नोएडा/मेरठ। उत्तर प्रदेश की आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन (EOW) की मेरठ टीम ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए विवादित 'बिल्डर बाबा' उर्फ सचिन दत्ता को नोएडा से गिरफ्तार कर लिया है। सचिन दत्ता पर गाजियाबाद में एक ही फ्लैट को कई बार बेचकर और उस पर फर्जी दस्तावेजों के सहारे विभिन्न बैंकों से करोड़ों रुपये का लोन लेकर धोखाधड़ी करने का आरोप है। यह मामला करीब नौ साल पुराना है, जिसमें EOW लंबे समय से जांच कर रही थी।READ ALSO:-मेरठ वालों सावधान! 5 से ज्यादा चालान पेंडिंग हैं तो रद्द होगा ड्राइविंग लाइसेंस, 83 हजार की 'ब्लैक लिस्ट' तैयार
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क्या है 'बिल्डर बाबा' पर करोड़ों की धोखाधड़ी का मामला?
\r\n\r\nसचिन दत्ता ने गाजियाबाद में श्रीबालाजी हाईटेक कंस्ट्रक्शन कंपनी प्राइवेट लिमिटेड के नाम से एक फर्म बनाई थी। आरोप है कि उसने अपने सहयोगियों और कुछ बैंक कर्मचारियों के साथ मिलीभगत कर एक शातिराना तरीका अपनाया।
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- \r\n एक फ्लैट, कई खरीदार: वह अपनी निर्माणाधीन बिल्डिंग (फोस्टर हाइट्स योजना) के एक ही फ्लैट के आवंटन पत्र कई अलग-अलग खरीदारों को जारी कर देता था।\r\n \r\n
- \r\n बैंकों से मिलीभगत: इसके बाद, वह बैंक के कर्मचारियों से सांठगांठ कर उन सभी फर्जी आवंटन पत्रों पर होम लोन स्वीकृत करा लेता था।\r\n \r\n
- \r\n करोड़ों का गबन: लोन की सारी रकम सीधे कंपनी के खातों में ट्रांसफर कराकर हड़प ली जाती थी। इस तरह उसने बैंकों और सैकड़ों खरीदारों को करोड़ों रुपये का चूना लगाया।\r\n \r\n
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EOW ने 9 साल पुराने केस में कसा शिकंजा
\r\n\r\nइस महाघोटाले का पर्दाफाश तब हुआ जब 2016 में ठगी के शिकार हुए लोगों ने गाजियाबाद के विजयनगर थाने में FIR दर्ज करानी शुरू की। मामले की गंभीरता को देखते हुए शासन ने इनमें से 19 मुकदमों की जांच EOW मेरठ को सौंप दी। जांच में EOW ने सचिन दत्ता को मुख्य आरोपी पाया। इससे पहले उसे 2017 में भी लखनऊ के गोमतीनगर से गिरफ्तार किया गया था, लेकिन वह जमानत पर बाहर आ गया था। अब EOW ने पुख्ता सबूतों के साथ उसे दोबारा नोएडा से गिरफ्तार कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।
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जब 8 दिनों में ही छिन गई थी महामंडलेश्वर की पदवी
\r\n\r\nसचिन दत्ता का विवादों से पुराना नाता रहा है। बिल्डर होने के साथ-साथ उसने धर्म की दुनिया में भी घुसपैठ करने की कोशिश की थी।
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- \r\n उसे प्रयागराज की बाघंबरी गद्दी में निरंजनी अखाड़े का महामंडलेश्वर बनाया गया था और नया नाम सच्चिदानंद गिरी मिला था।\r\n \r\n
- \r\n लेकिन जब उसके खिलाफ धोखाधड़ी, नाइट क्लब चलाने और शराब के कारोबार में शामिल होने के आरोप सामने आए, तो अखाड़ा परिषद ने महज आठ दिनों के अंदर ही उससे यह पदवी छीन ली थी।\r\n \r\n
- \r\n बाद में, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने जब 14 फर्जी बाबाओं की सूची जारी की, तो उसमें सचिन दत्ता उर्फ सच्चिदानंद गिरी का नाम भी शामिल था।\r\n \r\n
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पहले भी जा चुका है जेल
\r\n\r\nEOW की जांच में पता चला कि सचिन दत्ता ने फोस्टर हाइट्स योजना में भी फर्जी दस्तावेजों के जरिए 55.50 लाख रुपए का ऋण लिया था। यह पहली बार नहीं है जब उसे गिरफ्तार किया गया है; इससे पहले साल 2017 में भी उसे लखनऊ के गोमतीनगर एक्सटेंशन से गिरफ्तार किया गया था। अब एक बार फिर उसे गिरफ्तार कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
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8 दिन का 'महामंडलेश्वर' और फर्जी बाबाओं की लिस्ट
\r\n\r\nसचिन दत्ता का विवादों से पुराना नाता रहा है। उसे प्रयागराज की बाघंबरी गद्दी में निरंजनी अखाड़े का महामंडलेश्वर बनाया गया था और एक नया नाम सच्चिदानंद गिरी मिला था। लेकिन जैसे ही उसके खिलाफ ठगी और नाइट क्लब चलाने जैसे गंभीर आरोप सामने आए, अखाड़े ने महज आठ दिनों के भीतर ही उससे महामंडलेश्वर की पदवी छीन ली थी। बाद में, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने जब 14 फर्जी बाबाओं की सूची जारी की, तो उसमें सचिन दत्ता उर्फ सच्चिदानंद गिरी का नाम भी शामिल था।
Sabse pehle comment karne wale banein.