भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में कार खरीदते समय ग्राहक सबसे पहले सेल्समैन से एक ही सवाल पूछता है— "भैया, ये गाड़ी माइलेज (औसत) कितना देती है?" कंपनी के ब्रोशर और विज्ञापनों में 20 से 25 किलोमीटर प्रति लीटर का दावा देखकर ग्राहक खुश हो जाता है, लेकिन जब वह गाड़ी को सड़क पर उतारता है, तो हकीकत कुछ और ही निकलती है। एसी (Air Conditioner) ऑन करते ही माइलेज का आंकड़ा धड़ाम से नीचे गिर जाता है। सालों से चली आ रही ग्राहकों की इस टीस और शिकायत को अब सरकार ने गंभीरता से लिया है।READ ALSO:-Atal Pension Yojana 2026: मोदी सरकार का ऐतिहासिक फैसला, 2030-31 तक बढ़ाई गई स्कीम; 60 के बाद मिलेगी ₹5,000 की गारंटीड पेंशन
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केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने कार कंपनियों की मनमानी और लैब टेस्टिंग के पुराने तरीकों को बदलने का प्रस्ताव रखा है। अब माइलेज टेस्टिंग 'आदर्श स्थितियों' में नहीं, बल्कि 'वास्तविक स्थितियों' में होगी। इसका सीधा मतलब है कि अब कार का माइलेज टेस्ट एसी चलाकर किया जाएगा। यह नियम 2026 से लागू होने की उम्मीद है, जो भारतीय ऑटो सेक्टर में पारदर्शिता का एक नया अध्याय लिखेगा।
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सिर्फ माइलेज ही नहीं, बल्कि सुरक्षा (Safety) को लेकर भी सरकार ने कमर कस ली है। भारत न्यू कार असेसमेंट प्रोग्राम (Bharat NCAP) के अगले चरण में पैदल चलने वालों की सुरक्षा को भी रेटिंग का हिस्सा बनाया जाएगा। आइए, इस पूरी खबर को विस्तार से समझते हैं और जानते हैं कि इसका आप पर क्या असर पड़ेगा।
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माइलेज टेस्टिंग में ऐतिहासिक बदलाव: अब मिलेगी 'सच्ची' जानकारी
\r\n\r\nअब तक भारत में गाड़ियों की फ्यूल एफिशिएंसी (Fuel Efficiency) या माइलेज की टेस्टिंग जिन मानकों पर होती थी, वे यूरोपीय मानकों से प्रेरित थे, लेकिन उनमें एक बड़ी खामी थी। टेस्ट के दौरान गाड़ी का एयर कंडीशनर (AC) बंद रखा जाता था। भारत जैसे गर्म देश में, जहां साल के 8-9 महीने एसी के बिना गाड़ी चलाना लगभग नामुमकिन है, वहां एसी बंद करके निकाले गए माइलेज के आंकड़े ग्राहकों को गुमराह करने वाले साबित होते थे।
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क्या है नया प्रस्ताव?
\r\n\r\nयूनियन रोड ट्रांसपोर्ट मिनिस्ट्री द्वारा जारी ड्राफ्ट नोटिफिकेशन के अनुसार:
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- \r\n लागू होने की तारीख: 1 अक्टूबर 2026।\r\n \r\n
- \r\n नया नियम: भारत में बिकने वाली सभी M1 कैटेगरी (पैसेंजर गाड़ियां) का माइलेज टेस्ट अब गाड़ी का एसी (AC) ऑन करके किया जाएगा।\r\n \r\n
- \r\n मानक (Standard): यह टेस्टिंग नए AIS 213 (Automotive Industry Standards) के तहत की जाएगी।\r\n \r\n
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क्यों पड़ी इसकी जरूरत?
