खबरीलाल बिजनेस डेस्क | नई दिल्ली
\r\n\r\n
​क्या कभी आपके साथ ऐसा हुआ है कि आपने ऑनलाइन 500 रुपये का कोई सामान कार्ट में डाला, लेकिन पेमेंट पेज तक पहुंचते-पहुंचते उसका बिल 600 रुपये हो गया? या फिर बिना आपसे पूछे ही फाइनल बिल में 1-2 रुपये का डोनेशन, हैंडलिंग चार्ज या पैकेजिंग फीस जुड़ गई? डिजिटल दुनिया की भाषा में कंपनियों की इसी चालाकी को 'डार्क पैटर्न' (Dark Patterns) कहा जाता है।
\r\n\r\n
 
\r\n\r\n
​सेंट्रल कंज्यूमर प्रोटेक्शन अथॉरिटी (CCPA) ने ग्राहकों को गुमराह करने वाली इन चालाकियों पर कड़ा संज्ञान लेते हुए Zepto, BookMyShow, Physics Wallah और IndiGo जैसी 9 बड़ी कंपनियों पर सख्त कार्रवाई की है और लाखों रुपये का जुर्माना ठोका है।
\r\n\r\n
 
\r\n\r\n

​क्या होता है डार्क पैटर्न (What are Dark Pattens)?

\r\n\r\n
​डार्क पैटर्न ऑनलाइन कंपनियों, ई-कॉमर्स वेबसाइटों और ऐप्स का एक ऐसा 'डिजिटल जाल' है, जिसे इस तरह डिजाइन किया जाता है कि ग्राहक भ्रमित हो जाएं। इसके जरिए ग्राहकों से अनजाने में ज्यादा पैसे वसूल लिए जाते हैं, ऐसे सब्सक्रिप्शन बेच दिए जाते हैं जिनकी उन्हें जरूरत नहीं होती, या फिर उन्हें डराकर (False Urgency) सामान खरीदने पर मजबूर किया जाता है।
\r\n\r\n
 
\r\n\r\n

​किन कंपनियों पर हुई कार्रवाई और क्या थी उनकी चालाकी?

\r\n\r\n
​CCPA ने अपनी जांच में पाया कि ये नामी कंपनियां अलग-अलग तरह के डार्क पैटर्न्स का इस्तेमाल कर रही थीं:
\r\n\r\n
 
\r\n\r\n

​1. Zepto: छुपा हुआ चार्ज और जबरन मेंबरशिप

\r\n\r\n
    \r\n
  • \r\n
    ​क्या थी चालाकी: जेप्टो (Zepto) ऐप पर ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए पहले सामान के दाम कम दिखाए जाते थे। लेकिन पेमेंट के आखिरी पेज पर चुपके से 'हैंडलिंग चार्ज' और 'जबरन मेंबरशिप फीस' जोड़ दी जाती थी। इसे तकनीकी भाषा में 'ड्रिप प्राइसिंग' (Drip Pricing) और 'बास्केट स्नेकिंग' (Basket Sneaking) कहते हैं।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    ​CCPA का एक्शन: सरकार ने इसे सीधे तौर पर धोखाधड़ी माना और जेप्टो पर 7 लाख रुपये का भारी जुर्माना ठोका। जुर्माने के बाद कंपनी ने ऐप से यह तरीका हटा दिया है।
    \r\n
  • \r\n
\r\n\r\n
 
\r\n\r\n

​2. Physics Wallah: प्री-सिलेक्टेड डोनेशन और इमोशनल ब्लैकमेल

\r\n\r\n
    \r\n
  • \r\n
    ​क्या थी चालाकी: इस लोकप्रिय ऑनलाइन एजुकेशन प्लेटफॉर्म पर जब कोई छात्र कोर्स खरीदता था, तो बिल में 10 रुपये का डोनेशन अपने आप टिक (Pre-select) हो जाता था। अगर कोई छात्र इसे अनटिक (हटाने) की कोशिश करता, तो उसे इमोशनल मैसेज दिखाकर रोकने का प्रयास किया जाता था। साथ ही, 'फ्री कोर्स' के नाम पर ग्राहकों का पर्सनल डेटा भी मांगा जा रहा था।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    ​CCPA का एक्शन: अथॉरिटी ने कड़ा संज्ञान लेते हुए कंपनी पर 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।
    \r\n
  • \r\n
\r\n\r\n
 
