मेरठ/मोदीपुरम/वेस्ट यूपी:
\r\n\r\nशुक्रवार, 16 जनवरी 2026 का दिन मौसम के इतिहास के पन्नों में एक 'बर्फीले अध्याय' के रूप में दर्ज हो गया है। पहाड़ों पर हो रही भारी बर्फबारी और मैदानी इलाकों में पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) की सक्रियता ने मिलकर ऐसा कहर बरपाया कि लोग दिन में ही घरों में दुबकने को मजबूर हो गए। सूरज बादलों और कोहरे की इतनी मोटी परत के पीछे छिपा रहा कि दिन और रात का फर्क मिट गया।READ ALSO:-मेरठ में 'कोल्ड अटैक': डीएम ने फिर चलाया कलम, 17 जनवरी को 9वीं तक के स्कूल बंद; 10वीं-12वीं वालों के लिए समय में बड़ा बदलाव
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शुक्रवार को अधिकतम तापमान (Maximum Temperature) में ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई। पारा लुढ़ककर 13.6 डिग्री सेल्सियस पर आ गया, जिसने पिछले 21 सालों का रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिया। इससे पहले इतनी भीषण 'दिन की ठंड' 2006 में महसूस की गई थी। शाम होते-होते हालात और बिगड़ गए। शाम 6 बजे से ही कोहरे ने अपने पैर पसारने शुरू किए और 8 बजते-बजते विजिबिलिटी (दृश्यता) शून्य के करीब पहुंच गई।
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इस 3000+ शब्दों की विशेष वेदर रिपोर्ट में, हम जानेंगे कि मौसम वैज्ञानिकों ने अगले 48 घंटों के लिए क्या भविष्यवाणी की है, 21 साल के आंकड़ों का विश्लेषण क्या कहता है, और इस जानलेवा ठंड से आप अपना बचाव कैसे कर सकते हैं।
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वो शुक्रवार, जब सूरज निकला ही नहीं: एक आंखों देखी रिपोर्ट
\r\n\r\nशुक्रवार की सुबह जब लोगों की आंख खुली, तो बाहर का नजारा किसी हिल स्टेशन जैसा नहीं, बल्कि एक 'गैस चैंबर' जैसा था—फर्क सिर्फ इतना था कि यह धुंध प्रदूषण की नहीं, कोहरे की थी। ठंड ऐसी थी जो कपड़ों की परतों को भेदकर सीधे हड्डियों तक पहुंच रही थी।
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विजिबिलिटी: 10 मीटर का दायरा
\r\n\r\nसुबह के समय कोहरा इतना घना था कि 10 मीटर दूर खड़ा इंसान भी नजर नहीं आ रहा था। सड़कें, इमारतें और पेड़ सब कुछ सफेद धुंध में गायब हो चुके थे।
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- \r\n सड़क पर रेंगते वाहन: सड़कों पर फर्राटा भरने वाली गाड़ियां चींटी की चाल चलने को मजबूर हो गईं। दिल्ली-देहरादून हाईवे, जो आमतौर पर व्यस्त रहता है, वहां गाड़ियां इंडिकेटर (Blinkers) जलाकर कतार में चलती दिखीं।\r\n \r\n
- \r\n दोपहर में शाम का अहसास: दोपहर 12 बजे भी कोहरा छाया रहा। वाहन चालकों को दिन के उजाले में भी हेडलाइट्स (Headlights) जलानी पड़ीं। सूरज की एक किरण देखने के लिए लोग तरस गए।\r\n \r\n
- \r\n शाम का 'ब्लैकआउट': दिन भर की कसर शाम ने पूरी कर दी। शाम 5 बजे ही अंधेरा छाने लगा और 6 बजे कोहरे ने दोबारा वापसी की। रात 8 बजे तक स्थिति यह थी कि स्ट्रीट लाइट्स की रोशनी भी कोहरे में बिखरकर रह गई थी। ऐसा लग रहा था मानो शहर पर कोई सफेद चादर डाल दी गई हो।\r\n \r\n
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आंकड़ों का खेल: 21 साल का रिकॉर्ड कैसे टूटा?
