बिजनौर के नजीबाबाद में गैस सिलेंडर के लिए मचा त्राहिमाम: पूरी रात एजेंसी के बाहर सोने को मजबूर लोग, 5 दिन की वेटिंग, उपभोक्ताओं ने लगाया कालाबाजारी का गंभीर आरोप
यूपी के बिजनौर (नजीबाबाद) में इंडियन गैस एजेंसी पर उपभोक्ताओं का भारी हंगामा। 5-5 दिन से रातभर लाइन में लगने और एडवांस बुकिंग के बावजूद लोगों को नहीं मिल रहा गैस सिलेंडर। गुस्साए उपभोक्ताओं न
Published at : 16 Apr 2026, 10:07 AM
Updated at : 10 Sep 2026, 09:12 PM
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Bijnor Gas Cylinder Shortage Uproar at Najibabad Agency
खबरीलाल डेस्क रिपोर्ट: उत्तर प्रदेश के बिजनौर (Bijnor) जिले से आम आदमी की परेशानियों को उजागर करने वाली एक बेहद गंभीर और हैरान करने वाली खबर सामने आई है। डिजिटल इंडिया और हर घर तक गैस पहुंचाने के सरकारी दावों के बीच, बिजनौर के नजीबाबाद (Najibabad) इलाके में रसोई गैस (LPG Cylinder) के लिए त्राहिमाम मचा हुआ है। यहाँ स्थित एक इंडियन गैस एजेंसी (Indian Gas Agency) के बाहर पिछले कई दिनों से हालात बेकाबू हैं। उपभोक्ता अपने घरों के चूल्हे जलाने के लिए इस कदर मोहताज हो गए हैं कि उन्हें चिलचिलाती धूप और रात के अंधेरे में अपनी नींद और चैन त्यागकर गैस एजेंसी के बाहर सड़कों पर सोना पड़ रहा है।READ ALSO:-बिजनौर में जानलेवा स्टंट का खौफनाक Video Viral: गर्दन पर कुल्हाड़ी रखकर फोड़ा नारियल, सीने पर तोड़ी ईंट; दर्शकों की अटकी सांसें
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बुकिंग होने के बावजूद गैस न मिलने से लोगों के सब्र का बांध टूट गया, जिसके बाद गैस एजेंसी के बाहर भारी हंगामा हुआ। हालात को संभालने के लिए स्थानीय पुलिस को मौके पर दखल देना पड़ा। लोगों का सीधा आरोप है कि उनके हिस्से की गैस को ब्लैक मार्केट (Black Market) में ऊंचे दामों पर बेचा जा रहा है।
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@Shakeel57767846 यूपी के बिजनौर (नजीबाबाद) में इंडियन गैस एजेंसी पर उपभोक्ताओं का भारी हंगामा। 5-5 दिन से रातभर लाइन में लगने और एडवांस बुकिंग के बावजूद लोगों को नहीं मिल रहा गैस सिलेंडर। गुस्साए उपभोक्ताओं ने लगाया कालाबाजारी का आरोप। मौके पर पहुंची पुलिस। pic.twitter.com/kkO0kl3dQm
लगातार पांच दिनों से यही सिलसिला चल रहा है। लोग अपना दिनभर का काम-काज, मजदूरी और नौकरी छोड़कर गैस के लिए लाइन में लगते हैं, लेकिन जब उनका नंबर आता है, तो एजेंसी के कर्मचारियों द्वारा यह कहकर उन्हें वापस लौटा दिया जाता है कि 'गैस खत्म हो गई है, कल आना'। कई उपभोक्ता ऐसे हैं जो पिछले 5-5 दिनों से इसी उम्मीद में गैस एजेंसी के बाहर भूखे-प्यासे डेरा डाले हुए हैं।
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एडवांस बुकिंग का मैसेज मोबाइल में, लेकिन हाथों में खाली सिलेंडर
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सरकार और गैस कंपनियों ने उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए ऑनलाइन और फोन कॉल के जरिए गैस बुकिंग की व्यवस्था की है। लेकिन नजीबाबाद की इस गैस एजेंसी पर यह सारी आधुनिक व्यवस्थाएं दम तोड़ती नजर आ रही हैं।
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लाइन में लगे दर्जनों लोगों ने अपने मोबाइल फोन दिखाते हुए बताया कि उन्होंने कई दिन पहले ही गैस की बुकिंग करा ली थी। उनके फोन पर कंपनी की तरफ से 'बुकिंग कन्फर्म' और 'डिलीवरी के लिए तैयार' होने का मैसेज भी आ चुका है। नियम के मुताबिक, बुकिंग के कुछ ही घंटों या अधिकतम एक-दो दिन के भीतर सिलेंडर घर पर डिलीवर हो जाना चाहिए। होम डिलीवरी तो दूर की बात, जब उपभोक्ता खुद अपना खाली सिलेंडर लेकर एजेंसी के गोदाम पर पहुंच रहे हैं, तब भी उन्हें बैरंग लौटाया जा रहा है। घंटों लाइन में लगने के बाद 'स्टॉक नहीं है' का रटा-रटाया जवाब लोगों के गुस्से को भड़का रहा है।
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सब्र का टूटा बांध: गैस एजेंसी पर जोरदार हंगामा और पुलिस की एंट्री
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लगातार मिल रहे कोरे आश्वासनों और गैस न मिलने की हताशा जब चरम पर पहुंच गई, तो उपभोक्ताओं का गुस्सा फूट पड़ा। सुबह के वक्त जब एजेंसी खुली और फिर से लोगों को गैस देने में आनाकानी की गई, तो वहां मौजूद सैकड़ों की भीड़ ने गैस एजेंसी के खिलाफ जोरदार नारेबाजी और हंगामा शुरू कर दिया।
