बिजनौर (ख़बरीलाल विशेष): उत्तर प्रदेश के बिजनौर जनपद से त्यौहार की खुशियों के बीच एक बेहद ही चिंताजनक और डराने वाली खबर सामने आई है। आस्था और श्रद्धा के साथ व्रत रख रहे श्रद्धालुओं के लिए बाजार से लाया गया कुट्टू का आटा उस वक्त 'जहर' बन गया, जब उसे खाने के कुछ ही देर बाद एक-एक करके करीब 10 लोगों की तबीयत अचानक गंभीर रूप से बिगड़ गई। यह पूरी घटना बिजनौर जनपद के थाना मंडावली क्षेत्र की है। कुट्टू के आटे से बनी पूड़ियां और पकौड़ियां खाने के बाद पीड़ितों को भयंकर उल्टी, चक्कर और घबराहट होने लगी।Read also:-यूपी में 'स्मार्ट मीटर' बना जी का जंजाल: रिचार्ज के घंटों बाद भी नहीं लौट रही बिजली; उपभोक्ता परिषद ने ठोकी अवमानना याचिका, उधर बिजली चोरी में 146 पर FIR
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घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल है और मिलावटखोरों के खिलाफ लोगों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। ख़बरीलाल की इस विस्तृत रिपोर्ट में आइए जानते हैं इस पूरी घटना का तफसील से ब्यौरा, प्रशासन की कार्रवाई और त्यौहारों पर बिकने वाले मिलावटी कुट्टू के आटे से बचने के उपाय।
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मंडावली क्षेत्र में कैसे हुआ यह हादसा? (घटना का पूरा विवरण)

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त्यौहार के पावन अवसर पर जहाँ एक तरफ हर घर में पूजा-पाठ और व्रत का माहौल था, वहीं मंडावली थाना क्षेत्र के एक मोहल्ले/गांव में मातम और चीख-पुकार मच गई। जानकारी के अनुसार, दिन भर निर्जला या फलाहारी व्रत रखने के बाद शाम के समय परिवार के सदस्यों और कुछ अन्य श्रद्धालुओं ने व्रत खोलने के लिए कुट्टू के आटे से बने व्यंजनों का सेवन किया था। स्थानीय बाजार की एक दुकान से यह आटा खरीद कर लाया गया था।
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लक्षणों की शुरुआत और अफरा-तफरी का माहौल प्रत्यक्षदर्शियों और पीड़ितों के परिजनों के अनुसार, भोजन करने के करीब आधे से एक घंटे के भीतर ही स्थिति बिगड़ने लगी। सबसे पहले बच्चों और बुजुर्गों ने पेट में तेज दर्द और मरोड़ की शिकायत की। इसके तुरंत बाद उन्हें उल्टियां (Vomiting) शुरू हो गईं। जब तक घर के अन्य सदस्य कुछ समझ पाते, तब तक कुट्टू का आटा खाने वाले अन्य लोगों को भी तेज चक्कर (Dizziness), आंखों के सामने अंधेरा छाना और भयंकर घबराहट होने लगी।
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देखते ही देखते करीब 10 लोगों की हालत इतनी खराब हो गई कि वे जमीन पर गिर पड़े। एक ही झटके में इतने सारे लोगों की तबीयत बिगड़ने से पूरे मोहल्ले में हड़कंप मच गया। आस-पड़ोस के लोग तुरंत मदद के लिए दौड़े और बिना कोई देरी किए एंबुलेंस और निजी वाहनों की मदद से सभी पीड़ितों को नजदीकी अस्पताल की ओर ले जाया गया।
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अस्पताल में मरीजों की स्थिति और डॉक्टरों का बयान

