बिजनौर (कृषि एवं पशुपालन डेस्क): 06 अगस्त 2026 उत्तर भारत के कई राज्यों में एक बार फिर से पशुओं के लिए जानलेवा साबित होने वाली 'लम्पी स्किन डिजीज' (Lumpy Skin Disease - LSD) ने दस्तक दे दी है। इस संक्रामक और घातक वायरस के बढ़ते खतरे को देखते हुए उत्तर प्रदेश का बिजनौर जिला प्रशासन पूरी तरह से सतर्क हो गया है। जिलाधिकारी (DM) जसजीत कौर ने पशुधन की सुरक्षा और वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए जिले में तत्काल प्रभाव से कई कड़े और महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश लागू कर दिए हैं।READ ALSO:-बिजनौर में एक्शन मोड में डीएम जसजीत कौर: चांदपुर-हस्तिनापुर बाढ़ प्रभावित इलाकों का लिया जायजा, 11 किमी लंबे सुरक्षा बांध के लिए ग्रामीणों को दिया भरोसा!
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चूंकि बिजनौर एक सीमावर्ती जिला है, इसलिए यहाँ संक्रमण फैलने का जोखिम अधिक रहता है। इसे ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने पशुओं की आवाजाही से लेकर उनकी खरीद-फरोख्त तक पर सख्त पाबंदियां लगा दी हैं।
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क्यों उठाया गया यह सख्त कदम? (The Looming Threat of LSD)

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जिलाधिकारी जसजीत कौर ने स्थिति की गंभीरता को स्पष्ट करते हुए बताया कि हाल ही में उत्तराखण्ड, हिमाचल प्रदेश और हरियाणा सहित कई सीमावर्ती राज्यों में गोवंशीय पशुओं में लम्पी स्किन रोग के संक्रमण की आधिकारिक पुष्टि हुई है। चिंता का विषय यह है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के भी कुछ जनपदों में इस वायरस के संदिग्ध और पुष्ट प्रकरण सामने आने लगे हैं।
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यह एक तेजी से फैलने वाली वायरस जनित संक्रामक बीमारी है। इसका फैलाव मुख्य रूप से मच्छरों, मक्खियों, किलनी (Ticks) और अन्य रक्त चूसने वाले वाहक कीटों के माध्यम से एक पशु से दूसरे पशु में बहुत तीव्र गति से होता है। ऐसे में समय रहते एहतियाती कदम उठाना बेहद जरूरी हो गया था।
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पशु मेलों और अंतरराज्यीय परिवहन पर 'पूर्ण प्रतिबंध' (Total Ban on Transport and Markets)

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संक्रमण की चेन (Chain of Infection) को तोड़ने के लिए जिलाधिकारी ने जिले में धारा 144 जैसी सख्ती का आभास कराते हुए निम्नलिखित प्रतिबंध तत्काल प्रभाव से लागू कर दिए हैं:
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    अंतरराज्यीय परिवहन पर रोक: जनपद बिजनौर की सीमाओं से गोवंश एवं महिषवंशीय (भैंस प्रजाति) पशुओं के अंतरराज्यीय परिवहन (Inter-state Transport) पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है। नाकों और चेकपोस्ट पर पुलिस और पशुपालन विभाग की टीमें कड़ी निगरानी रखेंगी।
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  3. \r\n
    पशु बाजारों पर ताला: जनपद के भीतर लगने वाले सभी साप्ताहिक पशु पैठ, पशु बाजार, हाट और पशु मेलों के आयोजन पर आगामी आदेशों तक पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। किसी भी स्थान पर पशुओं की भीड़ इकट्ठा करने की सख्त मनाही है।
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युद्धस्तर पर चलेगा सर्विलांस और 'रिंग टीकाकरण' (Ring Vaccination Strategy)

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जिलाधिकारी ने मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी (Chief Veterinary Officer - CVO) और उनकी पूरी टीम को निर्देशित किया है कि वे अपने कार्यालयों से निकलकर फील्ड में उतरें।
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    व्यापक सर्विलांस: जिले के हर ब्लॉक और ग्राम पंचायत स्तर पर व्यापक सर्विलांस अभियान (Surveillance Campaign) संचालित किया जाए। यदि किसी भी गांव या गोशाला में लम्पी स्किन डिजीज (LSD) का कोई संदिग्ध या पुष्ट मामला मिलता है, तो तत्काल आवश्यक कार्रवाई (रैपिड रिस्पांस) सुनिश्चित की जाए।
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    रिंग टीकाकरण (Ring Vaccination): प्रभावित क्षेत्रों में रोग नियंत्रण के लिए 'रिंग टीकाकरण' पद्धति अपनाई जाएगी। इसके तहत, यदि किसी पशु में संक्रमण की पुष्टि होती है, तो उसके आसपास के एक निश्चित दायरे (Radius) में मौजूद सभी स्वस्थ पशुओं का तुरंत टीकाकरण किया जाएगा, ताकि संक्रमण को एक ही जगह पर 'लॉक' किया जा सके।
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राष्ट्रीय गोकुल मिशन के लिए विशेष और सख्त नियम

