मुंबई: साल 2025 के जाते-जाते सराफा बाजार में महंगाई का ऐसा विस्फोट हुआ है, जिसकी गूंज पूरी दुनिया में सुनाई दे रही है। Sona Chandi Ka Bhav (सोना-चांदी का भाव) अब आम आदमी की पहुंच से लगभग बाहर होता जा रहा है। बीते हफ्ते बुलियन मार्केट में जो हुआ, वह ऐतिहासिक है। चांदी की चमक ने सोने को भी पीछे छोड़ दिया है।READ ALSO:-UP Weather: यूपी में कुदरत का 'बर्फीला' प्रहार; कोहरे के अंधकार में टकराईं 20 गाड़ियां, 23 जिलों में महा-संकट का 'Red Alert'
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इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, महज एक हफ्ते के अंदर चांदी की कीमतों में 27,000 रुपये से ज्यादा की भारी भरकम तेजी दर्ज की गई है। वहीं, सोना भी इतिहास के सबसे उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है। निवेशकों के लिए जहां यह जश्न का मौका है, वहीं शादी-ब्याह वाले घरों में बजट बिगड़ गया है।
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चांदी ने लगाई 27,000 की छलांग, सोना 1.38 लाख के करीब
\r\n\r\nबाजार के आंकड़ों पर नजर डालें तो चांदी में लगातार पांचवे हफ्ते जबरदस्त तेजी देखने को मिली है। 19 दिसंबर को एक किलो चांदी की कीमत 2,00,336 रुपये थी। लेकिन खरीदारों की भारी भीड़ और इंडस्ट्रियल डिमांड के चलते यह एक हफ्ते में 27,771 रुपये उछलकर 26 दिसंबर (शुक्रवार) को 2,28,107 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई। यह अपने आप में एक नया ऑल टाइम हाई (All Time High) है। गौर करने वाली बात यह है कि इस हफ्ते चांदी ने लगातार चार दिनों तक अपना ही रिकॉर्ड तोड़ा और हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को एक ही दिन में 9,124 रुपये की बढ़त हासिल की।
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दूसरी तरफ, सोने की रफ्तार भी थमने का नाम नहीं ले रही है। पिछले हफ्ते (19 दिसंबर) को 10 ग्राम 24 कैरेट सोने का भाव 1,31,779 रुपये था। एक हफ्ते के भीतर इसमें 6,177 रुपये की तेजी आई और शुक्रवार, 26 दिसंबर को यह 1,37,956 रुपये प्रति 10 ग्राम के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गया। यह अब तक की Sona Chandi Ka Bhav की सबसे ऊंची कीमत है।
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चांदी में क्यों आई इतनी भयंकर तेजी? (3 प्रमुख कारण)
\r\n\r\nचांदी अब केवल जेवर या पायल बनवाने वाली धातु नहीं रही, बल्कि यह एक महत्वपूर्ण इंडस्ट्रियल कमोडिटी बन गई है। विशेषज्ञों के अनुसार, चांदी में आई इस तूफानी तेजी के पीछे तीन मुख्य कारण हैं:
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- \r\n इंडस्ट्रियल डिमांड (Industrial Demand): चांदी की मांग में आया यह उछाल मुख्य रूप से रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर की वजह से है। सोलर पैनल (Solar Panels), आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV) के निर्माण में चांदी का भारी इस्तेमाल होता है। यह अब सिर्फ ज्वेलरी नहीं, बल्कि एक 'जरूरी कच्चा माल' बन गई है। जैसे-जैसे दुनिया ग्रीन एनर्जी की तरफ बढ़ रही है, चांदी की खपत कई गुना बढ़ गई है।\r\n \r\n
- \r\n ट्रंप का टैरिफ डर और ग्लोबल सप्लाई: अमेरिका में व्यापारिक नीतियों और संभावित टैरिफ (Tariff) के डर से बड़ी-बड़ी अमेरिकी कंपनियां चांदी का भारी स्टॉक जमा कर रही हैं। उन्हें डर है कि भविष्य में सप्लाई चेन बाधित हो सकती है। इस 'पैनिक बाइंग' के चलते ग्लोबल सप्लाई में कमी आई है और कीमतें रॉकेट बन गई हैं।\r\n \r\n
- \r\n मैन्युफैक्चरर की होड़: प्रोडक्शन लाइन रुकने के डर से दुनिया भर के मैन्युफैक्चरर्स पहले से ही चांदी खरीदकर रख रहे हैं। यह होड़ बाजार में कृत्रिम कमी पैदा कर रही है, जिससे आने वाले महीनों में भी तेजी बनी रहने की पूरी संभावना है।\r\n \r\n
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सोने में आग लगने की वजह? (3 प्रमुख कारण)
\r\n\r\nसोना हमेशा से मुसीबत के समय का साथी माना जाता है। वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों ने सोने को निवेशकों की पहली पसंद बना दिया है।
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- \r\n डॉलर की कमजोरी: अमेरिका द्वारा ब्याज दरें घटाने के फैसले के बाद डॉलर इंडेक्स (Dollar Index) में कमजोरी आई है। जब डॉलर कमजोर होता है, तो अन्य मुद्राओं वाले देशों के लिए सोना खरीदना सस्ता पड़ता है, जिससे मांग बढ़ती है और अंततः सोने की कीमतें ऊपर जाती हैं। इससे सोने की 'होल्डिंग कॉस्ट' भी कम हुई है।\r\n \r\n
- \r\n जियोपॉलिटिकल तनाव (Geopolitical Tension): रूस-यूक्रेन जंग और मध्य-पूर्व में चल रहे तनाव ने दुनिया भर के निवेशकों को डरा दिया है। शेयर बाजार की अस्थिरता से बचने के लिए निवेशक सोने को सबसे 'सुरक्षित निवेश' (Safe Haven) मानकर उसमें पैसा लगा रहे हैं।\r\n \r\n
- \r\n सेंट्रल बैंकों की खरीदारी: चीन समेत कई देशों के केंद्रीय बैंक (Central Banks) डॉलर पर निर्भरता कम करने के लिए अपने खजाने में सोना भर रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सेंट्रल बैंक्स सालभर में 900 टन से ज्यादा सोना खरीद रहे हैं, जो दामों को ऊपर धकेलने का सबसे बड़ा कारण है।\r\n \r\n
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2026 की भविष्यवाणी: क्या 2.75 लाख पार होगी चांदी?