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अस्पताल के आपातकालीन वार्ड (Emergency Ward) में एक साथ इतने सारे फूड पॉइजनिंग (Food Poisoning) के मरीजों के पहुँचने से डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ के बीच भी अफरा-तफरी मच गई। डॉक्टरों ने तुरंत तत्परता दिखाते हुए सभी मरीजों का प्राथमिक उपचार शुरू किया।
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क्या कहते हैं चिकित्सक? अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) स्तर के चिकित्सकों का कहना है कि यह मामला स्पष्ट रूप से गंभीर फूड पॉइजनिंग का है। मरीजों के शरीर में पानी की भारी कमी (Dehydration) हो गई थी और ब्लड प्रेशर तेजी से गिर रहा था। सभी पीड़ितों को तुरंत आईवी फ्लूइड्स (IV Fluids) और एंटी-एमेटिक (उल्टी रोकने वाली) दवाइयां दी गईं। डॉक्टरों के अनुसार, "गनीमत यह रही कि मरीजों को समय रहते अस्पताल ले आया गया। कुट्टू के आटे में मौजूद फंगस या पुराने आटे के इस्तेमाल से इस तरह का भयंकर टॉक्सिक रिएक्शन होता है, जो कई बार जानलेवा भी साबित हो सकता है।" फिलहाल, सभी 10 मरीजों की हालत स्थिर बताई जा रही है, लेकिन उन्हें मेडिकल ऑब्जर्वेशन में रखा गया है।
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हरकत में आया प्रशासन: पुलिस और खाद्य विभाग की संयुक्त जांच शुरू

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त्यौहारी सीजन में कुट्टू के आटे से फूड पॉइजनिंग की यह कोई पहली घटना नहीं है, लेकिन एक साथ 10 लोगों के बीमार पड़ने की इस घटना ने बिजनौर जिला प्रशासन की नींद उड़ा दी है।
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मंडावली पुलिस की कार्रवाई घटना की सूचना मिलते ही मंडावली थाना प्रभारी अपनी टीम के साथ अस्पताल पहुंचे और पीड़ितों तथा उनके परिजनों के बयान दर्ज किए। पुलिस इस बात की गहनता से जांच कर रही है कि यह आटा किस विशिष्ट दुकान से खरीदा गया था और उस दुकानदार के पास यह माल किस थोक विक्रेता (Wholesaler) के यहाँ से आया था। पुलिस का कहना है कि अगर जांच में किसी की आपराधिक लापरवाही या जानबूझकर मिलावट करने की बात सामने आती है, तो संबंधित धाराओं (जैसे IPC की धारा 272, 273 - खाने-पीने की चीजों में मिलावट) के तहत सख्त से सख्त एफआईआर (FIR) दर्ज कर जेल भेजा जाएगा।
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खाद्य सुरक्षा और औषधि प्रशासन (FSDA) का एक्शन इस घटना के तुरंत बाद बिजनौर के खाद्य विभाग (Food Department) की टीम अलर्ट मोड पर आ गई है। खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की एक विशेष टीम का गठन किया गया है, जिसे मंडावली और आसपास के इलाकों में स्थित किराना और परचून की दुकानों पर छापेमारी का निर्देश दिया गया है।
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टीम ने उस दुकान की पहचान कर ली है जहाँ से यह संदिग्ध आटा खरीदा गया था। अधिकारियों ने दुकान से कुट्टू के आटे के कई सैंपल (Samples) सील कर लिए हैं और उन्हें परीक्षण के लिए राजकीय प्रयोगशाला (State Laboratory) भेज दिया गया है। खाद्य विभाग के अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि रिपोर्ट आने के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि आटे में मिलावट (Adulteration) की गई थी, या फिर पुराना और फंगस लगा हुआ आटा बाजार में बेचा जा रहा था। यदि रिपोर्ट में आटा इंसानी उपभोग के लिए अनफिट पाया जाता है, तो दुकानदार का लाइसेंस रद्द करने के साथ-साथ भारी जुर्माना और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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आखिर कुट्टू का आटा क्यों बन जाता है 'जहर'? (Medical & Scientific Angle)

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व्रत के दौरान कुट्टू का आटा (Buckwheat Flour) ऊर्जा का एक बेहतरीन स्रोत माना जाता है, लेकिन अक्सर त्यौहारों के समय इसकी भारी डिमांड होती है। मुनाफाखोर इसी डिमांड का फायदा उठाते हैं।
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    फंगस का हमला (Fungal Infection): कुट्टू का आटा बहुत जल्दी खराब होता है। अगर इसे नमी वाली जगह पर या लंबे समय तक रखा जाए, तो इसमें 'माइकोटॉक्सिन' (Mycotoxins) नामक फंगस पनपने लगता है। यह फंगस इंसानी शरीर के लिए बेहद जहरीला होता है और नर्वस सिस्टम पर सीधा अटैक करता है, जिससे चक्कर और घबराहट होती है।
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    पुराने स्टॉक की बिक्री: कई व्यापारी पिछले साल के बचे हुए कुट्टू के स्टॉक को नए आटे में मिलाकर बेच देते हैं। पुराना आटा पूरी तरह से दूषित (Contaminated) हो चुका होता है।
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    सिंथेटिक रंग और मिलावट: आटे को ताजा दिखाने के लिए कई बार इसमें सिंथेटिक रंग या अन्य सस्ते और खराब किस्म के आटे (जैसे खराब सिंघाड़े का आटा) की मिलावट की जाती है।
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आम जनता के लिए ख़बरीलाल की विशेष अपील: ऐसे करें असली और ताजे कुट्टू के आटे की पहचान

