नई दिल्ली/देहरादून: दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के लाखों यात्रियों के लिए वह बहुप्रतीक्षित पल आखिरकार आ ही गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 14 अप्रैल को भारत के सबसे आधुनिक और पर्यावरण के अनुकूल माने जाने वाले 'दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस-वे' (Delhi-Dehradun Expressway) का भव्य उद्घाटन करने जा रहे हैं। यह एक्सप्रेस-वे न केवल दो राजधानियों के बीच की दूरी को कम करेगा, बल्कि यह इंफ्रास्ट्रक्चर और इकोलॉजी (पर्यावरण) के बीच संतुलन का एक विश्वस्तरीय मॉडल भी पेश करेगा।READ ALSO:-लखनऊ SGPGI ने रचा इतिहास: यूपी का पहला सफल हार्ट ट्रांसप्लांट, दिल्ली से 'ग्रीन कॉरिडोर' के जरिए लाया गया धड़कता हुआ दिल
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वर्तमान में नेशनल हाईवे-58 (NH-58) के जरिए गाजियाबाद, मेरठ, मुजफ्फरनगर और रुड़की होते हुए देहरादून पहुंचने में लोगों को भारी ट्रैफिक जाम का सामना करना पड़ता है और इस थकाऊ सफर में 6 से 7 घंटे का समय लग जाता है। लेकिन, इस नए 6-लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे के चालू होने के बाद यह सफर मात्र ढाई से तीन घंटे में पूरा हो सकेगा।
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आइए, इस अत्याधुनिक एक्सप्रेस-वे की खूबियों, इसके रूट, टोल टैक्स की दरों और इसमें किए गए अद्वितीय प्रयोगों के बारे में विस्तार से जानते हैं।
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एक्सप्रेस-वे का रूट और उत्तर प्रदेश को मिलने वाला भारी फायदा
\r\n\r\nइस 212 किलोमीटर लंबे महात्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को अगर हम भौगोलिक दृष्टि से देखें, तो यह जितना उत्तराखंड के लिए फायदेमंद है, उससे कहीं अधिक यह उत्तर प्रदेश के आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण है। इस पूरे एक्सप्रेस-वे का लगभग 135 किलोमीटर (करीब 64%) हिस्सा अकेले उत्तर प्रदेश से होकर गुजरता है।
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- \r\n दिल्ली में शुरुआत: इस 6-लेन एक्सप्रेस-वे की शुरुआत दिल्ली के अक्षरधाम मंदिर के पास से होती है। यहां पहले से मौजूद हाईवे को रि-डेवलप किया गया है। स्थानीय ट्रैफिक को जाम से बचाने के लिए यहां एक्सप्रेस-वे के दोनों ओर 6-लेन की सर्विस रोड बनाई गई है, जिससे यह कुल 12-लेन का हो जाता है।\r\n \r\n
- \r\n यूपी में प्रवेश और ग्रीनफील्ड अलाइनमेंट: दिल्ली में गीता कॉलोनी से खजूरी खास तक 6.4 किलोमीटर का हिस्सा एलिवेटेड है। इसके बाद लोनी के पास से यह एक्सप्रेस-वे यूपी में प्रवेश करता है। गाजियाबाद में 20 से 22 किलोमीटर का सफर तय करने के बाद यह सीधे बागपत जिले में प्रवेश करता है।\r\n \r\n
- \r\n पश्चिमी यूपी के अछूते इलाकों का विकास: बागपत में इस एक्सप्रेस-वे का सबसे बड़ा हिस्सा (45-50 किमी) है। यह एक 'ग्रीनफील्ड' प्रोजेक्ट है, यानी जहां पहले सिर्फ खेत खलिहान थे, वहां से अब फर्राटा भरती गाड़ियां गुजरेंगी। इसके आगे खेकड़ा, बागपत और बड़ौत में विशेष इंटरचेंज बनाए गए हैं।\r\n \r\n
- \r\n शामली और सहारनपुर: आगे बढ़ते हुए यह एक्सप्रेस-वे शामली (35 से 40 किलोमीटर) और फिर यूपी के आखिरी जिले सहारनपुर (45 से 50 किलोमीटर) से गुजरता है। शामली, कैराना और देवबंद के पास अत्याधुनिक इंटरचेंज बनाए गए हैं, जिससे इन शहरों के व्यापारियों और किसानों को सीधा दिल्ली और उत्तराखंड का फास्ट कनेक्टिविटी मार्ग मिल गया है।\r\n \r\n
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यात्रियों के लिए बड़ी राहत: शुरुआत के 18 किलोमीटर तक कोई टोल नहीं
