भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार (Indian Auto Market) इस समय एक बेहद नाजुक और ऐतिहासिक मोड़ पर खड़ा है। अगर आप एक दमदार SUV खरीदने का सपना देख रहे हैं और डीजल इंजन की 'पुलिंग पावर' (Pulling Power) के मुरीद हैं, तो यह खबर आपके लिए किसी झटके से कम नहीं है। सरकार द्वारा प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए लाए जा रहे नए और बेहद कड़े BS7 (Bharat Stage 7) उत्सर्जन मानक डीजल इंजनों के अस्तित्व के लिए अब तक की सबसे बड़ी चुनौती बनने जा रहे हैं।READ ALSO:-यूपी के सभी 75 जिलों में दौड़ेंगी शानदार इलेक्ट्रिक बसें, अयोध्या-काशी के लिए स्पेशल सर्विस; पर्यटन मंत्री की अखिलेश को '2047' वाली चुनौती
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विशेषज्ञों का मानना है कि इन नए नियमों के लागू होने के बाद डीजल इंजनों को अपग्रेड करना तकनीकी रूप से जटिल और आर्थिक रूप से इतना महंगा हो जाएगा कि कार निर्माता कंपनियों के पास डीजल को अलविदा कहने के अलावा कोई और विकल्प शायद ही बचे।
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भारत में डीजल का सुनहरा दौर और अब मंडराता खतरा
\r\n\r\nभारत में कार खरीदारों का डीजल से रिश्ता बहुत पुराना है। शानदार माइलेज, सस्ते ईंधन और पहाड़ों या खराब रास्तों पर बेजोड़ टॉर्क (Torque) के कारण डीजल इंजन हमेशा से पहली पसंद रहे हैं। हालांकि, समय के साथ चीजें बहुत तेजी से बदली हैं:
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- \r\n मार्केट शेयर का गोता: साल 2012-13 के दौर में भारतीय पैसेंजर व्हीकल्स (PVs) बाजार में डीजल कारों की हिस्सेदारी 47% के रिकॉर्ड स्तर पर थी। लेकिन जैसे-जैसे BS4 से BS6 तक के मानक लागू हुए, शहरी कम्यूटर कारों (हैचबैक और छोटी सेडान) से डीजल इंजन पूरी तरह गायब हो गए।\r\n \r\n
- \r\n SUV का सहारा: आज की स्थिति में डीजल कारों का कुल मार्केट शेयर गिरकर मात्र 18% के आसपास रह गया है। यह 18% भी सिर्फ और सिर्फ बड़ी SUVs, ऑफ-रोडर्स और लंबी दूरी की यात्रा करने वाले वफादार ग्राहकों के कारण टिका हुआ है।\r\n \r\n
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आखिर BS7 मानक डीजल के लिए 'काल' क्यों हैं?
\r\n\r\nडीजल इंजनों के साथ सबसे बड़ी समस्या यह है कि वे पेट्रोल के मुकाबले ज्यादा 'पार्टिकुलेट मैटर' (PM) और 'नाइट्रोजन ऑक्साइड' (NOx) का उत्सर्जन करते हैं।
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BS7 मानकों को पूरा करने के लिए कार कंपनियों को इंजनों में बेहद एडवांस फिल्टर, सेंसर और उत्सर्जन नियंत्रण प्रणालियां (Emission Control Systems) लगानी होंगी। छोटे डीजल वाहनों में इतना भारी-भरकम निवेश करना अब कंपनियों के लिए घाटे का सौदा बन चुका है। यही वजह है कि मारुति सुजुकी, होंडा और फॉक्सवैगन जैसी बड़ी कंपनियों ने भारत में डीजल इंजन बनाना बहुत पहले ही बंद कर दिया है।
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महिंद्रा एंड महिंद्रा (M&M): डीजल के 'आखिरी किले' को बचाने की जद्दोजहद
\r\n\r\nजहां ज्यादातर कंपनियों ने डीजल से किनारा कर लिया है, वहीं महिंद्रा एंड महिंद्रा ने इसे एक अवसर में बदल दिया है। बाजार में डीजल इंजनों की कमी का सीधा फायदा महिंद्रा को मिल रहा है। आज भी महिंद्रा की Scorpio, Thar और Bolero जैसी डीजल SUVs की बाजार में बंपर डिमांड है और इन पर महीनों की वेटिंग चल रही है।
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हालांकि, महिंद्रा भी भविष्य के खतरों को लेकर सतर्क है और उसने अपनी रणनीति में बदलाव किया है। कंपनी के ऑटोमोटिव डिवीजन के चीफ एग्जीक्यूटिव नलिनिकांत गोलागुंटा ने बाजार की स्थिति को स्पष्ट करते हुए कहा:
