 5 एकड़ जमीन पर 10,000 रुपए और 5 एकड़ से ज्यादा जमीन पर पराली जलाने पर 30,000 रुपए का जुर्माना लगता है।
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