फरीदाबाद, हरियाणा: दिल्ली में लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास हुए कार बम धमाके की जांच में फरीदाबाद स्थित अल फलाह यूनिवर्सिटी (Al Falah University) का नाम आने के बाद से हड़कंप मचा हुआ है। इस यूनिवर्सिटी से जुड़े डॉक्टर उमर उन नबी (जो धमाके में मारा गया) और डॉ. मुजम्मिल शकील गनई की गिरफ्तारी के बाद अब जांच का दायरा यूनिवर्सिटी के वित्तीय लेनदेन और फंडिंग स्रोतों तक पहुँच गया है।
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\r\nप्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA) के तहत जांच शुरू कर दी है, जिसका मुख्य फोकस अल फलाह यूनिवर्सिटी फंडिंग पर है। ईडी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या यूनिवर्सिटी और इससे जुड़े चैरिटेबल ट्रस्टों का इस्तेमाल पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) के लिए धन जुटाने और मनी ट्रेल को छिपाने के लिए किया गया था।READ ALSO:-दिल्ली ब्लास्ट का तुर्की कनेक्शन, 'सेशन ऐप' पर हुई पूरी प्लानिंग: अंकारा में बैठा हैंडलर 'उकासा' दे रहा था निर्देश
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\r\nED की जांच के मुख्य बिंदु: विदेशी और अरब से फंडिंग का शक
\r\nजांच एजेंसियों को संदेह है कि आतंकी मॉड्यूल ने अपनी गतिविधियों के लिए ₹26 लाख से अधिक की रकम जुटाई थी। इस बड़ी राशि के स्रोत की तलाश में ही ईडी ने यूनिवर्सिटी के खातों पर शिकंजा कसा है। अल फलाह यूनिवर्सिटी फंडिंग जांच के तहत ED निम्नलिखित पहलुओं पर गहराई से पड़ताल करेगी:
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  •  विदेशी फंड ट्रांसफर (Foreign Funding): जांच एजेंसियां उन बैंक खातों की छानबीन करेंगी, जिनमें अरब देशों सहित विदेशी स्रोतों से बड़ी रकम ट्रांसफर हुई है। संदेह है कि दान या चैरिटी के नाम पर जुटाए गए फंड का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों के लिए किया गया।
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  • मनी ट्रेल की पहचान: PMLA के तहत यह पता लगाया जाएगा कि जैश-ए-मोहम्मद के हैंडलर्स के निर्देश पर किस तरह पैसे को वैध शैक्षणिक गतिविधियों के आवरण में छिपाया गया।
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  •  यूनिवर्सिटी मैनेजमेंट की भूमिका: यूनिवर्सिटी के अध्यक्ष और कुलपति जवाद अहमद सिद्दीकी और अन्य पदाधिकारियों की संदिग्ध भूमिका की भी जांच की जा रही है, जिन पर अतीत में धोखाधड़ी के आरोप लगे थे। 
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ईडी यह देखेगी कि क्या यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने जानबूझकर या लापरवाही से आतंकी तत्वों को पनाह दी और उन्हें वित्त पोषण में मदद की। 
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'सफेदपोश' आतंकी मॉड्यूल का केंद्र
\r\nजांच में यह भी पता चला है कि अल फलाह यूनिवर्सिटी जैश-ए-मोहम्मद के 'सफेदपोश आतंकी मॉड्यूल' का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन गई थी। गिरफ्तार डॉक्टर मुजम्मिल शकील और लापता डॉ. निसार-उल-हसन जैसे उच्च-शिक्षित पेशेवरों ने यूनिवर्सिटी परिसर का उपयोग भर्ती (Recruitment) और कट्टरपंथ (Radicalization) के लिए किया।
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\r\nयूनिवर्सिटी के हॉस्टल और कमरों से भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री (360 किलोग्राम अमोनियम नाइट्रेट) बरामद होने से यह संदेह और गहरा हो गया है कि यूनिवर्सिटी का दुरुपयोग आतंकी गतिविधियों के लिए किया जा रहा था। डॉ. शाहीन सईद पर जैश की महिला भर्ती शाखा, जमात-उल-मोमिनात, का नेतृत्व करने का भी आरोप है।
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\r\nप्रशासन ने शुरू की दस्तावेजों की जांच
\r\nफरीदाबाद पुलिस भी अल फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट से जुड़े दस्तावेजों की गहनता से जांच कर रही है। ट्रस्ट की भूमि, इमारत और विश्वविद्यालय को दी गई मान्यता से जुड़े सभी कागजात खंगाले जा रहे हैं। विश्वविद्यालय पर फर्जी मान्यता के दावे और अनियमितताओं के आरोप भी लग रहे हैं, जिससे इसकी मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
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\r\nदिल्ली ब्लास्ट के बाद, अल फलाह यूनिवर्सिटी फंडिंग और जैश-ए-मोहम्मद से इसके संभावित संबंधों पर अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शिकंजा कस दिया है। यह एक गंभीर मामला है, जहां एक शैक्षणिक संस्थान का कथित रूप से देश विरोधी और आतंकी गतिविधियों के लिए इस्तेमाल किया गया है। ईडी की जांच से विदेशी (अरब) फंडिंग और आतंकी साजिश के मनी ट्रेल से जुड़े कई अहम सुराग सामने आने की उम्मीद है।
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