उत्तर प्रदेश के कई जिलों में इस समय मौसम अपना अलग-अलग रंग दिखा रहा है। चिलचिलाती धूप और लू के थपेड़ों के बीच अचानक मौसम का मिजाज ऐसा बदला कि आसमान से राहत के साथ-साथ आफत भी बरसने लगी। बिजनौर (Bijnor) जिले के नजीबाबाद (Najibabad) थाना क्षेत्र में मौसम ने अचानक ऐसी करवट ली, जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी।READ ALSO:-गर्मी से बड़ी राहत या आसमानी आफत? यूपी, दिल्ली, बिहार सहित देश के 11 राज्यों में मूसलाधार बारिश और 70 KM/h की आंधी का खौफनाक अलर्ट जारी!
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दिन के समय अचानक आसमान में काले घने बादल छा गए और देखते ही देखते तेज आंधी-तूफान (Dust Storm) के साथ मूसलाधार बारिश शुरू हो गई। बारिश के साथ-साथ अचानक बड़े-बड़े ओले (Hailstorm) भी गिरने लगे। हवा की रफ्तार इतनी ज्यादा थी कि लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। इस तूफानी बवंडर ने पूरे नजीबाबाद क्षेत्र में भारी तबाही मचाई है, जिससे जनजीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो गया है। आइए इस आसमानी आफत से हुए नुकसान और मौसम के इस अजीबोगरीब खेल को विस्तार से समझते हैं।
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बारात घर पर बरपा कुदरत का कहर: हवा में उड़ी टीन, भरभरा कर गिरी दीवारें

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इस आंधी-तूफान का सबसे खौफनाक मंजर नजीबाबाद थाना क्षेत्र के एक बारात घर (Banquet Hall) पर देखने को मिला। हवा के झोंके इतने तेज और शक्तिशाली थे कि बारात घर के ऊपर पड़े भारी-भरकम टीन के शेड तिनके की तरह हवा में उड़ गए। टीन-टप्पर उड़ने से बारात घर का पूरा ढांचा हिल गया।
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हवा का दबाव इतना ज्यादा था कि बारात घर की पक्की दीवारें भी इस तूफान को नहीं झेल पाईं और भरभरा कर जमीन पर गिर गईं। गनीमत यह रही कि जिस समय यह हादसा हुआ, उस समय बारात घर में कोई बड़ा आयोजन नहीं चल रहा था या दीवार के पास कोई व्यक्ति मौजूद नहीं था, अन्यथा एक बहुत बड़ी जनहानि या दर्दनाक हादसा हो सकता था। दीवारों के गिरने और शेड उड़ने से बारात घर के मालिक को लाखों रुपये का भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है।
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सड़कों पर बिछ गए पेड़, हवा में उड़े लोहे के होर्डिंग

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आंधी की रफ्तार सिर्फ इमारतों तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसने बुनियादी ढांचे को भी भारी नुकसान पहुंचाया है। नजीबाबाद शहर और उसके आसपास के ग्रामीण इलाकों में कई जगह वर्षों पुराने और विशालकाय पेड़ जड़ से उखड़ कर धराशायी हो गए। सड़कों पर पेड़ों के गिरने से यातायात (Traffic) पूरी तरह से बाधित हो गया। कई प्रमुख मार्गों पर लंबा जाम लग गया और लोगों को अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए भारी मशक्कत करनी पड़ी।
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इतना ही नहीं, हाईवे और चौराहों पर लगे बड़े-बड़े विज्ञापन के होर्डिंग (Hoardings) भी तूफान की चपेट में आ गए। तेज हवाओं ने होर्डिंग्स के लोहे के एंगल्स को भी मोड़ दिया और कई होर्डिंग टूटकर सड़कों पर आ गिरे। यह मंजर देखकर राहगीरों में दहशत फैल गई और लोग खुद को बचाने के लिए सुरक्षित स्थानों की ओर भागते नजर आए।
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बिजली आपूर्ति ठप, घंटों अंधेरे में डूबा रहा इलाका

