मेरठ/गाजियाबाद: उत्तर प्रदेश परिवहन निगम (UPSRTC) की बसों में यात्रियों, विशेषकर महिलाओं और दिव्यांगों के साथ अभद्रता के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। ताजा मामला मेरठ और गाजियाबाद (Meerut News) के बीच का है, जिसने मानवता को शर्मसार कर दिया है। यहां एक रोडवेज बस के परिचालक (कंडक्टर) ने एक दिव्यांग युवती के साथ केवल इसलिए मारपीट की और उसे बाल पकड़कर बस से नीचे फेंक दिया, क्योंकि उसने अपना बस पास दिखाया था।READ ALSO:-नोएडा में 'OTT ठगी गैंग' का भंडाफोड़: 25 साल की कनिष्का निकली मास्टरमाइंड; 100 डॉलर में नेटफ्लिक्स-अमेजॉन का झांसा देकर NRIs को लगाया चूना
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घटना के बाद पीड़िता ने हिम्मत नहीं हारी और परिजनों के साथ मिलकर शिकायत दर्ज कराई। मामले की गंभीरता को देखते हुए रोडवेज अधिकारियों ने आरोपी कंडक्टर को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड (Suspend) कर दिया है।
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क्या है पूरा मामला?
\r\n\r\nपीड़ित युवती मेरठ के सिवालखास क्षेत्र की रहने वाली है और दिव्यांग है। वह गाजियाबाद के साहिबाबाद स्थित एक कंपनी में नौकरी करती है। गुरुवार (11 दिसंबर) की सुबह वह रोज की तरह नौकरी पर जाने के लिए निकली थी।
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युवती ने गाजियाबाद के मोहन नगर मोड़ पर एक रोडवेज बस को हाथ देकर रुकवाया। बस में चढ़ते ही उसने नियमानुसार अपना सरकारी बस पास कंडक्टर को दिखाया। आरोप है कि पास देखते ही कंडक्टर आग-बबूला हो गया। यूपी रोडवेज में अक्सर देखा गया है कि पास धारकों को लेकर स्टाफ का रवैया नकारात्मक रहता है, लेकिन इस बार यह रवैया अमानवीयता की हदें पार कर गया।
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बाल नोचे, थप्पड़ मारा और सड़क पर फेंका
\r\n\r\nपीड़िता के अनुसार, ऑफिस के लिए देरी हो रही थी, इसलिए उसने बस में चढ़ने का प्रयास किया। इस पर कंडक्टर ने उसे धक्का दिया और थप्पड़ मार दिया। जब दिव्यांग युवती ने इसका विरोध किया, तो आरोपी कंडक्टर ने आव देखा न ताव, युवती के बाल पकड़े और उसे घसीटते हुए बस से नीचे सड़क पर फेंक दिया।
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इतना ही नहीं, जब घायल युवती ने सबूत के तौर पर अपने मोबाइल से वीडियो बनाने की कोशिश की, तो कंडक्टर ने उसका मोबाइल छीनकर जमीन पर पटक दिया, जिससे मोबाइल टूट गया।
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तमाशबीन बनी रही भीड़
\r\n\r\nइस घटना का सबसे दुखद पहलू यह रहा कि बस में बैठी सवारियां और मोहन नगर मोड़ पर खड़े लोग तमाशबीन बने रहे। एक दिव्यांग बेटी सड़क पर रोती रही, लेकिन किसी ने कंडक्टर का विरोध करने की हिम्मत नहीं दिखाई। इसके बाद आरोपी कंडक्टर गालियां देता हुआ बस लेकर वहां से रफूचक्कर हो गया।
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4 घंटे तक अधिकारियों का इंतजार, फिर एक्शन
\r\n\r\nरोती-बिलखती युवती किसी तरह अपने ऑफिस पहुंची। शाम को घर लौटने पर उसने आपबीती परिजनों को बताई। शुक्रवार सुबह (12 दिसंबर) परिजन युवती को लेकर मेरठ के भैसाली डिपो (Bhaisali Depot) पहुंचे।
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वहां भी सिस्टम की लापरवाही दिखी। परिजन करीब 4 घंटे तक क्षेत्रीय प्रबंधक (RM) का इंतजार करते रहे, लेकिन वे नहीं मिले। बाद में कुछ संवेदनशील कर्मचारियों ने फोन पर अधिकारियों से बात कराई। युवती के भाई ने पूरी घटना बताई, जिसके बाद विभाग हरकत में आया।
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बस ट्रेस हुई, आरोपी अमित सस्पेंड
\r\n\r\nपीड़ित परिवार ने अपनी तहरीर में बस का नंबर UP81BT7114 बताया था। रोडवेज स्टाफ ने तुरंत ट्रैकिंग सिस्टम के जरिए बस को ट्रेस किया। बस उस वक्त रूट पर थी। आरोपी परिचालक की पहचान अमित के रूप में हुई है।
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रोडवेज के दिवस अधिकारी सुरेश चंद ने मामले की पुष्टि करते हुए कहा:
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"शिकायत मिलते ही आरोपी परिचालक अमित को 'रूट ऑफ' कर दिया गया है और उसे तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर वापस बुला लिया गया है। एक दिव्यांग युवती के साथ ऐसी अभद्रता किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मामले की विभागीय जांच शुरू कर दी गई है और दोषी पाए जाने पर बर्खास्तगी की कार्रवाई भी हो सकती है।"\r\n
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यह घटना न केवल यूपी रोडवेज (UPSRTC) की कार्यशैली पर सवाल उठाती है, बल्कि समाज की संवेदनहीनता को भी उजागर करती है। सरकार दिव्यांगों को सुविधा देने के लिए पास जारी करती है, लेकिन धरातल पर कर्मचारी इसे बोझ मानते हैं। गनीमत रही कि परिजनों की शिकायत पर तुरंत कार्रवाई हुई, लेकिन सवाल यह है कि क्या पब्लिक ट्रांसपोर्ट महिलाओं और दिव्यांगों के लिए सुरक्षित है?
Sabse pehle comment karne wale banein.