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बिजनौर (नजीबाबाद): उत्तर प्रदेश में कड़ाके की ठंड और शीतलहर का प्रकोप जारी है, लेकिन इससे भी ज्यादा 'ठंडा' रवैया बिजनौर के प्रशासनिक तंत्र का नजर आ रहा है। मामला जनपद के नजीबाबाद रेलवे स्टेशन का है, जहां कुदरत की मार और सिस्टम की लाचारी के बीच आम यात्री पिस रहा है। घने कोहरे के चलते जहां ट्रेनों के पहिए थम गए हैं, वहीं रेलवे स्टेशन पर रैन बसेरे (Rain Basera) के इंतजाम नदारद होने से यात्री खुले आसमान के नीचे ठिठुरने को मजबूर हैं।READ ALSO:-Bijnor News: कोहरे की 'सफेद चादर' बनी कफन! धामपुर में रफ्तार के कहर ने उजाड़ा हंसता-खेलता परिवार, पत्नी की मौत, पति अस्पताल में भर्ती
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कोहरे ने लगाया ट्रेनों पर 'ब्रेक', प्लेटफॉर्म पर बढ़ी भीड़ बीते कुछ दिनों से बिजनौर और आसपास के इलाकों में घने कोहरे (Dense Fog) ने डेरा डाल रखा है। विजिबिलिटी शून्य के करीब पहुंचने के कारण भारतीय रेलवे का संचालन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। नजीबाबाद जंक्शन से होकर गुजरने वाली और यहां रुकने वाली अधिकतर ट्रेनें अपने निर्धारित समय से 4 से 8 घंटे की देरी से चल रही हैं।
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ट्रेनों की इस लेटलतीफी ने यात्रियों के सब्र का बांध तोड़ दिया है। स्टेशन पर यात्रियों की भारी भीड़ जमा हो गई है। दूर-दराज से आए लोग, जिन्हें समय पर अपने गंतव्य तक पहुंचना था, अब अनिश्चितकाल के लिए प्लेटफॉर्म पर ही डेरा जमाए बैठे हैं। पूछताछ केंद्र पर भी सही जानकारी न मिलने से यात्रियों की हताशा और बढ़ गई है।
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डीएम के आदेश हवा-हवाई, 'शोपीस' बना रैन बसेरा सर्दी के मौसम की शुरुआत में ही बिजनौर जिलाधिकारी (DM) ने सख्त निर्देश दिए थे कि जिले के सभी प्रमुख स्थानों, बस अड्डों और रेलवे स्टेशनों पर रैन बसेरों (Shelter Homes) की समुचित व्यवस्था की जाए, ताकि किसी भी यात्री या बेसहारा को खुले में न सोना पड़े। लेकिन नजीबाबाद रेलवे स्टेशन पर इन आदेशों की धज्जियां उड़ती साफ दिखाई दे रही हैं।
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स्थानीय रिपोर्ट के अनुसार, स्टेशन परिसर में रैन बसेरा या तो नदारद है या जो व्यवस्था की गई है, वह महज एक 'शोपीस' है। वहां न तो सोने के लिए गद्दे हैं, न ओढ़ने के लिए कंबल, और न ही ठंड से बचने के लिए कोई हीटर। यह रैन बसेरा केवल कागजों और फाइलों में दौड़ रहा है, जबकि हकीकत में यात्री ठिठुर रहे हैं।
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जमीन पर लेटने को मजबूर, अलाव ही एकमात्र सहारा नजीबाबाद रेलवे स्टेशन का मंजर बेहद दर्दनाक है। कड़कड़ाती ठंड में छोटे बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग यात्री प्लेटफॉर्म की ठंडी जमीन पर चादर बिछाकर लेटने को मजबूर हैं। रैन बसेरे की सुविधा न मिलने के कारण यात्रियों ने खुद ही अपने स्तर पर इंतजाम करने शुरू कर दिए हैं।
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प्लेटफॉर्म के किनारों और स्टेशन के बाहर यात्री कूड़ा-करकट, लकड़ी और कागज जलाकर अलाव (Bonfire) का सहारा ले रहे हैं। आग के चारों ओर घेरा बनाकर बैठे ये यात्री किसी तरह रात कटने का इंतजार कर रहे हैं। यह स्थिति न केवल अमानवीय है, बल्कि सुरक्षा के लिहाज से भी खतरनाक है, लेकिन मरता क्या न करता वाली स्थिति में यात्रियों के पास कोई और विकल्प नहीं बचा है।
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अधिकारियों ने साधी चुप्पी (Moun), कौन लेगा जिम्मेदारी? इतनी बदइंतजामी के बावजूद रेलवे और स्थानीय प्रशासन के अधिकारी मौन साधे बैठे हैं। जब इस अव्यवस्था के बारे में सवाल किया जाता है, तो कोई भी जिम्मेदार अधिकारी कैमरे के सामने बोलने को तैयार नहीं होता। डीएम के आदेशों के बावजूद स्टेशन पर रैन बसेरे की मुकम्मल व्यवस्था न होना, अधिकारियों की कार्यशैली और संवेदनहीनता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। क्या अधिकारी किसी बड़े हादसे या किसी यात्री की जान जाने का इंतजार कर रहे हैं?
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यात्रियों और स्थानीय लोगों का गुस्सा फूटा स्टेशन पर मौजूद यात्रियों और स्थानीय नागरिकों में प्रशासन के खिलाफ भारी रोष है।
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    शोभित मित्तल (स्थानीय निवासी) का कहना है: "यह प्रशासन की घोर लापरवाही है। डीएम साहब के आदेश केवल अखबारों की सुर्खियों तक सीमित हैं। नजीबाबाद स्टेशन पर यात्री परेशान हैं, लेकिन कोई सुध लेने वाला नहीं है। रैन बसेरा के नाम पर सिर्फ मजाक किया जा रहा है।"
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    पीड़ित यात्री का दर्द: "हम पिछले 6 घंटे से ट्रेन का इंतजार कर रहे हैं। छोटे बच्चे साथ में हैं और ठंड बहुत ज्यादा है। यहां रुकने की कोई जगह नहीं है, वेटिंग रूम फुल हैं और रैन बसेरा है ही नहीं। हमें मजबूरन जमीन पर बैठकर आग तापनी पड़ रही है। सरकार बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन हकीकत यही है।"
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तत्काल सुध ले प्रशासन नजीबाबाद रेलवे स्टेशन की यह तस्वीर 'विकसित भारत' और 'स्मार्ट सुविधाओं' के दावों पर एक बदनुमा दाग है। घने कोहरे का प्राकृतिक कारण समझ में आता है, लेकिन यात्रियों के लिए आश्रय (Shelter) का प्रबंध न कर पाना पूर्णतः प्रशासनिक विफलता है। जरूरत है कि बिजनौर जिला प्रशासन और रेलवे अधिकारी तत्काल प्रभाव से जागें और स्टेशन पर रैन बसेरे, कंबल और अलाव की पुख्ता व्यवस्था सुनिश्चित करें, ताकि यात्रियों को इस जानलेवा ठंड से राहत मिल सके।
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