करूर, तमिलनाडु | अभिनेता से नेता बने 'थलपति' विजय के राजनीतिक भविष्य का भव्य शक्ति प्रदर्शन, शनिवार शाम को एक ऐसी त्रासदी में बदल गया जिसने पूरे देश को हिलाकर रख दिया। तमिलनाडु के करूर में उनकी विशाल रैली में मची भगदड़ ने 39 लोगों की जान ले ली, जिनमें 16 महिलाएं और 10 बच्चे शामिल हैं। 50 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हैं और ICU में जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं, जिससे मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका है।READ ALSO:-सौरभ हत्याकांड में अब तक का सबसे बड़ा मोड़: मुस्कान-साहिल ने चली बड़ी चाल, केस लड़ेगा बाहर से आया दिग्गज वकील
\r\n\r\n\r\n\r\n
कैसे एक अपील मौत का पैगाम बन गई?
\r\n\r\nयह त्रासदी कई घंटों की অব্যবস্থা और लापरवाही का नतीजा थी। पुलिस ने केवल 10,000 लोगों के लिए अनुमति दी थी, लेकिन विजय की लोकप्रियता के कारण लगभग 50,000 से अधिक लोग 1.20 लाख वर्ग फुट के छोटे से मैदान में जमा हो गए। अभिनेता विजय खुद तय समय से 6 घंटे की देरी से पहुंचे, जिससे भीड़ अधीर और बेकाबू हो रही थी।
\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n\r\nటీవీకే నేత, నటుడు విజయ్ ర్యాలీలో తొక్కిసలాటలో జరిగింది. తమిళనాడులోని కరూర్లో శనివారం జరిగిన ఈ ఘటనలో 39 మంది మరణించారు. పదుల సంఖ్యలో గాయపడ్డారు. #TVKVijay #stampede #karur pic.twitter.com/1NoCIKFo54
\r\n— BBC News Telugu (@bbcnewstelugu) September 28, 2025
\r\n\r\n
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जब विजय मंच पर थे, तो उन्हें बताया गया कि भीड़ में एक 9 साल की बच्ची खो गई है। उन्होंने मंच से उसे खोजने की अपील की। यही अपील विनाशकारी साबित हुई। बच्ची को खोजने के लिए भीड़ में अचानक हलचल हुई, जिससे भगदड़ मच गई। लोग एक-दूसरे पर गिरने लगे और जो नीचे गिरा, उसे उठने का मौका नहीं मिला। गर्मी, घुटन और हजारों पैरों के नीचे कुचले जाने से बच्चों और महिलाओं समेत 39 लोगों ने दम तोड़ दिया।
\r\n\r\n
त्रासदी पर सियासत: स्टालिन मौके पर, विजय रवाना
\r\n\r\nहादसे के बाद तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने तत्काल एक उच्च-स्तरीय बैठक की और देर रात ही करूर पहुंच गए। उन्होंने अस्पताल जाकर घायलों से मुलाकात की और मृतकों को श्रद्धांजलि अर्पित की। वहीं, दूसरी ओर, अभिनेता विजय ने घायलों से मिलना तक जरूरी नहीं समझा। वे सीधे त्रिची हवाई अड्डे पहुंचे और एक चार्टर्ड फ्लाइट से चेन्नई के लिए रवाना हो गए।
\r\n\r\n
हालांकि, बाद में उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर एक पोस्ट में लिखा, "मेरा दिल टूट गया है। मैं बहुत दर्द और दुःख महसूस कर रहा हूं। मैं करूर में जान गंवाने वालों के परिवारों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करता हूं।" उनके इस रवैये की कड़ी आलोचना हो रही है।
\r\n\r\n
🏪 आपके शहर के ऑफर
विज्ञापन · स्थानीय दुकानों की ताज़ा स्कीम · स्वाइप करें →
सभी ऑफर देखें →
सरकार का एक्शन और 6 बड़ी वजहें
\r\n\r\nमुख्यमंत्री स्टालिन ने मामले की जांच के लिए न्यायमूर्ति अरुणा जगदीसन की अध्यक्षता में एक जांच आयोग का गठन किया है। साथ ही, मृतकों के परिवारों को 10-10 लाख रुपये और घायलों को 1-1 लाख रुपये के मुआवजे की घोषणा की है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने भी राज्य सरकार से रिपोर्ट तलब की है।
