राजनीति की भागदौड़ और फाइलों के अंबार के बीच जब सत्ता का शीर्ष नेतृत्व अध्यात्म और कला की शरण में जाता है, तो इतिहास के पन्नों में कुछ बेहद खूबसूरत तस्वीरें दर्ज हो जाती हैं। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के प्रतिष्ठित लोकभवन में रविवार को कुछ ऐसा ही अलौकिक नजारा देखने को मिला। प्रदेश में बहुप्रतीक्षित मंत्रिमंडल विस्तार की गहमागहमी जैसे ही थमी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपनी पूरी नई और पुरानी कैबिनेट के साथ भगवान श्रीकृष्ण के गूढ़ रहस्यों पर आधारित फिल्म 'कृष्णावतारम्' (Krishnavataram) की स्पेशल स्क्रीनिंग में शिरकत की। इस आध्यात्मिक आयोजन के तुरंत बाद, मुख्यमंत्री ने एक बड़ा ऐलान करते हुए इस भव्य फिल्म को पूरे उत्तर प्रदेश में टैक्स फ्री (Tax-Free) घोषित कर दिया।READ ALSO:-ड्राइविंग लाइसेंस एक्सपायर हो गया है? तुरंत करें ये काम, वरना रद्द हो जाएगा लाइसेंस और कटेगा भारी चालान; जानें ऑनलाइन रिन्यूअल का A to Z प्रोसेस
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'बेटियों से कुछ मुफ्त नहीं लिया जाता' - एक भावुक मुख्यमंत्री का फैसला उत्तर प्रदेश में किसी फिल्म का टैक्स फ्री होना कोई नई बात नहीं है, लेकिन 'कृष्णावतारम्' को कर-मुक्त करने के पीछे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जो कारण बताया, उसने वहां मौजूद हर शख्स का दिल जीत लिया। इस फिल्म में उत्तर प्रदेश की माननीय राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल की नातिनी संस्कृति पटेल (Sanskruti Patel) ने भगवान कृष्ण की पत्नी 'सत्यभामा' का मुख्य किरदार निभाया है।
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इस अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भारतीय संस्कृति की जड़ों का हवाला देते हुए एक बेहद भावुक बात कही। उन्होंने कहा, "हमारे सनातन धर्म और भारतीय परंपरा में बेटियों का स्थान सर्वोच्च है। हमारी मान्यता है कि बेटियों से कभी कुछ मुफ्त नहीं लिया जाता।" चूँकि इस फिल्म में प्रदेश की प्रथम नागरिक (राज्यपाल) की नातिनी—जो यूपी की बेटी के समान हैं—ने अपने अथक परिश्रम से यह शानदार भूमिका निभाई है, इसलिए राज्य सरकार सम्मान स्वरूप इस फिल्म को जनता के लिए टैक्स फ्री कर रही है। यह फैसला केवल एक प्रशासनिक आदेश नहीं था, बल्कि यह नारी शक्ति और बेटियों के प्रति योगी सरकार के गहरे सम्मान का प्रतीक बन गया।
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लोकभवन का वो ऐतिहासिक पल और संस्कृति पटेल का जादू लोकभवन के आलीशान ऑडिटोरियम में आयोजित इस स्पेशल स्क्रीनिंग की भव्यता देखते ही बन रही थी। एक ओर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ थे, तो दूसरी ओर दोनों उपमुख्यमंत्री और सरकार के तमाम दिग्गज मंत्री मौजूद थे। इस पूरी महफिल की शोभा तब और बढ़ गई जब राज्यपाल आनंदीबेन पटेल भी इस खास पल का हिस्सा बनीं।
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जैसे ही ढाई घंटे की यह फिल्म खत्म हुई, पूरा हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। फिल्म का मुख्य आकर्षण नवोदित अभिनेत्री संस्कृति पटेल रहीं। उन्होंने 'सत्यभामा' के किरदार की जटिलताओं, उनके राजसी ठाठ-बाट, और भगवान कृष्ण के प्रति उनके अनन्य लेकिन अधिकारपूर्ण प्रेम को पर्दे पर इतनी शिद्दत से जिया कि दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए। स्क्रीनिंग के बाद मुख्यमंत्री ने स्वयं मंच पर आकर संस्कृति पटेल और फिल्म के अन्य सभी कलाकारों व क्रू सदस्यों को सम्मानित किया। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की आंखों में अपनी नातिनी की सफलता देखकर जो गर्व के भाव थे, वह वहां मौजूद हर कैमरे ने कैद किए।