\r\n\r\nमौसम विभाग के आंकड़े गवाही दे रहे हैं कि यह कोई सामान्य ठंड नहीं है। इसे मौसम विज्ञान की भाषा में 'सीवियर कोल्ड डे' (Severe Cold Day) कहा जा सकता है। जब अधिकतम तापमान सामान्य से काफी नीचे गिर जाता है, तो उसे कोल्ड डे कहा जाता है, और शुक्रवार को यही हुआ।
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तापमान का गिरता मीटर
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- \r\n शुक्रवार (16 जनवरी) का अधिकतम तापमान: 13.6 डिग्री सेल्सियस (रिकॉर्ड ब्रेकिंग)\r\n \r\n
- \r\n न्यूनतम तापमान: 6.0 डिग्री सेल्सियस\r\n \r\n
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इतिहास के आईने में 16 जनवरी
\r\n\r\nपिछले दो दशकों के आंकड़ों पर नजर डालें तो पता चलता है कि 16 जनवरी को दिन का तापमान इतना कम कभी नहीं रहा।
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- \r\n वर्ष 2026 (वर्तमान): 13.6 डिग्री (रिकॉर्ड ब्रेकिंग)\r\n \r\n
- \r\n वर्ष 2020: 15.6 डिग्री सेल्सियस\r\n \r\n
- \r\n वर्ष 2006: 14.7 डिग्री सेल्सियस\r\n \r\n
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विशेषज्ञों का कहना है कि सामान्यत: जनवरी के मध्य में दिन का तापमान 18-20 डिग्री के आसपास रहता है, लेकिन 13 डिग्री पर पारा आने से लोगों की दिनचर्या पूरी तरह प्रभावित हुई है। यह गिरावट बताती है कि जलवायु में किस तरह के चरम बदलाव आ रहे हैं। 2006 के बाद यह पहला मौका है जब दिन में इतनी ठिठुरन महसूस की गई।
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वैज्ञानिक कारण: आखिर क्यों हुई इतनी ठंड?
\r\n\r\nआम आदमी के लिए यह सिर्फ ठंड है, लेकिन इसके पीछे के भौगोलिक और मौसमी कारणों को समझना जरूरी है। भारतीय कृषि प्रणाली अनुसंधान संस्थान (IIFSR), मोदीपुरम के वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक डॉ. एम. शमीम ने इस स्थिति का विस्तार से विश्लेषण किया है।
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(A) पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance)
\r\n\r\nडॉ. शमीम के अनुसार, इस समय एक मजबूत पश्चिमी विक्षोभ उत्तर भारत से गुजर रहा है।
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- \r\n पहाड़ों पर बर्फबारी: इसके प्रभाव से जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के पहाड़ों पर भारी बर्फबारी हो रही है।\r\n \r\n
- \r\n बर्फीली हवाएं: वहां से चलने वाली बर्फीली हवाएं (Icy Winds) सीधे मैदानी इलाकों (मेरठ, मुजफ्फरनगर, दिल्ली-एनसीआर) से टकरा रही हैं, जिससे तापमान में भारी गिरावट आई है।\r\n \r\n
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(B) कोहरे की चादर (Fog Layer)
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- \r\n हवा में नमी (Moisture) बहुत ज्यादा है। हवा की गति धीमी होने के कारण यह नमी सतह के पास जम गई है, जिससे घना कोहरा बना है।\r\n \r\n
- \r\n यह कोहरा सूरज की किरणों (Solar Radiation) को धरती तक पहुंचने से रोक रहा है। इसे 'ग्रीनहाउस प्रभाव' का उल्टा मान सकते हैं—गर्मी नीचे आ ही नहीं पा रही। जब धरती गर्म नहीं हो पाती, तो दिन का तापमान ऊपर नहीं चढ़ता।\r\n \r\n
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भविष्यवाणी: अगले 48 घंटे भारी
\r\n\r\nडॉ. शमीम ने चेतावनी दी है कि अगले दो दिनों तक राहत की कोई उम्मीद नहीं है।
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- \r\n हल्की बारिश: पश्चिमी विक्षोभ के कारण कुछ स्थानों पर बूंदाबांदी या हल्की बारिश हो सकती है, जिससे ठंड और बढ़ सकती है।\r\n \r\n