\r\n\r\nअगर आप सोच रहे हैं कि यह तेजी अब थम जाएगी, तो एक्सपर्ट्स की राय आपको चौंका सकती है। केडिया एडवाइजरी के डायरेक्टर अजय केडिया का कहना है कि बुलियन मार्केट में अभी 'सुपर साइकिल' चल रही है। चांदी की इंडस्ट्रियल डिमांड जिस तरह बढ़ रही है, उसके आगे भी बने रहने का पूरा अनुमान है।
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केडिया के मुताबिक, साल 2026 में चांदी की कीमत 2.75 लाख रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच सकती है। वहीं, सोने को लेकर भी उनका नजरिया बेहद सकारात्मक है। उनका मानना है कि अगला साल खत्म होने तक सोना 1.50 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर को भी पार कर सकता है। यानी अगर आप निवेश करने की सोच रहे हैं, तो अभी भी मौका हाथ से गया नहीं है।
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अलग-अलग शहरों में रेट्स अलग क्यों होते हैं?
\r\n\r\nअक्सर लोग भ्रमित होते हैं कि न्यूज में दिखाया गया Sona Chandi Ka Bhav और सुनार की दुकान के भाव में अंतर क्यों होता है। दरअसल, इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) जो रेट जारी करता है, वह 24 कैरेट शुद्ध सोने का होता है और इसमें 3% GST और मेकिंग चार्ज शामिल नहीं होता।
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जब आप ज्वेलरी खरीदते हैं, तो उसमें ज्वेलर्स का मार्जिन, मेकिंग चार्ज और टैक्स जुड़ जाता है, जिससे दाम बढ़ जाते हैं। हालांकि, IBJA के रेट्स ही बेंचमार्क माने जाते हैं। आरबीआई (RBI) अपने सोवरेन गोल्ड बॉन्ड के रेट तय करने के लिए और बैंक गोल्ड लोन की वैल्यू निकालने के लिए इन्ही रेट्स का इस्तेमाल करते हैं।
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सोना खरीदते समय इन 2 बातों का रखें खास ध्यान
\r\n\r\nइतने महंगे भाव पर सोना खरीदते समय एक छोटी सी गलती भी आपको बड़ा नुकसान पहुंचा सकती है। ठगी से बचने के लिए इन दो नियमों का पालन जरूर करें:
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- \r\n सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें: हमेशा ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (BIS) का हॉलमार्क लगा हुआ सोना ही खरीदें। ज्वेलरी पर एक 6 अंकों का अल्फान्यूमेरिक कोड (HUID) होता है, जैसे- AZ4524। यह कोड सोने की शुद्धता की गारंटी है। बिना हॉलमार्किंग के सोना खरीदना जोखिम भरा हो सकता है।\r\n \r\n
- \r\n कीमत क्रॉस चेक करें: आंख मूंदकर ज्वेलर पर भरोसा न करें। सोने का सही वजन और खरीदने के दिन उसकी लाइव कीमत कई सोर्सेज से चेक करें। याद रखें, 24 कैरेट, 22 कैरेट और 18 कैरेट सोने के भाव में बड़ा अंतर होता है। ज्वेलरी अक्सर 22 या 18 कैरेट में बनती है, इसलिए 24 कैरेट के दाम पर ज्वेलरी न खरीदें।\r\n \r\n
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कुल मिलाकर, सराफा बाजार में यह तेजी अभी रुकने वाली नहीं दिख रही है। इंडस्ट्रियल और जियोपॉलिटिकल कारणों से Sona Chandi Ka Bhav आसमान छू रहे हैं। जहां निवेशकों के लिए यह चांदी काटने का समय है, वहीं आम उपभोक्ताओं को अब अपनी जेब ज्यादा ढीली करनी होगी। अगर आप लंबी अवधि के लिए निवेश करना चाहते हैं, तो एक्सपर्ट्स की राय के मुताबिक यह समय सही हो सकता है, क्योंकि 2026 में दाम और बढ़ने के आसार हैं।
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सोना और चांदी की कीमतों ने दिसंबर के आखिरी हफ्ते में ऐतिहासिक उछाल दर्ज किया है। चांदी 2.28 लाख रुपये प्रति किलो और सोना 1.37 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के पार पहुंच गया है। केडिया एडवाइजरी ने 2026 तक चांदी के 2.75 लाख रुपये तक जाने का अनुमान लगाया है। इस तेजी के पीछे इंडस्ट्रियल डिमांड, जियोपॉलिटिकल तनाव और सेंट्रल बैंकों की खरीदारी मुख्य कारण हैं।

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