\r\n\r\nइस एक्सप्रेस-वे की सबसे बड़ी खासियतों में से एक इसका टोल-फ्री सेक्शन है। दिल्ली और आसपास के लोकल यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए, अक्षरधाम से शुरू होकर यूपी के लोनी तक (कुल 18 किलोमीटर) के सफर को पूरी तरह से टोल-फ्री (Toll-Free) रखा गया है।
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यानी, जो लोग केवल दिल्ली-एनसीआर की सीमा के भीतर इस शानदार सड़क का इस्तेमाल करेंगे, उन्हें कोई पैसा नहीं देना होगा। 18 किलोमीटर से आगे बढ़ने पर मंडोला में एक बड़ा इंटरचेंज बनाया गया है, जो इस नए मार्ग को ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे (EPE) से जोड़ता है। यहीं से आगे जाने वाले यात्रियों का टोल कटना शुरू होगा।
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हरिद्वार कुंभ को ध्यान में रखकर बना विशेष 50 किलोमीटर का लिंक
\r\n\r\nउत्तराखंड की अर्थव्यवस्था पर्यटन और तीर्थयात्रा पर टिकी है। सहारनपुर को पार करने के बाद एक्सप्रेस-वे उत्तराखंड की सीमा में प्रवेश करता है। यहां से रुड़की और हरिद्वार का रास्ता पड़ता है।
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आगामी हरिद्वार महाकुंभ और कांवड़ यात्रा के दौरान होने वाली करोड़ों श्रद्धालुओं की भीड़ को ध्यान में रखते हुए, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने एक मास्टरस्ट्रोक चला है। सहारनपुर के हल्गोया गांव के पास से मुख्य एक्सप्रेस-वे से अलग होकर एक 50 किलोमीटर लंबा 6-लेन का अतिरिक्त रास्ता (Spur) सीधे हरिद्वार और रुड़की के लिए बनाया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य यह है कि जो यात्री केवल हरिद्वार जाना चाहते हैं, उन्हें देहरादून वाले मुख्य मार्ग पर जाकर जाम न बढ़ाना पड़े और कुंभ के दौरान यातायात पूरी तरह से बाधारहित रहे।
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एशिया का सबसे बड़ा वाइल्डलाइफ कॉरिडोर: जहां जंगल भी सुरक्षित, सफर भी तेज
\r\n\r\nहरिद्वार से देहरादून के बीच की 50 किलोमीटर की दूरी तय करना पहले सबसे मुश्किल काम था, क्योंकि यह पहाड़ी और घुमावदार रास्ता है। यह क्षेत्र 'राजाजी टाइगर रिजर्व' और शिवालिक वन क्षेत्र का हिस्सा है।
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जब फरवरी 2020 में इस प्रोजेक्ट की नींव रखी जा रही थी, तब पर्यावरणविदों ने इसका भारी विरोध किया था। उनका तर्क था कि जंगल के बीच से सड़क गुजरने पर हजारों पेड़ कटेंगे और बाघ, हाथी, और हिरण जैसे जानवरों के जीवन में इंसानी दखलंदाजी बढ़ेगी। मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा और नवंबर 2021 में कोर्ट ने पेड़ों की कटाई पर अस्थाई रोक लगा दी।
\r\n\r\nलेकिन, सरकार और NHAI ने हार नहीं मानी और एक ऐसा डिजाइन पेश किया जिसने सभी की चिंताएं दूर कर दीं।
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- \r\n 12 किलोमीटर लंबी एलिवेटेड रोड: जानवरों के आवास को बचाने के लिए जंगल के बीचों-बीच 12 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड (हवा में) कॉरिडोर बनाया गया है। यह एशिया में किसी भी जंगल के ऊपर बनी सबसे लंबी एलिवेटेड सड़क है।\r\n \r\n
- \r\n हाथियों के लिए 'फ्री-मूवमेंट': इस एलिवेटेड पुल की ऊंचाई जमीन से 6 से 7 मीटर रखी गई है। इसका डिजाइन हाथियों के पारंपरिक माइग्रेशन रूट (आने-जाने के रास्ते) को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है, ताकि गजराज आसानी से पुल के नीचे से गुजर सकें और ऊपर गाड़ियां चलती रहें।\r\n \r\n
- \r\n पीली लाइट और नॉइज बैरियर (Noise Barrier): रात के समय जानवरों की आंखों पर वाहनों की तेज रोशनी न पड़े, इसके लिए सफेद लाइट की जगह 'पीली लाइट' का प्रयोग किया गया है। साथ ही, वाहनों का शोर जंगल तक न पहुंचे, इसके लिए पुल के दोनों ओर विशेष 'नॉइज कंट्रोल दीवारें' खड़ी की गई हैं। यह भारत का पहला ऐसा एक्सप्रेस-वे है जो 'वाइल्डलाइफ प्रोटेक्शन' का इतना शानदार उदाहरण पेश करता है।\r\n \r\n