- \r\n कोहरा: अगले कुछ दिनों तक सुबह और रात के समय घना कोहरा छाया रहेगा।\r\n \r\n
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स्कूलों का हाल: खुलते ही ठिठुर गए नौनिहाल
\r\n\r\nप्रशासन और मौसम के बीच के तालमेल की कमी का खामियाजा स्कूली बच्चों को भुगतना पड़ा। कई दिनों की छुट्टियों के बाद जब शुक्रवार को स्कूल खुले, तो मौसम ने सबसे ज्यादा सख्ती दिखाई।
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समय बदला, पर मौसम नहीं
\r\n\r\nजिला प्रशासन ने एहतियात के तौर पर स्कूलों का समय बदलकर सुबह 10 बजे से दोपहर 3 बजे तक कर दिया था। तर्क था कि 10 बजे तक कोहरा छंट जाएगा और धूप निकल आएगी।
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- \r\n हकीकत: शुक्रवार को सुबह 11 बजे तक भी घना कोहरा छाया रहा। धूप के दर्शन तक नहीं हुए। दृश्यता बेहद कम थी।\r\n \r\n
- \r\n बच्चों की पीड़ा: बस स्टॉप पर खड़े बच्चे स्वेटर, जैकेट और मफलर में लिपटे होने के बावजूद कांपते नजर आए। क्लासरूम्स, जो अक्सर ठंडे रहते हैं, वहां बैठकर पढ़ाई करना किसी सजा से कम नहीं था। बच्चों के हाथ ठंड से इतने सुन्न थे कि वे ठीक से लिख भी नहीं पा रहे थे।\r\n \r\n
- \r\n अभिभावकों की चिंता: कई अभिभावकों ने नाराजगी जताई। उनका कहना था, "जब बड़ों के हाथ-पैर सुन्न हो रहे हैं, तो बच्चों को स्कूल बुलाना कहां की समझदारी है? प्रशासन को मौसम का मिजाज देखकर फैसला लेना चाहिए था।"\r\n \r\n
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जनजीवन अस्त-व्यस्त: हर वर्ग प्रभावित
\r\n\r\nकोहरे और ठंड की मार ने समाज के हर तबके को प्रभावित किया है। शहर की रफ्तार थम सी गई है।
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(A) दिहाड़ी मजदूर और रेहड़ी पटरी वाले
\r\n\r\nसबसे ज्यादा मार उन पर पड़ी है जो रोज कमाते और खाते हैं। ठंड के कारण बाजार सूने रहे, लोग घरों से नहीं निकले, जिससे रिक्शा चालकों, ऑटो चालकों और फेरीवालों की कमाई ठप हो गई। चौराहों पर लोग कचरा और लकड़ियां जलाकर हाथ तापते नजर आए।
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(B) नौकरीपेशा लोग
\r\n\r\nऑफिस जाने वाले लोगों को भारी मुसीबत का सामना करना पड़ा। दोपहिया वाहन (Bike/Scooter) चलाने वालों के लिए हवा के थपेड़े बर्दाश्त करना मुश्किल था। हेलमेट और दस्तानों के बावजूद उंगलियां सुन्न पड़ रही थीं। कई लोग ऑफिस देरी से पहुंचे।
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(C) यातायात और रेलवे
\r\n\r\nकोहरे का असर ट्रेनों और बसों पर भी पड़ा।
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- \r\n रेलवे: कई ट्रेनें अपने निर्धारित समय से 4 से 6 घंटे की देरी से चल रही हैं। यात्रियों को प्लेटफार्म पर ठिठुरते हुए अपनी ट्रेन का इंतजार करना पड़ा।\r\n \r\n
- \r\n रोडवेज: विजिबिलिटी कम होने के कारण बसों की रफ्तार 30-40 किमी/घंटा तक सीमित हो गई। दिल्ली-देहरादून हाईवे पर कई जगह जाम जैसे हालात बने रहे क्योंकि गाड़ियां रेंग रही थीं।\r\n \r\n
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किसान और खेती: एक तरफ खुशी, एक तरफ गम
\r\n\r\nकिसानों के लिए यह मौसम मिला-जुला असर लेकर आया है। कृषि वैज्ञानिकों ने इसे लेकर विशेष एडवाइजरी जारी की है।