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आखिर कैसी है 'कृष्णावतारम्'? (Film's Philosophical Depth) 'कृष्णावतारम्' कोई आम पौराणिक फिल्म नहीं है, जो केवल चमत्कार या युद्ध दिखाती हो। यह फिल्म 5000 साल पुरानी द्वापर युग की घटनाओं को एक मनोवैज्ञानिक और दार्शनिक धरातल पर तौलती है। आज के समय में जब युवा पीढ़ी हर बात पर तर्क और विज्ञान खोजती है, यह फिल्म उनके संदेहों का बड़ी ही सहजता से समाधान करती है।
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फिल्म में भगवान कृष्ण के प्रेम के विभिन्न स्वरूपों को अद्भुत तरीके से परिभाषित किया गया है:

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    राधा का प्रेम (समर्पण का पर्याय): फिल्म दिखाती है कि राधा और कृष्ण का प्रेम कोई भौतिक आकर्षण नहीं, बल्कि आत्मा का सर्वोच्च समर्पण है।
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    रुक्मिणी का प्रेम (नियति का खेल): देवी रुक्मिणी के साथ कृष्ण का विवाह और उनके प्रेम को नियति (Destiny) के एक खूबसूरत अध्याय के रूप में दर्शाया गया है।
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    सत्यभामा का किरदार (प्रेम की विविधता): संस्कृति पटेल द्वारा निभाया गया यह किरदार प्रेम में अधिकार, मान-मनौव्वल और कृष्ण के प्रति अटूट विश्वास की भव्यता को दर्शाता है।
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    16,000 रानियों का प्रसंग (नारी सशक्तिकरण): अक्सर आलोचक 16 हजार रानियों के प्रसंग पर सवाल उठाते हैं। इस फिल्म ने नरकासुर की कैद से मुक्त हुई उन महिलाओं को समाज में सम्मान दिलाने के कृष्ण के फैसले को 'नारी सशक्तिकरण' (Women Empowerment) के सबसे महान ऐतिहासिक कदम के रूप में चित्रित किया है।
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युवाओं तक सनातन संस्कृति पहुंचाने का मास्टरप्लान सीएम योगी आदित्यनाथ भली-भांति जानते हैं कि सिनेमा आज के दौर का सबसे ताकतवर माध्यम है। उन्होंने इस फिल्म को केवल टैक्स फ्री तक सीमित नहीं रखा है। उन्होंने राज्य के सूचना एवं जनसंपर्क विभाग को सख्त और स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि प्रदेश के सभी 75 जिलों में 'कृष्णावतारम्' की विशेष स्क्रीनिंग आयोजित की जाए।
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सरकार की मंशा है कि स्कूल और कॉलेज के छात्र, युवा और आम जनमानस भारी संख्या में सिनेमाघरों तक पहुंचें। आज की पीढ़ी, जो इंटरनेट और विदेशी संस्कृति के प्रभाव में अपनी जड़ों से दूर हो रही है, उसे यह फिल्म भगवान कृष्ण के रहस्यमय लेकिन प्रासंगिक व्यक्तित्व से जोड़ेगी। यह फिल्म सिखाती है कि धर्म का अर्थ केवल कर्मकांड नहीं है, बल्कि जीवन के हर संघर्ष में धर्म के मार्ग पर चलना है।
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राजनीति और कला का एक शुभ संयोग मंत्रिमंडल विस्तार के दिन ही इस फिल्म का प्रदर्शन होना एक दुर्लभ संयोग है। यह दर्शाता है कि उत्तर प्रदेश विकास और आधुनिकता के साथ-साथ अपनी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को भी सीने से लगाकर चल रहा है। 'कृष्णावतारम्' का यूपी में टैक्स फ्री होना संस्कृति पटेल जैसी उभरती प्रतिभाओं के लिए एक बड़ा प्रोत्साहन है। सिनेमाघरों में इस फिल्म के उतरने के बाद, यह देखना दिलचस्प होगा कि आम जनता द्वापर युग की इस भव्य सिनेमाई प्रस्तुति को कितना प्यार देती है, लेकिन सरकार ने अपनी तरफ से इसे जन-जन तक पहुंचाने का रास्ता पूरी तरह साफ कर दिया है।
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