बिजनौर (खबरीलाल विशेष रिपोर्ट): उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले से एक ऐसी दिल दहला देने वाली और समाज की संवेदनहीनता को उजागर करने वाली घटना सामने आई है, जिसने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है। बिजनौर के कीरतपुर रोड पर शनिवार की देर रात एक भीषण सड़क हादसा (Bijnor Road Accident) हुआ, जिसमें बाइक सवार दो युवकों की दर्दनाक मौत हो गई। यह हादसा सिर्फ एक एक्सीडेंट नहीं है, बल्कि यह उस मरती हुई इंसानियत का भी सुबूत है, जहां दो इंसान सड़क पर खून से लथपथ होकर तड़पते रहे, लेकिन वहां से गुजरने वाले किसी भी शख्स ने अपनी गाड़ी रोककर उन्हें अस्पताल पहुंचाने की जहमत नहीं उठाई। जब तक उन्हें अस्पताल ले जाया गया, तब तक उनकी सांसों की डोर टूट चुकी थी।Read also:-समाज के लिए मिसाल: मेरठ के रिटायर्ड जज डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार शर्मा ने बेटी के तलाक पर बांटी मिठाइयां, 'I Love My Bitiya' टी-शर्ट पहन ढोल-नगाड़ों के साथ लाए घर
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इस दुखद घटना ने न सिर्फ दो परिवारों के चिराग बुझा दिए हैं, बल्कि पांच मासूम बच्चों के सिर से हमेशा के लिए पिता का साया भी छीन लिया है। खबरीलाल (Khabreelal) की इस रिपोर्ट में आइए जानते हैं इस दर्दनाक हादसे की पूरी खौफनाक कहानी।
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कैसे हुआ यह खौफनाक हादसा?

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घटना शनिवार रात की है। मिली जानकारी के अनुसार, बिजनौर जिले के ग्राम झलरा के रहने वाले 25 वर्षीय सलमान (पुत्र इरशाद) और 35 वर्षीय हारुन (पुत्र रियासत) किसी निजी काम के सिलसिले में बाइक पर सवार होकर किरतपुर क्षेत्र के ग्राम सराय इम्मा गए हुए थे। दोनों युवक वहां से अपना काम निपटाकर देर रात अपने गांव झलरा वापस लौट रहे थे।
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जैसे ही उनकी बाइक हाईवे पर हनुमान धाम के पास पहुंची, तभी मौत बनकर पीछे से (या सामने से) आ रहे एक बेहद तेज रफ्तार अज्ञात वाहन ने उनकी बाइक में जोरदार टक्कर मार दी। यह टक्कर इतनी भीषण थी कि बाइक के परखच्चे उड़ गए और सलमान और हारुन हवा में उछलते हुए सड़क पर काफी दूर जा गिरे। दोनों के सिर और शरीर के अन्य हिस्सों में गंभीर चोटें आईं और उनका काफी खून बह गया। टक्कर मारने के बाद आरोपी चालक अपने वाहन समेत अंधेरे का फायदा उठाकर मौके से फरार हो गया।
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सड़क पर तड़पते रहे, पर मर गई इंसानियत

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इस हादसे का सबसे दुखद और विचलित करने वाला पहलू यह रहा कि एक्सीडेंट के बाद सलमान और हारुन काफी देर तक सड़क किनारे पड़े दर्द से कराहते रहे। खून से लथपथ दोनों युवक शायद किसी मसीहा का इंतजार कर रहे थे। उस हाईवे से कई गाड़ियां गुजरीं, कई लोग निकले, लेकिन किसी ने भी इंसानियत का फर्ज निभाते हुए अपनी गाड़ी नहीं रोकी।
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मेडिकल साइंस में सड़क हादसों के बाद के पहले एक घंटे को 'गोल्डन ऑवर' (Golden Hour) कहा जाता है। अगर इस दौरान घायल को सही इलाज मिल जाए, तो उसकी जान बचने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। लेकिन बिजनौर के इस हादसे में संवेदनहीनता के कारण वह 'गोल्डन ऑवर' सड़क पर ही बीत गया। काफी देर बाद उस रास्ते से गुजर रहे एक राहगीर की नजर उन पर पड़ी। उसने इंसानियत दिखाते हुए तुरंत पुलिस और एम्बुलेंस को इस हादसे की सूचना दी।
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अस्पताल में डॉक्टरों ने कर दिया मृत घोषित

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राहगीर की सूचना मिलने के बाद आनन-फानन में स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने बिना कोई देरी किए खून से लथपथ और अचेत अवस्था में पड़े दोनों युवकों को उठाया और इलाज के लिए बिजनौर के जिला अस्पताल की ओर दौड़ पड़े। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। अस्पताल पहुंचने पर जब इमरजेंसी में तैनात डॉक्टरों ने दोनों युवकों का चेकअप किया, तो उन्होंने सलमान और हारुन को मृत घोषित कर दिया। अत्यधिक खून बह जाने और समय पर प्राथमिक उपचार न मिल पाने के कारण दोनों ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया था। मौत की खबर सुनते ही अस्पताल में सन्नाटा पसर गया। पुलिस ने तुरंत पंचनामा भरकर दोनों शवों को पोस्टमार्टम (Postmortem) के लिए मोर्चरी भिजवा दिया।
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मजदूरी कर पालते थे परिवार, पीछे छोड़ गए 5 मासूम बच्चे