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त्यौहार के इस मौसम में प्रशासन के भरोसे बैठने के बजाय, उपभोक्ताओं को स्वयं भी जागरूक होना पड़ेगा। बाजार से कुट्टू का आटा खरीदते समय इन बातों का विशेष ध्यान रखें:
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    रंग और बनावट (Color and Texture): ताजा कुट्टू का आटा हल्का भूरा या ग्रे रंग का होता है। अगर आटा बहुत ज्यादा गहरा या काला दिखाई दे, तो उसे बिल्कुल न खरीदें। उसमें फंगस हो सकता है।
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    गंध (Smell): कुट्टू के आटे को सूंघ कर देखें। ताजे आटे में कोई विशेष गंध नहीं होती। यदि आटे से फफूंद (Musty) या सीलन जैसी बदबू आ रही है, तो वह एक्सपायर हो चुका है।
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    हाथों से रगड़कर देखें: आटे की थोड़ी सी मात्रा को उंगलियों के बीच रगड़ें। अगर यह बहुत ज्यादा खुरदरा लगे या इसमें छोटे-छोटे जाले या कीड़े (Weevils) नजर आएं, तो यह खाने योग्य नहीं है।
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    पैकेजिंग (Packaging): हमेशा FSSAI मार्क वाले, सीलबंद और ब्रांडेड कुट्टू के आटे को ही प्राथमिकता दें। खुली दुकानों से बोरियों में बिकने वाला आटा सबसे ज्यादा मिलावटी और पुराना होता है। एक्सपायरी डेट (Expiry Date) चेक करना कभी न भूलें।
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फूड पॉइजनिंग होने पर तुरंत क्या करें? (First Aid)

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यदि कुट्टू का आटा या व्रत का कोई भी सामान खाने के बाद घर के किसी सदस्य को उल्टी, चक्कर या पेट दर्द की शिकायत हो, तो:
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    घबराएं नहीं: सबसे पहले मरीज को शांत करें और खुली हवा में लेटाएं।
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    हाइड्रेशन (Hydration): उल्टी और दस्त से शरीर का पानी खत्म हो जाता है। मरीज को तुरंत ओआरएस (ORS), नींबू पानी या नमक-चीनी का घोल दें।
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    घरेलू नुस्खों से बचें: ऐसी गंभीर स्थिति में घरेलू नुस्खे आजमाने में समय बर्बाद न करें।
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    तुरंत डॉक्टर के पास जाएं: समय रहते नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल पहुंचना ही जान बचाने का एकमात्र तरीका है। आटे का सैंपल या बचा हुआ खाना भी डॉक्टर को दिखाने के लिए साथ ले जाएं।
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आगे की राह
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बिजनौर के मंडावली इलाके में हुई यह घटना सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि सिस्टम में बैठे उन भ्रष्ट मुनाफाखोरों के मुंह पर करारा तमाचा है, जो चंद रुपयों के लालच में लोगों की आस्था और उनकी जिंदगी के साथ खिलवाड़ करते हैं। बिजनौर प्रशासन को अब सिर्फ खानापूर्ति के लिए सैंपल लेने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि थोक मंडियों (Wholesale Markets) में बैठे उन बड़े मगरमच्छों पर भी शिकंजा कसना चाहिए जहाँ से यह जहर शहर की छोटी दुकानों तक पहुँचता है।
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त्यौहार आस्था का प्रतीक हैं, इन्हें बीमारी और डर का पर्याय नहीं बनने दिया जा सकता। ख़बरीलाल लगातार इस मामले पर अपनी नजर बनाए हुए है। खाद्य विभाग की रिपोर्ट आने और पुलिस की आगे की कार्रवाई पर हम आपको पल-पल की अपडेट देते रहेंगे। तब तक, सतर्क रहें, सुरक्षित रहें और अपने परिवार के स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें।
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