गोरखपुर/इटावा (UP Crime News): उत्तर प्रदेश में एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने शादी-ब्याह के लिए 'सरकारी दूल्हा' तलाशने वाले परिवारों की नींद उड़ा दी है। खाकी और लाल बत्ती का रौब दिखाकर एक ठग ने ऐसा मायाजाल बुना कि एक पढ़ा-लिखा परिवार भी उसमें उलझ कर रह गया। खुद को मानिकपुर (Manikpur) का एसडीएम (SDM) और आईएएस (IAS) अधिकारी बताने वाले इटावा के प्रीतम निषाद ने गोरखपुर की एक लड़की से शादी रचा ली।READ ALSO:-देवभूमि में 'आस्था' पर घमासान: चारधाम में गैर-सनातनियों की एंट्री पर सख्त नियम; गंगोत्री में 'पंचगव्य' तो बदरी-केदार में देना होगा 'एफिडेवि
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हैरानी की बात यह है कि जब इस 'फर्जी एसडीएम' की हकीकत सामने आई, तो पुलिस और लड़की वालों के पैरों तले जमीन खिसक गई। पता चला कि गोरखपुर की यह लड़की उसकी पहली नहीं, बल्कि 26वीं शिकार थी! इससे पहले वह 25 अन्य युवतियों से शादी कर लाखों रुपये ऐंठ चुका है। इस ताजा धोखाधड़ी में गोरखपुर के पीड़ित परिवार को 30 लाख रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है।
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अब गोरखपुर पुलिस (Gorakhpur Police) एक्शन मोड में आ गई है और आरोपी की गिरफ्तारी के लिए इटावा (Etawah) में डेरा डाल दिया है। आइए, इस महाठग की पूरी कहानी, उसके काम करने के तरीके (Modus Operandi) और इस घटना के हर एक पहलू को विस्तार से समझते हैं।
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25 शादियां और करोड़ों की ठगी: कौन है यह नटवरलाल?

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इस पूरे फर्जीवाड़े का मुख्य आरोपी प्रीतम कुमार निषाद (32 वर्ष) है। वह मूल रूप से उत्तर प्रदेश के इटावा जिले के इकदिल थाना क्षेत्र के लुधियात मोहल्ले का रहने वाला है।
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प्रीतम कोई आम ठग नहीं है; वह लोगों की मानसिकता (Psychology) से खेलने में माहिर है। उसे अच्छी तरह पता है कि भारतीय समाज में एक आईएएस (IAS) अधिकारी या एसडीएम (SDM) का रुतबा क्या होता है। इसी रुतबे का फायदा उठाकर उसने एक पूरा 'सिंडिकेट' तैयार कर रखा था, जिसमें उसकी सगी बहन, जीजा और परिवार के अन्य सदस्य भी शामिल बताए जा रहे हैं।
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क्रिमिनल बैकग्राउंड: * पुलिस सूत्रों के अनुसार, प्रीतम निषाद के खिलाफ इटावा के इकदिल थाने में पहले से ही दो युवतियों ने धोखाधड़ी और शादी का झांसा देने का मुकदमा दर्ज कराया हुआ है।
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    स्थानीय स्तर पर मिली जानकारी के मुताबिक, वह अब तक अलग-अलग जिलों और राज्यों में 'सरकारी अधिकारी' बनकर 25 लड़कियों से शादी कर चुका है और उनसे लाखों-करोड़ों रुपये ऐंठ चुका है।
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गोरखपुर का मामला: 30 लाख की चपत और एक लाचार पिता का टूटा सपना

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गोरखपुर कैंट थाना क्षेत्र के मोहद्दीपुर इलाके में रहने वाला पीड़ित परिवार इस समय गहरे सदमे में है। लड़की के पिता शारीरिक रूप से लकवाग्रस्त (Paralyzed) हैं। उनकी तीन बेटियां और एक बेटा है। दो बड़ी बेटियों की शादी वह पहले ही कर चुके थे और अब अपनी सबसे छोटी बेटी के लिए एक सुयोग्य वर की तलाश कर रहे थे।
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ऐसे बुना गया धोखे का जाल (The Matrimonial Trap)

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    ग्रुप में आया प्रोफाइल: पीड़ित लड़की की सबसे बड़ी बहन दिल्ली में रहती है। उसने समाज के एक व्हाट्सएप/मैट्रिमोनियल ग्रुप में एक युवक का प्रोफाइल देखा।
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    प्रभावशाली बायोडाटा: प्रोफाइल में प्रीतम कुमार निषाद को 32 वर्षीय 'आईएएस अधिकारी' और वर्तमान में 'मानिकपुर एसडीएम' के पद पर तैनात बताया गया था।
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    विश्वास जीतना: जब परिवार ने प्रीतम से संपर्क किया, तो उसने उन्हें विश्वास में लेने के लिए अपने पुराने (और फर्जी) इंटरव्यू के वीडियो भेजे। साथ ही, उसने कुछ राजनेताओं और मान-सम्मान प्राप्त करते हुए अपनी 'फोटोशॉप्ड' (Edited) तस्वीरें भी भेजीं।
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'फर्जी घर' का मुआयना

