उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के चांदपुर थाना क्षेत्र से एक बेहद ही चौंकाने वाला और फिल्मी कहानी जैसा आपराधिक मामला सामने आया है। अक्सर लोग अपनी आपसी रंजिश निकालने के लिए या अपने दुश्मनों को फंसाने के लिए कानून का गलत इस्तेमाल करने की कोशिश करते हैं। ऐसा ही एक दुस्साहसिक प्रयास बिजनौर में किया गया, जहां एक युवक को गोली लगने के बाद उसके परिजनों ने पुरानी रंजिश के चलते कुछ अन्य युवकों पर जानलेवा हमले का झूठा मुकदमा दर्ज करा दिया। लेकिन, यूपी पुलिस की पैनी नजर और सटीक विवेचना के आगे अपराधियों की एक न चली। चांदपुर पुलिस ने गहराई से जांच करते हुए न सिर्फ इस पूरी झूठी साजिश का पर्दाफाश किया है, बल्कि असली मुजरिम—जो कि घायल का अपना ही दोस्त निकला—को अवैध हथियार के साथ गिरफ्तार कर लिया है।READ ALSO:-'गदर 2' के बाद अब 'बंटवारा 1947' से बॉक्स ऑफिस पर सुनामी लाएंगे सनी देओल, खून-खराबे और दर्द से भरा रोंगटे खड़े कर देने वाला टीजर हुआ रिलीज
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यह मामला इस बात का जीता-जागता उदाहरण है कि कैसे अवैध हथियारों का शौक और कानून को गुमराह करने की कोशिश इंसान को सलाखों के पीछे पहुंचा सकती है। आइए, इस पूरी घटना को विस्तार से समझते हैं।
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क्या थी वो झूठी कहानी, जिसने पुलिस को भी चौंका दिया था?

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घटना की शुरुआत 14 जून 2026 को हुई। अमरोहा जिले के थाना मंडी धनौरा के अंतर्गत आने वाले ग्राम मल्हूपुरा के निवासी वादी श्री लोकेन्द्र सिंह (पुत्र कृपाल सिंह) ने चांदपुर थाने में आकर एक बेहद संगीन और खौफनाक तहरीर दी। लोकेन्द्र सिंह ने अपनी शिकायत में बताया कि उनके भतीजे अर्ष (पुत्र सोविन्द्र सिंह) और उसके दो मित्रों, अभय सिंह व मुकुल सिंह के साथ एक जानलेवा वारदात हुई है।
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वादी की ओर से दी गई पुलिस शिकायत (FIR) के अनुसार, घटना वाले दिन उनका भतीजा अपने दोस्तों के साथ वाहन (UP23AS7559) से कहीं जा रहा था। तभी रास्ते में अभियुक्त गर्व उर्फ चाहत (निवासी ग्राम ततारपुर, थाना बछरायूं, जनपद अमरोहा), प्रिंस उर्फ गोली (निवासी ग्राम अम्हेड़ा, थाना मंडी धनौरा, जनपद अमरोहा) और उनके साथ आए 3 अन्य अज्ञात व्यक्तियों ने उन्हें रोक लिया। वादी का आरोप था कि वाहन को लेकर इन लोगों के बीच तीखी कहासुनी और भद्दी गाली-गलौज हुई। बात इतनी बढ़ गई कि अभियुक्त गर्व उर्फ चाहत ने जान से मारने की नीयत से सीधा फायर झोंक दिया। इस फायरिंग में निकली गोली सीधे भतीजे अर्ष के कंधे में जा लगी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया।
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इस गंभीर तहरीर के आधार पर चांदपुर पुलिस ने तुरंत एक्शन लिया और बिना देरी किए मु0अ0सं0 352/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 190, 191(2), 191(3), 109(1), और 352 के तहत संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया। शुरुआती नजर में यह एक रोड रेज और जानलेवा हमले का साफ मामला लग रहा था।
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पुलिस विवेचना और कहानी में आया 'ट्विस्ट'

