नई दिल्ली (Health & Consumer Desk): आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में पैक्ड और प्रोसेस्ड फूड (Packaged & Processed Food) हमारी डाइट का एक अहम हिस्सा बन चुके हैं। बच्चे हों या बड़े, हर कोई रेडी-टू-ईट स्नैक्स, पैकेटबंद जूस, कोल्ड ड्रिंक्स और नमकीन का सेवन बड़े पैमाने पर करता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इन पैकेटबंद खाद्य पदार्थों में छिपी हुई चीनी (Hidden Sugar), अत्यधिक नमक और अनहेल्दी फैट की मात्रा कितनी खतरनाक हो सकती है?
\r\n\r\nइसी चिंता को दूर करने और ग्राहकों के स्वास्थ्य को सुरक्षित रखने के लिए भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। FSSAI ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष एक हलफनामा दायर किया है, जिसमें पैक्ड फूड के पैकेट के सामने स्पष्ट रूप से लाल रंग का षट्कोणीय चेतावनी लेबल (Red Hexagonal Warning Label) लगाने का प्रस्ताव रखा गया है। आइए विस्तार से जानते हैं कि यह नया नियम कैसे काम करेगा और इससे आम जनता को क्या फायदा होगा।
\r\n\r\nक्या है FSSAI का 'रेड षट्कोणीय' (Red Hexagon) प्रस्ताव?
\r\n\r\nसुप्रीम कोर्ट में दायर किए गए छह पन्नों के हलफनामे के मुताबिक, FSSAI ने 'फ्रंट-ऑफ-पैक लेबलिंग' (Front-of-Pack Labelling - FOPL) के तहत चेतावनी प्रणाली का प्रस्ताव रखा है। इस प्रस्ताव की मुख्य बातें इस प्रकार हैं:
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- \r\n लाल रंग का छह-कोने वाला निशान: पैक्ड फूड प्रोडक्ट्स के पैकेट के सामने (Front side) एक लाल रंग का षट्कोणीय (Hexagon) चिन्ह छापा जाएगा।\r\n \r\n
- \r\n साफ और सरल चेतावनी: यह चेतावनी इस तरह से डिजाइन की जाएगी कि आम ग्राहक दुकान या मॉल में सामान उठाते ही तुरंत समझ जाए कि उस उत्पाद में सेहत के लिए नुकसानदायक तत्व ज्यादा मात्रा में हैं।\r\n \r\n
- \r\n चित्रात्मक और पाठ्य रूप (Visual & Text Format): यह लेबल तस्वीरों और स्पष्ट शब्दों के रूप में होगा, जो चिंताजनक पोषक तत्वों की अधिकता को साफ तौर पर दर्शाएगा।\r\n \r\n
किन उत्पादों और पोषक तत्वों पर लगेगा यह लेबल?
\r\n\r\nहर पैक्ड फूड पर यह लाल निशान नहीं लगेगा, बल्कि इसकी एक तय सीमा (Threshold) होगी। FSSAI के प्रस्ताव के अनुसार, यह चेतावनी लेबल मुख्य रूप से तीन प्रमुख घटकों पर आधारित होगा:
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- \r\n एडेड सैचुरेटेड फैट (Added Saturated Fat)\r\n \r\n
- \r\n एडेड चीनी (Added Sugar)\r\n \r\n
- \r\n नमक या सोडियम (Sodium/Salt)\r\n \r\n
\r\n\r\nयदि किसी पैक्ड फूड प्रोडक्ट में बताए गए इन तीन तत्वों में से कोई भी दो या उससे ज्यादा तत्व तय सीमा से अधिक मात्रा में पाए जाते हैं, तो उस उत्पाद के पैकेट पर यह लाल रंग का षट्कोणीय चेतावनी लेबल लगाना अनिवार्य कर दिया जाएगा।
\r\n\r\nकिस आधार पर तय होंगी सीमाएं? (ICMR-NIN Guidelines)
\r\n\r\nयह एक बहुत बड़ा सवाल है कि इन तत्वों की अधिकता की सीमा (Limits) कौन तय करेगा? FSSAI ने अपने हलफनामे में स्पष्ट किया है कि ये सीमाएं ICMR-नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ न्यूट्रिशन (NIN) द्वारा हाल ही में जारी किए गए 'भारतीयों के लिए आहार संबंधी दिशानिर्देश, 2024' (Dietary Guidelines for Indians, 2024) पर आधारित होंगी। वैज्ञानिक और चिकित्सकीय अनुसंधान के आधार पर तय इन मानकों से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि जनता को उच्च गुणवत्ता वाली और वैज्ञानिक रूप से परखी गई पोषण संबंधी जानकारी मिले।
\r\n\r\nसुप्रीम कोर्ट में क्यों उठा यह मामला?
