मुजफ्फरनगर: सावन के पवित्र महीने में कांवड़ यात्रा (Kanwar Yatra) पूरे चरम पर है। सड़कों पर शिवभक्तों का जनसैलाब उमड़ पड़ा है। कोई पैदल चल रहा है, तो कोई दंडौती करते हुए हरिद्वार की ओर बढ़ रहा है। लेकिन, इन सबके बीच उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर से गुजरी एक बेहद खास कांवड़ ने सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। यह कोई साधारण कांवड़ नहीं है, बल्कि इसे एक चलते-फिरते 'जिम' (Gym) का रूप दिया गया है।READ ALSO:-मेरठ: बेगमपुल व्यापार संघ ने धूमधाम से मनाया 57वां स्थापना दिवस; वरिष्ठों को किया नमन, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और पारिवारिक मिलन समारोह ने बांधा समां
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दिल्ली पुलिस में सिपाही (हेड कांस्टेबल) के पद पर तैनात अमित उर्फ मिट्ठू मदेरिया अपने तीन अन्य दोस्तों के साथ इस अद्भुत 'जिम वाली कांवड़' को लेकर दिल्ली के नजफगढ़ से हरिद्वार के लिए निकले हैं। मंगलवार की रात करीब 9 बजे जब उनकी यह कांवड़ मुजफ्फरनगर पहुंची, तो सड़क पर उसे देखने वालों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। कांवड़ के आगे भगवान भोलेनाथ की विशाल और मनमोहक प्रतिमा विराजमान है, जबकि इसके पिछले हिस्से को पूरी तरह से एक फिटनेस सेंटर का रूप दिया गया है, जिसमें डंबल (Dumbbells) और कसरत करने के अन्य भारी उपकरण सजाए गए हैं। सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात यह है कि अमित इस पूरी कांवड़ को अपने शरीर से बंधी लोहे की मोटी जंजीरों के सहारे खींचते हुए आगे बढ़ रहे हैं।
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 अमित दिल्ली पुलिस में हेड कांस्टेबल हैं। वह नेशनल लेवल के तैराक भी रह चुके हैं।

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250 किलोमीटर का सफर और फिटनेस का महा-अभियान

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'खबरीलाल' से विशेष बातचीत करते हुए अमित ने अपनी इस अनोखी यात्रा के उद्देश्य को विस्तार से साझा किया। उन्होंने बताया कि उनकी यह कांवड़ यात्रा दिल्ली के नजफगढ़ से शुरू होकर हरिद्वार तक जाएगी और वहां से पवित्र गंगाजल भरकर वे वापस दिल्ली लौटेंगे, जहां शिव मंदिर में जलाभिषेक किया जाएगा। यह पूरा सफर करीब 250 किलोमीटर का है।
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अमित का कहना है, "यह केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं है, बल्कि भगवान शिव की आराधना के साथ-साथ समाज और खासकर आज की युवा पीढ़ी को फिटनेस के प्रति जागरूक करने का एक प्रयास है। आज का युवा नशे की गिरफ्त में फंसकर अपनी ताकत और भविष्य दोनों बर्बाद कर रहा है। मेरी यह यात्रा उन्हीं भटके हुए युवाओं के लिए एक संदेश है कि शरीर भगवान का दिया हुआ मंदिर है, इसे नशे का कूड़ादान न बनाएं।"

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सड़क पर चलते-चलते करवा रहे हैं फिटनेस चैलेंज

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अमित की यह कांवड़ यात्रा बेहद संवादात्मक (Interactive) है। वे केवल चुपचाप अपनी मंजिल की ओर नहीं बढ़ रहे हैं, बल्कि रास्ते में जहां भी उन्हें युवाओं की भीड़ दिखती है या लोग उनके पास आते हैं, वे वहीं रुककर युवाओं को 'फिटनेस चैलेंज' (Fitness Challenge) दे डालते हैं।
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सड़क पर ही वे युवाओं से पुश-अप्स (Push-ups), स्क्वैट्स और डंबल उठाने की प्रतियोगिताएं करवाते हैं। जो युवा इन व्यायामों में बेहतर प्रदर्शन करते हैं, अमित उन्हें अपनी क्षमता के अनुसार मौके पर ही नकद या अन्य पुरस्कार देकर सम्मानित भी करते हैं। इस तरह के आयोजनों से न केवल रास्ते में कांवड़ियों और स्थानीय लोगों का मनोरंजन हो रहा है, बल्कि युवाओं में जिम जाने और अपनी सेहत सुधारने को लेकर एक नई ऊर्जा और उत्साह भी पैदा हो रहा है। मुजफ्फरनगर में भी कई युवाओं ने अमित के साथ सड़क पर पुश-अप्स लगाकर अपनी फिटनेस का मुजाहिरा किया।
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"मैं 40 साल का हूं और कोई नशा नहीं करता..."