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मुकदमा दर्ज होने के बाद बिजनौर पुलिस के आला अधिकारियों के निर्देश पर चांदपुर थाने की पुलिस ने मामले की तफ्तीश शुरू की। पुलिस ने जब घटनास्थल का मुआयना किया, तकनीकी साक्ष्यों (इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस और सीसीटीवी) को खंगाला और घायल अर्ष के साथ मौजूद रहे उसके दोस्तों—अभय और मुकुल—से अलग-अलग पूछताछ की, तो बयानों में भारी विरोधाभास नजर आने लगा।
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जिन लोगों पर फायरिंग का आरोप लगाया गया था, उनकी लोकेशन और घटना की टाइमलाइन आपस में मेल नहीं खा रही थी। इसके अलावा, जिस तरह से गोली लगने की बात बताई जा रही थी, वह फॉरेंसिक और मेडिकल एंगल से संदिग्ध प्रतीत हो रही थी। पुलिस का शक तब और गहरा गया जब वादी पक्ष के लोगों के हाव-भाव और बयान बार-बार बदलने लगे। पुलिस समझ चुकी थी कि दाल में कुछ काला नहीं, बल्कि पूरी दाल ही काली है।
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सख्ती से पूछताछ और असली मुजरिम का कबूलनामा

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शक के आधार पर चांदपुर पुलिस ने जब विवेचना को आगे बढ़ाया तो परत-दर-परत झूठ का पर्दाफाश होने लगा। 18 जून 2026 को पुलिस ने इस मामले के मुख्य गवाह और अर्ष के दोस्त, अभय सिंह उर्फ गोलू (पुत्र हरिराज सिंह, निवासी ग्राम सदरपुर, थाना रजबपुर, जनपद अमरोहा) को हिरासत में लेकर कड़ाई से पूछताछ की। पुलिस की मनोवैज्ञानिक पूछताछ के आगे अभय ज्यादा देर टिक नहीं सका और उसने जो सच उगला, उसने सबको हैरान कर दिया।
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पूछताछ में अभय ने यह चौंकाने वाले खुलासे किए:

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    सगाई समारोह का जश्न और तमंचे का शौक: अभय ने बताया कि घटना वाले दिन कोई रोड रेज या दुश्मनों से झगड़ा नहीं हुआ था। वे सभी दोस्त एक सगाई समारोह में शामिल होने गए थे। लौटते समय उनके पास एक अवैध देसी तमंचा (315 बोर) मौजूद था।
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    हंसी-मजाक में चली गोली: गाड़ी के अंदर हथियारों का प्रदर्शन और लापरवाही चल रही थी। इसी दौरान अभय के हाथ से असावधानीवश (गलती से) तमंचे का ट्रिगर दब गया और गोली चल गई।
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    दोस्त के कंधे में लगी गोली: तमंचे से निकली वह गोली सीधे उसके ही जिगरी दोस्त अर्ष (पुत्र सोविन्द्र सिंह) के कंधे को चीरती हुई निकल गई। अर्ष खून से लथपथ हो गया और गाड़ी में अफरा-तफरी मच गई।
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    बचने के लिए रची गई खौफनाक साजिश: घटना के बाद अभय और अर्ष बुरी तरह डर गए। उन्हें पता था कि अगर अवैध तमंचे से गोली चलने की बात सामने आई, तो पुलिस उन्हें आर्म्स एक्ट और अन्य गंभीर धाराओं में जेल भेज देगी। कानूनी कार्यवाही से बचने और इसी बहाने अपने पुराने विरोधियों (गर्व उर्फ चाहत और प्रिंस उर्फ गोली) को फंसाने के लिए उन्होंने एक तीर से दो निशाने लगाने की सोची।
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    झूठी एफआईआर की प्लानिंग: दोनों ने मिलकर अपने परिजनों को गुमराह किया और एक मनगढ़ंत कहानी रची। उन्होंने गाड़ी को लेकर हुए विवाद और दुश्मनों द्वारा जानलेवा फायरिंग की झूठी कहानी पुलिस को बताई, ताकि वे खुद बच सकें और उनके दुश्मन जेल चले जाएं।
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पुलिस की सख्त कार्यवाही: असलहा बरामद और नई धाराएं जुड़ीं

