जयपुर: जयपुर-अजमेर नेशनल हाईवे मंगलवार की रात एक भयानक मंजर का गवाह बना, जब एक केमिकल से भरे टैंकर और LPG सिलेंडरों से लदे एक ट्रक के बीच हुई टक्कर ने मौत का तांडव मचा दिया। हादसा इतना भयावह था कि ट्रक में रखे 330 में से करीब 200 सिलेंडर एक के बाद एक बम की तरह फटते चले गए, जिससे पूरा इलाका दहल उठा। धमाकों की गूंज 10 किलोमीटर दूर तक सुनाई दी और हाईवे आग के दरिया में तब्दील हो गया। इस अग्निकांड में एक व्यक्ति की जिंदा जलकर दर्दनाक मौत हो गई, जबकि 5 अन्य वाहन भी आग की चपेट में आकर राख हो गए।Read also:-बिहार में बजा चुनावी बिगुल! दो चरणों में 6 और 11 नवंबर को होगी वोटिंग, 14 नवंबर को फैसला; आचार संहिता लागू
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क्या RTO के डर ने ली जान?
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हादसे के पीछे की जो वजह सामने आ रही है, वह बेहद चौंकाने वाली है। एक प्रत्यक्षदर्शी और हादसे में अपना ट्रक गंवा चुके ड्राइवर शाहरुख ने बताया कि केमिकल से भरा टैंकर जयपुर की ओर जा रहा था। तभी सामने से आरटीओ की गाड़ी आती दिखी। कथित तौर पर, आरटीओ की कार्रवाई से बचने के लिए टैंकर के ड्राइवर ने हड़बड़ाहट में गाड़ी को सड़क किनारे एक ढाबे की तरफ मोड़ दिया, जहाँ पहले से ही LPG सिलेंडरों से भरा ट्रक खड़ा था।
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जैसे ही तेज रफ्तार टैंकर ट्रक से टकराया, एक चिंगारी भड़की और ज्वलनशील केमिकल ने तुरंत आग पकड़ ली। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप ले लिया और LPG ट्रक को अपनी चपेट में ले लिया। टैंकर का ड्राइवर खुद को बचाने के लिए संघर्ष करता रहा, लेकिन आग इतनी तेजी से फैली कि उसे निकलने का मौका तक नहीं मिला और उसकी मौके पर ही जलकर मौत हो गई।
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दमकलकर्मियों ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया।

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दो घंटे तक गूंजते रहे धमाके, आसमान से बरसी आग
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टक्कर के बाद का मंजर किसी युद्ध क्षेत्र से कम नहीं था। ट्रक में रखे सिलेंडरों ने एक-एक कर फटना शुरू कर दिया। यह सिलसिला करीब 2 घंटे तक चलता रहा। हर धमाके के साथ आग का एक विशाल गोला आसमान में उठता और पूरा इलाका दहल जाता। कुछ सिलेंडर तो मिसाइल की तरह हवा में उछलकर 500-500 मीटर दूर खेतों और पास के ढाबे में जा गिरे, जिससे वहां मौजूद लोगों में भगदड़ मच गई। इस दौरान हाईवे पर खड़े पांच अन्य वाहन भी आग का गोला बन गए।
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6 घंटे की मशक्कत और 7 किलोमीटर लंबा जाम
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हादसे के बाद हाईवे पर दोनों तरफ वाहनों की कतारें लग गईं और करीब 7 किलोमीटर लंबा जाम लग गया। सूचना मिलते ही प्रशासन और पुलिस की टीमें मौके पर पहुंचीं। ट्रैफिक को किशनगढ़ और टोंक रोड से डायवर्ट किया गया। दमकल की 12 गाड़ियों ने लगभग 3 घंटे की भारी मशक्कत के बाद देर रात 1:30 बजे आग पर काबू पाया। इसके बाद जले हुए सिलेंडरों को हटाने का काम शुरू हुआ और लगभग 6 घंटे की कड़ी मेहनत के बाद बुधवार सुबह 4:30 बजे हाईवे को यातायात के लिए फिर से खोला जा सका।
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अधजला शव और डीएनए टेस्ट का इंतजार
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हादसे में मारे गए व्यक्ति का शव इतनी बुरी तरह जल चुका है कि उसकी पहचान करना असंभव है। पुलिस ने शव के अवशेषों को एक प्लास्टिक बैग में भरकर एसएमएस अस्पताल की मॉर्च्युरी में रखवाया है। अस्पताल अधीक्षक के अनुसार, शव की पहचान अब एफएसएल-डीएनए टेस्ट के बाद ही हो पाएगी।
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घटना की गंभीरता को देखते हुए डिप्टी सीएम प्रेमचंद बैरवा और जयपुर ग्रामीण एसपी राशि डोगरा डूडी भी मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया।
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