\r\n\r\n
हादसे की 6 प्रमुख वजहें:
\r\n\r\n- \r\n
- \r\n भारी देरी: विजय का 6 घंटे देर से पहुंचना।\r\n \r\n
- \r\n अत्यधिक भीड़: अनुमान से दोगुनी भीड़ का जमा होना।\r\n \r\n
- \r\n अव्यवस्था: मंच के पास भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस या वॉलंटियर्स का न होना।\r\n \r\n
- \r\n भगदड़ का क्षण: विजय की बस की ओर भीड़ का बढ़ना और धक्का-मुक्की।\r\n \r\n
- \r\n घुटन और बेहोशी: गर्मी और भीड़ के कारण कई लोगों को सांस लेने में दिक्कत हुई।\r\n \r\n
- \r\n सुबह की घटना से सबक नहीं: उसी दिन सुबह नमक्कल में भी विजय की रैली में भीड़ बेकाबू हुई थी, लेकिन उससे कोई सबक नहीं लिया गया।\r\n \r\n
\r\n\r\n
\r\n
एक चेतावनी, जिसे नजरअंदाज किया गया
\r\n\r\nकरूर की यह त्रासदी टाली जा सकती थी अगर आयोजकों ने उसी दिन सुबह हुई एक और घटना से सबक लिया होता। शनिवार को विजय की दो रैलियां थीं। पहली रैली नमक्कल में थी, जहां उन्हें सुबह 8:45 बजे पहुंचना था, लेकिन वे दोपहर 2:45 बजे पहुंचे। छह घंटे तक धूप में भूखे-प्यासे इंतजार कर रही भीड़ बेकाबू हो गई, धक्का-मुक्की में कई लोग घायल हुए और कुछ महिलाओं के पैर तक टूट गए। यह एक स्पष्ट चेतावनी थी कि भीड़ प्रबंधन में भारी चूक हो रही है, लेकिन इसे पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया गया और शाम को करूर में वही लापरवाही 39 मौतों का कारण बन गई।
\r\n\r\n\r\n\r\n
क्यों हो रही थीं ये रैलियां?
\r\n\r\nअभिनेता विजय ने 2 फरवरी, 2024 को अपनी राजनीतिक पार्टी 'तमिलगा वेत्री कझगम' (TVK) की स्थापना की थी। उनका लक्ष्य 2026 के विधानसभा चुनावों में सत्तारूढ़ DMK के खिलाफ एक मजबूत विकल्प के रूप में उभरना है। ये रैलियां इसी उद्देश्य का हिस्सा थीं, जिनके जरिए वे जनता को अपनी पार्टी की विचारधारा और एजेंडे से जोड़ना चाहते थे। लेकिन अब यही रैलियां उनकी सबसे बड़ी कमजोरी के रूप में सामने आई हैं।
\r\n\r\n\r\n\r\n
जब-जब सेलिब्रिटी, तब-तब भगदड़: एक दुखद पैटर्न
\r\n\r\nभारत में यह पहली बार नहीं है जब किसी सेलिब्रिटी के लिए उमड़ी भीड़ मौत का कारण बनी हो। यह एक खतरनाक पैटर्न का हिस्सा है:
\r\n\r\n- \r\n
- \r\n बेंगलुरु (जुलाई 2025): RCB की IPL जीत के जश्न में विराट कोहली को देखने आई भीड़ में भगदड़ से 11 की मौत।\r\n \r\n
- \r\n हैदराबाद (दिसंबर 2024): अल्लू अर्जुन को 'पुष्पा 2' की स्क्रीनिंग पर देखने आई भीड़ में भगदड़ से एक महिला की मौत।\r\n \r\n
- \r\n केरल (अगस्त 2018): एक्टर दुलकर सलमान के मॉल उद्घाटन में मची भगदड़ में एक व्यक्ति की जान गई।\r\n \r\n
- \r\n तेलंगाना (मार्च 2013): जूनियर एनटीआर के फिल्म म्यूजिक रिलीज पर मची भगदड़ में एक प्रशंसक की मौत।\r\n \r\n
\r\n\r\n
एक विरोधाभास: जब राजनीति से दूर भागते थे विजय
\r\n\r\nआज जो विजय तमिलनाडु की सत्ता पर काबिज होने के लिए रैलियां कर रहे हैं, एक समय था जब वे राजनीति से सख्त परहेज करते थे। उन्होंने अपने ही पिता एस. ए. चंद्रशेखर समेत 11 लोगों पर मुकदमा कर दिया था, क्योंकि उनके पिता ने 'ऑल इंडिया थलपति विजय मक्कल इयक्कम' नाम से एक राजनीतिक पार्टी बना ली थी और उसमें विजय के नाम का इस्तेमाल किया जा रहा था। यह विरोधाभास आज की तारीख में उनके राजनीतिक सफर पर एक बड़ा सवालिया निशान लगाता है।
\r\n
Sabse pehle comment karne wale banein.