New Delhi: केंद्र सरकार ने मोबाइल यूजर्स और स्मार्टफोन कंपनियों को बड़ी राहत दी है। सरकार ने मोबाइल फोन पर Sanchar Saathi App (संचार साथी एप) के प्री-इंस्टॉलेशन (पहले से डाउनलोड) की अनिवार्यता के अपने फैसले को वापस ले लिया है।READ ALSO:-यूपी में अफसरों की बंपर भर्ती: नए साल में PCS के 1850+ पदों पर मौका; आयोग रचेगा इतिहास, एक साल में दो भर्तियों का रिजल्ट!
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टेलिकॉम डिपार्टमेंट (DoT) ने स्पष्ट किया है कि एप की बढ़ती लोकप्रियता और लोगों द्वारा खुद इसे डाउनलोड करने की रफ्तार को देखते हुए अब कंपनियों के लिए इसे फोन में पहले से इंस्टॉल कर बेचना अनिवार्य नहीं होगा। यह फैसला ऐसे समय आया है जब विपक्ष और सोशल मीडिया पर इसे लेकर 'प्राइवेसी' और 'जासूसी' की बहस छिड़ी हुई थी।
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2 दिन में 10 गुना बढ़े डाउनलोड
\r\n\r\nटेलिकॉम डिपार्टमेंट के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, Sanchar Saathi App को लेकर जनता में जागरूकता तेजी से बढ़ी है। बुधवार दोपहर 12 बजे तक इस एप को 1.40 करोड़ लोग डाउनलोड कर चुके हैं। हैरान करने वाली बात यह है कि पिछले दो दिनों में अपनी मर्जी से एप डाउनलोड करने वालों की संख्या में 10 गुना की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसी सकारात्मक रिस्पॉन्स को देखते हुए सरकार ने जबरन इंस्टॉलेशन का फैसला बदला है।
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संसद में बोले सिंधिया- "जासूसी संभव नहीं"
\r\n\r\nइस पूरे मुद्दे पर केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) ने बुधवार को लोकसभा में सरकार का पक्ष रखा। एप को लेकर कांग्रेस नेता दीपेंद्र सिंह हुड्डा के सवालों का जवाब देते हुए सिंधिया ने साफ किया कि Sanchar Saathi App से किसी भी तरह की जासूसी करना न तो संभव है और न ही सरकार की ऐसी कोई मंशा है।
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सिंधिया ने कहा, "फीडबैक के आधार पर मंत्रालय ने एप इंस्टॉल करने के आदेश में बदलाव किया है। यह एप पूरी तरह से ऑप्शनल (वैकल्पिक) है। यूजर जब चाहे इसे अपने फोन से हटा सकते हैं। यह एप केवल वही डेटा लेता है जिसे यूजर खुद फ्रॉड या स्पैम रिपोर्ट करता है। यह कॉल सुनने या पर्सनल मैसेज पढ़ने में सक्षम नहीं है।"
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क्यों हुआ था विवाद?
\r\n\r\nयह विवाद 28 नवंबर को शुरू हुआ था, जब दूरसंचार विभाग ने एपल (Apple), सैमसंग, वीवो और शाओमी जैसी कंपनियों को एक आदेश जारी किया था। इसमें कहा गया था कि भारत में बिकने वाले सभी नए फोन्स में Sanchar Saathi App पहले से इंस्टॉल होना चाहिए। कंपनियों को इसके लिए 90 दिन का समय दिया गया था।
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विपक्ष ने इस आदेश को निजता का हनन बताया था। 2 दिसंबर को कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने इसे 'जासूसी एप' करार देते हुए कहा था कि सरकार हर नागरिक की निगरानी करना चाहती है। वहीं, रेणुका चौधरी ने राज्यसभा में कार्यस्थगन प्रस्ताव दिया था।
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एपल और कंपनियों की बढ़ गई थी मुश्किलें
\r\n\r\nसरकार के प्री-इंस्टॉलेशन आदेश से मोबाइल इंडस्ट्री, खासकर एपल (Apple) जैसी कंपनियों की चिंता बढ़ गई थी। एपल की ग्लोबल पॉलिसी किसी भी थर्ड-पार्टी या सरकारी एप को प्री-इंस्टॉल करने की इजाजत नहीं देती। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इंडस्ट्री के दबाव और तकनीकी पेचीदगियों के कारण भी सरकार ने नरमी बरती है।
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आखिर क्या है Sanchar Saathi App?
\r\n\r\nसरकार द्वारा 17 जनवरी 2025 को लॉन्च किया गया Sanchar Saathi App एक साइबर सिक्योरिटी टूल है। इसका मुख्य उद्देश्य डिजिटल सुरक्षा को बढ़ावा देना है।
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- \r\n खोया फोन खोजें: यह एप चोरी या गुम हुए मोबाइल को ट्रैक करने और उसे ब्लॉक करने में मदद करता है।\r\n \r\n
- \r\n फर्जी IMEI की पहचान: यह चेक करता है कि आपका फोन असली है या क्लोन किया हुआ।\r\n \r\n
- \r\n फ्रॉड रिपोर्टिंग: वॉट्सएप या कॉल के जरिए होने वाले साइबर फ्रॉड को यूजर सीधे रिपोर्ट कर सकते हैं।\r\n \r\n
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सरकार का दावा है कि इस सिस्टम के जरिए अब तक 7 लाख से ज्यादा गुम हुए मोबाइल बरामद किए जा चुके हैं। भाजपा सांसद संबित पात्रा ने भी इसे फ्रॉड रोकने और डिजिटल सुरक्षा का एक अहम हथियार बताया है।
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सरकार ने Sanchar Saathi App को अनिवार्य बनाने का फैसला वापस लेकर विवाद को खत्म कर दिया है। अब यह यूजर्स की मर्जी पर निर्भर करेगा कि वे इसे अपने फोन में रखना चाहते हैं या नहीं। हालांकि, साइबर फ्रॉड से बचने के लिए सरकार इसे डाउनलोड करने की अपील लगातार कर रही है।
Sabse pehle comment karne wale banein.