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- \r\n गेहूं (Wheat) के लिए वरदान: गेहूं की फसल के लिए यह ठंड और कोहरा किसी टॉनिक से कम नहीं है। तापमान जितना कम होगा, गेहूं में 'टिलरिंग' (फुटाव) उतनी ही अच्छी होगी और दाना मोटा होगा। इससे बंपर पैदावार की उम्मीद है।\r\n \r\n
- \r\n सरसों और आलू (Mustard & Potato) के लिए खतरा: दूसरी तरफ, आलू और सरसों के किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें हैं।\r\n\r\n
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- \r\n आलू: लगातार कोहरा और नमी आलू में 'झुलसा रोग' (Late Blight) का कारण बन सकती है, जिससे पूरी फसल बर्बाद हो सकती है।\r\n \r\n
- \r\n सरसों: सरसों के फूलों पर पाला (Frost) जमने से फलियां नहीं बन पातीं।\r\n \r\n
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- \r\n कृषि सलाह: वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी है कि वे पाले से बचाने के लिए खेतों में हल्की सिंचाई करें और आवश्यकतानुसार फफूंदीनाशक का छिड़काव करें।\r\n \r\n
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स्वास्थ्य अलर्ट: 'हार्ट' और 'सांस' के मरीज सावधान
\r\n\r\nमेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल के डॉक्टरों ने इस मौसम को स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक बताया है। ठंड बढ़ने के साथ ही अस्पतालों की ओपीडी में मरीजों की संख्या बढ़ गई है।
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कोल्ड स्ट्रोक का खतरा
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- \r\n हृदय रोगी (Heart Patients): ठंड में शरीर की नसें सिकुड़ जाती हैं (Vasoconstriction), जिससे ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है। इससे हार्ट अटैक और ब्रेन स्ट्रोक का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। डॉक्टरों ने बुजुर्गों को सुबह की सैर (Morning Walk) पूरी तरह बंद करने की सलाह दी है।\r\n \r\n
- \r\n सांस के मरीज: कोहरे में प्रदूषक तत्व (Pollutants) और धुएं के कण फंस जाते हैं, जिससे हवा जहरीली हो जाती है। अस्थमा, सीओपीडी (COPD) और ब्रोंकाइटिस के मरीजों को इनहेलर साथ रखने और घर के अंदर रहने की सलाह दी गई है।\r\n \r\n
- \r\n हाइपोथर्मिया: बच्चों और बुजुर्गों में शरीर का तापमान अचानक गिरने (Hypothermia) का खतरा रहता है, जिससे जान भी जा सकती है।\r\n \r\n
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कोहरे में ड्राइविंग: जान बचाने के 5 मंत्र
\r\n\r\n'खबरीलाल' अपने पाठकों से अपील करता है कि कोहरे में ड्राइविंग करते समय इन बातों का विशेष ध्यान रखें, क्योंकि हाईवे पर विजिबिलिटी बहुत कम है:
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- \r\n लो बीम (Low Beam) का प्रयोग: हेडलाइट्स को हमेशा 'लो बीम' पर रखें। हाई बीम पर रोशनी कोहरे के कणों से टकराकर वापस आपकी आंखों में आती है, जिससे सामने कुछ नहीं दिखता (चकाचौंध होती है)।\r\n \r\n
- \r\n फॉग लैंप्स (Fog Lamps): अगर गाड़ी में फॉग लैंप्स हैं, तो उनका इस्तेमाल जरूर करें। ये सड़क के करीब की रोशनी देते हैं।\r\n \r\n
- \r\n इंडिकेटर नहीं, हेडलाइट जलाएं: कई लोग सिर्फ पार्किंग लाइट जलाकर चलते हैं, जो गलत है। पूरी हेडलाइट जलाएं ताकि पीछे और आगे वाले को आप दिख सकें।\r\n \r\n
- \r\n सड़क की पट्टी: सड़क के किनारे बनी सफेद या पीली पट्टी (Lane markings) को फॉलो करते हुए गाड़ी चलाएं।\r\n \r\n
- \r\n दूरी बनाए रखें: आगे चलने वाली गाड़ी से सुरक्षित दूरी (Safe Distance) बनाकर चलें, क्योंकि गीली सड़क पर ब्रेक देर से लगते हैं।\r\n \r\n