\r\n\r\nअक्सर देखा गया है कि अगर कोई कंपनी दावा करती है कि उनकी कार 20 kmpl का माइलेज देती है, तो शहर के ट्रैफिक में एसी चलाने पर वह घटकर 12-14 kmpl रह जाता है। यह अंतर इतना बड़ा होता है कि ग्राहक खुद को ठगा हुआ महसूस करता है।
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- \r\n लैब बनाम सड़क: वर्तमान में टेस्टिंग लैब के अंदर डायनोमोमीटर (Dynamometer) पर नियंत्रित वातावरण में होती है, जहां हवा का प्रतिरोध नहीं होता और एसी बंद रहता है।\r\n \r\n
- \r\n भारतीय मौसम: भारत में ड्राइविंग के दौरान एसी का इस्तेमाल अनिवार्य सा हो गया है। एसी कंप्रेसर इंजन पर लोड डालता है, जिससे ईंधन की खपत 10% से 15% तक बढ़ जाती है। नए नियम इसी अंतर को खत्म करेंगे।\r\n \r\n
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कंपनियों पर बढ़ेगी जवाबदेही, खत्म होंगे झूठे दावे
\r\n\r\nइस नियम के लागू होने के बाद ऑटोमोबाइल कंपनियों की मार्केटिंग स्ट्रैटेजी को बड़ा झटका लग सकता है। अब वे ग्राहकों को लुभाने के लिए बढ़ा-चढ़ाकर आंकड़े पेश नहीं कर पाएंगी।
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- \r\n पारदर्शिता (Transparency): जब टेस्टिंग एसी ऑन करके होगी, तो जो आंकड़े सर्टिफिकेट पर आएंगे, वे ग्राहक को मिलने वाले असली माइलेज के बेहद करीब होंगे।\r\n \r\n
- \r\n भरोसा: इससे ब्रांड और ग्राहक के बीच भरोसे का रिश्ता मजबूत होगा। ग्राहक को गाड़ी खरीदते वक्त ही पता होगा कि उसकी जेब पर ईंधन का कितना बोझ पड़ने वाला है।\r\n \r\n
- \r\n तकनीकी सुधार: जानकारों का मानना है कि अपना माइलेज गिरने से बचाने के लिए कंपनियां अब इंजन तकनीक और एसी कंप्रेसर की एफिशिएंसी को सुधारने पर काम करेंगी, जिसका अंतिम फायदा ग्राहक को ही मिलेगा।\r\n \r\n
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सरकार ने इस ड्राफ्ट पर हितधारकों (कंपनियों और आम जनता) से 30 दिनों के भीतर सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं। इसके बाद फाइनल नोटिफिकेशन जारी किया जाएगा।
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भारत NCAP 2: सुरक्षा के मोर्चे पर भी सख्त तैयारी
\r\n\r\nमाइलेज के साथ-साथ सरकार ने सुरक्षा मानकों को भी ग्लोबल लेवल पर ले जाने की तैयारी कर ली है। भारत में हाल ही में लॉन्च हुए Bharat NCAP (New Car Assessment Program) को अपग्रेड करके Bharat NCAP 2 लाने का प्रस्ताव है।
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- \r\n प्रस्तावित तारीख: नए सुरक्षा नियम 1 अक्टूबर 2027 से लागू करने की योजना है।\r\n \r\n
- \r\n मकसद: सिर्फ गाड़ी के अंदर बैठे यात्रियों की जान बचाना ही नहीं, बल्कि गाड़ी की टक्कर से सड़क पर चलने वाले अन्य लोगों को सुरक्षित रखना भी है।\r\n \r\n