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सोशल मीडिया की दुनिया में अमित 'मिट्ठू मदेरिया' (Mittu Maderia) के नाम से काफी मशहूर हैं। उनके फिटनेस वीडियो और लाइफस्टाइल को हजारों लोग फॉलो करते हैं। अपनी उम्र और ताकत का हवाला देते हुए अमित कहते हैं, "आज मैं 40 साल का हो चुका हूं और गर्व से कह सकता हूं कि मैंने आज तक जीवन में कभी किसी प्रकार का कोई नशा नहीं किया है। यही मेरी असली ताकत है। इसीलिए आज मैं अपने भोले बाबा की इस भारी-भरकम कांवड़ को नंदी महाराज की तरह जंजीर से बांधकर खींचने में सक्षम हूं।"
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उन्होंने गहरी चिंता जताते हुए कहा, "आजकल मैं देखता हूं कि 17-18 साल के कई युवा इतने कमजोर हो चुके हैं कि उनमें इस जंजीर को उठाने तक की ताकत नहीं बची है। नशे ने उनकी हड्डियां खोखली कर दी हैं। मेरी यह जिम कांवड़ उन्हीं युवाओं के लिए एक साइलेंट मैसेज है। अगर आपको किसी चीज का नशा करना ही है, तो अपनी सेहत बनाने का नशा करो, फिटनेस का नशा करो, पसीना बहाने का नशा करो।"
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पुलिस सेवा का अनुभव: नशे से बर्बाद होता बचपन

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अमित वर्तमान में दिल्ली पुलिस में हेड कांस्टेबल के पद पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उनका पूरा परिवार हमेशा से खेलकूद और फिटनेस की दुनिया से गहराई से जुड़ा रहा है। खुद अमित तैराकी (Swimming) में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की कई प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले चुके हैं और देश का नाम रोशन कर चुके हैं।
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अपनी पुलिस ड्यूटी के अनुभवों को साझा करते हुए वे कहते हैं, "पुलिस सेवा में होने के नाते मुझे समाज की कड़वी सच्चाइयों को बहुत करीब से देखने का मौका मिलता है। हम थानों में और गश्त के दौरान देखते हैं कि 15-16 साल के मासूम बच्चे आजकल ऐसे-ऐसे खतरनाक केमिकल और सिंथेटिक नशे कर रहे हैं, जिसकी एक आम इंसान कल्पना भी नहीं कर सकता। यह देखकर दिल दहल जाता है कि हमारे देश का भविष्य किस गर्त में जा रहा है। अगर हम अपनी ऐसी छोटी-छोटी पहलों से कुछ युवाओं को भी नशे के दलदल से बाहर निकालकर खेल और फिटनेस के मैदान में ला सकें, तो यही मेरी इस कांवड़ यात्रा की सबसे बड़ी सफलता होगी। मुझे खुशी होगी जब यही युवा नशे की पुड़िया छोड़कर हाथ में भाला या डंबल उठाएंगे और कल को ओलंपिक (Olympics) में देश के लिए मेडल जीतेंगे।"
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युवाओं को महत्वपूर्ण सलाह: बिना तैयारी न उठाएं भारी कांवड़

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अमित ने कांवड़ यात्रा के नाम पर होने वाले अंधी दौड़ और दिखावे पर भी अपनी बेबाक राय रखी। उन्होंने उन युवाओं को एक बेहद महत्वपूर्ण और व्यवहारिक सलाह दी जो बिना किसी शारीरिक तैयारी के भारी-भरकम कांवड़ उठा लेते हैं।
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उन्होंने कहा, "कांवड़ यात्रा केवल आस्था और भक्ति का पर्व नहीं है, बल्कि यह आपके अनुशासन, मानसिक संयम और शारीरिक क्षमता की भी एक बहुत बड़ी परीक्षा है। मैंने कई बार देखा है कि बहुत से श्रद्धालु दोस्तों के उकसावे में आकर या जोश-जोश में 80 से 100 लीटर तक गंगाजल लेकर यात्रा शुरू कर देते हैं। लेकिन, क्योंकि उनका शरीर इस भारी वजन को सहने का आदी नहीं होता और न ही उन्होंने कोई अभ्यास किया होता है, इसलिए वे बीच रास्ते में ही बुरी तरह टूट जाते हैं। कई बार तो उन्हें थक-हारकर अपनी कांवड़ बीच में ही किसी और को सौंपनी पड़ती है या छोड़नी पड़ जाती है, जो कि धार्मिक दृष्टि से भी सही नहीं है।"
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अमित ने अपील करते हुए कहा, "इसलिए मेरा सभी युवाओं से यह करबद्ध निवेदन है कि कांवड़ उठाने से पहले अपने शरीर को इसके लिए तैयार करें। महीनों पहले से नियमित व्यायाम करें, रनिंग करें और स्टैमिना बनाएं। फिर अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार ही गंगाजल उठाएं और सच्ची श्रद्धा के साथ कांवड़ यात्रा पूरी करें।"
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आस्था, संयम और स्वास्थ्य का अनूठा संगम

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दिल्ली पुलिस के सिपाही अमित मदेरिया की यह 'जिम कांवड़' आज सिर्फ एक धार्मिक यात्रा तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह समाज सुधार का एक जीता-जागता चलता-फिरता मॉडल बन गई है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश, विशेषकर मुजफ्फरनगर और मेरठ जैसे जिलों में जहां युवाओं का एक बड़ा वर्ग सेना, पुलिस और खेलों की तैयारी करता है, वहां अमित का यह संदेश और भी ज्यादा प्रासंगिक हो जाता है। उनकी जंजीरों की झंकार और डंबल्स की खनक आज उन युवाओं को जगाने का काम कर रही है, जो नशे की नींद में सोए हुए हैं। खबरीलाल ऐसे सभी युवाओं से अपील करता है कि अमित की इस प्रेरणादायक यात्रा से सीख लें और अपने जीवन को स्वस्थ, सुरक्षित और देश के लिए उपयोगी बनाएं।
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