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जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि केंद्र सरकार की महात्वाकांक्षी योजना 'राष्ट्रीय गोकुल मिशन' (Rashtriya Gokul Mission) के अंतर्गत अन्य राज्यों से उच्च नस्ल के गोवंशीय पशुओं को बिजनौर में प्रवेश की अनुमति केवल विशेष और अत्यंत कड़ी शर्तों के साथ ही दी जाएगी:
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    वैध मेडिकल प्रमाण-पत्र: पशु के पास पूर्ण टीकाकरण का वैध मेडिकल सर्टिफिकेट होना अनिवार्य है।
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    डिजिटल रिकॉर्ड: पशु का पूरा विवरण 'भारत पशुधन एप' (Bharat Pashudhan App) पर अनिवार्य रूप से अपलोड होना चाहिए।
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    पहचान का सटीक मिलान: किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी रोकने के लिए पशुपालक के व्यक्तिगत पहचान पत्र (आधार नंबर) और पशु की ईयर टैगिंग (Ear Tagging) का मौके पर कड़ाई से मिलान (Verification) सुनिश्चित किया जाएगा। इन सभी मानकों को पूरा करने वाले पशुओं को ही जिले की सीमा में प्रवेश मिलेगा।
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क्या है लम्पी स्किन डिजीज (LSD) और इसके प्रमुख लक्षण?

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पशुपालकों की जागरूकता के लिए यह जानना अत्यंत आवश्यक है कि लम्पी वायरस क्या है। यह पॉक्सविरिडे (Poxviridae) परिवार के 'कैप्रिपॉक्स' (Capripox) वायरस के कारण होता है।
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बीमार पशुओं में दिखने वाले प्रमुख लक्षण:

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    पशु को तेज बुखार आना और उसका सुस्त पड़ जाना।
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  3. \r\n
    पशु की त्वचा (स्किन) पर 2 से 5 सेंटीमीटर की मोटी-मोटी गांठें (Nodules) या चकत्ते उभर आना।
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    आंखों और नाक से लगातार पानी या स्राव बहना।
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    मुंह से लार टपकना और चारा-पानी खाना छोड़ देना।
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    दुधारू पशुओं की दूध देने की क्षमता में अचानक भारी गिरावट आना।
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  11. \r\n
    गंभीर स्थिति में पशु की मृत्यु हो जाना।
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पशुपालकों के लिए प्रशासन की विशेष एडवाइजरी (Advisory for Farmers)

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प्रशासन ने जिले के सभी पशुपालकों, किसानों और गोशाला संचालकों से अपील की है कि वे घबराएं नहीं, बल्कि पूरी सतर्कता बरतें। बचाव ही इस बीमारी का सबसे अच्छा इलाज है।
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    साफ-सफाई रखें: पशुओं के बाड़े में साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें। मच्छरों और मक्खियों को भगाने के लिए शाम के समय बाड़े में नीम के पत्तों का धुआं करें।
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    संक्रमित पशु को अलग करें: यदि किसी पशु में लम्पी बीमारी के लक्षण दिखाई दें, तो उसे तुरंत स्वस्थ पशुओं के झुंड से अलग (Isolate) कर दें और उसका चारा-पानी अलग बर्तनों में रखें।
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    तत्काल सूचना दें: किसी भी संदिग्ध स्थिति में बिना देरी किए नजदीकी पशु चिकित्सालय या पशु चिकित्सा अधिकारी से संपर्क करें। झोलाछाप डॉक्टरों से पशु का इलाज कतई न कराएं।
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जिलाधिकारी जसजीत कौर ने अंत में सभी संबंधित प्रशासनिक, पुलिस और पशुपालन विभाग के अधिकारियों को सख्त चेतावनी देते हुए निर्देशित किया है कि शासन द्वारा जारी इन दिशा-निर्देशों का कड़ाई (Zero Tolerance Policy) से अनुपालन सुनिश्चित कराया जाए। लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों या नियम तोड़ने वाले पशु व्यापारियों के खिलाफ महामारी अधिनियम के तहत सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। यह सभी आदेश जनपद में तत्काल प्रभाव से लागू कर दिए गए हैं।
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(बिजनौर प्रशासन पशुधन की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है, पशुपालक भी सहयोग करें और अपने पशुओं को सुरक्षित रखें।)
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