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अभय सिंह उर्फ गोलू के इस इकबालिया जुर्म के बाद पूरी तस्वीर साफ हो गई। चांदपुर पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी अभय सिंह को गिरफ्तार कर लिया। उसकी निशानदेही पर वह अवैध हथियार भी बरामद कर लिया गया जिससे यह पूरी घटना कारित हुई थी—01 तमंचा 315 बोर।
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चूंकि अब असलियत सामने आ चुकी थी, इसलिए पुलिस ने मुकदमे में दर्ज धाराओं में भी बदलाव किया। अब यह मामला मु0अ0सं0 352/26 में तब्दील होकर धारा 229/125 (बी) बीएनएस (भारतीय न्याय संहिता) व 9/25 आर्म्स एक्ट के तहत दर्ज कर लिया गया है। अवैध हथियार रखने और पुलिस को झूठी सूचना देकर गुमराह करने के आरोप में अब अभय के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
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गिरफ्तार अभियुक्त का पूरा विवरण:

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    नाम: अभय उर्फ गोलू
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    पिता का नाम: हरिराज सिंह
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    निवासी: ग्राम सदरपुर, थाना रजबपुर, जनपद अमरोहा
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सराहनीय कार्य करने वाली पुलिस टीम: इस पूरी झूठी साजिश का पर्दाफाश करने और असली मुजरिम को सलाखों के पीछे भेजने में चांदपुर थाने की पुलिस टीम का अहम योगदान रहा। इस टीम में शामिल थे:
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    उप-निरीक्षक (उ0नि0) गजराज सिंह, थाना चांदपुर, जनपद बिजनौर
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    हेड कांस्टेबल (हे0का0) 505 मंजीत सिंह, थाना चांदपुर
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    कांस्टेबल (का0) 2659 रोहन, थाना चांदपुर
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समाज के लिए क्या है सबक?

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यह घटना केवल एक क्राइम न्यूज़ नहीं है, बल्कि समाज के युवाओं के लिए एक बहुत बड़ा सबक है।
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    अवैध हथियारों का शौक जानलेवा है: शादी-विवाह या सगाई समारोहों में अवैध हथियारों का प्रदर्शन या 'हर्ष फायरिंग' एक गंभीर अपराध है। थोड़ी सी शान-ओ-शौकत दिखाने के चक्कर में अक्सर ऐसी दुर्घटनाएं हो जाती हैं जो किसी की जान ले सकती हैं।
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    कानून को गुमराह करना सबसे बड़ी भूल है: अगर आपसे कोई गलती हुई है, तो कानून का सामना करना ही बेहतर विकल्प है। पुलिस को गुमराह करने, झूठी एफआईआर लिखाने और बेगुनाह लोगों को फंसाने की कोशिश करने से अपराध कम नहीं होता, बल्कि आप कानून की नजरों में एक बड़े अपराधी बन जाते हैं।
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बिजनौर की चांदपुर पुलिस ने इस मामले को सुलझाकर न केवल दो निर्दोष युवकों (गर्व और प्रिंस) को जेल जाने से बचाया है, बल्कि यह भी साबित किया है कि पुलिस की जांच प्रणाली अब बेहद उन्नत और वैज्ञानिक हो चुकी है, जिससे किसी भी झूठी कहानी को आसानी से बेनकाब किया जा सकता है। पुलिस विभाग ने स्पष्ट किया है कि झूठे मुकदमे दर्ज कराने वालों और समाज में अवैध हथियारों के जरिए खौफ फैलाने वालों के खिलाफ इसी तरह की सख्त और जीरो-टॉलरेंस की कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।
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