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तेज तूफान और बारिश का सबसे पहला और सीधा असर बिजली व्यवस्था पर पड़ा। जैसे ही आंधी शुरू हुई, एहतियात के तौर पर बिजली विभाग ने पूरे इलाके की आपूर्ति ठप कर दी। वहीं, कई जगहों पर पेड़ों की डालियां टूटकर हाईटेंशन लाइनों (High-tension wires) और बिजली के खंभों पर गिर गईं, जिससे तार टूट गए और खंभे तिरछे हो गए। विद्युत लाइनें क्षतिग्रस्त होने के कारण नजीबाबाद और उसके आसपास के दर्जनों गांवों की बिजली कई घंटों तक गुल रही। लोग पीने के पानी और अन्य बुनियादी जरूरतों के लिए परेशान होते रहे। बिजली विभाग के कर्मचारी मौसम साफ होने के बाद फॉल्ट को सुधारने और लाइनों को दुरुस्त करने के काम में जुट गए हैं।
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तबाही के बीच 'सुकून की बूंदें': भीषण गर्मी से मिली बड़ी राहत

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जहां एक तरफ इस प्राकृतिक आपदा ने संपत्तियों और बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाया है, वहीं दूसरी तरफ आम जनता के लिए यह बारिश किसी 'संजीवनी' से कम साबित नहीं हुई है। पिछले कई दिनों से बिजनौर और आसपास के इलाकों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार जा रहा था। चिलचिलाती धूप, उमस और गर्म थपेड़ों (लू) ने लोगों का घर से बाहर निकलना मुहाल कर दिया था। लेकिन इस मूसलाधार बारिश और ओलावृष्टि ने मौसम के मिजाज को पूरी तरह से ठंडा कर दिया है।
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तापमान में अचानक भारी गिरावट दर्ज की गई है। गर्म हवाओं की जगह अब ठंडी और सुहावनी हवाएं चल रही हैं। गर्मी से बेहाल लोगों, खासकर बच्चों और बुजुर्गों ने इस बारिश के बाद राहत की लंबी सांस ली है। शाम के समय लोग अपने घरों की छतों और बालकनियों में इस सुहावने मौसम का आनंद लेते हुए देखे गए।
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किसानों की बढ़ी चिंता: ओलावृष्टि से फसलों को नुकसान का डर

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आम आदमी के लिए भले ही यह मौसम सुहावना हो, लेकिन ग्रामीण अंचलों में रहने वाले किसानों के लिए यह आंधी और ओलावृष्टि एक बड़ा सिरदर्द बन गई है। इस समय खेतों में कई तरह की मौसमी सब्जियां और बागों में आम की फसल (Mango crop) तैयार हो रही है। अचानक गिरे बड़े-बड़े ओलों और तेज हवाओं के कारण आम के बौर और छोटे फलों के झड़ने की भारी आशंका है। यदि ओलावृष्टि का दायरा बड़ा रहा होगा, तो इससे किसानों को भारी नुकसान झेलना पड़ सकता है। प्रशासन जल्द ही राजस्व टीमों को भेजकर फसलों को हुए नुकसान का आकलन करा सकता है।
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बिजनौर के नजीबाबाद में आया यह आंधी-तूफान कुदरत की उस असीमित ताकत का एक छोटा सा उदाहरण है, जिसके आगे इंसान की हर तकनीक और ढांचा बौना साबित होता है। बारात घर की दीवारें गिरने और पेड़ों के उखड़ने से हुए नुकसान की भरपाई में समय लगेगा। प्रशासन और स्थानीय पुलिस की टीमें रास्तों से मलबा और पेड़ हटाने में लगी हुई हैं ताकि यातायात को पूरी तरह से सामान्य किया जा सके। हालांकि, गर्मी से बेहाल लोगों के लिए यह तबाही अपने साथ एक ठंडी राहत भी लेकर आई है। मौसम विभाग ने आने वाले कुछ दिनों तक ऐसे ही उतार-चढ़ाव वाले मौसम का अलर्ट जारी किया है, इसलिए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
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