उत्तर प्रदेश के बिजनौर में कड़ाके की ठंड और घने कोहरे (Dense Fog) ने रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है। विजिबिलिटी (दृश्यता) इतनी कम हो गई है कि सड़क पर चलना मौत के कुएं में चलने जैसा हो गया है। इसी 'सफेद आफत' ने आज सुबह अफजलगढ़ थाना क्षेत्र में एक बड़े हादसे को अंजाम दिया।READ ALSO:-बिजनौर सड़क हादसा: 4 दिन तक मौत से जंग लड़ता रहा 20 साल का उजैर, आखिरकार हार गया जिंदगी; नगीना में पसरा मातम
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हरिद्वार से तीर्थ यात्रा कर लौट रहे श्रद्धालुओं की कार अनियंत्रित होकर सड़क किनारे एक गहरे तालाब/खाई में जा गिरी। गनीमत रही कि समय रहते मदद मिल गई और एक बड़ा हादसा टल गया। यह घटना न केवल प्रशासन के लिए चेतावनी है, बल्कि उन सभी यात्रियों के लिए सबक है जो कोहरे में सफर करने का जोखिम उठा रहे हैं।
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घटना का विवरण: गांव जिक्रीवाला के पास क्या हुआ?

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हादसा थाना अफजलगढ़ (Afzalgarh Police Station) क्षेत्र के गांव जिक्रीवाला (Jikriwala) के पास हुआ। गुरुवार की सुबह, जब पूरा इलाका घने कोहरे की चादर में लिपटा हुआ था, एक कार हरिद्वार दिशा से आ रही थी। कार में चार श्रद्धालु सवार थे, जो देवभूमि हरिद्वार से दर्शन और गंगा स्नान कर अपने घर वापस लौट रहे थे।
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    दृश्यता शून्य (Zero Visibility): सुबह के समय कोहरा इतना घना था कि ड्राइवर को सड़क का किनारा (Road Shoulder) और खाई का फर्क समझ नहीं आया।
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    अनियंत्रित कार: जिक्रीवाला के पास एक मोड़ पर कार अचानक अनियंत्रित हो गई। इससे पहले कि ड्राइवर ब्रेक लगा पाता, गाड़ी सड़क से फिसलते हुए सीधे किनारे बने गहरे तालाब/खाई में जा गिरी।
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    पानी में समाई कार: गिरते ही कार पानी में डूबने लगी। ठंडे पानी और बंद दरवाजों के बीच यात्रियों की सांसे अटक गईं।
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रेस्क्यू ऑपरेशन: रस्सियों ने बचाई जान

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जैसे ही कार तालाब में गिरी, अंदर बैठे चारों यात्रियों में चीख-पुकार मच गई। वे मदद के लिए चिल्लाने लगे। आसपास के खेतों में काम कर रहे ग्रामीणों और राहगीरों ने जब पानी में गिरती कार और चीखें सुनीं, तो वे तुरंत मौके की ओर दौड़े।
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साहस की मिसाल:

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    रस्सी का सहारा: ग्रामीणों ने समझदारी दिखाते हुए तुरंत रस्सियों (Ropes) का इंतजाम किया।
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    मानव श्रृंखला: कुछ साहसी युवक तालाब के किनारे तक गए और रस्सियों को कार तक फेंका।
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    बाहर निकाला: कार के अंदर फंसे यात्रियों को एक-एक करके रस्सियों की मदद से बाहर खींचा गया। अगर ग्रामीणों ने तत्परता न दिखाई होती, तो ठंड और डूबने से यात्रियों की जान जा सकती थी।
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घायलों की स्थिति: सदमे में श्रद्धालु

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कार में कुल चार यात्री सवार थे। इस हादसे में चारों को चोटें आई हैं।
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    चोटें: गनीमत रही कि किसी की जान नहीं गई, लेकिन सभी यात्री घायल हैं और गहरे सदमे (Trauma) में हैं। ठंडे पानी में भीगने के कारण वे ठंड से कांप रहे थे।
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    इलाज: ग्रामीणों और पुलिस की मदद से घायलों को तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र/अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज चल रहा है।
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    पुलिस पहुंची: सूचना मिलते ही अफजलगढ़ थाने की पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। पुलिस ने क्रेन की मदद से कार को तालाब से बाहर निकालने की प्रक्रिया शुरू की।
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कोहरे का कहर: पश्चिमी यूपी में रेड अलर्ट

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मौसम विभाग (IMD) ने पहले ही पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 'घने से बहुत घने कोहरे' (Dense to Very Dense Fog) का अलर्ट जारी किया हुआ है। बिजनौर, मुरादाबाद और नजीबाबाद बेल्ट में सुबह के समय विजिबिलिटी 50 मीटर से भी कम रह रही है।
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हादसों का कारण:

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    सफेद पट्टी का न होना: कई ग्रामीण सड़कों पर 'व्हाइट लाइन' या 'रिफ्लेक्टर' नहीं हैं, जिससे कोहरे में सड़क का किनारा पता नहीं चलता।
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    रफ्तार: कोहरे के बावजूद ड्राइवर अक्सर गाड़ी की गति कम नहीं करते, जो ऐसे हादसों का मुख्य कारण बनता है।
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सड़क सुरक्षा विश्लेषण: कोहरे में कैसे बचें?

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यह हादसा हम सभी के लिए एक सबक है। अगर आप कोहरे में ड्राइव कर रहे हैं, तो 'ख़बरीलाल' आपसे अपील करता है कि इन 5 बातों का विशेष ध्यान रखें:
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  1. \r\n
    फॉग लाइट्स (Fog Lights): अपनी गाड़ी की फॉग लाइट्स और लो-बीम (Low Beam) हेडलाइट्स हमेशा ऑन रखें। हाई बीम का इस्तेमाल न करें क्योंकि कोहरा रोशनी को वापस रिफ्लेक्ट करता है।
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    धीमी गति: स्पीडोमीटर पर नजर रखें। गति उतनी ही रखें जिससे आप अचानक कोई बाधा दिखने पर सुरक्षित रूप से रुक सकें।
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    सड़क किनारे के सहारे: सड़क के बीच में चलने के बजाय, सड़क की बाईं ओर बनी सफेद पट्टी (Pavement Marking) को फॉलो करते हुए चलें।
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  7. \r\n
    इंडिकेटर: अगर आपको मुड़ना है, तो काफी पहले से इंडिकेटर दें। अगर रुकना है, तो सड़क से पूरी तरह नीचे उतारकर ही गाड़ी रोकें और पार्किंग लाइट्स (Hazards) जला दें।
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    दूरी बनाए रखें: आगे चल रही गाड़ी से सामान्य दिनों के मुकाबले दोगुनी दूरी बनाकर रखें।
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जान है तो जहान है

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हरिद्वार से पुण्य कमाकर लौट रहे इन यात्रियों के लिए आज का दिन एक पुनर्जन्म जैसा है। ग्रामीणों की सूझबूझ ने उन्हें नया जीवनदान दिया है। प्रशासन को भी चाहिए कि जिक्रीवाला जैसे संवेदनशील मोड़ों और तालाबों के किनारे रेलिंग (Railing) या रिफ्लेक्टर लगाए, ताकि भविष्य में ऐसे हादसे रोके जा सकें।
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ख़बरीलाल की अपील: ठंड बढ़ रही है और कोहरा अभी और सताएगा। कृपया अपनी यात्रा को सुरक्षित बनाएं। थोड़ी सी देरी भली, लेकिन दुर्घटना से बचें।
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