अमेरिका और इजराइल के एक संयुक्त और घातक हमले में ईरान के सर्वोच्च धार्मिक और राजनीतिक नेता (Supreme Leader) अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की खबर ने पूरी दुनिया में भूचाल ला दिया है। इस वैश्विक घटनाक्रम का सीधा और गहरा असर भारत में भी देखने को मिल रहा है। विशेष रूप से उत्तर प्रदेश में अयातुल्ला खामेनेई की मौत के बाद हालात बेहद संवेदनशील हो गए हैं। इस खबर के आते ही राज्य के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं, जिसके मद्देनजर पूरे यूपी में पुलिस प्रशासन ने हाई अलर्ट (High Alert) जारी कर दिया है।READ ALSO:-1 मार्च से आम आदमी की जिंदगी में हुए 4 महा-बदलाव: महंगा हुआ खाना और सफर, वॉट्सऐप और रेलवे के नियमों में हुआ ऐतिहासिक फेरबदल
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए रविवार सुबह एक आपातकालीन उच्च स्तरीय बैठक बुलाई। इस बैठक में राज्य के शीर्ष पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी कीमत पर कानून-व्यवस्था न बिगड़ने पाए और पूरी एहतियात बरती जाए। यह घटना केवल एक अंतरराष्ट्रीय खबर नहीं रह गई है, बल्कि इसने स्थानीय स्तर पर भावनाओं को गहरे तक झकझोर दिया है।
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यूपी में हाई अलर्ट और शिया बहुल जिलों में कड़ी चौकसी

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ईरान के सुप्रीम लीडर की हत्या के बाद उपजे तनाव को देखते हुए उत्तर प्रदेश पुलिस पूरी तरह से मुस्तैद हो गई है। डीजीपी राजीव कृष्ण ने दैनिक भास्कर से बातचीत में हालात की जानकारी देते हुए बताया कि पुलिस बल को 24 घंटे अलर्ट मोड पर रखा गया है।
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डीजीपी ने स्पष्ट किया कि उन जिलों में विशेष सतर्कता बरती जा रही है, जहां शिया समुदाय की आबादी अधिक है। उन्होंने कहा, "राजधानी लखनऊ, जौनपुर, आजमगढ़, गाजीपुर, मुजफ्फरनगर और मेरठ जैसे जिलों में पुलिस को लगातार गश्त और कड़ी निगरानी रखने के सख्त निर्देश दिए गए हैं।" स्थानीय खुफिया इकाइयों (LIU) को भी सक्रिय कर दिया गया है ताकि किसी भी तरह की भड़काऊ गतिविधि या अफवाहों को तुरंत रोका जा सके।
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लखनऊ की सड़कों पर मातम: 'खामेनेई मेरा शेर था'

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अयातुल्ला खामेनेई की मौत की खबर जैसे ही भारत पहुंची, शिया समुदाय के प्रमुख केंद्र लखनऊ में मातम छा गया। हजारों की संख्या में शिया समुदाय के लोग, जिनमें महिलाएं, पुरुष और बच्चे शामिल हैं, सड़कों पर उतर आए हैं। पुराने लखनऊ के कई इलाकों में लोग रोते-बिलखते और छाती पीटकर मातम मनाते देखे जा सकते हैं।
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प्रदर्शनकारियों में अमेरिका और इजराइल के खिलाफ भारी आक्रोश है। सड़कों पर "खामेनेई जिंदाबाद" और "अमेरिका-इजराइल मुर्दाबाद" के नारे गूंज रहे हैं। भीड़ को नियंत्रित करने और शांति बनाए रखने के लिए भारी संख्या में पुलिस बल, पीएसी (PAC) और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के जवानों को तैनात किया गया है।
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 लखनऊ में बड़ा इमामबाड़ा के पास भी हजारों लोग नारेबाजी करते हुए पहुंचे। ये लोग अल्लाहू अकबर और या हुसैन-या हुसैन के नारे लगा रहे हैं।

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विरोध प्रदर्शन के दौरान एक महिला का दर्द और गुस्सा फूट पड़ा। रोते और चिल्लाते हुए उसने कहा:
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"जिनकी नस्लों में धोखा और गद्दारी है, उन्होंने खामेनेई को धोखे में मारा। खामेनेई मेरा शेर था, कयामत तक रहेगा। एक मरेगा, हजार खामेनेई आएंगे। लानत है अमेरिका और इजराइल पर। इनकी नस्लें गद्दार-धोखेबाज हैं।"
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यह बयान उस गहरे भावनात्मक जुड़ाव को दर्शाता है जो शिया समुदाय ईरान के सर्वोच्च नेता के साथ महसूस करता है।
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शिया पर्सनल लॉ बोर्ड का 3 दिवसीय राष्ट्रीय शोक का ऐलान