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शादी तय करने से पहले जब लड़की के परिवार वाले छानबीन के लिए इटावा गए, तो वहां भी प्रीतम ने अपने ड्रामे से उन्हें बेवकूफ बना दिया।
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    उसने लुधियात मोहल्ले में एक मकान दिखाया और कहा कि वह यहां अपनी बड़ी बहन के साथ रहता है।
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    जब परिवार ने उसके पैतृक गांव चलने को कहा, तो उसने बहुत ही शातिराना जवाब दिया: "मेरा गांव बहुत पिछड़ा हुआ है। वहां कम आना-जाना होता है। मैं अपने पूरे गांव का पहला आईएएस अधिकारी हूँ, इसलिए मैं शहर में ही रहता हूँ।" परिवार उसकी इस भावुक और 'सक्सेस स्टोरी' वाली बात पर पूरी तरह विश्वास कर गया और 11 मार्च 2026 को शादी की तारीख पक्की कर दी।
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शादी के नाम पर 15 लाख की एडवांस ठगी

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शादी तय होते ही प्रीतम ने अपना असली रंग दिखाना शुरू कर दिया। उसने शादी की तैयारियों और अन्य 'वीआईपी खर्चों' के नाम पर लड़की के परिवार वालों से किश्तों में लगभग 15 लाख रुपये नकद ले लिए। लकवाग्रस्त पिता ने अपनी जीवन भर की पूंजी अपनी बेटी की 'एसडीएम' से शादी के लिए दांव पर लगा दी।
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7 मार्च का 'VIP' ड्रामा: भारत सरकार की गाड़ी और फर्जी असिस्टेंट

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शादी से चार दिन पहले, 7 मार्च 2026 को प्रीतम निषाद गोरखपुर आया। इस दिन उसने जो भौकाल (Show-off) बनाया, उसने परिवार की बची-खुची शंकाओं को भी दूर कर दिया।
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लड़की के पिता का दर्दनाक बयान: "वह जिस कार से हमारे घर आया था, उस पर मोटे अक्षरों में 'भारत सरकार' (Government of India) लिखा हुआ था। उसके साथ एक आदमी भी था, जिसे वह अपना 'पीए' (Assistant) बता रहा था, जो फाइलें लिए उसके पीछे-पीछे चल रहा था। उसने हमें शादी का कार्ड दिया। जब मैंने पूछा कि आप खुद कार्ड देने क्यों आए, तो उसने कहा कि उसे गोरखपुर में हमारे समाज के कैबिनेट मंत्री, सांसद और कुछ बड़े पुलिस अधिकारियों को कार्ड बांटना है। हम उसकी बातों में आ गए।"
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11 मार्च 2026: 26वीं शादी और सात फेरे

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11 मार्च को गोरखपुर के एक मैरिज हॉल में धूमधाम से शादी हुई। बारात में 20 से 30 लोग आए थे, जिनमें फर्जी आईएएस के साथ उसकी शातिर बहन, जीजा, पिता और कुछ बच्चे शामिल थे।
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    प्रीतम ने दूल्हा बनने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
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    वह शानदार शेरवानी पहन कर आया था और सात फेरे लेने से ठीक पहले उसने अपना वीआईपी रुतबा दिखाने के लिए कपड़े भी बदले।
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    कुल मिलाकर, इस शादी में लड़की वालों के 30 लाख रुपये से ज्यादा खर्च हो गए।
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कैसे खुली फर्जी SDM की पोल? (The Unmasking)

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कहते हैं कि झूठ के पैर नहीं होते। शादी के कुछ दिनों बाद ही इस भव्य ड्रामे का पर्दाफाश हो गया।
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पहला सुराग: एक गुमनाम कॉल लड़की के पिता के मोबाइल पर प्रीतम के असली गांव से किसी परिचित का फोन आया। उस व्यक्ति ने बताया कि प्रीतम गांव से भागा हुआ एक फ्रॉड है। उसने यह भी खुलासा किया कि यह उसकी 26वीं शादी है और वह इससे पहले 25 लड़कियों की जिंदगी बर्बाद कर चुका है।
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दूसरा सुराग: घर की हकीकत सच्चाई जानने के लिए जब पीड़ित परिवार अपनी बेटी को लेकर अचानक इटावा के लुधियात मोहल्ले वाले पते पर पहुंचा, तो उनके होश उड़ गए। खुद को मानिकपुर का एसडीएम बताने वाले प्रीतम निषाद के घर पर एक साधारण सा शौचालय (Toilet) तक नहीं था! जब स्थानीय लोगों से पूछताछ की गई, तो पता चला कि वह कोई अधिकारी नहीं, बल्कि एक शातिर ठग है। हकीकत खुलते ही लड़की के परिवार वाले अपनी बेटी को वहां से सुरक्षित बचाकर वापस गोरखपुर ले आए।
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पुलिस का एक्शन: इटावा में गोरखपुर पुलिस की दबिश