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अभी और सताएगी सर्दी
\r\n\r\nकुल मिलाकर, मौसम विभाग और डॉ. शमीम के पूर्वानुमान बताते हैं कि अभी सर्दी का सितम जारी रहेगा। पश्चिमी विक्षोभ का असर अगले कुछ दिनों तक बना रहेगा। 21 साल का रिकॉर्ड टूटना यह संकेत देता है कि हमें मौसम के इन बदलावों के लिए तैयार रहना होगा।
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अगले कुछ दिन धैर्य और सावधानी के हैं। अगर बहुत जरूरी न हो तो शाम के बाद और सुबह जल्दी घर से बाहर न निकलें। गर्म पानी पिएं, लेयर्ड कपड़े पहनें और अपने बच्चों व बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखें। प्रशासन के अगले आदेशों (खासकर स्कूलों को लेकर) पर नजर बनाए रखें, क्योंकि अगर मौसम ऐसा ही रहा तो छुट्टियों पर पुनर्विचार हो सकता है।
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सूर्यदेव के दर्शन अभी दुर्लभ रहेंगे, तब तक अपनी सुरक्षा खुद करें।
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महत्वपूर्ण तथ्य (Quick Facts Box)
\r\n\r\n| \r\n विवरण \r\n | \r\n \r\n आंकड़ा/जानकारी \r\n | \r\n
| \r\n तिथि \r\n | \r\n \r\n 16 जनवरी 2026 (शुक्रवार) \r\n | \r\n
| \r\n अधिकतम तापमान (Max Temp) \r\n | \r\n \r\n 13.6°C (21 साल का रिकॉर्ड टूटा) \r\n | \r\n
| \r\n न्यूनतम तापमान (Min Temp) \r\n | \r\n \r\n 6.0°C \r\n | \r\n
| \r\n दृश्यता (Visibility) \r\n | \r\n \r\n 10 मीटर से कम (सुबह और रात) \r\n | \r\n
| \r\n प्रभावित क्षेत्र \r\n | \r\n \r\n मेरठ, मुजफ्फरनगर, दिल्ली-देहरादून हाईवे \r\n | \r\n
| \r\n मौसम वैज्ञानिक \r\n | \r\n \r\n डॉ. एम. शमीम (IIFSR, मोदीपुरम) \r\n | \r\n
| \r\n कारण \r\n | \r\n \r\n पश्चिमी विक्षोभ + पहाड़ी बर्फबारी \r\n | \r\n
| \r\n पूर्वानुमान \r\n | \r\n \r\n अगले 2 दिन कोहरा, शीतलहर और हल्की बारिश की संभावना \r\n | \r\n
| \r\n स्कूल का समय \r\n | \r\n \r\n सुबह 10 बजे से दोपहर 3 बजे तक \r\n | \r\n
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
\r\n\r\nQ: क्या कल (शनिवार) भी ऐसा ही कोहरा रहेगा?
\r\n\r\nA: जी हां, मौसम वैज्ञानिक डॉ. शमीम के अनुसार, पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से अगले दो दिनों तक घने कोहरे और शीतलहर की स्थिति बनी रहेगी। हल्की बारिश भी हो सकती है।
\r\n\r\nQ: 13 डिग्री अधिकतम तापमान का क्या मतलब है?
\r\n\r\nA: इसका मतलब है कि पूरे दिन में, यहां तक कि दोपहर के समय भी, तापमान 13 डिग्री से ऊपर नहीं गया। यह सामान्य से 6-7 डिग्री कम है। इसे 'सीवियर कोल्ड डे' कहा जाता है।
\r\n\r\nQ: क्या स्कूलों में फिर से छुट्टी हो सकती है?
\r\n\r\nA: फिलहाल प्रशासन ने समय बदला है (10 से 3)। लेकिन बच्चों को हो रही परेशानी को देखते हुए अभिभावक छुट्टी की मांग कर रहे हैं। आधिकारिक आदेश के लिए खबरों पर नजर रखें।
\r\n\r\nQ: कोहरे में कौन सी लाइट जलाकर गाड़ी चलानी चाहिए?
\r\n\r\nA: कोहरे में हमेशा 'लो बीम' (Low Beam) पर हेडलाइट और फॉग लैंप्स जलाकर गाड़ी चलानी चाहिए। हाई बीम का इस्तेमाल न करें।
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कोहरा और ठंड सिर्फ मौसम नहीं, बल्कि एक आपदा भी बन सकते हैं अगर हम सतर्क न रहें। सड़क पर 'हीरो' बनने की कोशिश न करें, रफ्तार धीमी रखें। अपने आस-पास के बेघर लोगों और जानवरों का भी ख्याल रखें—पुराने कपड़े या अलाव उन्हें भी थोड़ी राहत दे सकते हैं।
Sabse pehle comment karne wale banein.