\r\n\r\nयह पूरा प्रस्ताव एक जनहित याचिका (Public Interest Litigation - PIL) के सिलसिले में सुप्रीम कोर्ट के सामने दायर किया गया है। इस याचिका में मांग की गई थी कि देश में बढ़ते मोटापे (Obesity), डायबिटीज (Diabetes) और हृदय रोगों (Heart Diseases) के पीछे पैक्ड फूड्स में मौजूद अत्यधिक चीनी, नमक और फैट का बड़ा हाथ है।
\r\n\r\nअदालत के निर्देशों के बाद FSSAI ने यह विस्तृत कार्ययोजना कोर्ट के समक्ष रखी है। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि वर्तमान में पैकेट्स के पीछे बहुत छोटे अक्षरों में न्यूट्रीशनल इन्फॉर्मेशन (Nutritional Information) लिखी होती है, जिसे आम ग्राहक आसानी से पढ़ या समझ नहीं पाता। 'फ्रंट-ऑफ-पैक' पर साफ चेतावनी होने से ग्राहक खरीदारी करते समय सही और सूझबूझ भरा फैसला ले सकेंगे।
\r\n\r\nउपभोक्ताओं को इससे क्या मिलेगा फायदा? (Consumer Benefits)
\r\n\r\nइस नई व्यवस्था के लागू होने से आम उपभोक्ताओं को निम्नलिखित लाभ मिलेंगे:
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- \r\n पारदर्शिता (Transparency): ग्राहकों को अब यह अंदाजा लगाने के लिए किसी एक्सपर्ट की जरूरत नहीं होगी कि कौन सा प्रोडक्ट सेहत के लिए हानिकारक है। लाल निशान देखते ही ग्राहक सतर्क हो जाएंगे।\r\n \r\n
- \r\n स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता: लोग अनहेल्दी स्नैक्स और अत्यधिक चीनी-नमक वाले उत्पादों से दूरी बनाने लगेंगे, जिससे लाइफस्टाइल बीमारियों (जैसे मोटापा, बीपी और शुगर) को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।\r\n \r\n
- \r\n कंपनियों पर दबाव: जब ग्राहकों को लाल चेतावनी लेबल वाले उत्पाद पसंद नहीं आएंगे, तो फूड कंपनियां खुद-ब-खुद अपने उत्पादों में चीनी, नमक और फैट की मात्रा कम करने के लिए मजबूर होंगी (Reformulation of Products).\r\n \r\n
FSSAI द्वारा सुप्रीम कोर्ट में पेश किया गया यह प्रस्ताव भारत में फूड सेफ्टी और कंज्यूमर राइट्स के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित हो सकता है। जिस तरह सिगरेट और तंबाकू के पैकेट पर चेतावनी के निशान होते हैं, उसी तरह अब अनहेल्दी पैक्ड फूड्स पर भी लाल षट्कोणीय चेतावनी देखने को मिल सकती है। यह पहल देश के नागरिकों को एक स्वस्थ जीवन शैली की ओर ले जाने में एक बड़ा कदम साबित होगी।
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Sabse pehle comment karne wale banein.