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\r\n\r\n\r\n"हमारा SUV पोर्टफोलियो किसी एक फ्यूल पर निर्भर नहीं है, बल्कि यह ग्राहकों की विविध जरूरतों, उनके इस्तेमाल के तरीकों और भौगोलिक इलाकों के आधार पर तैयार किया गया है। हम अपनी इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) जर्नी को तेज करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। फिर भी, कई ग्राहकों के लिए ICE (जीवाश्म ईंधन वाले) वाहन आज भी जरूरी हैं, इसलिए हम सभी पावरट्रेन विकल्पों में इनोवेशन करना जारी रखेंगे।"\r\n
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मर्सिडीज-बेंज (Mercedes-Benz) का डेटा: अमीरों की पहली पसंद आज भी है डीजल
\r\n\r\nअगर आपको लगता है कि डीजल गाड़ियां सिर्फ वे लोग खरीदते हैं जिन्हें पैसे बचाने होते हैं, तो आपको लग्जरी कार मार्केट के आंकड़े जरूर देखने चाहिए। लग्जरी सेगमेंट में आज भी डीजल का भारी दबदबा है।
\r\n\r\nमर्सिडीज-बेंज इंडिया के MD और CEO संतोष अय्यर ने एक चौंकाने वाला आंकड़ा साझा किया:
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\r\n\r\n\r\n"पिछली तिमाही में हमारी कुल बिक्री का 50% से ज्यादा हिस्सा डीजल मॉडल्स से आया है। लग्जरी कार खरीदार गाड़ी की कुल कीमत (Total Cost of Ownership), चलाने के खर्च और उसकी रीसेल वैल्यू (Residual Value) के आधार पर फैसला करते हैं। हालांकि, हम प्लग-इन हाइब्रिड और EV में भी समान अवसर देख रहे हैं।"\r\n
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परफॉर्मेंस बनाम पॉकेट: 1 लाख रुपये तक महंगी हो जाएंगी डीजल गाड़ियां!
\r\n\r\n'Jato Dynamics' के प्रेसिडेंट रवि भाटिया का मानना है कि आज का डीजल ग्राहक 'बजट' वाला ग्राहक नहीं है। जो व्यक्ति 1 करोड़ रुपये की लग्जरी SUV खरीद रहा है, वह डीजल इसलिए नहीं चुनता कि उसे पेट्रोल के पैसे बचाने हैं, बल्कि वह डीजल के जबरदस्त टॉर्क (Torque) और हाईवे पर ड्राइविंग के बेजोड़ मजे के लिए इसे चुनता है।
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लेकिन, क्या यह 'परफॉर्मेंस का शौक' BS7 की महंगाई की मार झेल पाएगा?
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- \r\n कीमतों में भारी उछाल: इंडस्ट्री के जानकारों के अनुसार, BS7 मानकों को लागू करने की 'कम्प्लायंस कॉस्ट' के कारण हर डीजल गाड़ी की कीमत में 30,000 रुपये से लेकर 1,00,000 रुपये से ज्यादा का सीधा इजाफा होगा।\r\n \r\n
- \r\n मिडिल क्लास पर असर: 10 से 20 लाख रुपये की कैटेगरी वाली SUVs (जो पारंपरिक रूप से डीजल का सबसे बड़ा बाजार हैं) के खरीदारों के लिए यह मूल्य वृद्धि एक बहुत बड़ा झटका साबित हो सकती है।\r\n \r\n
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अगला कदम: EV, Hybrid या CNG?
\r\n\r\nअगले कुछ साल भारतीय ऑटोमोबाइल इतिहास के सबसे निर्णायक साल होने वाले हैं। जैसे-जैसे BS7 लागू होने का समय करीब आएगा, ऑटो कंपनियों और ग्राहकों, दोनों को एक कड़ा फैसला लेना होगा।
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| \r\n ईंधन का विकल्प \r\n | \r\n \r\n भविष्य की संभावनाएं \r\n | \r\n
| \r\n डीजल (Diesel) \r\n | \r\n \r\n महंगी हो जाएंगी, केवल प्रीमियम और फुल-साइज SUVs तक सीमित रह सकती हैं। \r\n | \r\n
| \r\n हाइब्रिड (Hybrid) \r\n | \r\n \r\n डीजल का सबसे बेहतरीन विकल्प। शानदार माइलेज और कम उत्सर्जन इसे हिट बना सकता है। \r\n | \r\n
| \r\n इलेक्ट्रिक (EV) \r\n | \r\n \r\n सरकार का पूरा फोकस इस पर है। चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर सुधरने पर यह डीजल की जगह ले लेगा। \r\n | \r\n
| \r\n सीएनजी (CNG) \r\n | \r\n \r\n एंट्री लेवल और मिड-रेंज SUVs के लिए एक किफायती विकल्प बन रहा है। \r\n | \r\n
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क्या 1 लाख रुपये अतिरिक्त देकर भारत का ग्राहक डीजल के प्रति अपनी वफादारी कायम रखेगा? या फिर वह नई तकनीक (Hybrid/EV) को अपनाकर भविष्य की ओर कदम बढ़ाएगा? यह देखना बेहद दिलचस्प होगा।
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Sabse pehle comment karne wale banein.