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मृतकों की पारिवारिक पृष्ठभूमि की बात करें तो सलमान और हारुन दोनों ही बेहद साधारण परिवार से ताल्लुक रखते थे। दोनों अपनी दिन-रात की मेहनत और मजदूरी से अपने-अपने परिवारों का भरण-पोषण करते थे।
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25 साल का सलमान अपने घर का मुख्य सहारा था। उसकी मौत के बाद उसके घर में कोहराम मच गया है। सलमान अपने पीछे अपनी जवान पत्नी और दो बहुत ही छोटे और मासूम बच्चों को बिलखता हुआ छोड़ गया है। वहीं, 35 वर्षीय हारुन की मौत ने भी उसके परिवार को तोड़ कर रख दिया है। हारुन के तीन मासूम बच्चे हैं, जिन्हें शायद अभी यह ठीक से समझ भी नहीं आ रहा होगा कि अब उनके पिता कभी लौट कर घर नहीं आएंगे। इन दोनों मजदूरों की मौत के बाद अब इनके परिवारों के सामने रोजी-रोटी का एक बहुत बड़ा संकट खड़ा हो गया है। पत्नियों का रो-रोकर बुरा हाल है और वे बार-बार बेहोश हो रही हैं।
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गांव झलरा में पसरा मातम, नहीं जले घरों में चूल्हे

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जैसे ही रविवार की सुबह-सुबह इस दर्दनाक हादसे और दोनों युवकों की मौत की मनहूस खबर उनके पैतृक गांव झलरा पहुंची, पूरे गांव में मातम पसर गया। गांव की गलियों में सन्नाटा छा गया और हर तरफ सिर्फ महिलाओं के रोने और चीखने-पुकारने की आवाजें ही गूंजने लगीं। ग्रामीण अपने सारे काम छोड़कर मृतकों के घर की ओर दौड़ पड़े।
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गांव वालों का कहना है कि दोनों ही युवक बेहद मिलनसार और मेहनती थे। किसी से उनका कोई विवाद नहीं था। एक ही गांव के दो नौजवानों की एक साथ सड़क हादसे में मौत से पूरे गांव को गहरा सदमा लगा है। शोक का आलम यह था कि रविवार को गांव के कई घरों में चूल्हे तक नहीं जले। हर कोई बस इसी बात पर चर्चा कर रहा है कि आखिर उस अज्ञात वाहन वाले को पुलिस कब पकड़ेगी।
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पुलिस की कार्रवाई और अज्ञात वाहन की सरगर्मी से तलाश

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घटना की सूचना मिलने के बाद बिजनौर पुलिस एक्शन में आ गई है। पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजने के साथ ही उस अज्ञात वाहन की तलाश शुरू कर दी है जिसने इस खौफनाक वारदात को अंजाम दिया।
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पुलिस की कई टीमें हनुमान धाम के आस-पास के ढाबों, दुकानों और टोल प्लाजा पर लगे सीसीटीवी (CCTV) कैमरों की फुटेज खंगाल रही हैं, ताकि उस रात उस समय वहां से गुजरने वाले भारी वाहनों या तेज रफ्तार कारों की पहचान की जा सके। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वे जल्द ही टक्कर मारने वाले वाहन और उसके चालक को गिरफ्तार कर लेंगे। इसके अलावा पुलिस ने लोगों से भी अपील की है कि अगर किसी ने इस हादसे को देखा हो या किसी के पास कोई जानकारी हो, तो वह तुरंत पुलिस से संपर्क करे।
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तेज रफ्तार का कहर और हमारी जिम्मेदारी

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बिजनौर सहित पूरे उत्तर प्रदेश में हाईवे पर बेलगाम और तेज रफ्तार वाहन लगातार हादसों का कारण बन रहे हैं। कीरतपुर रोड पर हुआ यह हादसा यातायात नियमों की धज्जियां उड़ाने का एक और जीता-जागता उदाहरण है।
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खबरीलाल अपने सभी पाठकों से अपील करता है कि सड़क पर वाहन चलाते समय गति सीमा का हमेशा ध्यान रखें। साथ ही, अगर आप सड़क पर कोई एक्सीडेंट देखते हैं, तो अपनी आंखें मूंद कर न निकलें। रुकें, घायलों की मदद करें और तुरंत पुलिस या एम्बुलेंस (108 और 112) को कॉल करें। हो सकता है आपकी एक छोटी सी कोशिश से किसी घर का चिराग बुझने से बच जाए और किसी मासूम के सिर से उसके पिता का साया न उठे। सड़क हादसों में घायलों की मदद करने वालों को सरकार और सुप्रीम कोर्ट द्वारा 'गुड सेमेरिटन' (Good Samaritan) के तहत सुरक्षा भी दी जाती है, ताकि पुलिस उन्हें बेवजह परेशान न करे। इसलिए मदद करने से पीछे न हटें।
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