\r\n\r\n

​3. BookMyShow: बिल में चुपके से 1 रुपया जोड़ना

\r\n\r\n
    \r\n
  • \r\n
    ​क्या थी चालाकी: मूवी या इवेंट टिकट बुक करते समय बिना ग्राहक की अनुमति के बिल में 'BookASmile' नाम की चैरिटी के लिए 1 रुपया पहले से टिक होकर (Auto-tick) जुड़ जाता था।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    ​CCPA का एक्शन: अथॉरिटी की कड़ी फटकार के बाद अब कंपनी को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वह इस ऑटो-टिक फीचर को तुरंत हटाए।
    \r\n
  • \r\n
\r\n\r\n
​
\r\n\r\n

4. IndiGo: डराकर या शर्मिंदा करके सर्विस बेचना (Confirm Shaming)

\r\n\r\n
    \r\n
  • \r\n
    ​क्या थी चालाकी: इंडिगो एयरलाइंस की ऐप पर जब कोई यात्री एक्स्ट्रा सर्विस (जैसे ट्रैवल इंश्योरेंस या पेड सीट) लेने से मना करता था, तो स्क्रीन पर लिखा आता था- "No I will take risk" (नहीं, मैं जोखिम उठाऊंगा)। यह ग्राहकों के मन में डर पैदा कर सर्विस खरीदने के लिए उकसाने का एक मनोवैज्ञानिक तरीका था।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    ​CCPA का एक्शन: सरकार के सख्त हस्तक्षेप के बाद इंडिगो को यह डराने वाली लाइन बदलनी पड़ी। अब कंपनी को सीधी भाषा में "No, I will not add to the trip" लिखना पड़ रहा है।
    \r\n
  • \r\n
\r\n\r\n
​
\r\n\r\n

इन 5 अन्य कंपनियों पर भी चला CCPA का डंडा

\r\n\r\n
​उपरोक्त कंपनियों के अलावा CCPA ने अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर भी गाज गिराई है। इन सभी को छुपे हुए चार्ज, झूठे टाइमर और जबरन सब्सक्रिप्शन जैसे डार्क पैटर्न्स तुरंत बंद करने के सख्त निर्देश दिए गए हैं:
\r\n\r\n
 
\r\n\r\n\r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n
\r\n
कंपनी का नाम
\r\n
\r\n
प्लेटफॉर्म का प्रकार
\r\n
\r\n
लगाया गया जुर्माना
\r\n
\r\n
Anuj Jindal
\r\n
\r\n
एजुकेशन/कोचिंग प्लेटफॉर्म
\r\n
\r\n
3 लाख रुपये
\r\n
\r\n
FirstCry
\r\n
\r\n
बेबी प्रोडक्ट ई-कॉमर्स
\r\n
\r\n
2 लाख रुपये
\r\n
\r\n
PharmaEasy
\r\n
\r\n
ऑनलाइन फार्मेसी
\r\n
\r\n
1 लाख रुपये
\r\n
\r\n
McAfee
\r\n
\r\n
एंटीवायरस/सॉफ्टवेयर
\r\n
\r\n
1 लाख रुपये
\r\n
\r\n
SpiceJet
\r\n
\r\n
एयरलाइंस
\r\n
\r\n
1 लाख रुपये
\r\n
\r\n\r\n
 
\r\n\r\n

खबरीलाल की सलाह: डिजिटल शॉपिंग करते समय रहें सावधान

\r\n\r\n
​डार्क पैटर्न से बचने के लिए एक जागरूक ग्राहक बनना बेहद जरूरी है। अगली बार जब भी आप ऑनलाइन शॉपिंग करें, खाना ऑर्डर करें या फ्लाइट/मूवी टिकट बुक करें, तो इन बातों का ध्यान रखें:
\r\n\r\n
 
\r\n\r\n
    \r\n
  1. \r\n
    ​चेकआउट पेज पर सतर्क रहें: 'पेमेंट' (Pay Now) बटन दबाने से पहले फाइनल बिल के एक-एक चार्ज (कन्वीनियंस फीस, पैकेजिंग, डोनेशन आदि) को ध्यान से पढ़ें।
    \r\n
  2. \r\n
  3. \r\n
    ​ऑटो-टिक बॉक्स हटाएं: चेक करें कि कहीं किसी इंश्योरेंस, डोनेशन या प्रीमियम सर्विस वाले बॉक्स पर पहले से टिक (Right Mark) तो नहीं लगा है। यदि हां, तो उसे अनटिक करें।
    \r\n
  4. \r\n
  5. \r\n
    ​शिकायत दर्ज करें: अगर आपको लगता है कि कोई ऐप आपको गुमराह कर रही है या छुपे हुए चार्ज वसूल रही है, तो आप राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (NCH) नंबर 1915 पर कॉल कर सकते हैं या कंज्यूमर फोरम की वेबसाइट पर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
    \r\n
  6. \r\n
विज्ञापन
विज्ञापन