नई दिल्ली: अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर, बाल अधिकार कार्यकर्ताओं ने भारत में बाल विवाह (Child Marriage) के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया है। 'जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन' (JRC) के संस्थापक भुवन रिभु ने जोर देकर कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत 2047 के दृष्टिकोण को तभी प्राप्त किया जा सकता है, जब देश को बाल विवाह मुक्त घोषित किया जाए। उन्होंने कहा कि भारत यह साबित कर रहा है कि बाल विवाह को समाप्त करना एक प्राप्त करने योग्य वास्तविकता है।READ ALSO:-बागपत ट्रिपल मर्डर: मौलाना की पत्नी और दो मासूम बेटियों की मस्जिद के कमरे में बेरहमी से हत्या, खून से लथपथ मिले शव; अफगानी मंत्री के स्वागत में गए थे मौलाना, DIG मेरठ मौके पर
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बाल विवाह में आई उल्लेखनीय कमी
\r\n\r\nकेंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अनुसार, बाल विवाह निषेध अधिनियम (PCMA), 2006 के सख्त कार्यान्वयन के बाद देश में बाल विवाह की घटनाओं में लगभग 50 प्रतिशत की कमी आई है।
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| \r\n सर्वेक्षण \r\n | \r\n \r\n वर्ष \r\n | \r\n \r\n बाल विवाह का प्रसार (%) \r\n | \r\n
| \r\n NFHS-3 \r\n | \r\n \r\n 2005-06 \r\n | \r\n \r\n 47.4% \r\n | \r\n
| \r\n NFHS-5 \r\n | \r\n \r\n 2019-21 \r\n | \r\n \r\n 23.3% \r\n | \r\n
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यह तीव्र गिरावट मुख्य रूप से महिलाओं की बढ़ती शिक्षा और आर्थिक विकास के कारण आई है।
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4 लाख से अधिक बाल विवाह रोके गए
\r\n\r\nJRC, जो 451 जिलों में 250 से अधिक NGO के नेटवर्क के साथ काम करता है, ने बाल विवाह को रोकने में बड़ी सफलता का दावा किया है।
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- \r\n आंकड़े: 1 अप्रैल 2023 से 30 सितंबर 2025 तक JRC द्वारा देश भर में चार लाख से अधिक बाल विवाह रोके गए।\r\n \r\n
- \r\n सर्वाधिक मामले वाले राज्य: रोके गए मामलों में सबसे अधिक संख्या झारखंड से थी, जिसके बाद बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश का स्थान था।\r\n \r\n
- \r\n सफलता का उदाहरण: असम में पिछले तीन वर्षों में लड़कियों में बाल विवाह में 89 प्रतिशत और लड़कों में 91 प्रतिशत की उल्लेखनीय गिरावट आई है, जिसे राज्य सरकार की 'शून्य सहनशीलता' (Zero Tolerance) नीति और नागरिक समाज के सहयोग का परिणाम बताया गया है।\r\n \r\n
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बाल विवाह के मुख्य कारण और चिंताजनक रुझान
\r\n\r\nबाल अधिकार विशेषज्ञों ने आगाह किया है कि प्रतिशत में गिरावट के बावजूद, बाल विवाह कुछ केंद्रित क्षेत्रों में एक चिंताजनक स्तर पर बना हुआ है, खासकर गरीबी और रूढ़िवादिता से ग्रस्त इलाकों में।
\r\n\r\n1. गरीबी और आर्थिक तनाव
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- \r\n सबसे प्रमुख कारण: गरीबी या खराब वित्तीय स्थिति बाल विवाह का सबसे बड़ा कारण है।\r\n \r\n
- \r\n वित्तीय बोझ: कई परिवार बेटियों को वित्तीय बोझ मानते हैं और आजीविका की लागत या पारिवारिक बोझ कम करने के लिए जल्दी शादी कर देते हैं।\r\n \r\n
- \r\n संकट का प्रभाव: सूखे या महामारी जैसे संकटों से होने वाला आर्थिक तनाव स्थिति को और बिगाड़ देता है, जिससे पिछली प्रगति उलट सकती है।\r\n \r\n