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लोगों ने एजेंसी के बाहर रास्ता जाम करने की भी कोशिश की और कर्मचारियों पर धांधली का आरोप लगाया। हंगामे की सूचना मिलते ही नजीबाबाद थाने की पुलिस तुरंत मौके पर पहुंच गई। पुलिस ने भीड़ को समझाने-बुझाने का प्रयास किया। काफी देर की मशक्कत और मान-मनौव्वल के बाद पुलिस ने हंगामा कर रहे उपभोक्ताओं को शांत कराया और एजेंसी संचालक से बात कर गैस वितरण व्यवस्था को सुचारू करने के सख्त निर्देश दिए।
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सबसे बड़ा आरोप: "घरेलू गैस की हो रही है सरेआम कालाबाजारी"
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इस पूरे बवाल के बीच सबसे संगीन मामला कालाबाजारी (Black Marketing) का है। हंगामा कर रहे उपभोक्ताओं ने गैस एजेंसी के मालिक और कर्मचारियों पर मिलीभगत कर सरेआम कालाबाजारी करने का आरोप लगाया है।
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लोगों का कहना है कि ऐसा नहीं है कि एजेंसी के पास गैस पीछे से (सप्लाई चेन से) आ ही नहीं रही है। गैस के भरे हुए ट्रक रात के अंधेरे में आते हैं, लेकिन वो गैस आम घरेलू उपभोक्ताओं (Domestic Users) को देने के बजाय सीधे तौर पर होटलों, ढाबों, रेस्टोरेंट और अवैध गैस रिफिलिंग करने वाले माफियाओं को ऊंचे दामों पर बेच दी जाती है। व्यावसायिक इस्तेमाल (Commercial Use) के लिए महंगे सिलेंडर लेने के बजाय, होटल संचालक ब्लैक में इन घरेलू सिलेंडरों को खरीद लेते हैं। इसी वजह से असली उपभोक्ताओं को हफ्तों तक गैस नहीं मिल पाती।
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उपभोक्ताओं की जुबानी, उनका दर्द (बाइट)
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खबरीलाल के संवाददाता ने मौके पर मौजूद कई उपभोक्ताओं से बात की, जिनका दर्द छलक कर बाहर आ गया:
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मोहम्मद याकूब (स्थानीय उपभोक्ता):"हम पिछले तीन-चार दिन से लगातार यहाँ धक्के खा रहे हैं। मैं अपनी दिहाड़ी-मजदूरी छोड़कर पूरी रात यहाँ एजेंसी के बाहर लाइन में सोता हूँ। सुबह जब नंबर आता है तो कह देते हैं गैस नहीं है। मेरे घर में छोटे-छोटे बच्चे हैं, गैस न होने की वजह से कई बार चूल्हा नहीं जल पाता और बच्चों को स्कूल भूखे जाना पड़ता है। हमारी बुकिंग भी हो चुकी है, मैसेज भी आ गया है, फिर भी हमें गैस नहीं दी जा रही है। ये लोग हमारी गैस को होटलों वालों को ब्लैक में बेच रहे हैं।"
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विमल कुमार (स्थानीय निवासी):"ये पूरी तरह से तानाशाही और कालाबाजारी है। हम आम जनता बेवकूफों की तरह पूरी-पूरी रात यहाँ मच्छरों के बीच पड़े रहते हैं। 5 दिन से मैं चक्कर काट रहा हूँ। जब हम अंदर जाकर पूछते हैं कि गोदाम में सिलेंडर रखे हैं तो हमें क्यों नहीं दे रहे, तो ये लोग बदतमीजी पर उतर आते हैं। ये लोग सिस्टम को ताक पर रखकर पैसा कमाने के चक्कर में गरीब आदमी को रुला रहे हैं। अगर प्रशासन ने इसकी जांच नहीं की तो हम लोग बड़ा आंदोलन करेंगे।"
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प्रशासन की चुप्पी पर उठ रहे सवाल
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नजीबाबाद में यह हाहाकार कोई एक दिन की बात नहीं है। पिछले कई दिनों से चल रहे इस संकट के बावजूद अब तक जिला पूर्ति अधिकारी (DSO) या किसी बड़े प्रशासनिक अधिकारी (SDM/DM) ने इस गैस एजेंसी पर कोई छापेमारी या सख्त कार्रवाई नहीं की है।
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सवाल यह उठता है कि क्या प्रशासन को लोगों की यह परेशानी दिखाई नहीं दे रही है? या फिर कालाबाजारी के इस खेल में विभागीय लोगों की भी कोई मिलीभगत है? आम आदमी का सीधा सा सवाल है कि अगर गैस की सप्लाई कंपनी से ही कम आ रही है, तो बुकिंग का मैसेज क्यों भेजा जा रहा है? और अगर गैस आ रही है, तो वह जा कहां रही है?
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फिलहाल पुलिस के दखल के बाद हंगामा तो शांत हो गया है, लेकिन लोगों के घरों के चूल्हे अभी भी ठंडे पड़े हैं। बिजनौर प्रशासन को चाहिए कि वह तुरंत इस मामले का संज्ञान ले और नजीबाबाद की इस इंडियन गैस एजेंसी के स्टॉक रजिस्टर और डिलीवरी रिकॉर्ड की गहनता से जांच करे, ताकि कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई हो सके और आम जनता को इस भीषण गर्मी में गैस के लिए सड़कों पर न सोना पड़े।
Sabse pehle comment karne wale banein.