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अभी तक गाड़ियों की स्टार रेटिंग मुख्य रूप से क्रैश टेस्ट (टक्कर होने पर गाड़ी का ढांचा कितना सुरक्षित है) पर आधारित होती थी। लेकिन नई व्यवस्था में इसे व्यापक बनाया जा रहा है।
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अब 5 पैमानों पर होगी सेफ्टी रेटिंग: पैदल यात्रियों का रखा जाएगा खास ख्याल
\r\n\r\nनया प्रस्ताव सुरक्षा रेटिंग को पूरी तरह बदल देगा। अब सिर्फ मजबूत लोहा होना काफी नहीं होगा, बल्कि गाड़ी में एक्सीडेंट रोकने की तकनीक का होना भी जरूरी होगा। नई रेटिंग व्यवस्था इन पांच स्तंभों पर टिकी होगी:
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(i) क्रैश प्रोटेक्शन (Crash Protection):
\r\n\r\nयह मौजूदा मानक है। इसमें देखा जाएगा कि टक्कर होने पर एयरबैग, सीटबेल्ट और गाड़ी की बॉडी यात्रियों को कितना सुरक्षित रखती है।
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(ii) पैदल यात्रियों की सुरक्षा (Pedestrian Protection):
\r\n\r\nयह सबसे बड़ा बदलाव है। भारतीय सड़कों पर हर साल हजारों पैदल यात्री और साइकिल सवार गाड़ियों की चपेट में आते हैं।
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- \r\n VRU (Vulnerable Road Users): नई रेटिंग में पैदल चलने वालों और दोपहिया सवारों (VRU) की सुरक्षा को कुल स्कोर में 20 प्रतिशत वेटेज दिया जाएगा।\r\n \r\n
- \r\n इसका मतलब है कि गाड़ियों के बोनट और बंपर का डिजाइन ऐसा होना चाहिए कि अगर कोई पैदल यात्री गाड़ी से टकराए, तो उसे कम से कम चोट लगे।\r\n \r\n
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(iii) सेफ ड्राइविंग फीचर्स (Safe Driving Features):
\r\n\r\nइसमें यह देखा जाएगा कि गाड़ी में ऐसे कौन से फीचर्स हैं जो ड्राइवर को सुरक्षित गाड़ी चलाने में मदद करते हैं। जैसे—स्पीड अलर्ट, सीट बेल्ट रिमाइंडर, और ब्लाइंड स्पॉट मॉनिटरिंग।
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(iv) क्रैश अवॉयडेंस (Crash Avoidance):
\r\n\r\nयह एडवांस तकनीक से जुड़ा है। इसमें ADAS (Advanced Driver Assistance Systems) जैसे फीचर्स की जांच होगी। क्या गाड़ी खुद ब्रेक लगा सकती है? क्या वह लेन से भटकने पर चेतावनी देती है? यानी हादसा होने से पहले ही उसे रोकने की क्षमता।
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(v) हादसे के बाद की सुरक्षा (Post-Crash Safety):
\r\n\r\nएक्सीडेंट हो जाने के बाद गाड़ी कितनी सुरक्षित है? क्या दरवाजे आसानी से खुल रहे हैं ताकि यात्रियों को बाहर निकाला जा सके? क्या ईंधन लीक होकर आग लगने का खतरा तो नहीं है? इलेक्ट्रिक गाड़ियों के मामले में बैटरी की सुरक्षा को भी इसमें परखा जाएगा।
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'हवा-हवाई' दावों का दौर क्यों था अब तक?
\r\n\r\nआपके मन में सवाल उठ सकता है कि सरकार ने यह फैसला अब क्यों लिया, और अब तक हमें गलत माइलेज क्यों बताया जा रहा था?