2. शिक्षा का अभाव (सबसे बड़ा जोखिम)
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- \r\n शिक्षा और विवाह की आयु में संबंध: NFHS के आंकड़े दर्शाते हैं कि जिन महिलाओं ने स्कूली शिक्षा नहीं ली है, उनकी बाल विवाह की संभावना उच्च शिक्षा प्राप्त महिलाओं की तुलना में 15 गुना अधिक होती है।\r\n \r\n
- \r\n बिहार का उदाहरण: यूएनएफपीए (UNFPA) की एक रिपोर्ट के अनुसार, बिहार में अशिक्षित 63 प्रतिशत महिलाओं की शादी 18 साल से पहले हो जाती है, जबकि उच्च शिक्षा प्राप्त लड़कियों की शादी केवल 12 प्रतिशत होती है।\r\n \r\n
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3. सामाजिक और लैंगिक मानदंड
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- \r\n रूढ़िवादी सोच: कई समुदायों में, कम उम्र में लड़कियों की शादी करना स्वीकार्य है या यहाँ तक कि अपेक्षित भी है।\r\n \r\n
- \r\n पवित्रता की धारणा: लड़कियों को 'सुरक्षा' प्रदान करने की इच्छा और 'पवित्रता' की रूढ़िवादी धारणाएँ भी बाल विवाह के प्रमुख प्रेरक हैं।\r\n \r\n
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समाधान का खाका: कानून का सख्त कार्यान्वयन
\r\n\r\nभुवन रिभु ने बाल विवाह को समाप्त करने के लिए एक स्पष्ट रोडमैप प्रस्तुत किया: "संरक्षण से पहले रोकथाम, अभियोजन से पहले संरक्षण, तथा रोकथाम को मजबूत करने के लिए अभियोजन।"
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कानूनी सुधार की आवश्यकता
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- \r\n PCMA में संशोधन: PCMA अधिनियम में संशोधन किया जाना चाहिए ताकि विवाह के लिए तस्करी सहित बाल विवाह के प्रयासों और उकसावे को स्पष्ट रूप से अपराध घोषित किया जा सके।\r\n \r\n
- \r\n विशेष कानून की मान्यता: PCMA को व्यक्तिगत कानूनों का स्थान लेने वाले एक विशेष कानून के रूप में मान्यता दी जानी चाहिए, ताकि प्रचलित प्रथाएं कानूनी सुरक्षा पर हावी न हो सकें।\r\n \r\n
- \r\n अनिवार्य पंजीकरण: रोके गए या रिपोर्ट किए गए प्रत्येक बाल विवाह को स्थानीय पंचायतों के माध्यम से अनिवार्य रूप से पंजीकृत किया जाना चाहिए।\r\n \r\n
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संस्थागत और सामुदायिक प्रतिबद्धता
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- \r\n जवाबदेही: जिला एवं राज्य स्तर पर स्पष्ट जवाबदेही तय की जानी चाहिए।\r\n \r\n
- \r\n प्रशिक्षण और एकीकरण: बाल विवाह निषेध अधिकारियों (CMPOs) और अग्रिम पंक्ति के कार्यकर्ताओं को नियमित प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए, और विशेष किशोर पुलिस इकाइयों को बाल विवाह ढांचे के भीतर एकीकृत किया जाना चाहिए।\r\n \r\n
- \r\n सामुदायिक भूमिका: पंचायतें और वार्ड समितियाँ जोखिमग्रस्त परिवारों की पहचान करके प्रथम सुरक्षा पंक्ति के रूप में कार्य कर सकती हैं। लड़कियों को शिक्षित करने और उन्हें कानूनी/मनोवैज्ञानिक सहायता देने के लिए NGO को सुरक्षित स्थानों का विस्तार करना चाहिए।\r\n \r\n
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भुवन रिभु ने अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस पर टारगेटेड, समयबद्ध और ठोस कार्रवाई का संकल्प लेने का आह्वान किया, ताकि प्रत्येक गांव और प्रत्येक जिले को बाल विवाह मुक्त घोषित किया जा सके।
Sabse pehle comment karne wale banein.