भारतीय महिला क्रिकेट टीम की कप्तानी छोड़ने के बाद अब हरमनप्रीत कौर का नाम फिर उनके रिकॉर्ड और पूरे क्रिकेट सफर के साथ चर्चा में है। 37 साल की हरमनप्रीत ने 6 अक्टूबर 2026 को तीनों फॉर्मेट की कप्तानी छोड़ने का ऐलान किया, लेकिन खिलाड़ी के रूप में भारत के लिए खेलना जारी रखने की बात कही है।

लेकिन हरमनप्रीत की कहानी सिर्फ कप्तानी तक सीमित नहीं है। पंजाब के मोगा से निकलकर उन्होंने भारतीय महिला क्रिकेट में अपनी अलग पहचान बनाई। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में उनका सफर 2009 में शुरू हुआ, जब उन्होंने पाकिस्तान के खिलाफ ODI डेब्यू किया। वह उस समय अपने 20वें जन्मदिन से सिर्फ एक दिन दूर थीं। 

विज्ञापन
विज्ञापन

2009 में Team India में एंट्री

हरमनप्रीत ने मार्च 2009 में भारत के लिए ODI डेब्यू किया। उसी साल जून में उन्होंने इंग्लैंड के खिलाफ अपना पहला T20I भी खेला। शुरुआत में वह बल्लेबाजी के साथ ऑफ-स्पिन गेंदबाजी करने वाली ऑलराउंडर के रूप में टीम का हिस्सा बनीं। 

उनके खेल की सबसे खास बात आक्रामक बल्लेबाजी रही। बचपन में उनके पिता भी क्रिकेट खेलते थे और शुरुआती कोचिंग में उन्हें गेंद पर आक्रमण करने के लिए प्रोत्साहित किया गया। BCCI के अनुसार, उनके पहले कोच Y. Sodhi का जोर भी उनकी स्वाभाविक आक्रामक बल्लेबाजी को विकसित करने पर था। 

2013 में पहला ODI शतक

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में जगह बनाने के बाद हरमनप्रीत ने 2013 में इंग्लैंड के खिलाफ अपना पहला ODI शतक लगाया। इसके बाद वह भारतीय बल्लेबाजी क्रम में एक भरोसेमंद और आक्रामक खिलाड़ी के रूप में स्थापित होती गईं। 

2016 में विदेश में भी बनाया रिकॉर्ड

2016 में हरमनप्रीत ने भारतीय महिला क्रिकेट के लिए एक और दरवाजा खोला। वह Women’s Big Bash League में Sydney Thunder से जुड़ीं और Big Bash League कॉन्ट्रैक्ट हासिल करने वाली पहली भारतीय क्रिकेटर बनीं। अगले साल वह Kia Super League में भी खेलने वाली पहली भारतीय बनीं। 

इसी दौर में उनकी पहचान सिर्फ भारत की खिलाड़ी के रूप में नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय T20 क्रिकेट की बड़ी खिलाड़ियों में बनने लगी।

2017 की 171* ने बदल दी पहचान

अगर हरमनप्रीत कौर के करियर की एक पारी चुननी हो, तो 2017 World Cup की 171 रन की नाबाद पारी सबसे खास पड़ावों में शामिल होगी।

ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सेमीफाइनल में उन्होंने सिर्फ 115 गेंदों पर नाबाद 171 रन बनाए। उनकी पारी में 20 चौके और 7 छक्के थे। भारत ने 42 ओवर में 281/4 का स्कोर बनाया और ऑस्ट्रेलिया को 36 रन से हराकर फाइनल में जगह बनाई। 

यह पारी आज भी महिला ODI क्रिकेट की सबसे यादगार पारियों में गिनी जाती है। BCCI के अनुसार, यह Women’s World Cup में किसी भारतीय बल्लेबाज का सर्वोच्च व्यक्तिगत स्कोर है। 

कप्तानी की शुरुआत और बड़ा सफर

हरमनप्रीत ने 2016 में भारत की T20I कप्तानी संभाली। बाद में 2022 में मिताली राज के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास के बाद वह टेस्ट और ODI में भी पूर्णकालिक कप्तान बनीं। 

उनकी कप्तानी में भारत ने 2022 Commonwealth Games में सिल्वर मेडल और 2023 Asian Games में गोल्ड जीता। 2023 में भारत ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अपना पहला टेस्ट भी जीता। 

2025 में रचा सबसे बड़ा इतिहास

हरमनप्रीत की कप्तानी का सबसे बड़ा अध्याय 2025 Women's ODI World Cup रहा।

भारत ने दक्षिण अफ्रीका को फाइनल में हराकर पहली बार महिला ODI World Cup जीता। इसके साथ हरमनप्रीत ICC Women's World Cup जीतने वाली पहली भारतीय कप्तान बनीं। 

2026 में भी उनकी कप्तानी में भारत ने Asian Games में लगातार दूसरी बार महिला क्रिकेट का गोल्ड मेडल जीता। 

रिकॉर्ड्स की लंबी लिस्ट

हरमनप्रीत के नाम कई ऐतिहासिक रिकॉर्ड हैं।

  • 171* — Women's World Cup में भारतीय बल्लेबाज का सर्वोच्च व्यक्तिगत स्कोर।
  • पहली भारतीय महिला T20I सेंचुरी — 2018 में न्यूजीलैंड के खिलाफ।
  • 200 T20I खेलने वाली दुनिया की पहली क्रिकेटर — पुरुष और महिला क्रिकेट दोनों में।
  • 150 T20I में कप्तानी करने वाली पहली क्रिकेटर — पुरुष और महिला दोनों में।
  • 2026 में Women's International Cricket की सबसे ज्यादा capped खिलाड़ी बनीं। फरवरी 2026 में उनकी अंतरराष्ट्रीय appearances की संख्या 356 पहुंची थी और उन्होंने Suzie Bates को पीछे छोड़ा।
  • Big Bash League contract पाने वाली पहली भारतीय क्रिकेटर।
  • पहली भारतीय कप्तान जिन्होंने Women's ODI World Cup जिताया। 

कप्तानी में भी आंकड़े खास

  • अब कप्तानी छोड़ते समय उनके नाम 5 टेस्ट, 51 ODI और 155 T20I में भारत की कप्तानी का रिकॉर्ड दर्ज है।
  • उनकी कप्तानी में भारत ने World Cup, Asian Games और अन्य बड़े टूर्नामेंटों में अहम उपलब्धियां हासिल कीं। अब वह कप्तानी की जिम्मेदारी से अलग होकर बतौर खिलाड़ी भारतीय टीम के साथ रहेंगी।
  • हरमनप्रीत ने अपने कप्तानी छोड़ने के संदेश में लिखा कि उन्होंने टीम को अपना “खून, पसीना और समय” दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि कप्तानी खत्म हो रही है, लेकिन उनका सफर जारी रहेगा।
  • 2009 में शुरू हुआ यह सफर अब एक नए अध्याय में पहुंच गया है—इस बार हाथ में कप्तानी की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि बल्ला होगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
पढ़िए फटाफट खबरेंस्वाइप करके पढ़ें