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- \r\n पुराना ढर्रा: अब तक भारत में ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) जो टेस्टिंग करता था, वह पुराने मापदंडों पर आधारित थी। इसमें गाड़ी को एक रोलर (Roller) पर खड़ा करके दौड़ाया जाता था, जहां न तो हवा का दबाव होता था, न ही सड़क के गड्ढे और न ही एसी का लोड।\r\n \r\n
- \r\n यूरोपीय मानक: भारत ने काफी हद तक यूरोपीय मानकों को अपनाया था। यूरोप में मौसम ठंडा रहता है, इसलिए वहां एसी के बिना टेस्टिंग करना व्यावहारिक था। लेकिन भारत की भीषण गर्मी (45-48 डिग्री सेल्सियस) में यह मानक पूरी तरह फेल साबित हो रहा था।\r\n \r\n
- \r\n कंपनियों का दबाव: कंपनियां हमेशा बेहतर आंकड़े दिखाना चाहती हैं। एसी बंद करके टेस्ट करने से माइलेज 15-20% ज्यादा दिखता है, जो मार्केटिंग के लिए अच्छा होता है। लेकिन अब उपभोक्ता मंत्रालय और परिवहन मंत्रालय ने स्पष्ट कर दिया है कि भारत की "जमीनी हकीकत" को ध्यान में रखकर ही नियम बनेंगे।\r\n \r\n
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इस बदलाव का आम आदमी पर क्या असर होगा?
\r\n\r\nयह बदलाव सीधे तौर पर आपकी कार खरीदने की योजना और जेब को प्रभावित करेगा।
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फायदे (Pros):
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- \r\n सटीक बजटिंग: आपको गाड़ी खरीदते समय पता होगा कि महीने का पेट्रोल/डीजल खर्च कितना आएगा।\r\n \r\n
- \r\n धोखाधड़ी से बचाव: '25 का माइलेज' बोलकर '15 का माइलेज' देने वाली कारों की पोल खुल जाएगी।\r\n \r\n
- \r\n सुरक्षित सड़कें: नई सेफ्टी रेटिंग से भारतीय सड़कों पर पैदल चलने वालों की जान ज्यादा सुरक्षित होगी।\r\n \r\n
- \r\n बेहतर तकनीक: मजबूरन कंपनियों को बेहतर इंजन और सेफ्टी फीचर्स देने होंगे।\r\n \r\n
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चुनौतियां (Cons):
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- \r\n गाड़ियां महंगी हो सकती हैं: सेफ्टी फीचर्स और माइलेज सुधारने के लिए नई तकनीक लगाने से कारों की लागत बढ़ सकती है।\r\n \r\n
- \r\n माइलेज के आंकड़े कम दिखेंगे: 2026 के बाद नई कारों के ब्रोशर पर माइलेज के आंकड़े मौजूदा आंकड़ों से कम नजर आएंगे, जिससे ग्राहकों को मानसिक रूप से तैयार होना होगा कि यह "कम" नहीं बल्कि "सच" है।\r\n \r\n
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भारतीय ऑटो बाजार का परिपक्व होता दौर
\r\n\r\nभारत अब दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऑटोमोबाइल बाजार है। ऐसे में, हमारे नियम भी विश्वस्तरीय होने चाहिए। सरकार द्वारा प्रस्तावित ये नए नियम—चाहे वह एसी के साथ माइलेज टेस्टिंग हो या पैदल यात्रियों की सुरक्षा—यह दर्शाते हैं कि भारतीय बाजार अब परिपक्व हो रहा है।
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अब वह दौर बीत रहा है जब सिर्फ "सस्ती और टिकाऊ" गाड़ी की मांग होती थी। आज का भारतीय ग्राहक "सुरक्षित और पारदर्शी" सौदा चाहता है। 2026 और 2027 में लागू होने वाले ये नियम निश्चित रूप से कार कंपनियों के लिए चुनौती होंगे, लेकिन अंततः जीत 'उपभोक्ता' की ही होगी। अब शोरूम की चमक-दमक के पीछे 'असली सच' छिप नहीं पाएगा।
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नोट: यह नियम अभी ड्राफ्ट चरण में हैं। सरकार ने सुझाव मांगे हैं, जिसके बाद अंतिम अधिसूचना जारी की जाएगी। ऑटो जगत की ऐसी ही बारीक और महत्वपूर्ण खबरों के लिए हमारे साथ बने रहें।
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