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इस दुखद घटना के बाद 'ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड' (All India Shia Personal Law Board) ने तुरंत प्रभाव से तीन दिवसीय शोक की घोषणा कर दी है। शिया समुदाय के धर्मगुरुओं ने इस हमले की कड़ी निंदा की है और इसे पूरी इंसानियत पर हमला करार दिया है।
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बोर्ड के महासचिव मौलाना यासूब अब्बास ने समुदाय के लोगों के लिए विशेष दिशा-निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने कहा, "इस दुख की घड़ी में लोग अपने घरों की छतों और दरवाजों पर काले झंडे लगाएंगे और विरोध स्वरूप काले कपड़े पहनेंगे।" इसके अलावा, अयातुल्ला खामेनेई को श्रद्धांजलि देने और उनकी आत्मा की शांति के लिए अगले तीन दिनों तक रोजाना 'मजलिस' (शोकसभा) का आयोजन किया जाएगा, जिसमें उनकी शिक्षाओं और योगदान को याद किया जाएगा।
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मध्य पूर्व का हवाई संपर्क टूटा: लखनऊ और वाराणसी से उड़ानें रद्द

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इस भू-राजनीतिक अस्थिरता और अयातुल्ला खामेनेई की मौत के बाद मध्य पूर्व (Middle East) के देशों में युद्ध जैसे हालात बन गए हैं। सुरक्षा कारणों और हवाई क्षेत्र (Airspace) में पैदा हुए खतरे को देखते हुए भारत से खाड़ी देशों को जाने वाली कई उड़ानों को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया गया है। इसका सबसे ज्यादा असर यूपी के यात्रियों पर पड़ा है।
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रद्द की गई उड़ानों का विवरण:

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    लखनऊ से सऊदी अरब और खाड़ी देश: रविवार को लखनऊ के चौधरी चरण सिंह अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से सऊदी अरब और अन्य खाड़ी देशों को जाने वाली सभी प्रमुख उड़ानें रद्द कर दी गई हैं।
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    विशिष्ट कैंसिलेशन: दुबई और रियाद जाने वाली 2-2 उड़ानें कैंसिल की गई हैं। इसके साथ ही मस्कट, अबू धाबी, दम्माम और शारजाह की 1-1 फ्लाइट को भी रद्द कर दिया गया है।
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    वाराणसी एयरपोर्ट का हाल: लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (वाराणसी) से दुबई जाने वाली 2 फ्लाइट्स को भी एहतियात के तौर पर 4 मार्च तक के लिए पूरी तरह रद्द कर दिया गया है।
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हवाई अड्डों पर हजारों यात्री फंसे हुए हैं और एयरलाइंस उन्हें टिकट रिफंड या रीशेड्यूल करने के विकल्प दे रही हैं। यह स्थिति स्पष्ट करती है कि कैसे एक अंतरराष्ट्रीय घटना ने आम आदमी की यात्रा और योजनाओं को बाधित कर दिया है।
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अमेरिका-इजराइल हमले के भू-राजनीतिक मायने

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अयातुल्ला अली खामेनेई 1989 से ईरान के सर्वोच्च नेता थे और उन्हें मध्य पूर्व में अमेरिका और इजराइल विरोधी धड़े (Axis of Resistance) का सबसे बड़ा स्तंभ माना जाता था। उनकी हत्या न केवल ईरान के लिए बल्कि पूरे इस्लामी जगत के लिए एक बहुत बड़ा झटका है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस हमले के बाद ईरान और उसके समर्थित समूह (जैसे हिजबुल्लाह, हमास और हूती) अमेरिका तथा इजराइल पर भीषण जवाबी कार्रवाई कर सकते हैं, जिससे एक पूर्णकालिक क्षेत्रीय युद्ध (Regional War) छिड़ने का खतरा पैदा हो गया है। भारत सरकार भी इस पूरी स्थिति पर पैनी नजर बनाए हुए है, क्योंकि खाड़ी देशों में लाखों भारतीय कामगार रहते हैं और भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इसी क्षेत्र पर निर्भर है।
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ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई की मौत के बाद पैदा हुए हालात बेहद तनावपूर्ण हैं। उत्तर प्रदेश में पुलिस और प्रशासन हाई अलर्ट पर हैं और किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए तैयार हैं। लखनऊ से लेकर वाराणसी तक शिया समुदाय का आक्रोश और मातम साफ देखा जा सकता है। उड़ानें रद्द होने से आम जनजीवन भी प्रभावित हुआ है। आने वाले कुछ दिन वैश्विक शांति और आंतरिक सुरक्षा दोनों के लिहाज से बेहद अहम होने वाले हैं। सरकार और प्रशासन की पूरी कोशिश है कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति की इस आग की लपटें राज्य की कानून व्यवस्था को नुकसान न पहुंचाएं।
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