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सुरक्षा और हाई-टेक सुविधाएं: 10 मिनट में पहुंचेगी मदद
\r\n\r\n212 किलोमीटर लंबे इस हाई-स्पीड कॉरिडोर को विश्वस्तरीय सुरक्षा मानकों के अनुसार डिजाइन किया गया है:
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- \r\n अंडरपास और ब्रिज: स्थानीय गांवों के लोगों को सड़क पार करने में दिक्कत न हो, इसके लिए पूरे रास्ते में 113 अंडरपास और 5 रेलवे ओवरब्रिज (ROB) बनाए गए हैं।\r\n \r\n
- \r\n यात्री सुविधाएं: सफर को आरामदायक बनाने के लिए 62 बस शेल्टर और कई 'वे-साइड एमिनिटीज' (Way-side amenities) विकसित की गई हैं, जहां पेट्रोल पंप, रेस्तरां और वॉशरूम की सुविधा होगी।\r\n \r\n
- \r\n सीसीटीवी और 10-मिनट रिस्पॉन्स: सुरक्षा के लिहाज से चप्पे-चप्पे पर हाई-रिजॉल्यूशन कैमरे लगाए गए हैं। एडवांस ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ATMS) के जरिए अगर कोई एक्सीडेंट ट्रेस होता है, तो इमरजेंसी रेस्क्यू टीम मात्र 10 मिनट के भीतर मौके पर पहुंच जाएगी।\r\n \r\n
- \r\n स्पीड लिमिट और चालान: एक्सप्रेस-वे पर कारों के लिए अधिकतम स्पीड लिमिट 100 किलोमीटर प्रति घंटा तय की गई है। सड़क पर लगे हाई-टेक सेंसर ओवरस्पीडिंग करने वाले वाहनों को तुरंत स्कैन कर उनका ऑटोमैटिक ई-चालान काट देंगे।\r\n \r\n
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क्या होंगी टोल की दरें? जानिए अपनी जेब का खर्च
\r\n\r\nसमय और ईंधन की बचत के बदले यात्रियों को एक निर्धारित टोल चुकाना होगा। टोल टैक्स की जो दरें सामने आई हैं, वे इस प्रकार हैं:
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- \r\n कारों के लिए: कार, जीप या वैन के लिए टोल की दर लगभग 3 रुपये प्रति किलोमीटर तय की गई है।\r\n\r\n
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- \r\n उदाहरण: अगर आप दिल्ली से सीधे देहरादून जाते हैं, तो आपको एक तरफ का टोल लगभग 675 रुपये चुकाना होगा।\r\n \r\n
- \r\n रिटर्न डिस्काउंट: यदि आप 24 घंटे के भीतर उसी रास्ते से वापस लौटते हैं (Fastag के जरिए), तो आपको वापसी में 675 रुपये नहीं, बल्कि करीब आधा यानी 335 रुपये ही देने होंगे।\r\n \r\n
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- \r\n कमर्शियल वाहनों के लिए: मिनी बस या लाइट कमर्शियल वाहनों (LCV) के लिए एक तरफ का टोल करीब 1100 रुपये है।\r\n \r\n
- \r\n भारी वाहनों के लिए: बड़ी बस और ट्रकों के लिए टोल 2275 रुपये रखा गया है, जबकि मल्टी-एक्सल भारी वाहनों के लिए यह टोल 4000 रुपये तक हो सकता है। सरकार के नियमानुसार वीआईपी और इमरजेंसी वाहनों को टोल में मिलने वाली छूट यहां भी लागू रहेगी।\r\n \r\n
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एक नए युग की शुरुआत
\r\n\r\n4 दिसंबर 2021 को जब पीएम मोदी ने इस प्रोजेक्ट का शिलान्यास किया था, तब उन्होंने कहा था कि यह एक्सप्रेस-वे "पर्यावरण की सुरक्षा के साथ, हमारे विकास का भी प्रमाण होगा।" आज करीब 4 साल बाद यह बात सच साबित हो रही है। दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस-वे सिर्फ कंक्रीट की एक सड़क नहीं है, बल्कि यह समय की बचत, ईंधन की किफायत, प्रदूषण में कमी, वन्यजीवों के संरक्षण और उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड के आर्थिक विकास का एक सुनहरा मार्ग है। 14 अप्रैल का दिन भारतीय इंफ्रास्ट्रक्चर के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होने जा रहा है।
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