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जैसे ही भंडाफोड़ हुआ, आरोपी प्रीतम निषाद अपने इटावा वाले घर से फरार हो गया।
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    FIR और कार्यवाही: गोरखपुर लौटने के बाद पीड़ित परिवार ने तुरंत गोरखपुर कैंट थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामले की गंभीरता (और एक आईएएस अधिकारी के नाम के दुरुपयोग) को देखते हुए तुरंत धारा 420 (धोखाधड़ी), 467, 468 (फर्जी दस्तावेज बनाना) और 498A के तहत मामला दर्ज कर लिया है। इस केस में प्रीतम के साथ-साथ साजिश रचने वाले उसके परिवार वालों को भी नामजद किया गया है।
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    गिरफ्तारी का प्रयास: रविवार को गोरखपुर कैंट पुलिस की एक विशेष टीम आरोपी की गिरफ्तारी के लिए इटावा रवाना हो गई। पुलिस सर्विलांस और मुखबिरों की मदद से उसके संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है।
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    कैंट पुलिस का कहना है कि आरोपी के पकड़े जाने के बाद ही पता चलेगा कि उसने उन 25 लड़कियों के साथ क्या किया और इस पूरे नेक्सस (Nexus) में और कौन-कौन लोग शामिल हैं।
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जागरूकता (Awareness): कैसे करें असली और फर्जी अधिकारी की पहचान?

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आजकल 'शादी डॉट कॉम' या व्हाट्सएप ग्रुप्स पर फर्जी प्रोफाइल बनाकर ठगी करना एक आम साइबर अपराध (Cyber Crime) बन गया है। 'सरकारी नौकरी' के मोह में परिवार अंधी दौड़ का हिस्सा बन जाते हैं। अगर आपके पास भी कोई ऐसा रिश्ता आता है, तो ये 5 जांच (Background Verification) जरूर करें:
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    DoPT वेबसाइट पर चेक करें: भारत सरकार के डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनल एंड ट्रेनिंग (DoPT) की वेबसाइट supremo.nic.in (Executive Record Sheet) पर देश के हर असली IAS अधिकारी का पूरा बायोडाटा, पोस्टिंग हिस्ट्री और बैच की जानकारी पब्लिक डोमेन में उपलब्ध होती है। नाम सर्च करके सच्चाई जानी जा सकती है।
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    सिविल लिस्ट (Civil List): राज्य सरकारें अपने प्रशासनिक अधिकारियों की 'सिविल लिस्ट' जारी करती हैं। आप संबंधित जिले (जैसे इस केस में मानिकपुर/चित्रकूट) की आधिकारिक NIC वेबसाइट (districtname.nic.in) पर जाकर वर्तमान SDM का नाम और फोटो देख सकते हैं।
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    कार्यस्थल पर फिजिकल वेरिफिकेशन: केवल लड़के के घर जाकर न देखें, बल्कि जिस ऑफिस में वह तैनाती का दावा कर रहा है, वहां किसी परिचित या रिश्तेदार को भेजकर गुपचुप तरीके से पता करवाएं।
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  7. \r\n
    आरटीआई (RTI) का प्रयोग: यदि समय है, तो आप 10 रुपये की RTI लगाकर भी उस विभाग से उस नाम के अधिकारी की तैनाती की पुष्टि कर सकते हैं।
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    सोशल मीडिया का स्मार्ट इस्तेमाल: LinkedIn या Twitter (X) पर उस अधिकारी का असली प्रोफाइल खोजें। अक्सर ठग लोग असली अधिकारियों के नाम का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन उनकी तस्वीरें मैच नहीं करतीं।
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गोरखपुर की यह घटना हमारे समाज के लिए एक बड़ा 'वेक-अप कॉल' (Wake-up call) है। शादी जीवन का एक बहुत बड़ा फैसला होता है। केवल 'लाल बत्ती', 'सरकारी बोर्ड' या महंगे कपड़ों को देखकर किसी अजनबी पर 30 लाख रुपये और अपनी बेटी का भविष्य नहीं लुटाना चाहिए। पुलिस अब अपना काम कर रही है, लेकिन एक लकवाग्रस्त पिता को जो मानसिक और आर्थिक आघात लगा है, उसकी भरपाई शायद ही कभी हो पाए। उम्मीद है कि यूपी पुलिस जल्द ही इस नटवरलाल को सलाखों के पीछे पहुंचाएगी।
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